राजर्षी उपरिचर के हिंसा रहित अश्वमेध यज्ञ।
महाभारत के शान्तिपर्व में हमे राजर्षी उपरिचर के द्वारा आयोजित अश्वमेध यज्ञ के वर्णन मिलता है।
उस यज्ञ में भाग लिए कुछ प्रशिद्ध ऋषि: उस यज्ञ में ऋषि श्रेष्ठ कपिल, तांड्य ब्राह्मण के रचयिता महर्षी तांड्य, तैत्तिरीयब्राह्मण के रचयिता महर्षी तैत्तिर, यजुर्वेद के काण्व शाखा के प्रणेता महर्षि काण्व तथा उनके पुत्र महर्षी मेधातिथि उपस्थित थे।
अश्वमेध यज्ञ का हिंसा रहित विधि: इतने बड़े बड़े ऋषियों के उपस्थिति में उस यज्ञ में किसी भी पशु की हिंसा नहीं हुई तथा उस यज्ञ में फल आदि से बने पुरोडाश के द्वारा ही यज्ञ हुआ जिस से प्रसन्न होकर स्वयं परमात्मा ने अद्रुस्य में राजर्षी को प्रत्यक्ष दर्शन दिया। तथा हिंसा रहित उस यज्ञ का भाग ग्रहण किया।
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महाभारत के शान्तिपर्व में हमे राजर्षी उपरिचर के द्वारा आयोजित अश्वमेध यज्ञ के वर्णन मिलता है।
उस यज्ञ में भाग लिए कुछ प्रशिद्ध ऋषि: उस यज्ञ में ऋषि श्रेष्ठ कपिल, तांड्य ब्राह्मण के रचयिता महर्षी तांड्य, तैत्तिरीयब्राह्मण के रचयिता महर्षी तैत्तिर, यजुर्वेद के काण्व शाखा के प्रणेता महर्षि काण्व तथा उनके पुत्र महर्षी मेधातिथि उपस्थित थे।
अश्वमेध यज्ञ का हिंसा रहित विधि: इतने बड़े बड़े ऋषियों के उपस्थिति में उस यज्ञ में किसी भी पशु की हिंसा नहीं हुई तथा उस यज्ञ में फल आदि से बने पुरोडाश के द्वारा ही यज्ञ हुआ जिस से प्रसन्न होकर स्वयं परमात्मा ने अद्रुस्य में राजर्षी को प्रत्यक्ष दर्शन दिया। तथा हिंसा रहित उस यज्ञ का भाग ग्रहण किया।
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Close your eyes , plug in and tap into the world of Divine ❤️❤️
Chant :- Gajendra Moksha ( Hindi translation )
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Chant :- Gajendra Moksha ( Hindi translation )
Devoted to the Nishkala form of Lord Vishnu.... 🙏🙏
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ब्राह्मणत्व की प्राप्ति का हेतु :
विद्वानों के अनुसार ब्रह्मयोनि के 2 हेतु होते हैं:-
1. तपस्या
2. पुण्य कर्म यानि अच्छे कर्मों का अनुष्ठान।
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विद्वानों के अनुसार ब्रह्मयोनि के 2 हेतु होते हैं:-
1. तपस्या
2. पुण्य कर्म यानि अच्छे कर्मों का अनुष्ठान।
~ अनुगीता ; भगवान श्रीकृष्ण द्वारा ब्रह्माजी के मत का प्रतिपादन
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आजाद हिंद फौज के महान नेतृत्व , महान क्रांतिकारी , भारत माता के वीर सपूत नेताजी सुभाष चन्द्र बोस अमर रहें
उसकी जयंती पर उन्हें शत-शत नमन 🙏
( the Kambal Kutai of Wooten , Incident of Presidency College , Kolkata , credit :- Arya bose bhaiya )
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उसकी जयंती पर उन्हें शत-शत नमन 🙏
( the Kambal Kutai of Wooten , Incident of Presidency College , Kolkata , credit :- Arya bose bhaiya )
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Association of Devi Lakshmi with Owl ( Uluka ) :-
हम सभी अच्छी तरह से जानते हैं कि उलूक/उल्लू को अक्सर देवी लक्ष्मी के वाहन के रूप में जोड़ा जाता है। लेकिन क्या आपको पता है ये रिश्ता कितना पुराना है??
