प्रज्ञानं ब्रह्म 🙏🚩
वाजीकरण - संदर्भ : चरक चिकित्सास्थान वाजीकरणाध्याय , प्रथम तीन पाद वाजीकरण अर्थात् वीर्यशुक्र वृद्धि ताकि संतानोत्पत्ति हो सके व दांपत्य जीवन सुखमय हो । वाजीकरण की सलाह जितेंद्रियों को ही दी जाती है । यदि हिल्लन-डुल्लन इसका सेवन करेंगे तो व्यभिचार और अगम्यागमन…
चतुर्थ पाद में हमें शक्तिवर्धक औषधियां देखने को मिलती हैं जो इन्हीं हिल्लन-डुल्लन लोगों के लिए है ।
यह ध्यान रखिएगा कि वाजीकरण का उपयोग मुख्य रूप से जितेंद्रियों को ही करना चाहिए । हिल्लन-डुल्लन लोग इसके दुरुपयोग से वीर्यनाश कर तथा बहुस्त्रीगामी होकर बस समाज में व्यभिचार ही फैलाते हैं ।
औषधि का सेवन रोग को दूर करने के लिए स्वास्थ्यलाभ तथा आयुवर्धन के लिए ही करना चाहिए । इनका दुरुपयोग विनाश को जन्म देता है ।
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जो लोग अतिशय मैथुन करने वाले हैं , शक्तिहीन है , बहुस्त्रीगामी है , वैश्यागमन करते हैं , अगम्यागमन प्रवृत्ति वाले हैं , केवल औषधीयों का दम पर मैथुन करने वाले हैं , बारंबार शुक्र का क्षरण करने वाले हैं , जो एक बार के मैथुन में ही अत्यधिक शुक्र का नाश करने वाले हैं , केवल हेमंत आदि ऋतुओं में ही गमन करने में सक्षम , अभ्यासानुसार बारंबार मैथुन में प्रयुक्त होने वाले हैं ,
कुल मिला-जुलाकर जिनके लक्षण इन्हीं हिल्लन-डुल्लन लोगों की भांति है , उन्हें भी वाजीकरण जैसी कुछ औषधियों का सेवन करने की अनुमति दी जाती है । साथ ही साथ बलवान अगर बलहीन हो जाए या बलवान को और बल की प्राप्ति करनी हो , तो चतुर्थ पाद की औषधियों का प्रयोग किया जा सकता है ।
यह ध्यान रखिएगा कि वाजीकरण का उपयोग मुख्य रूप से जितेंद्रियों को ही करना चाहिए । हिल्लन-डुल्लन लोग इसके दुरुपयोग से वीर्यनाश कर तथा बहुस्त्रीगामी होकर बस समाज में व्यभिचार ही फैलाते हैं ।
चतुर्थ पाद की औषधियां भी पहले के तीन पादों की तरह ही वृष्य तथा बलवर्धक होती हैं , उनमें भी तामसिक और सात्विक के भेद होते हैं ।
औषधि का सेवन रोग को दूर करने के लिए स्वास्थ्यलाभ तथा आयुवर्धन के लिए ही करना चाहिए । इनका दुरुपयोग विनाश को जन्म देता है ।
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पांडा बाबू 🐼 का पोपट : भाग १३
Existence of Saraswati River and Age of Vedas pe Panda babu 🐼 ki kutai !!!
वह बात अलग है कि पांडा बाबू 🐼 इन सबको फेक बोलते हुए इन सब पर यकीन नहीं करेंगे और कहेंगे कि तुमने कुछ सिद्ध नहीं किया 😂😂
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वैदिक ऋषिकाएं : भाग २
ऋषिका सार्पराज्ञी
सार्पराज्ञी एक चतुर्वेदी ऋषिका है । इनके द्वारा दृष्ट किए मंत्र चारों वेदों में निहित हैं ।
ऋषिका सार्पराज्ञी का नाम बृहद्देवता २/८४ में अन्य ऋषिकाओं के साथ देखने को मिलता है । यजुर्वेद के प्रसिद्ध भाष्याकार महिधर ने ३/६ के भाष्य में ऋषिका सार्पराज्ञी का ऋषित्व स्वीकार करते हुए उन्हें ही मंत्रदृष्टा माना है ।
इनके द्वारा दृष्ट किए गए मंत्र अग्न्याधान प्रक्रिया में प्रयोग होते हैं ।
आज के युग की प्रगतिशील स्त्रियों के लिए सार्पराज्ञी एक प्रेरणा स्रोत तथा वैज्ञानिक दृष्टिकोण की प्रवक्ता हैं ।
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ऋषिका सार्पराज्ञी
सार्पराज्ञी एक चतुर्वेदी ऋषिका है । इनके द्वारा दृष्ट किए मंत्र चारों वेदों में निहित हैं ।
ऋषिका सार्पराज्ञी का नाम बृहद्देवता २/८४ में अन्य ऋषिकाओं के साथ देखने को मिलता है । यजुर्वेद के प्रसिद्ध भाष्याकार महिधर ने ३/६ के भाष्य में ऋषिका सार्पराज्ञी का ऋषित्व स्वीकार करते हुए उन्हें ही मंत्रदृष्टा माना है ।
इनके द्वारा दृष्ट किए गए मंत्र अग्न्याधान प्रक्रिया में प्रयोग होते हैं ।
ये ऋग्वेद १०/१८९ सूक्त की ऋषिका हैं ।
इस सूक्त के तीन मंत्र हैं जो यजु ( ३/६-८ ) , साम ( ६३०-६३२ , १३७६-१३७८ ) और अथर्ववेद ( ६/३१/१-३ ) में भी दृष्टिगोचर होते हैं ।
यह तीनों मंत्र सूर्य को समर्पित हैं जहां पर सूर्य की महिमा तथा इसका वैज्ञानिक महत्व देखने को मिलता है ।
इन मंत्रों में पृथ्वी का सूर्य के चारों ओर चक्कर लगाना , सूर्य ज्योति का पृथ्वी पर प्रभाव तथा इससे मुहूर्त का निर्माण देखने को मिलता है ।
आज के युग की प्रगतिशील स्त्रियों के लिए सार्पराज्ञी एक प्रेरणा स्रोत तथा वैज्ञानिक दृष्टिकोण की प्रवक्ता हैं ।
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और ये लोग वेदों के विज्ञान पर बात करना चाहते हैं 😂😂😂
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इस्लामी भाईचारा 👺 : वैदिक भाई या चारा ??
