आज कल कुछ तथाकथित वैदिक लोग सायण भाष्य इत्यादि से वेद आदि ग्रंथों में बलि प्रथा तथा मांसाहार सिद्ध करने की नाकाम कोशिश में लगे हुए हैं चलिए आज इसकी भी समीक्षा कर लेते हैं ।
यहां पर मैंने शतपथ ब्राह्मण , गोपथ ब्राह्मण , महाभारत , निरुक्त वेदांग , योग दर्शन, ब्रह्मसूत्र तथा स्वयं वेद का प्रमाण दिया है ।
महाभारत के प्रमाण कुछ इस प्रकार हैं :
१. शांति पर्व मोक्षधर्म पर्व अध्याय 272
२. शांति पर्व मोक्षधर्म पर्व अध्याय 265
३. अनुशासन पर्व अध्याय 115 श्लोक 43
निरुक्त 1.8
ऋग्वेद १.१.४ ,१ .१६४.२७ , ६.२८.४
यजुर्वेद १२.३२
सामवेद १५१२
अथर्ववेद ११.७.७ , ५.३१.२-३ , १.१६.४ , ८.३.१५
योग दर्शन २.३०-३१
योग दर्शन का व्यास भाष्य
ब्रह्म सूत्र ३.१.२५ तथा इसका विद्योदय भाष्य
अजीब बात तो यह है कि सायण ने खुद अपने ऋग्वेद यजुर्वेद तथा शतपथ भाष्य में कई जगह यज्ञ को अध्वर अर्थात अहिंसा से युक्त कहा है और यह उन सभी यज्ञों के लिए है जो अग्नि देवता के द्वारा संचालित होते हैं ।
साथ ही यहां पर ऋग्वेद के गौसूक्त तथा अथर्ववेद के ब्रह्मगवी सूक्त पर सायन तथा महीधर उवट्ट के भाष्य पर आधारित श्रीराम शर्मा आचार्य के भाष्य में भी हमें गौ इत्यादि पशुओं के साथ अहिंसा करने तथा उनके रक्षणिय होने की बात कही गई है ।
यह सभी मेरे प्रमाण है । अनुरोध करता हूं कि सभी पौराणिक तथा वेद में मांसाहार खोजने वाले विधर्मी इन सभी का खंडन करके दिखाओ ।
यहां पर मैंने शतपथ ब्राह्मण , गोपथ ब्राह्मण , महाभारत , निरुक्त वेदांग , योग दर्शन, ब्रह्मसूत्र तथा स्वयं वेद का प्रमाण दिया है ।
महाभारत के प्रमाण कुछ इस प्रकार हैं :
१. शांति पर्व मोक्षधर्म पर्व अध्याय 272
२. शांति पर्व मोक्षधर्म पर्व अध्याय 265
३. अनुशासन पर्व अध्याय 115 श्लोक 43
निरुक्त 1.8
ऋग्वेद १.१.४ ,१ .१६४.२७ , ६.२८.४
यजुर्वेद १२.३२
सामवेद १५१२
अथर्ववेद ११.७.७ , ५.३१.२-३ , १.१६.४ , ८.३.१५
योग दर्शन २.३०-३१
योग दर्शन का व्यास भाष्य
ब्रह्म सूत्र ३.१.२५ तथा इसका विद्योदय भाष्य
चरक संहिता चिकित्सा स्थान १९.३-४
अजीब बात तो यह है कि सायण ने खुद अपने ऋग्वेद यजुर्वेद तथा शतपथ भाष्य में कई जगह यज्ञ को अध्वर अर्थात अहिंसा से युक्त कहा है और यह उन सभी यज्ञों के लिए है जो अग्नि देवता के द्वारा संचालित होते हैं ।
साथ ही यहां पर ऋग्वेद के गौसूक्त तथा अथर्ववेद के ब्रह्मगवी सूक्त पर सायन तथा महीधर उवट्ट के भाष्य पर आधारित श्रीराम शर्मा आचार्य के भाष्य में भी हमें गौ इत्यादि पशुओं के साथ अहिंसा करने तथा उनके रक्षणिय होने की बात कही गई है ।
यह सभी मेरे प्रमाण है । अनुरोध करता हूं कि सभी पौराणिक तथा वेद में मांसाहार खोजने वाले विधर्मी इन सभी का खंडन करके दिखाओ ।
अंततः बस इतना ही कहना चाहूंगा कि थोड़ा पढ़ लो और तर्क के आधार पर बात करो । किसी आचार्य की कुछ भी कहने पर या दो मुहीं बातें करने पर उसे सत्य न मान लिया करो । जरा खुद की बुद्धि तथा तर्क का आश्रय लिया करो ।
ऋषियों के न रहने पर तर्क ही तुम्हारा ऋषि होगा ।
निरुक्त 13.12
ऐसे लोगों के कारण ही सनातन धर्म को मानने वालों को वामपंथियों द्वारा अंधभक्त जैसी संज्ञाएं दी जाती हैं ।
ऋषियों के न रहने पर तर्क ही तुम्हारा ऋषि होगा ।
निरुक्त 13.12
ऐसे लोगों के कारण ही सनातन धर्म को मानने वालों को वामपंथियों द्वारा अंधभक्त जैसी संज्ञाएं दी जाती हैं ।
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