देवराज इंद्र का वास्तविक चरित्र : भाग 7
क्या देवराज इंद्र अमर्यादित धर्मविरूद्ध कर्म करने वाले थे ?
महाभारत के खिल पर्व हरिवंश के विष्णुपर्व अध्याय 69 में भगवान इंद्र , भगवान श्रीकृष्ण को संदेश भेजते तथा समझाते हैं ।
उन्होंने मर्यादा की महत्व बताते हुए कहा : " यदि मैं देवमर्यादा को भंग करता हूं , तो प्रजापतियों के समुदाय में मेरा क्या स्थान होगा ?
यदि मैंने प्रजापति भगवान् ब्रह्मा द्वारा नियत मर्यादा को त्यागना चाहा , तो वो मुझे श्राप भी दे सकते हैं । "
इसके अलावा वह यह भी कहते हैं :-
" यदि हम ही प्राचीन धर्म सेतु की मर्यादा को भंग कर देंगे , तब तो दैत्य दानवादि और भी अधिक खुलकर इन मर्यादाओं का भेदन करने लगेंगे । "
अगर आपको संदेह है कि यह मर्यादा सिर्फ पारिजात के विषय में है , तो ऐसा कुछ नहीं है । भगवान इंद्र को अगर सिर्फ पारिजात के विषय में कहना होता , तो असुर दैत्य आदि विषयों के साथ ही साथ देवमर्यादा को नहीं जोड़ते ।
अतः सिद्ध है कि भगवान इंद्र धर्म की मर्यादा को कभी लांघकर दुष्कर्म नहीं कर सकते थे , जो उनकी बातों से भी स्पष्ट झलकता है ।
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Image making was done in Bharat even in Pre Mauryan times.
There are certain sculptures of Yakshas , which've been preserved over time ; provide us sufficient evidence for it.
Still a gentleman ( you know who ) believe that Greeks gave us this whole thing in Post Mauryan period. 🤣🤣
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There are certain sculptures of Yakshas , which've been preserved over time ; provide us sufficient evidence for it.
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Source : Studies in Ancient Art ; VS Agrawala
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नवबौद्धों के नीले सपने : भाग 11
क्या संस्कृत अशोक के समय या उसके पहले नहीं मिलती ?
दक्षिण भारत में सबसे पुराने तमिल शिलालेख, दक्षिणी ब्राह्मी लिपि में लिखे गए हैं और कम से कम तीसरी-दूसरी शताब्दी ईसापूर्व ( 3rd-2nd century BCE ) के हैं।
समकालीन/अशोक से पहले, उनमें पहले से ही संस्कृत अक्षर शामिल थे ; हालाँकि यह अपने प्रारंभिक चरण में तमिल से बना है।
इस प्रकार यह अशोक के पूर्व और उसके समय में संस्कृत की ऐतिहासिकता को सिद्ध करता है ।
Source : The development of religion in South India , By KA Nilakanth Shashtri
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वैदिक धर्म में स्त्रियों की महत्ता ☝️
पत्नियां स्वयं श्री का स्वरूप हैं । वे अश्वमेध यज्ञ में यजमान का अभिषेक करें , उनके सायुज्य से यजमान श्री , तेज , प्रताप , पराक्रम व पशु ( संपत्ति ) से युक्त हो संपन्नता को प्राप्त करे ।
~ शतपथ ब्राह्मण १३.२.६.७
धनतेरस पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं । मां श्रीलक्ष्मी सबका कल्याण करें 🙏🙏
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पत्नियां स्वयं श्री का स्वरूप हैं । वे अश्वमेध यज्ञ में यजमान का अभिषेक करें , उनके सायुज्य से यजमान श्री , तेज , प्रताप , पराक्रम व पशु ( संपत्ति ) से युक्त हो संपन्नता को प्राप्त करे ।
~ शतपथ ब्राह्मण १३.२.६.७
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Happy diwali bhailog 💀🙏
Aag laga do is baar !!!
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Evidences of Vedas before 12th century : Part 17
I-tsing was an eye witnesses of Shruti tradition of Vedas in Bharat.
This was how Vedas were preserved for thousands of years in our Civilization ; without changes.
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I-tsing was an eye witnesses of Shruti tradition of Vedas in Bharat.
This was how Vedas were preserved for thousands of years in our Civilization ; without changes.
