Sab log so jao Bhai log 😭😭
Aap logo ne to group ko Jhagda karne ka adda bana diya hai
Adbhims kripaya gc me Shanti banaye rakhen warna pagar kaat li jayegi
Chats lock till morning
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Kal jis topic pe behes ho rahi thi , usko khatam karo vmro
Sab apne vicharo ko follow Karo
Zabardasti Implement mat karo kisi pe
Over and out 💀
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Vedo ka khandan Padma Puran se deke khud ko piro samajhta hua katua 😂😂😂😂
🤣3
Riyal hai kya gais 😂🤣
Bhante ji Bhagavat katha ka vachan kar rahe hain 😂😂😂
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🤣6👍1
नव बौद्ध ( त्रिपिटक पढ़ते समय ) :
बुद्ध की वाणी में ब्राह्मणों की मिलावट 😭😭😭
नव बौद्ध ( मनुस्मृति पढ़ते समय ) :
एकदम ऑथेंटिक सब कुछ सही-सही
लिखा है मेरा बाप बैठ कर देख रहा था जब ये लिखा जा रहा था । 💙👍👍
कमेंट में जय भीम नीले दिल के साथ लिखना ना भूलें । 😊
बुद्ध की वाणी में ब्राह्मणों की मिलावट 😭😭😭
नव बौद्ध ( मनुस्मृति पढ़ते समय ) :
एकदम ऑथेंटिक सब कुछ सही-सही
लिखा है मेरा बाप बैठ कर देख रहा था जब ये लिखा जा रहा था । 💙👍👍
कमेंट में जय भीम नीले दिल के साथ लिखना ना भूलें । 😊
😁5
Who is this 🧐
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33%
Buddha 💙💙
17%
Mahavira ☺️
50%
Manuwadi God copied from Buddha saaaar 😭😭
https://youtube.com/shorts/bEBooirUKlQ?si=AoXDtz86At5kjU5W
ऐसे पाखंडी धूर्तों से समस्त बहनें बचकर रहें । आपको वेद पढ़ने का पूर्ण अधिकार है । 🙏🙏
वेदों के सभी मंत्र अत्यंत शुभ है और स्त्री को सदैव ही उसका पाठ करना चाहिए ।
स्त्री ही नहीं हर मनुष्य को वेद पढ़ने का अधिकार है भले ही वह शूद्र या चांडाल ही क्यों ना हो गुरुकुल जाकर उसे वेदाध्ययन करने का पूर्ण अधिकार है ।। Yajurveda 26.2
ऐसे पाखंडी धूर्तों से समस्त बहनें बचकर रहें । आपको वेद पढ़ने का पूर्ण अधिकार है । 🙏🙏
वेदों के सभी मंत्र अत्यंत शुभ है और स्त्री को सदैव ही उसका पाठ करना चाहिए ।
स्त्री ही नहीं हर मनुष्य को वेद पढ़ने का अधिकार है भले ही वह शूद्र या चांडाल ही क्यों ना हो गुरुकुल जाकर उसे वेदाध्ययन करने का पूर्ण अधिकार है ।। Yajurveda 26.2
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औरतों को महामृत्युंजय का जाप क्यों नहीं करना चाहिए||#अनिरुद्धाचार्यजीमहाराज
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Forwarded from ऋषि उवाच®️ (ऋषि उवाच)
क्या स्त्रीओ को वेद पढने का अधिकार है?
वेद पढने का अधिकार मानवमात्र को है। स्वयं वेद में अनेक मन्त्र ऐसे है जिसके मन्त्रदृष्टा स्त्री है।
जब ईश्वरने वेदमन्त्र का दर्शन करने का अधिकार स्त्रियों को दिया है तो उसके अध्यन का निषेध करनेवाले हम कौन होते है?
