प्रज्ञानं ब्रह्म 🙏🚩
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This Rational Channel is made to clarify doubts and Allegations on Sanatan dharma. I am a Neutral Agnostic & Non sectarian Vedic.

Doubts and Debates are certainly Welcome. No abuses please.

मर्यादा का उल्लंघन ना करें ।
Krishnam Vande Jagadgurum 🙏
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पांडा 🐼 का पोपट पार्ट 4

आपने पांडा 🐼 जी को अकसर कहते सुना होगा स्त्रियों को वेद पढ़ने का अधिकार नहीं । और तो और पहले कमेंट में पांडा 🐼 जी अपने घुटनों में स्थित अपने मस्तिष्क का पूर्ण उपयोग करने की कोशिश की है । 🤣 जरा इस कथन की भी समीक्षा कर लेते हैं ।

ऋग्वेद 8.33.19
दृ॑श॒न्त्स्त्री हि ब्र॒ह्मा ब॒भूवि॑थ ॥
अर्थात् स्त्री ही ब्रह्मा है । सायण ने भी इसके भाष्य में स्त्री को स्तोता अर्थात् मंत्रज्ञा बताया है ।


अब ब्राह्मण ग्रंथों में ब्रह्मा पद की महिमा देख लेते हैं ।
गोपथ ब्राह्मण पूर्वभाग २.२४ के अनुसार ब्रह्मा चतुर्वेदी होता है अर्थात उसे चारों वेदों का ज्ञान होता है ।
उसी गोपथ ब्राह्मण पूर्वभाग ४.२ के अनुसार ब्रह्मा को यज्ञ में सर्वाधिक महत्व प्राप्त होता है क्योंकि वह यज्ञ की सभी औषधीयो तथा सामग्रियों का निर्णायक होता है । इसके अनुसार ब्रह्मा के द्वारा ही यज्ञ यथाविधि संचालित हो सकता है । ब्रह्मा चाहे तो यज्ञ को बना और बिगाड़ दोनों सकता है ।


यहां से यह सिद्ध होता है कि न सिर्फ स्त्रियां वेद पाठ कर सकती हैं अपितु वह यज्ञ में भी सर्वोच्च ब्रह्मा पद के लिए भी दीक्षित हो सकतीं हैं ।

ॐ परमात्मने नमः 🙏🙏
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Itna confusion kyun hai bhai ?? 🤣🤣🤣
🤣9
Aihole Inscription of Pulakeshi 2 (634 CE) mentions the date of Mahabharata (Bharata war)

Hence Mahabharata occured 30+3000+5+700 = 3735 years before the time of the inscription

Full credit : @Manuvadii

3735 + 1389 (from 634 to today) = 5124 yrs (Date of Bharata war)

Very close to the modern dates
Epigraphia Indica vol 6
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मेरा येशु येशु 🤡 भाग 3

चावल की बोरी वाले अब मनुस्मृति ५.३० से मांसाहार सिद्ध करने की कोशिश कर रहे हैं । आएं अब इसकी समीक्षा करते हैं ।

1. मनुस्मृति ५.४५-४९ तथा ६.१३-१४ के अनुसार मांस भक्षण कदापि नहीं करना चाहिए ।
2. अथर्ववेद ८.६.२९ , १०.१.२३ के अनुसार क्रमशः मांस भक्षण करने वाला हत्यारा होता है तथा गौ , पुरुष (मनुष्य) , तथा अश्व इत्यादि की हत्या नहीं करनी चाहिए ।
3. वाल्मीकि रामायण किष्किंधाकांड १७.३८ तथा सुंदरकांड ३६.४१ प्रभु श्रीराम ने कभी भी मांस भक्षण नहीं किया था । तो उनका अनुगमन करने वाले हम सब कैसे मांस भक्षण कर सकते हैं ?
4. महाभारत अनुशासन पर्व , दान धर्म पर्व अध्याय ११५ , पूर्णतः मांसभक्षण के विरोध में ही लिखा गया है ।
6. मनुस्मृति ६.११ में वर्णित बलिवैश्वदेव नामक पंचमहायज्ञ जिसे आमतौर पर बलि से जोड़ा जाता है तथा उसमें भी चावल आदि अन्न से निर्मित पुरोडाश और चरु का प्रयोग होता है न कि पशु मांस का ।


अतः यहां से सिद्ध होता है की प्राचीन वैदिक लोग अहिंसा में विश्वास रखते थे और आमिष भोजी नहीं थे । यहां से मांसाहार का आक्षेप भी खत्म हो जाता है। बाकी मधुपर्क में मांस का खंडन पहले ही कर चुका हूं ।
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Logic ham sharminda hain
Tere qatil jinda hain 🌚
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शङ्कराचार्य का एक शिष्य था ब्रह्मचारी मुकुन्द।

उसने हुमायुँ के घर पुत्ररूप में जन्म लिया। उसका नाम रखा गया - अकबर।

उनके विविध शिष्य थे जिनके नाम थे - श्रीधर, श्रीपति, शम्भु, वरेण्य आदि अनेक। यह सब ने भी जन्म ग्रहण करके अकबर के दरबारमें मन्त्रीपद प्राप्त किया।

और अकबरने सुखपूर्वक राज्य करके वैकुण्ठ गमन किया।

आपने यह जो भी पढा, वह गप्प नहीं है - भविष्यपुराण के वचन है। सन्दर्भ भविष्यपुराण प्रतिसर्गपर्व अध्याय २२।

अब क्या ही बोले?
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