Devi Lakshmi and Lord Shiva in the coins of 2nd to 1st century BCE.
These are from Kuninda Dynasty , of about 2nd BCE and inscriptions were transliterated by Alexander Cunningham , ( Jharni's favourite historian 💀 ).
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Here Devi is shown in her 2 forms
1. Standing on Lotus ( पद्मासना )
2. Standing in front of a deer with a lotus flower in her hand ( पद्महस्ता )
Similarly Lord Shiva is Shown wearing a Tiger skin ( व्याघ्रचर्म , बाघंबर ) and having a Battle axe ( परशु ) and Trident ( त्रिशूल ) in his Hands , just as his description given as Pashupati in Mahabharat , Shanti Parva.
These are from Kuninda Dynasty , of about 2nd BCE and inscriptions were transliterated by Alexander Cunningham , ( Jharni's favourite historian 💀 ).
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पांडा 🐼 का पोपट पार्ट 8
अक्सर आपने पांडा 🐼 जी को यह कहते सुना होगा कि स्त्री को वेद पढ़ने का अधिकार नहीं है । आइए इनका खंडन करते हैं ।
प्रजापतिर्यज्ञः आदि वचनों से सिद्ध है कि प्रजापति अर्थात् परमात्मा ही यज्ञ है तथा परमतत्व को जानने वाला यज्ञ सुचारू रूप से करा सकता है और परमात्मा के विषय में वेद से बेहतर कौन बता सकता है ?
अतः यज्ञ करने हेतु वेदज्ञान होना अत्यंत आवश्यक है । यहां से स्त्रियों का वेदाधिकार सिद्ध होता है ।
अक्सर आपने पांडा 🐼 जी को यह कहते सुना होगा कि स्त्री को वेद पढ़ने का अधिकार नहीं है । आइए इनका खंडन करते हैं ।
कृष्णयजुर्वेदीय तैत्तिरीय ब्राह्मण २.३.१० के अनुसार प्रजापति सोम ने सृष्टि के आदि में उत्पन्न हुए तीन वेद ( ऋक् , यजु , साम ) सीता सावित्री को प्रदान किये ।
सायणाचार्य ने भी सीता सावित्री को प्रजापति की पुत्री (दुहिता) एवं वेदज्ञा माना है ।
उसी कृष्णयजुर्वेदीय तैत्तिरीय ब्राह्मण १.१.४ में इडा , जो मनुपुत्री होने के कारण मानवी कही जाती है , उसके लिए यज्ञानूकाशिन्यासीत् शब्द का प्रयोग किया गया है जिसका अर्थ करते हुए सायणाचार्य ने यज्ञानूकाशिनी यज्ञतत्व प्रकाशनसमर्थाऽऽसीत् अर्थात यज्ञ के तत्व को जानने तथा दूसरों को बताने वाली कहा है । सायण भाष्य के अनुसार यह मनु के यज्ञ में होता बनी थी ।
प्रजापतिर्यज्ञः आदि वचनों से सिद्ध है कि प्रजापति अर्थात् परमात्मा ही यज्ञ है तथा परमतत्व को जानने वाला यज्ञ सुचारू रूप से करा सकता है और परमात्मा के विषय में वेद से बेहतर कौन बता सकता है ?
अतः यज्ञ करने हेतु वेदज्ञान होना अत्यंत आवश्यक है । यहां से स्त्रियों का वेदाधिकार सिद्ध होता है ।
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Karpatri's Lame logic for defending the Ashleel bhasya done by Mahidhar uvatt.
Saying that It's just a way to supress one's lust in the Vasanta Season when Ashvamedh is done and then Mahishi + Ghoda.... I can't speak much more
Saying that It's just a way to supress one's lust in the Vasanta Season when Ashvamedh is done and then Mahishi + Ghoda.... I can't speak much more
Vedarth PariJat , page 1722-25
Pata nahi kya soch k log aise logo ka samman karte hain
anyways is book ka khandan already Vedarth Kalpataru me ho rakha hai
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Forwarded from मनुवादियों का इतिहास पुरातत्त्व 🚩🚩 (𑁍PUSHYMITRA THE OLD SLAYER𑁍)
ram ji evidence.pptx
5 MB
Glimpses of Women Rights from Markandeya Purana.
सीखो सीखो पांडा बाबू कम से कम अपने पुराणों से ही कुछ अच्छी बातें सीखो । 🐼🐼
सीखो सीखो पांडा बाबू कम से कम अपने पुराणों से ही कुछ अच्छी बातें सीखो । 🐼🐼
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नवबौद्धों के नीले ख़्वाब पार्ट 3
अक्सर आपने साइंस हगनी को केसमुत्तीसुत्त के कलामसुत्त को दिखाकर बौद्ध धर्मग्रंथों को अप्रमाणिक बताते हुए देखा होगा ।
मेरा एक प्रश्न है कि जब बुद्ध ने ग्रंथों एवं पुस्तकों पर विश्वास करने से मना कर दिया है तो खुद त्रिपिटक को झूठ साबित करने के लिए उसी त्रिपिटक के अंगुत्तर निकाय के केसामुत्तिसुत्त कलामसुत्त पर यकीन कैसे कर रहे हो ??
शायद कलामसुत्त पर यकीन रखने के कारण ही आज नवबौद्ध तर्क पर बात नहीं करते । 😁😁
अक्सर आपने साइंस हगनी को केसमुत्तीसुत्त के कलामसुत्त को दिखाकर बौद्ध धर्मग्रंथों को अप्रमाणिक बताते हुए देखा होगा ।
पर शायद यह मूर्ख इस सुत्त को पूरा पढ़ना भूल गया । बुद्ध ने तो यहां पर तर्क पर भी भरोसा करने से मना किया है और यह बात उन्होंने एक बार नहीं अपितु पूरे सुत्त में चार बार कही है :
1. ४.१
2. २५.३
3. २६.१
4. ४१.३
मेरा एक प्रश्न है कि जब बुद्ध ने ग्रंथों एवं पुस्तकों पर विश्वास करने से मना कर दिया है तो खुद त्रिपिटक को झूठ साबित करने के लिए उसी त्रिपिटक के अंगुत्तर निकाय के केसामुत्तिसुत्त कलामसुत्त पर यकीन कैसे कर रहे हो ??
शायद कलामसुत्त पर यकीन रखने के कारण ही आज नवबौद्ध तर्क पर बात नहीं करते । 😁😁
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