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Christmas is incomplete without this legendary song 🗿🗿
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🤣19
Forwarded from पुराण प्रवचन
क्या वेद में इतिहास अनित्य है?
कुछ मूर्ख लोग जिनको न वेद का पता है ना ही व्याकरण और प्रकरण का ऐसे लोग आज वेद में अनित्य इतिहास दिखाने को कोशिश करते हैं।
इन गधों को समझ नहीं आता की जब निरुक्त (१/१२) में निरुक्तकार ने नाम पदों को धातूज माना है जिनका यौगिक अर्थ संभव है लेकिन रूढ़ अर्थ नहीं। जब की लौकिक अनित्य इतिहास में रूढ़ अर्थ होता है धातुज अर्थ नहीं।
इसका एक उदाहरण देता हूं शतपथ ब्राह्मण (१/७/४) में "प्राशित्रं आख्यान" आता है जिसको प्रजापति उषा आख्यान भी बोलते हैं। अब इसमें कुछ मूर्ख इतिहास दिखाने को कोशिश करते हैं लेकिन आचार्य हरिस्वामी और सायण भाष्य में भी इसको आख्यान ही बोला है इतिहास नहीं।
हरिस्वामी और सायणने इसमें जो उषा नामपद आया है उसका अर्थ अनेक प्रकार से किया है जैसे लोकात्म रूप से द्युलोक, प्राणपिण्डात्म रूप से रोहिणी नाम नक्षत्र, कालात्म रूप से उषा तथा यज्ञात्म रूप से वाणी अर्थात यहां उषा नाम से किसी व्यक्तिवाचक रूढ़ अर्थ नही लिया गया वल्कि यौगिक,याज्ञीक और आधिदैविक अर्थ ही ग्रहण किया है उसी प्रकार प्रजापति का भी अर्थ बनेगा। तो यहां कोई दो व्यक्ति का इतिहास नहीं है क्यू की शब्द धातूज है।
कुछ मूर्ख लोग जिनको न वेद का पता है ना ही व्याकरण और प्रकरण का ऐसे लोग आज वेद में अनित्य इतिहास दिखाने को कोशिश करते हैं।
इन गधों को समझ नहीं आता की जब निरुक्त (१/१२) में निरुक्तकार ने नाम पदों को धातूज माना है जिनका यौगिक अर्थ संभव है लेकिन रूढ़ अर्थ नहीं। जब की लौकिक अनित्य इतिहास में रूढ़ अर्थ होता है धातुज अर्थ नहीं।
इसका एक उदाहरण देता हूं शतपथ ब्राह्मण (१/७/४) में "प्राशित्रं आख्यान" आता है जिसको प्रजापति उषा आख्यान भी बोलते हैं। अब इसमें कुछ मूर्ख इतिहास दिखाने को कोशिश करते हैं लेकिन आचार्य हरिस्वामी और सायण भाष्य में भी इसको आख्यान ही बोला है इतिहास नहीं।
हरिस्वामी और सायणने इसमें जो उषा नामपद आया है उसका अर्थ अनेक प्रकार से किया है जैसे लोकात्म रूप से द्युलोक, प्राणपिण्डात्म रूप से रोहिणी नाम नक्षत्र, कालात्म रूप से उषा तथा यज्ञात्म रूप से वाणी अर्थात यहां उषा नाम से किसी व्यक्तिवाचक रूढ़ अर्थ नही लिया गया वल्कि यौगिक,याज्ञीक और आधिदैविक अर्थ ही ग्रहण किया है उसी प्रकार प्रजापति का भी अर्थ बनेगा। तो यहां कोई दो व्यक्ति का इतिहास नहीं है क्यू की शब्द धातूज है।
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Kuch time baad meri posting suru hogi 😈 And khandan Mandan wali prakriya bhi
Thanks a lot for showing such patience 😁🙏
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क्या विवाह के पूर्व महिलाओं को वेदमंत्र पढ़ने का अधिकार नहीं है ??
अथ मलेच्छ खण्डनम्..
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👍12🔥8🤣4🤡2❤1
Kuch naya upload karne wala hu , ek unexpected topic par
Narrow mind walo ki jalni chahiye aur tej se 😈☝️
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Narrow mind walo ki jalni chahiye aur tej se 😈☝️
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संगम ग्रंथ में वर्णित एकादश दैवीय नृत्य :-
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Written by :- Mystical Garuda 🦅
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