प्रज्ञानं ब्रह्म 🙏🚩
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This Rational Channel is made to clarify doubts and Allegations on Sanatan dharma. I am a Neutral Agnostic & Non sectarian Vedic.

Doubts and Debates are certainly Welcome. No abuses please.

मर्यादा का उल्लंघन ना करें ।
Krishnam Vande Jagadgurum 🙏
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भगवान शिव द्वारा माँ दुर्गा को दिये गये कुछ उपदेश :-

उन्हें और साथ ही देवी मां को दी गई उपाधियां भी देखें। उन्हे सर्वकालिक धर्मचारिणी ( धर्मनित्या ) कहा जा रहा है और चूँकि अहिंसा परम धर्म है, तो वह मांस कैसे खा सकती है या शराब कैसे पी सकती है?
यहां तक ​​कि जब भगवान शिव ने उन्हें दिए गए उपदेशों में स्पष्ट रूप से ऐसा करने से मना किया था ??

स्रोत:- महाभारत से अनुशासन पर्व के विभिन्न अध्याय


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माता दुर्गा धर्मार्थ तत्व की विशारदा थीं । वो सदैव धर्म में तत्पर रहने वाली , इंद्रियसंयमपरायणा देवी थीं ।

भगवान महेश्वर ने उन्हें उपदेश करते वक्त बारंबार धर्मचारिणी कहकर संबोधित किया तथा उन्हें यह शिक्षा दी कि मन कर्म और वचन से किसी की भी हिंसा न करें ।

तो भगवान शिव के उपदेश के विरुद्ध जाकर , माता दुर्गा भला किस प्रकार मांस मदिरा , बलि आदि ग्रहण कर सकतीं हैं ?

अतः मेरे विचार से माता आदिशक्ति को बलि देना निरर्थक है ।

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There are also the 9 forms of Maa Durga herself in Agama Shastras ; each representing a different aspect of Life.

Like Wealth and Happiness i.e. Laukika Sukha , Health , Desire i.e. Kama , Siddhi i.e. Wishes , enemy destroyer i.e. Ripumara , Agni i.e. Yagya and Food , Rudramsha i.e. Consort/Part of Rudra etc.


सबसे खास बात यह है कि इनका वाहन सिंह है ( अब कोई विशेष प्रजाति का प्राणी इसको भी ग्रीक से प्रभावित सिद्ध करने की कोशिश करेगा ) 💀

महाष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएं ❤️🙏
देवी महागौरी सबका कल्याण करें ।

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क्या सूरज चीकर जैसे नुबड़े ईसाइयों की ठुकाई पुन: शुरू की जाए ??
आज कल ये नवबौद्ध-ईसाई हाइब्रिड बने नजर आ रहे हैं। 😂😂
Anonymous Quiz
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1. Yes 🗿🗿
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2. Noo 🤡🤡
Mera Yesu Yesu : Part 15 Posting tonight !!

Ravan bhakton , apne sugar daddy ki dhazziyan udte dekhne k liye ready ho jao !!


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Did Ravana respect Maa Sita.pdf
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मेरा येशु येशु: भाग 15

रावणभक्तों के लिए विशेष प्रस्तुति 😂

क्या रावण ने माता सीता को लंका में बहुत सम्मान दिया था ??

Written by :- Mystical Garuda 🦅

नोट : पढ़ने के बाद कुछ लोगो को बर्नोल की जरूरत पड़ सकती है।


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Great initiative ❤️❤️

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देवराज इंद्र का वास्तविक चरित्र : भाग 7


क्या देवराज इंद्र अमर्यादित धर्मविरूद्ध कर्म करने वाले थे ?

महाभारत के खिल पर्व हरिवंश के विष्णुपर्व अध्याय 69 में भगवान इंद्र , भगवान श्रीकृष्ण को संदेश भेजते तथा समझाते हैं ।
उन्होंने मर्यादा की महत्व बताते हुए कहा : " यदि मैं देवमर्यादा को भंग करता हूं , तो प्रजापतियों के समुदाय में मेरा क्या स्थान होगा ?
यदि मैंने प्रजापति भगवान् ब्रह्मा द्वारा नियत मर्यादा को त्यागना चाहा , तो वो मुझे श्राप भी दे सकते हैं । "

इसके अलावा वह यह भी कहते हैं :-

" यदि हम ही प्राचीन धर्म सेतु की मर्यादा को भंग कर देंगे , तब तो दैत्य दानवादि और भी अधिक खुलकर इन मर्यादाओं का भेदन करने लगेंगे । "


अगर आपको संदेह है कि यह मर्यादा सिर्फ पारिजात के विषय में है , तो ऐसा कुछ नहीं है । भगवान इंद्र को अगर सिर्फ पारिजात के विषय में कहना होता , तो असुर दैत्य आदि विषयों के साथ ही साथ देवमर्यादा को नहीं जोड़ते ।

अतः सिद्ध है कि भगवान इंद्र धर्म की मर्यादा को कभी लांघकर दुष्कर्म नहीं कर सकते थे , जो उनकी बातों से भी स्पष्ट झलकता है ।

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Image making was done in Bharat even in Pre Mauryan times.

There are certain sculptures of Yakshas , which've been preserved over time ; provide us sufficient evidence for it.

Still a gentleman ( you know who ) believe that Greeks gave us this whole thing in Post Mauryan period. 🤣🤣

Source : Studies in Ancient Art ; VS Agrawala


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नवबौद्धों के नीले सपने : भाग 11


क्या संस्कृत अशोक के समय या उसके पहले नहीं मिलती ?

दक्षिण भारत में सबसे पुराने तमिल शिलालेख, दक्षिणी ब्राह्मी लिपि में लिखे गए हैं और कम से कम तीसरी-दूसरी शताब्दी ईसापूर्व ( 3rd-2nd century BCE ) के हैं।

समकालीन/अशोक से पहले, उनमें पहले से ही संस्कृत अक्षर शामिल थे ; हालाँकि यह अपने प्रारंभिक चरण में तमिल से बना है।

इस प्रकार यह अशोक के पूर्व और उसके समय में संस्कृत की ऐतिहासिकता को सिद्ध करता है ।

Source : The development of religion in South India , By KA Nilakanth Shashtri


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वैदिक धर्म में स्त्रियों की महत्ता ☝️

पत्नियां स्वयं श्री का स्वरूप हैं । वे अश्वमेध यज्ञ में यजमान का अभिषेक करें , उनके सायुज्य से यजमान श्री , तेज , प्रताप , पराक्रम व पशु ( संपत्ति ) से युक्त हो संपन्नता को प्राप्त करे ।

~ शतपथ ब्राह्मण १३.२.६.७

धनतेरस पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं । मां श्रीलक्ष्मी सबका कल्याण करें 🙏🙏

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Evidences of Vedas before 12th century : Part 17

I-tsing was an eye witnesses of Shruti tradition of Vedas in Bharat.
This was how Vedas were preserved for thousands of years in our Civilization ; without changes.

Source :- A record of Buddhist religion in India and Malay archipelago , I-tsing ( 7th century )
Chapter 34


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Real reason of Solar Eclipse :- Unlike Myths spread in society

Mahabharata Shanti Parva ; 203/21


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अहिंसा के विषय में पराशरगीता के कुछ श्लोक :-

जानबूझकर हिंसा करने वाले के पाप अक्षम्य होते हैं, अहिंसा व्रत भी उसका निवारण नहीं कर सकता।

~ महाभारत शान्तिपर्वान्तरगत पराशरगीता


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