प्रज्ञानं ब्रह्म 🙏🚩
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This Rational Channel is made to clarify doubts and Allegations on Sanatan dharma. I am a Neutral Agnostic & Non sectarian Vedic.

Doubts and Debates are certainly Welcome. No abuses please.

मर्यादा का उल्लंघन ना करें ।
Krishnam Vande Jagadgurum 🙏
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मेरा येशु येशु : भाग 12

Christianity : Science or $hit ??

Aaiye dekhte hain ki christianity me kitna Jizzyan vizzyaann hai 🤢🤮

Enjoy the post !!!

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पांडा का पोपट : भाग १४

अक्सर अपने पांडा बाबू 🐼 और कथावाचकों को यह कहते देखा होगा , की माता सीता रावण की पुत्री हैं । रावण ने कल्याण के लिए उनका अपहरण कर लिया तथा वो श्रीराम को अपने घर लाना चाहता था वगैरा-वगैरा ।

जबकि महर्षि वाल्मीकि अरण्यकांड ४९/१६ में कहा है कि माता सीता रावण के लिए भी माता समान थीं । रावण के द्वारा माता सीता का अपहरण किया जाना बिलकुल वैसा ही है जैसा चंद्रपुत्र बुध द्वारा अपनी माता रोहिणी का अपहरण किया जाना , अर्थात् रावण मानो अपनी माता को ही अपहृत कर ले गया ।


यहां से एक चीज तो स्पष्ट हो जाती है की माता सीता और रावण में पिता पुत्री का कोई संबंध नहीं था ।

इसी प्रकार जटायु ने भी आलंकारिक रूप से अरण्यकांड ५०/१७ में माता सीता को रावण की मृत्यु बताया है ।
इसी प्रकार शूर्पणखा ने भी रावण को उकसाते समय झूठ बोलते हुए उसके मन में माता सीता के प्रति गलत विचार उत्पन्न किए थे ।

अतः रावण अपने कल्याण के लिए तो माता सीता को लेकर नहीं जा रहा था ।


पांडा बाबू की कपोल कल्पित कथाएं सत्य को बदल नहीं सकती ।
सत्य जानने के लिए वाल्मीकि रामायण पढ़ें ।

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देवराज इंद्र का वास्तविक चरित्र : भाग 6

देवराज इंद्र दर्शनों तथा तत्वज्ञान के जानकार और स्वयं भी तत्वज्ञानी थे ।

महाभारत शांति पर्व , वृत्रगीता


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Buddha in Valmiki Ramayana : Myth or Reality ???

Post Credit : @aryavart_regenerator ji 👊


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( Aaj kal History pe hi post aa rahi hai , isi karan yaha pe content Kam dal pata hun )
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यह देखने से पहले मेरा तंदूरी क्यों नहीं बन गया 😭😭😭

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Evidence of Vedas before 12th century: Part 11

ब्राह्मण लिखना जानते थे और अशोक के समय में भी वो वेदादि ग्रंथों की एक-एक प्रति अपने साथ रखा करते थे जिससे वह पीढ़ी दर पीढ़ी श्रुति परंपरा के द्वारा आगे अपने शिष्यों में वैदिक ज्ञान बांटा करते थे । हालांकि वे लेखन कार्य को गुप्त रखते थे परंतु इसमें कोई संदेह नहीं होना चाहिए कि ब्राह्मणों को लिखना पढ़ना अच्छी तरह आता था ।

~ Letter of Max Muller to J takakusu ( the person who translated I-tsing work )..


पाणिनि के समय में भी भारतीयों को विविध प्रकार की भाषाओं और लिपियों का ज्ञान था । भारतीयों के उपनिषद् और वेदांत आदि दर्शनों का ज्ञान अलेक्जेंड्रिया की संस्थापना और बेबीलोन के पुनर्जागरण के बाद ग्रीस में बहुत जोरों से फैला । ग्रीक लोग भारत की संस्कृति तथा कथानकों से बहुत प्रभावित हुए तथा उन्हें अपने कथाओं में महत्वपूर्ण स्थान दिया ।

~ India as known to ancient World , Dr. Gauranganath Banerjee


यहां से श्रुति की प्राचीनता सिद्ध होती है जो कि अशोक तथा उससे पहले के समय में भी , देश विदेश में प्रख्यात थी ।

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Evidence of Vedas before 12th century : Part 12

These are the Shakhas ( branches ) of 3 Vedas which are mentioned in Tevijja Sutta of Tripitaka.

Pali - Sanskrit - Veda

बहवरिच - बह्वृच - Rigveda
छंदोग - छान्दोग्य - Samveda
तित्तिरिय - तैत्तिरीय - Krishna Yajurveda
अद्धरिय - अध्वर्यु ( शतपथ ) - Yajurveda



Mark Addhariya brahman because as per me , possibly it can be Aiteraeya brahman of Rigveda...


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Understanding Kapala :

कपाल क्या है?

कई विधर्मियों का दावा है कि यज्ञ के दौरान वर्णित सिर या कपाल वास्तव में मानव का सिर है जिसे यज्ञ वेदी में गिरा दिया जाता है और इस प्रकार वैदिक धर्म में मानव बलि दी जाती है।

लेकिन ब्राह्मण ग्रंथ इस बारे में क्या कहते हैं? आइये एक नजर डालते हैं.

शतपथ 1/2/1/2 के अनुसार पुरोडाश यज्ञ का मुख है । जिस बर्तन में इसे रखा जाता है, वह कपाल है । इसी प्रकार इसमें जो पिसा हुआ चावल पकाया जा रहा है वह मस्तिष्क है ।


इसलिए यहां मानव सिर मानना ​​हास्यास्पदता का शीर्ष स्तर है।

मैं इन मूर्खों से अनुरोध करता हूं कि कृपया किसी भी बात पर टिप्पणी करने से पहले कृपया वैदिक ग्रंथ पढ़ें ।

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