पांडा का पोपट : पार्ट 3
मांस भक्षण का उदाहरण न सिर्फ पांडा 🐼 अपितु मूर्ख अंग्रेजों ने भी जबरदस्ती वैदिक धर्म में मिलाने की कोशिश की है ।
आईए अब इसकी समीक्षा करते हैं ।
मधुपर्क किससे बनता है यह इन सूत्रों में काफी अच्छे से बताया गया है ,
और अगर हम मान भी लेते हैं कि वहां पर मांस लेने का वर्णन है तो यह बात श्रुति से विपरीत होने के कारण स्वतः मान्य नहीं होगी ।
मांस भक्षण का उदाहरण न सिर्फ पांडा 🐼 अपितु मूर्ख अंग्रेजों ने भी जबरदस्ती वैदिक धर्म में मिलाने की कोशिश की है ।
इनका एक बहुत बड़ा दावा यह है कि आश्वलायन गृह्यसूत्र १.२४.२६ में मधुपर्क में मांस डालकर खाने को कहा गया है ।
पता नहीं इनकी मोटी बुद्धि में यह बात कहां से आ गई कि दधि , क्षीर , मधु , मक्खन इत्यादि से बने अत्यंत पवित्र मधुपर्क में मांस इत्यादि है।
आईए अब इसकी समीक्षा करते हैं ।
आश्वलायन गृह्यसूत्र १.२४.५-६
तंत्रसार परिच्छेद १
शब्द कल्पद्रुम
पारस्कर गृह्यसूत्र विवाह प्रकरण १.३.५
हिरण्यकेशी गृह्यसूत्र १.१२.१०
ब्रह्मेक्त याज्ञवल्क्य संहिता ८.२०२
वराह गृह्यसूत्र १२.४
आपस्तंब धर्मसूत्र २.४.८.८-९
जैमिनीय गृह्यसूत्र १.१९
बौधायन गृह्यसूत्र १.२.९-१०
मधुपर्क किससे बनता है यह इन सूत्रों में काफी अच्छे से बताया गया है ,
बल्कि जिस आ.गृ १.२४.२६ को ये इतना प्रचारित करते हैं प्रसिद्ध पौराणिक आचार्य श्रीराम शर्मा जी ने भी उसका अर्थ मांस से रहित अन्न लिया है ।
और अगर हम मान भी लेते हैं कि वहां पर मांस लेने का वर्णन है तो यह बात श्रुति से विपरीत होने के कारण स्वतः मान्य नहीं होगी ।
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पांडा 🐼 का पोपट पार्ट 4
आपने पांडा 🐼 जी को अकसर कहते सुना होगा स्त्रियों को वेद पढ़ने का अधिकार नहीं । और तो और पहले कमेंट में पांडा 🐼 जी अपने घुटनों में स्थित अपने मस्तिष्क का पूर्ण उपयोग करने की कोशिश की है । 🤣 जरा इस कथन की भी समीक्षा कर लेते हैं ।
अब ब्राह्मण ग्रंथों में ब्रह्मा पद की महिमा देख लेते हैं ।
यहां से यह सिद्ध होता है कि न सिर्फ स्त्रियां वेद पाठ कर सकती हैं अपितु वह यज्ञ में भी सर्वोच्च ब्रह्मा पद के लिए भी दीक्षित हो सकतीं हैं ।
ॐ परमात्मने नमः 🙏🙏
आपने पांडा 🐼 जी को अकसर कहते सुना होगा स्त्रियों को वेद पढ़ने का अधिकार नहीं । और तो और पहले कमेंट में पांडा 🐼 जी अपने घुटनों में स्थित अपने मस्तिष्क का पूर्ण उपयोग करने की कोशिश की है । 🤣 जरा इस कथन की भी समीक्षा कर लेते हैं ।
ऋग्वेद 8.33.19
दृ॑श॒न्त्स्त्री हि ब्र॒ह्मा ब॒भूवि॑थ ॥
अर्थात् स्त्री ही ब्रह्मा है । सायण ने भी इसके भाष्य में स्त्री को स्तोता अर्थात् मंत्रज्ञा बताया है ।
अब ब्राह्मण ग्रंथों में ब्रह्मा पद की महिमा देख लेते हैं ।
गोपथ ब्राह्मण पूर्वभाग २.२४ के अनुसार ब्रह्मा चतुर्वेदी होता है अर्थात उसे चारों वेदों का ज्ञान होता है ।
