प्रज्ञानं ब्रह्म 🙏🚩
1.18K subscribers
1.4K photos
53 videos
6 files
43 links
This Rational Channel is made to clarify doubts and Allegations on Sanatan dharma. I am a Neutral Agnostic & Non sectarian Vedic.

Doubts and Debates are certainly Welcome. No abuses please.

मर्यादा का उल्लंघन ना करें ।
Krishnam Vande Jagadgurum 🙏
Download Telegram
कन्याकुमारी का इतिहास :


हम सभी जानते हैं कि माता पार्वती कितनी बड़ी तपस्विनी थीं। उन्होंने भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए कई वर्षों तक कठिन तपस्या की।

भारतीय प्रायद्वीप के सुदूर दक्षिणी सिरे पर स्थित कन्याकुमारी उनकी तपस्या का एक प्रमुख केंद्र था जहाँ वे देवी कुमारी के रूप में भगवान शिव की पूजा करती थीं।
क्या आप जानते हैं कि यह कितने वर्षों से वैदिक लोगों के लिए एक धार्मिक तीर्थस्थल रहा है ?

1st century CE में लिखी गई Periplus of Erythraean Sea , जो हिंद महासागर में व्यापार मार्ग से संबंधित एक यूनानी पुस्तक है । इसमें उल्लेख है कि :-

" कुमारी भारतीय लोगों के लिए एक बंदरगाह और तीर्थस्थल था। यहां बहुत से लोग पवित्र स्नान करने आते हैं।
यहां पुरुष और महिलाएं आजीवन ब्रह्मचर्य का पालन करने भी आते हैं। इससे जुड़ी कहानी कहती है कि एक बार एक देवी यहां रहती थी और स्नान करती थी । "


कन्याकुमारी में शाक्त परंपरा की जड़ें बहुत प्राचीन काल से हैं।

नमो दैव्यै महा दैव्यै 🙏🙏

Follow us at :-
@scienceinsightdharma
@history_of_manuvadii
❤7
प्रज्ञानं ब्रह्म 🙏🚩
कन्याकुमारी का इतिहास : हम सभी जानते हैं कि माता पार्वती कितनी बड़ी तपस्विनी थीं। उन्होंने भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए कई वर्षों तक कठिन तपस्या की। भारतीय प्रायद्वीप के सुदूर दक्षिणी सिरे पर स्थित कन्याकुमारी उनकी तपस्या का एक प्रमुख केंद्र था जहाँ…
अत: यहां से तीन बातें सिद्ध होती हैं:-

1. प्राचीन भारत में महिलाएं भी ब्रह्मचर्य का पूर्ण पालन करती थीं (अगर ब्रह्मचर्य पालन होता होगा तो जाहिर सी बात है कि गुरुकुल , वेदादि ग्रन्थ , वैदिक शिक्षाप्रणाली आदि भी होती होगी )
2. भारत के लोगो की माँ आदिशक्ति में आस्था और भक्ति का भी पता चलता है।
3. देवी माँ की पूजा का प्राचीन इतिहास।
🔥5❤1👍1
कुछ दिन पहले मैंने कुछ सज्जनों को आपातकाल में अभक्ष्य-भक्षण का अंध-समर्थन करते देखा था।
उन्हें हमने सर्वकालिक निषेध भी दिखाया परंतु उन्हें संतुष्टि नहीं मिली।

पंचतंत्र में भी प्राचीन ग्रंथों को उद्धृत करते हुए कहा गया है:

" प्राण कंठ में आ जाए, तब भी विद्वान मनुष्य को अभक्ष्य भक्षण नहीं करना चाहिए क्योंकि ये लोक और परलोक दोनों के लिए अच्छे नहीं हैं। "

संदर्भ : पंचतंत्र, मित्रभेदः


Follow us at :-
@scienceinsightdharma
@history_of_manuvadii
🔥6👍2❤1🤣1
1st century BCE old Statue of Indra , where Gaja Lakshmi is standing on the top of it.

Founded from Bodhgaya and belongs to 50 BCE.

