A REFERENCE OF DIFFERENT SMRITIS like Manu , Yajnavalkya , Vishnu , even Secular political texts like Kautilya arthashastra , Kamandakiya nitisara , Brihadsamhita of Varahamihira etc. have been taken to understand and decode the Core essences of the shlokas written in Fragment 9 of the manuscripts of Bajaur Collection.
Circa : 140 CE to late 3rd century [ Kushana period ]
NOTE : THIS FRAGMENT 9 HAS NO BUDDHIST TRACES IN IT. ENTIRELY BASED OF SECULAR TEXTS AND SANATAN SMRITIS...
Circa : 140 CE to late 3rd century [ Kushana period ]
भागवत पुराण 10.51.6 के अनुसार जब भगवान श्रीकृष्ण एवं कालयवन का सामना हुआ तो भगवान श्रीकृष्ण युद्ध भूमि छोड़कर भाग गए ।
भगवान श्री कृष्ण को रणछोड़ बनाने तथा उनकी वीरता को धूल धूसरित करने में पुराणों की बहुत बड़ी भूमिका है ।
इसके विपरीत महाभारत 7.11.16 -18 के अनुसार भगवान श्री कृष्ण ने युद्ध भूमि में कालयवन को पराजित कर दिया था तथा लोगों को उसके अत्याचार तथा दासत्व से मुक्ति दिलाई थी ।
अतः इतिहास से शिक्षा ग्रहण करें पुराणों से नहीं ।
जय योगेश्वर भगवान श्रीकृष्ण 🙏🙏
भगवान श्री कृष्ण को रणछोड़ बनाने तथा उनकी वीरता को धूल धूसरित करने में पुराणों की बहुत बड़ी भूमिका है ।
इसके विपरीत महाभारत 7.11.16 -18 के अनुसार भगवान श्री कृष्ण ने युद्ध भूमि में कालयवन को पराजित कर दिया था तथा लोगों को उसके अत्याचार तथा दासत्व से मुक्ति दिलाई थी ।
अतः इतिहास से शिक्षा ग्रहण करें पुराणों से नहीं ।
जय योगेश्वर भगवान श्रीकृष्ण 🙏🙏
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Forwarded from मनुवादियों का इतिहास पुरातत्त्व 🚩🚩
Oldest manuscript of sushrut samhita (878 CE) from Nepal.
पौराणिक का पोपट पार्ट 1
हमारे प्रिय पांडा 🐼 जी वर्ण व्यवस्था को जन्म से सिद्ध करने की नाकाम कोशिश करते हुए पकड़े गए हैं ।
बचने के लिए व्याकरण का सहारा ले रहे हैं । इनके अनुसार सृष्टम शब्द भूतकाल का है तथा वर्तमान में दोहराया नहीं जा सकता ।
पर लौकिक संस्कृत में ही हमें " सृष्ट " धातु नपुंसक लिंग के लट् लकार में प्रथमा एवं द्वितीया विभक्ति के एकवचन रूप में ही सृष्टम शब्द देखने को मिल जाता है । अतः इनका यह फर्जी दावा भी यहीं का यहीं खंडित हो जाता है ।
इनकी जन्मना वर्ण व्यवस्था का भी बहुत जल्दी खंडन किया जाएगा वह भी उनके ही तथा श्रुति स्मृति इत्यादि के प्रमाणों से ।
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मेरा येशु येशु भाग 1
कुछ तथाकथित चावल की बोरी वाले प्रभु श्रीराम के जन्म पर सवाल उठाते हुए कह रहे थे कि किसी यज्ञ और पायस के द्वारा संतान उत्पत्ति पूर्ण रूप से अवैज्ञानिक है । आइए इसकी समीक्षा करते हैं ।
हमें तो इसमें पूर्ण रूप से विज्ञान ही दिखाई देता है।
गर्भाधान पूर्ण रूप से प्राकृतिक है अतः इसमें अश्लीलता मात्र उन्हीं को दिखेगी जिनके मन में गलत भाव होगा ।
सौजन्य से : @Kartikprakash जी
पायस से संतान उत्पत्ति के ऊपर में पहले ही पोस्ट बना चुका हूं परंतु इनमें इतना भी सामर्थ्य नहीं होगा कि उसका खंडन करके दिखा सकें।
जय श्रीराम 🙏🙏
कुछ तथाकथित चावल की बोरी वाले प्रभु श्रीराम के जन्म पर सवाल उठाते हुए कह रहे थे कि किसी यज्ञ और पायस के द्वारा संतान उत्पत्ति पूर्ण रूप से अवैज्ञानिक है । आइए इसकी समीक्षा करते हैं ।
गोपथ ब्राह्मण पूर्वभाग तृतीय प्रपाठक की कंडिका २३ के अनुसार देखिए पुत्रेष्टि यज्ञ किस प्रकार होता है ?
ऋतु स्नान के पश्चात स्त्री को पुंसवन इत्यादि संस्कार के मंत्र द्वारा संस्कारित करके पवित्र दुग्ध आदि का भोजन करें तथा उसके बाद गर्भाधान संस्कार कर पत्नी में वीर्य स्थापना करें। तत्पश्चात उचित समय आने पर संतान की प्राप्ति होती है ।
हमें तो इसमें पूर्ण रूप से विज्ञान ही दिखाई देता है।
गर्भाधान पूर्ण रूप से प्राकृतिक है अतः इसमें अश्लीलता मात्र उन्हीं को दिखेगी जिनके मन में गलत भाव होगा ।
सौजन्य से : @Kartikprakash जी
पायस से संतान उत्पत्ति के ऊपर में पहले ही पोस्ट बना चुका हूं परंतु इनमें इतना भी सामर्थ्य नहीं होगा कि उसका खंडन करके दिखा सकें।
जय श्रीराम 🙏🙏
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