सशङ्खचक्रं सकिरीटकुण्डलं
सपीतवस्त्रं सरसीरुहेक्षणम् ।
सहारवक्षःस्थलकौस्तुभश्रियं
नमामि विष्णुं शिरसा चतुर्भुजम् ॥
छायायां पारिजातस्य हेमसिंहासनोपरि
आसीनमम्बुदश्याममायताक्षमलंकृतम् ।
चन्द्राननं चतुर्बाहुं श्रीवत्साङ्कित वक्षसं
रुक्मिणी सत्यभामाभ्यां सहितं कृष्णमाश्रये ॥
Jai Lakshmi Narayana
Jai Rukmini Keshava 🗿🚩🙏
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सहारवक्षःस्थलकौस्तुभश्रियं
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आसीनमम्बुदश्याममायताक्षमलंकृतम् ।
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Created by : Mystical Garuda
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❤3
मेरा येशु येशु : भाग 12
Christianity : Science or $hit ??
Aaiye dekhte hain ki christianity me kitna Jizzyan vizzyaann hai 🤢🤮
Enjoy the post !!!
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😁6
पांडा का पोपट : भाग १४
अक्सर अपने पांडा बाबू 🐼 और कथावाचकों को यह कहते देखा होगा , की माता सीता रावण की पुत्री हैं । रावण ने कल्याण के लिए उनका अपहरण कर लिया तथा वो श्रीराम को अपने घर लाना चाहता था वगैरा-वगैरा ।
यहां से एक चीज तो स्पष्ट हो जाती है की माता सीता और रावण में पिता पुत्री का कोई संबंध नहीं था ।
पांडा बाबू की कपोल कल्पित कथाएं सत्य को बदल नहीं सकती ।
सत्य जानने के लिए वाल्मीकि रामायण पढ़ें ।
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अक्सर अपने पांडा बाबू 🐼 और कथावाचकों को यह कहते देखा होगा , की माता सीता रावण की पुत्री हैं । रावण ने कल्याण के लिए उनका अपहरण कर लिया तथा वो श्रीराम को अपने घर लाना चाहता था वगैरा-वगैरा ।
जबकि महर्षि वाल्मीकि अरण्यकांड ४९/१६ में कहा है कि माता सीता रावण के लिए भी माता समान थीं । रावण के द्वारा माता सीता का अपहरण किया जाना बिलकुल वैसा ही है जैसा चंद्रपुत्र बुध द्वारा अपनी माता रोहिणी का अपहरण किया जाना , अर्थात् रावण मानो अपनी माता को ही अपहृत कर ले गया ।
यहां से एक चीज तो स्पष्ट हो जाती है की माता सीता और रावण में पिता पुत्री का कोई संबंध नहीं था ।
इसी प्रकार जटायु ने भी आलंकारिक रूप से अरण्यकांड ५०/१७ में माता सीता को रावण की मृत्यु बताया है ।
इसी प्रकार शूर्पणखा ने भी रावण को उकसाते समय झूठ बोलते हुए उसके मन में माता सीता के प्रति गलत विचार उत्पन्न किए थे ।
अतः रावण अपने कल्याण के लिए तो माता सीता को लेकर नहीं जा रहा था ।
पांडा बाबू की कपोल कल्पित कथाएं सत्य को बदल नहीं सकती ।
सत्य जानने के लिए वाल्मीकि रामायण पढ़ें ।
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देवराज इंद्र का वास्तविक चरित्र : भाग 6
देवराज इंद्र दर्शनों तथा तत्वज्ञान के जानकार और स्वयं भी तत्वज्ञानी थे ।
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देवराज इंद्र दर्शनों तथा तत्वज्ञान के जानकार और स्वयं भी तत्वज्ञानी थे ।
महाभारत शांति पर्व , वृत्रगीता
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Buddha in Valmiki Ramayana : Myth or Reality ???
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( Aaj kal History pe hi post aa rahi hai , isi karan yaha pe content Kam dal pata hun )
Post Credit : @aryavart_regenerator ji 👊
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यह देखने से पहले मेरा तंदूरी क्यों नहीं बन गया 😭😭😭
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Evidence of Vedas before 12th century: Part 11
ब्राह्मण लिखना जानते थे और अशोक के समय में भी वो वेदादि ग्रंथों की एक-एक प्रति अपने साथ रखा करते थे जिससे वह पीढ़ी दर पीढ़ी श्रुति परंपरा के द्वारा आगे अपने शिष्यों में वैदिक ज्ञान बांटा करते थे । हालांकि वे लेखन कार्य को गुप्त रखते थे परंतु इसमें कोई संदेह नहीं होना चाहिए कि ब्राह्मणों को लिखना पढ़ना अच्छी तरह आता था ।
पाणिनि के समय में भी भारतीयों को विविध प्रकार की भाषाओं और लिपियों का ज्ञान था । भारतीयों के उपनिषद् और वेदांत आदि दर्शनों का ज्ञान अलेक्जेंड्रिया की संस्थापना और बेबीलोन के पुनर्जागरण के बाद ग्रीस में बहुत जोरों से फैला । ग्रीक लोग भारत की संस्कृति तथा कथानकों से बहुत प्रभावित हुए तथा उन्हें अपने कथाओं में महत्वपूर्ण स्थान दिया ।
यहां से श्रुति की प्राचीनता सिद्ध होती है जो कि अशोक तथा उससे पहले के समय में भी , देश विदेश में प्रख्यात थी ।
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ब्राह्मण लिखना जानते थे और अशोक के समय में भी वो वेदादि ग्रंथों की एक-एक प्रति अपने साथ रखा करते थे जिससे वह पीढ़ी दर पीढ़ी श्रुति परंपरा के द्वारा आगे अपने शिष्यों में वैदिक ज्ञान बांटा करते थे । हालांकि वे लेखन कार्य को गुप्त रखते थे परंतु इसमें कोई संदेह नहीं होना चाहिए कि ब्राह्मणों को लिखना पढ़ना अच्छी तरह आता था ।
~ Letter of Max Muller to J takakusu ( the person who translated I-tsing work )..
पाणिनि के समय में भी भारतीयों को विविध प्रकार की भाषाओं और लिपियों का ज्ञान था । भारतीयों के उपनिषद् और वेदांत आदि दर्शनों का ज्ञान अलेक्जेंड्रिया की संस्थापना और बेबीलोन के पुनर्जागरण के बाद ग्रीस में बहुत जोरों से फैला । ग्रीक लोग भारत की संस्कृति तथा कथानकों से बहुत प्रभावित हुए तथा उन्हें अपने कथाओं में महत्वपूर्ण स्थान दिया ।
~ India as known to ancient World , Dr. Gauranganath Banerjee
यहां से श्रुति की प्राचीनता सिद्ध होती है जो कि अशोक तथा उससे पहले के समय में भी , देश विदेश में प्रख्यात थी ।
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