उसी गोपथ ब्राह्मण पूर्वभाग ४.२ के अनुसार ब्रह्मा को यज्ञ में सर्वाधिक महत्व प्राप्त होता है क्योंकि वह यज्ञ की सभी औषधीयो तथा सामग्रियों का निर्णायक होता है । इसके अनुसार ब्रह्मा के द्वारा ही यज्ञ यथाविधि संचालित हो सकता है । ब्रह्मा चाहे तो यज्ञ को बना और बिगाड़ दोनों सकता है ।
यहां से यह सिद्ध होता है कि न सिर्फ स्त्रियां वेद पाठ कर सकती हैं अपितु वह यज्ञ में भी सर्वोच्च ब्रह्मा पद के लिए भी दीक्षित हो सकतीं हैं ।
ॐ परमात्मने नमः 🙏🙏
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Aihole Inscription of Pulakeshi 2 (634 CE) mentions the date of Mahabharata (Bharata war)
Hence Mahabharata occured 30+3000+5+700 = 3735 years before the time of the inscription
Full credit : @Manuvadii
3735 + 1389 (from 634 to today) = 5124 yrs (Date of Bharata war)
Very close to the modern dates
Epigraphia Indica vol 6
Hence Mahabharata occured 30+3000+5+700 = 3735 years before the time of the inscription
Full credit : @Manuvadii
3735 + 1389 (from 634 to today) = 5124 yrs (Date of Bharata war)
Very close to the modern dates
Epigraphia Indica vol 6
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मेरा येशु येशु 🤡 भाग 3
चावल की बोरी वाले अब मनुस्मृति ५.३० से मांसाहार सिद्ध करने की कोशिश कर रहे हैं । आएं अब इसकी समीक्षा करते हैं ।
अतः यहां से सिद्ध होता है की प्राचीन वैदिक लोग अहिंसा में विश्वास रखते थे और आमिष भोजी नहीं थे । यहां से मांसाहार का आक्षेप भी खत्म हो जाता है। बाकी मधुपर्क में मांस का खंडन पहले ही कर चुका हूं ।
चावल की बोरी वाले अब मनुस्मृति ५.३० से मांसाहार सिद्ध करने की कोशिश कर रहे हैं । आएं अब इसकी समीक्षा करते हैं ।
1. मनुस्मृति ५.४५-४९ तथा ६.१३-१४ के अनुसार मांस भक्षण कदापि नहीं करना चाहिए ।
2. अथर्ववेद ८.६.२९ , १०.१.२३ के अनुसार क्रमशः मांस भक्षण करने वाला हत्यारा होता है तथा गौ , पुरुष (मनुष्य) , तथा अश्व इत्यादि की हत्या नहीं करनी चाहिए ।
3. वाल्मीकि रामायण किष्किंधाकांड १७.३८ तथा सुंदरकांड ३६.४१ प्रभु श्रीराम ने कभी भी मांस भक्षण नहीं किया था । तो उनका अनुगमन करने वाले हम सब कैसे मांस भक्षण कर सकते हैं ?
4. महाभारत अनुशासन पर्व , दान धर्म पर्व अध्याय ११५ , पूर्णतः मांसभक्षण के विरोध में ही लिखा गया है ।
6. मनुस्मृति ६.११ में वर्णित बलिवैश्वदेव नामक पंचमहायज्ञ जिसे आमतौर पर बलि से जोड़ा जाता है तथा उसमें भी चावल आदि अन्न से निर्मित पुरोडाश और चरु का प्रयोग होता है न कि पशु मांस का ।
अतः यहां से सिद्ध होता है की प्राचीन वैदिक लोग अहिंसा में विश्वास रखते थे और आमिष भोजी नहीं थे । यहां से मांसाहार का आक्षेप भी खत्म हो जाता है। बाकी मधुपर्क में मांस का खंडन पहले ही कर चुका हूं ।
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