Source :- A record of Buddhist religion in India and Malay archipelago , I-tsing ( 7th century )
Chapter 34
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Real reason of Solar Eclipse :- Unlike Myths spread in society
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Mahabharata Shanti Parva ; 203/21
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अहिंसा के विषय में पराशरगीता के कुछ श्लोक :-
जानबूझकर हिंसा करने वाले के पाप अक्षम्य होते हैं, अहिंसा व्रत भी उसका निवारण नहीं कर सकता।
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जानबूझकर हिंसा करने वाले के पाप अक्षम्य होते हैं, अहिंसा व्रत भी उसका निवारण नहीं कर सकता।
~ महाभारत शान्तिपर्वान्तरगत पराशरगीता
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Glory to Vedic Women :- Part 1 !!
Dharini and Mena were daughters of Svadha , who were Yoginis and Brahmavadinis as well.
They were well versed and had multiple qualities.
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Dharini and Mena were daughters of Svadha , who were Yoginis and Brahmavadinis as well.
They were well versed and had multiple qualities.
~ Vishnu Purana 1/10/19-20
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Glory to Vedic Women : Part 2 !!
Madalasa , the former daughter of Gandharvaraja Vishvasu , was reborn as the daughter of Nagaraja Asvatara. She was Yogini and Yoga Charini. She was an expert in Politics , Neeti and Adhyatma.
( I mentioned those adhyayas too which contain her teachings to her son , Alarka. )
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Madalasa , the former daughter of Gandharvaraja Vishvasu , was reborn as the daughter of Nagaraja Asvatara. She was Yogini and Yoga Charini. She was an expert in Politics , Neeti and Adhyatma.
Source :- Markandeya Purana , Adhyaya 23-36
( I mentioned those adhyayas too which contain her teachings to her son , Alarka. )
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Glory to Vedic Women :- Part 3 !!
क्या माता सीता का बालविवाह हुआ था ?
अक्सर विधर्मी व कथावाचक यह कहते नजर आते हैं की माता सीता का बाल विवाह हुआ था ।
आइए , रामायण के एक प्रकरण द्वारा इसकी समीक्षा करते हैं ।
अयोध्या कांड सर्ग ११८ में माता सीता व अनसूयाजी का संवाद मिलता है । अनसूया जी के मां सीता के विवाह के विषय में जिज्ञासा प्रकट करने पर माता सीता उन्हें बताती हैं :-
श्लोक में वर्णित पतिसंयोगसुलभं शब्द की व्याख्या करते हुए आचार्य गोविंदराज वाल्मीकि रामायण की भूषण टीका में लिखते हैं :-
अतः जो लोग यह कहते हैं , कि उनके बाल विवाह हुआ था यह तो स्वतः ही खंडित है ।
अतः कथावाचकों तथा विधर्मियों की बातों में ना आए ; अपने ग्रंथों का अध्ययन कर सत्य का अन्वेषण करें ।
रामो विग्रहवान धर्मः 🙏🙏
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क्या माता सीता का बालविवाह हुआ था ?
अक्सर विधर्मी व कथावाचक यह कहते नजर आते हैं की माता सीता का बाल विवाह हुआ था ।
आइए , रामायण के एक प्रकरण द्वारा इसकी समीक्षा करते हैं ।
अयोध्या कांड सर्ग ११८ में माता सीता व अनसूयाजी का संवाद मिलता है । अनसूया जी के मां सीता के विवाह के विषय में जिज्ञासा प्रकट करने पर माता सीता उन्हें बताती हैं :-
" जब मेरी अवस्था विवाह के योग्य हो गई , तो मेरे पिता को इसकी चिंता हुई । "
श्लोक में वर्णित पतिसंयोगसुलभं शब्द की व्याख्या करते हुए आचार्य गोविंदराज वाल्मीकि रामायण की भूषण टीका में लिखते हैं :-
माता सीता विवाह के पहले ही यौवनावस्था में प्रवेश कर चुकी थीं ।
अतः जो लोग यह कहते हैं , कि उनके बाल विवाह हुआ था यह तो स्वतः ही खंडित है ।
अतः कथावाचकों तथा विधर्मियों की बातों में ना आए ; अपने ग्रंथों का अध्ययन कर सत्य का अन्वेषण करें ।
रामो विग्रहवान धर्मः 🙏🙏
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ऋग्वेद (१०/९५) में आए उर्वशी पुरुरवा संवाद सूक्त को कुछ मूर्ख लोग मानवीय इतिहास समझ रहे हैं इस भ्रांति के समाधान पर हमारे यह लेख अवश्य पढ़ें। 🙏🙏👇👇
https://vedkabhedexposse.blogspot.com/2024/11/blog-post.html?m=1
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आजकल इंटरनेट पर " वैदिक विज्ञान " को लेकर बड़ी बहस चल रही है।
एक स्वघोषित विद्वान तो स्पष्ट वर्णित प्राकृतिक विज्ञान को भी अस्वीकार कर रहे हैं ।
आज हम उनके एक दावे का विश्लेषण करेंगे:- वैदिक वाङ्गमय के अनुसार चंद्रमा की प्रभा के लिए सूर्य की किरणें उत्तरदायी हैं : सत्य या असत्य ??