यहां अमरावती का एक स्लैब है, जो दूसरी-पहली शताब्दी ईसापूर्व (2nd-1st century BCE) का है। यहां देवी लक्ष्मी को कमल के पुष्प पर बैठे हुए दिखाया गया है। स्लैब के अनुभागीय मुख पर उल्लू उसके पास है।
इस प्रकार हम उलूक/उल्लू के साथ देवी लक्ष्मी की पूजा की प्राचीनता को स्थापित करते हैं।
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मोहान्धकार-भरिते हृदये मदीये
मातः सदैव कुरु वासमुदारभावे।
स्वीयाखिलावयव-निर्मलसुप्रभाभिः
शीघ्रं विनाशय मनोगतमन्धकारम् ॥
मां सरस्वती हम सभी पर करुणा और विद्या की कृपा करें ।
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मातः सदैव कुरु वासमुदारभावे।
स्वीयाखिलावयव-निर्मलसुप्रभाभिः
शीघ्रं विनाशय मनोगतमन्धकारम् ॥
मां सरस्वती हम सभी पर करुणा और विद्या की कृपा करें ।
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सीरियल्स के विपरीत , महाभारत में ऋषि नारद की महिमा को दर्शाया गया है। वे " शरारती " या " कलहप्रिय " नहीं थे , जैसा कि टीवी में दिखाया जाता है ; अपितु वे चपलतादि दोषों से रहित थे । वे समस्त प्राणियों के हित में तत्पर रहते और स्वाध्यायशील थे ।
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~ शान्तिपर्वांतरगत श्रीकृष्ण-उद्धव संवाद
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Forwarded from Modern Sāṃkhyavādin (Mystical Garuda 🦅)
Some guys :- Evolution is fake. It is against the notion of Vedas 😢😢.
Avg. Satkāryavādin :- Nahh it isn't. It is an explainable fact , whose essence doesn't even go against Sāṃkhya's basic principle of Satkāryavāda.
Source :- Jyotiṣmatī Vyākhyā of Sāṃkhyatattva-kaumudī
Avg. Satkāryavādin :- Nahh it isn't. It is an explainable fact , whose essence doesn't even go against Sāṃkhya's basic principle of Satkāryavāda.
Source :- Jyotiṣmatī Vyākhyā of Sāṃkhyatattva-kaumudī
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अनाथस्य दीनस्य तृष्णातुरस्य भयार्तस्य भीतस्य बद्धस्य जन्तोः ।
त्वमेका गतिर्देवि निस्तारकर्त्री नमस्ते जगत्तारिणि त्राहि दुर्गे ॥
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त्वमेका गतिर्देवि निस्तारकर्त्री नमस्ते जगत्तारिणि त्राहि दुर्गे ॥
Credit :- Dark Sanatan ji
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आरजी भंडारकर ने अपना मत सिद्ध करने क चक्कर में वेदार्थ का जो विनाश किया ; वह प्रकरण, अलंकार और उनकी अज्ञता सिद्ध करते हुए कल्पना से अधिक कुछ नहीं |
आर्य-द्रविड़ विभाजन करने के चक्कर में वेदार्थ का विनाश करना ; कहाँ तक उचित है ?
क्या वो पूर्वाचार्यों से ज्यादा वेद को समझते हैं ?
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आर्य-द्रविड़ विभाजन करने के चक्कर में वेदार्थ का विनाश करना ; कहाँ तक उचित है ?
क्या वो पूर्वाचार्यों से ज्यादा वेद को समझते हैं ?
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क्या वैदिक धर्म में बाल-विवाह की अनुमति है ?
गृह्यसूत्रों के पूर्वाचार्यों का कथन है कि विवाहोपरांत , ३ दिनों के ब्रह्मचर्य के बाद चौथी रात्रि में प्रथम बार गर्भाधान करना चाहिए | आचार्य गोभिल का कथन है कि स्त्री के पति के घर में आने के पश्चात् जब ऋतुमती (गर्भधारण की क्षमता से युक्त) होने के बाद ही समागम करना चाहिए |
~ गोभिल गृह्यसूत्र २/५/७-८
शंका :- बाल-विवाह के कुछ वर्ष उपरांत भी गर्भाधान किया जा सकता है ; तो इससे बाल विवाह का खंडन कैसे होता है ?
उत्तर :- आश्वलायन , आपस्तम्ब , कात्यायन प्रभृति आदि आचार्यों के मत में भी विवाह की चतुर्थ रात्रि में गर्भाधान किया जा सकता है | इसके हिसाब से गर्भाधान के ३ मास बाद पुंसवन होगा , जो गर्भावस्था का सूचक माना जाता है |
१६-१७ से कम आयु की कन्या सफल गर्भ धारण नहीं करती ; न ही आयुर्वेद में १६ वर्ष से कम आयु में इसकी अनुमति है |
परमर्षि कपिल के अनुसार भी :-
अपनी स्त्री से समागम तभी करें जब वह ऋतुस्नान कर चुकी हो | ऐसा करने से ही उपस्थ द्वार की रक्षा होती है |
~ महाभारत , शांतिपर्व
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Maheśvarasya Liṅgodbhava !!
नोट :- ये पोस्ट कुछ लोगों की भावनाओं को आहत कर सकती है ; अतः अपने रिस्क पर ही पढ़ें |
बिना वास्तविक अर्थ जाने उसका मजाक बनाना कितना आसान होता है , परंतु वास्तविकता समझ आने पर उतना ही पश्चात्ताप भी होता है ।
छाया स्थाणोरपि तव तापं नमतां हरत्यहो शिव भो ।
साम्ब सदाशिव शंभो शंकर शरणं मे तव चरणयुगम् ॥
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