Source : Mauryan and Sunga Art , Nihar Ranjan Ray , Central Archaeological Library


Join us at 👇⬇️
@scienceinsightdharma
@history_of_manuvadii
👍5
वंदे वांछितलाभाय चंद्रार्धकृतशेखराम |
वृषारूढां शूलधरां शैलपुत्री यशस्विनीम्‌ ||

नवरात्रि पर्व के प्रथम दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं 🙏🙏

Join us at 👇 ⬇️
@scienceinsightdharma
@history_of_manuvadii
🙏5❤2
देवी के परम मंगलमय इतिहास की चर्चा में हम आज देवी उमा (पार्वती) के बारे में कुछ विशेष बताएंगे।

देवी उमा वेदों की ज्ञाता थीं। वह उन्हें पुण्यक विधि से पहले उद्धृत करती है।
वह अखंडनीय सर्वकालिक धर्मचारिणी थीं , इसीलिए उन्होंने सभी पुण्यक अनुष्ठान किये।

स्रोत: हरिवंश पुराण, विष्णुपर्व अध्याय 78


Join us at 👇⬇️
@scienceinsightdharma
@history_of_manuvadii
❤4
देवी पार्वती संसार के सभी प्राणियों के कल्याण के लिए सदैव तत्पर रहती थीं ।

वह सर्वज्ञ (सभी शास्त्रों और विद्याओं को जानने वाली) थी। भगवान शिव ने उन्हें कई बार धर्म और उसके आचरण के संबंध में उपदेश दिये थे ।

Source : हरिवंश पुराण, विष्णु पर्व, अध्याय 77/25 एवं 78/1


Join us at 👇⬇️
@scienceinsightdharma
@history_of_manuvadii
❤3
देवी पार्वती का उपनयन संस्कार भी हुआ था। राजा हिमवान ने वेदमंत्रों का जाप से यथावत देवी पार्वती और भगवान शिव का उपनयन संपन्न किया था।


चूँकि यह पूरा समारोह उनकी शादी से ठीक पहले किया गया था, देवी पार्वती ऋषि हारित और यम के अनुसार सद्योवधु थीं।

कुमारसंभवम के अनुसर देवी पार्वती ने भी समस्त विद्याओं का ज्ञान बचपन में ही ग्रहण कर लिया था।
इसके अलावा उनके उपनयन की पुष्टि भी कुमारसंभवम् द्वारा की जाती है।

तप, स्वाध्याय और दैनिक यज्ञ करना उनके घोर तपस्या में प्रतिदिन का कार्य था।
उनके तप को देख कर ऋषि भी आश्चर्यचकित हो गए।

स्रोत: शिवपुराण, रुद्र संहिता, पार्वती खंड, 47/1, कालिदास कृत कुमारसंभवम्

Join us at 👇⬇️
@scienceinsightdharma
@history_of_manuvadii
👍4❤1
अनिरुद्धकृत आर्यास्तव के अनुसार, देवी पार्वती एक वीर योद्धा थीं, जिन्होंने अनिरुद्ध की नागपाश से रक्षा की थी। उनका अपने मन और सभी इंद्रियों पर नियन्त्रण था। इसके अलावा देवी ने कई बार दैत्य सेना के विरुद्ध जाकर उनसे युद्ध भी किया और वह हमेशा विजयी रहीं।

वास्तविकता में तो देवी ने अपना आर्या नाम ; बिल्कुल सार्थक बना लिया।


धनुर्वेद में अपनी उत्कृष्टता के कारण, वह सभी दुष्ट दानव और दैत्यों के लिए एक दुःस्वप्न थी। वह धर्म और संसार की रक्षक थी।

स्रोत: हरिवंश, विष्णु पर्व, अध्याय 120


Join us at 👇⬇️
@scienceinsightdharma
@history_of_manuvadii
👍5❤1
इतना स्पष्ट लिखने के बावजूद भी कुछ लोगों के मुख से मेरे लिए अत्यंत कल्याणकारी शब्द प्रवाहित हो रहे हैं ।

अगर केवल देवी मां के आधिदैविक पक्ष पर बात करनी होती तो मैंने ये पोस्ट ही ना बनाई होती ।
जब मैं इतिहास का विषय चुना है तो मैं उस पर ही बात करूंगा ।

और जो लोग मुझे आर्यसमाजी बोल रहे हैं , उनसे अनुरोध है कि इस तरह की फालतू बकैती तब तक ना करें जब तक आपके पास कोई प्रमाण न हो ।

मैं ना तो खुद को कभी आर्यसमाजी कहा था और ना कभी आगे कहने का कोई इरादा है ; बस बात ख़त्म ।



~ Mystical Garuda 🦅
❤7👍1😢1
Gandhara was a major center of Vedic religion before Buddhism entered the area in the 3rd century BCE.

The existence of Vedas and Vedic dharma is already proven much older than Buddhism 🗿🗿

Join us at 👇⬇️
@scienceinsightdharma
❤5