निरुक्त 2/6 के अनुसार चंद्रज्योत्स्ना हेतु सूर्यरश्मि सुषुम्णा ही उत्तरदायी है। दुर्गवृत्ति इसका व्याख्या कुछ इस प्रकार करती है :-
यही बात यजुर्वेद 18/40 के उवट्टभाष्य और महीधरभाष्य में क्रमशः इस प्रकार से मौजूद है :-
बाकी आप स्वयं विचार करें ।
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एक स्वघोषित विद्वान तो स्पष्ट वर्णित प्राकृतिक विज्ञान को भी अस्वीकार कर रहे हैं ।
आज हम उनके एक दावे का विश्लेषण करेंगे:- वैदिक वाङ्गमय के अनुसार चंद्रमा की प्रभा के लिए सूर्य की किरणें उत्तरदायी हैं : सत्य या असत्य ??
निरुक्त 2/6 के अनुसार चंद्रज्योत्स्ना हेतु सूर्यरश्मि सुषुम्णा ही उत्तरदायी है। दुर्गवृत्ति इसका व्याख्या कुछ इस प्रकार करती है :-
" किरणों का एक समूह, जिसे सुषुम्णा नाम से जाना जाता है , जिसका स्रोत आदित्य (सूर्य) है , वही चंद्रमा की चमक के लिए जिम्मेदार है । यह सूर्य ही है, जिसके सौजन्य से चन्द्रमण्डल चमकता है; और इससे सारी दिशाएँ प्रकाशित होती हैं। "
यही बात यजुर्वेद 18/40 के उवट्टभाष्य और महीधरभाष्य में क्रमशः इस प्रकार से मौजूद है :-
सुषुम्णः सूर्यरश्मिः । यः सुषुम्णः सुयज्ञियः । सूर्यस्येव हि चन्द्रमसो रश्मयः ।
"सूर्यरश्मिः सूर्यस्येव रश्मयः किरणा यस्य । सुषुम्ण इति सुयज्ञिय इत्येतत् सूर्यरश्मिरिति सूर्यस्येव हि चन्द्रमसो रश्मयः' ।"
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क्या देवी सरस्वती ब्रह्माजी की पुत्री हैं :- भाग 3
कई विधर्मियों ( नीलग्रह मूलनिवासी व ईसाईयों ) का दावा है कि सरस्वती ब्रह्माजी की बेटी थीं , लेकिन यह सच नहीं है ।
इसका खंडन हम श्रुति ग्रन्थों से पहले ही कर चुके हैं , जिसको आप यहां से पढ़ सकते हैं :-
१. प्रथम प्रमाण
२. द्वितीय प्रमाण
आईए इसी श्रृंखला में आगे पूर्वाचार्यों के मत द्वारा इनका खंडन करते हैं ।
आदि शंकराचार्य स्पष्ट रूप से कहते हैं कि देवी आद्यापराशक्ति के तीन रूप हैं - सृष्टिकर्ता ब्रह्मा की पत्नी सरस्वती, पालनकर्ता श्रीहरि की पत्नी श्रीलक्ष्मी और संहारक भगवान शिव की पत्नी पार्वती।
इससे यह सिद्ध हो गया कि देवी सरस्वती भगवान ब्रह्मा की पत्नी हैं, उनकी पुत्री नहीं।
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कई विधर्मियों ( नीलग्रह मूलनिवासी व ईसाईयों ) का दावा है कि सरस्वती ब्रह्माजी की बेटी थीं , लेकिन यह सच नहीं है ।
इसका खंडन हम श्रुति ग्रन्थों से पहले ही कर चुके हैं , जिसको आप यहां से पढ़ सकते हैं :-
१. प्रथम प्रमाण
२. द्वितीय प्रमाण
आईए इसी श्रृंखला में आगे पूर्वाचार्यों के मत द्वारा इनका खंडन करते हैं ।
आदि शंकराचार्य स्पष्ट रूप से कहते हैं कि देवी आद्यापराशक्ति के तीन रूप हैं - सृष्टिकर्ता ब्रह्मा की पत्नी सरस्वती, पालनकर्ता श्रीहरि की पत्नी श्रीलक्ष्मी और संहारक भगवान शिव की पत्नी पार्वती।
इससे यह सिद्ध हो गया कि देवी सरस्वती भगवान ब्रह्मा की पत्नी हैं, उनकी पुत्री नहीं।
स्रोत:-आदिशंकराचार्यकृत सौन्दर्यलहरी, 97वाँ श्लोक
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