शास्त्रोमें स्त्रियो के उपनयन संस्कार का वर्णन नहीं है, इस लिए स्त्री को वेदपढने का अधिकार नहीं है।
अष्टाध्यायी के सूत्र १.२.६७ ‘पुमान् स्त्रिया’ अनुसार जब कोई नियम स्त्री और पुरुष दोनों के लिए लागु होते है तब केवल पुल्लिङ्ग का ही प्रयोग होता है।
जब कोई बात केवल स्त्रीविशेष के लिए ही लागु करनी हो तभी स्त्रलिङ्ग का प्रयोग होता है।
इस नियम अनुसार सारे स्मृतिशास्त्रोमें पुरुषो के उपनयन का जो नियम है, वही नियम स्त्रिओ पर भी लागु होते है। इस लिए स्त्रियो का उपनयन अधिकार सिद्ध होता है।
स्मृति शास्त्र और वेदाङ्गमें स्त्रीओ के वेदाध्यन का वर्णन
ऋग्वेद के मन्त्र ८.३३.१९ में ‘स्त्री हि ब्रह्मा बभूविथ’ द्वारा स्त्री को ब्रह्मा बोला गया है। चार वेद जाननेवाले व्यक्ति ही ब्रह्मा के पद को प्राप्त करता है।
आश्वालयन गृह्यसूत्रमें स्त्रीओ के वेदाध्यन के बाद गुरुकुल से लोटते समय समावर्तन संस्कार का स्पष्ट वर्णन है, जो सिद्ध करता है की स्त्रियो का उपनयन होता था और वह गुरुकुल में निवास करती थी।
बृहदारण्यक उपनिषद में भी गार्गी और मैत्रेयी नाम कि विदुषी स्त्रियो का वर्णन है जो सिद्ध करता है की स्त्रिया वेद पढकर राजसभा की कार्यवाहीमें भी भाग लेती थी।
वाल्मीकि रामायण में स्त्रिओ के वेद पढने का वर्णन
अयोध्याकाण्ड सर्ग १४ श्लोक ६१ में माता कैकेयी को मन्त्रज्ञा अर्थात् वेदमन्त्रो को जाननेवाली बताया है।
अयोध्याकाण्ड सर्ग २० श्लोक १५ में माता कौशल्या द्वारा यज्ञ करने का वर्णन है। वह यज्ञमें मन्त्रोच्चारपूर्वक आहुति दे रही थी।
किष्किन्धाकाण्ड सर्ग १४ श्लोक १२ में वाली की पत्नी तारा को मन्त्रविद् अर्थात् वेदमन्त्र जाननेवाली बताया है। और वह अपने पति के विजय की कामना के लिए स्वस्तिपाठ भी करती है।
क्या गायत्रीमन्त्र बोलने पर स्त्रीओ को नुकसान होता है?
यह केवल भ्रम है। स्त्रियो को गायत्रीजाप करने का पूर्ण अधिकार है। इस से स्त्रियो के शरीर पर कोई दुष्प्रभाव नहीं होता।
हजारो स्त्रिया गायत्रीमन्त्र का नित्यजाप करती है और अपने परिवार के साथ खुशहाल रहती है। उनके बच्चे भी है और वेदज्ञान अर्जित करके उनका उत्तम लालनपालन कर रही है।
वशिष्ठ स्मृति अध्याय २१ श्लोक ६ में स्पष्ट लिखा है की अगर स्त्री के द्वारा मानसिकरूप से अपने पति का उलङ्घन हो जाये तो उसे १०८ गायत्रीमन्त्र का जाप या यज्ञ करना चाहीये। इससे वह पवित्र हो जाती है।
जो सिद्ध करता है की स्त्रिया गायत्रीमन्त्र जप सकती है।
॥ओ३म्॥
वेद पढने का अधिकार मानवमात्र को है। स्वयं वेद में अनेक मन्त्र ऐसे है जिसके मन्त्रदृष्टा स्त्री है।
वेदमें अपाला आत्रेयी, अगस्त्य की माता तथा बहन, इन्द्राणी, उर्वशी, घोषा, नोधा, यमी, शची पौलोमी, श्रद्धा, सरमा, सार्पराज्ञी,सूर्या जैसी अनेक ऋषिकाओ के नामो का वर्णन है।
जब ईश्वरने वेदमन्त्र का दर्शन करने का अधिकार स्त्रियों को दिया है तो उसके अध्यन का निषेध करनेवाले हम कौन होते है?
शास्त्रोमें स्त्रियो के उपनयन संस्कार का वर्णन नहीं है, इस लिए स्त्री को वेदपढने का अधिकार नहीं है।
अष्टाध्यायी के सूत्र १.२.६७ ‘पुमान् स्त्रिया’ अनुसार जब कोई नियम स्त्री और पुरुष दोनों के लिए लागु होते है तब केवल पुल्लिङ्ग का ही प्रयोग होता है।
जब कोई बात केवल स्त्रीविशेष के लिए ही लागु करनी हो तभी स्त्रलिङ्ग का प्रयोग होता है।
इस नियम अनुसार सारे स्मृतिशास्त्रोमें पुरुषो के उपनयन का जो नियम है, वही नियम स्त्रिओ पर भी लागु होते है। इस लिए स्त्रियो का उपनयन अधिकार सिद्ध होता है।
स्मृति शास्त्र और वेदाङ्गमें स्त्रीओ के वेदाध्यन का वर्णन
ऋग्वेद के मन्त्र ८.३३.१९ में ‘स्त्री हि ब्रह्मा बभूविथ’ द्वारा स्त्री को ब्रह्मा बोला गया है। चार वेद जाननेवाले व्यक्ति ही ब्रह्मा के पद को प्राप्त करता है।
आश्वालयन गृह्यसूत्रमें स्त्रीओ के वेदाध्यन के बाद गुरुकुल से लोटते समय समावर्तन संस्कार का स्पष्ट वर्णन है, जो सिद्ध करता है की स्त्रियो का उपनयन होता था और वह गुरुकुल में निवास करती थी।
बृहदारण्यक उपनिषद में भी गार्गी और मैत्रेयी नाम कि विदुषी स्त्रियो का वर्णन है जो सिद्ध करता है की स्त्रिया वेद पढकर राजसभा की कार्यवाहीमें भी भाग लेती थी।
वाल्मीकि रामायण में स्त्रिओ के वेद पढने का वर्णन
अयोध्याकाण्ड सर्ग १४ श्लोक ६१ में माता कैकेयी को मन्त्रज्ञा अर्थात् वेदमन्त्रो को जाननेवाली बताया है।
अयोध्याकाण्ड सर्ग २० श्लोक १५ में माता कौशल्या द्वारा यज्ञ करने का वर्णन है। वह यज्ञमें मन्त्रोच्चारपूर्वक आहुति दे रही थी।
किष्किन्धाकाण्ड सर्ग १४ श्लोक १२ में वाली की पत्नी तारा को मन्त्रविद् अर्थात् वेदमन्त्र जाननेवाली बताया है। और वह अपने पति के विजय की कामना के लिए स्वस्तिपाठ भी करती है।
सुन्दरकाण्ड सर्ग १४ श्लोक ४९ में हनुमानजी एक नदीतट पर सीतामाता की यह आशामें प्रतिक्षा कर रहे थे की सन्ध्या का समय होने पर माता सीता इस नदीतट पर सन्ध्या करने अवश्य पधारेगी। जो सिद्ध करता है की स्त्रिया भी सन्ध्या करती थी।
क्या गायत्रीमन्त्र बोलने पर स्त्रीओ को नुकसान होता है?
यह केवल भ्रम है। स्त्रियो को गायत्रीजाप करने का पूर्ण अधिकार है। इस से स्त्रियो के शरीर पर कोई दुष्प्रभाव नहीं होता।
हजारो स्त्रिया गायत्रीमन्त्र का नित्यजाप करती है और अपने परिवार के साथ खुशहाल रहती है। उनके बच्चे भी है और वेदज्ञान अर्जित करके उनका उत्तम लालनपालन कर रही है।
वशिष्ठ स्मृति अध्याय २१ श्लोक ६ में स्पष्ट लिखा है की अगर स्त्री के द्वारा मानसिकरूप से अपने पति का उलङ्घन हो जाये तो उसे १०८ गायत्रीमन्त्र का जाप या यज्ञ करना चाहीये। इससे वह पवित्र हो जाती है।
जो सिद्ध करता है की स्त्रिया गायत्रीमन्त्र जप सकती है।
॥ओ३म्॥
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