कुतुब मीनार के पास की मस्जिद कुव्वत-उल-इस्लाम को 27 हिंदू और जैन मंदिरों को तोड़ने के बाद उनके अवशेषों से बनाया गया था ।
इसका प्रमाण उसी मस्जिद पर खुदा हुआ एक शिलालेख है जो 1191 ई. का है ।
यह अभिलेख कहता है कि अपने शासन के 587वें साल में कुतुबुद्दीन ऐबक ने अपने सेनापति आमिर द्वारा 27 हिंदू और जैन मंदिरों को तुड़वाया तथा उनके अवशेषों से इस जमी मस्जिद का निर्माण कराया ।
कु - रान सुराह ३ आयत ९१-९२ के द्वारा इस शिलालेख की शुरुआत होती है ।
अब मुस्लिम आक्रमणकर्ताओं को महान बताने तथा उनको अपना बाप समझने वाले लिब्रांडू दल खुद बताएं कि क्या आप लोगों के अनुसार हम सनातनी मनुष्य भी हैं ? मुसलमानों की धार्मिक भावना का बड़ा सम्मान करते हो पर हमारी ? हमारे द्वारा अगर कोई कदम उठाया जाए तो वह इन मुसलमानों पर अत्याचार हो जाता है वहीं अगर यह हमारे मंदिरों को तोड़ दें , हमारे लोगों को मार दें , तो यह भाईचारे का प्रतीक है ??
Share this post as much as you can , to aware Vedic dharmis against 🅱uslims pseudo secularism.
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कुतुब मीनार के पास की मस्जिद कुव्वत-उल-इस्लाम को 27 हिंदू और जैन मंदिरों को तोड़ने के बाद उनके अवशेषों से बनाया गया था ।
इसका प्रमाण उसी मस्जिद पर खुदा हुआ एक शिलालेख है जो 1191 ई. का है ।
यह अभिलेख कहता है कि अपने शासन के 587वें साल में कुतुबुद्दीन ऐबक ने अपने सेनापति आमिर द्वारा 27 हिंदू और जैन मंदिरों को तुड़वाया तथा उनके अवशेषों से इस जमी मस्जिद का निर्माण कराया ।
कु - रान सुराह ३ आयत ९१-९२ के द्वारा इस शिलालेख की शुरुआत होती है ।
अब मुस्लिम आक्रमणकर्ताओं को महान बताने तथा उनको अपना बाप समझने वाले लिब्रांडू दल खुद बताएं कि क्या आप लोगों के अनुसार हम सनातनी मनुष्य भी हैं ? मुसलमानों की धार्मिक भावना का बड़ा सम्मान करते हो पर हमारी ? हमारे द्वारा अगर कोई कदम उठाया जाए तो वह इन मुसलमानों पर अत्याचार हो जाता है वहीं अगर यह हमारे मंदिरों को तोड़ दें , हमारे लोगों को मार दें , तो यह भाईचारे का प्रतीक है ??
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Media is too big
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Maharishi Kapil and Sankhya darshan ❤️❤️
Edit by : Roxxzy bhoijaan 🗿🙏
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मेरा येशु येशु : भाग 11
अरे मूर्ख बोल क्या रहा है , पहले यही स्पष्ट कर दे । मैंने तो चैनल और अपने बायो में भी दोनों जगह खुद को अज्ञेयवादी वैदिक बताया है 😂
दूसरी चीज तो खुद को बहुत बड़ा डिबेटर कहता है और इतने गंदे शब्दों का इस्तेमाल करता है , इसी से तेरी औकात पता चल जाती है ।
अगर तू सनातन धर्म के किसी भी विद्वान को गालियां देगा तो मैं बर्दाश्त करने वाला नहीं हूं ।
अब तेरी इस दो कौड़ी की पोस्ट का खंडन सुन ।
वैदिक संस्कृत में मेदः का अर्थ चिकना होता है । आचार्य महीधर ने भी इसके भाष्य में मेद का अर्थ वपा ( चिकना/मेद ) ही किया है ( मेदो वपारूपां )
श्रीराम शर्मा आचार्य ने भी मेद का अर्थ औषधि का चिकना भाग ही ग्रहण किया है ।
महर्षि ने दूध का उदाहरण दिया है , और जहां तक बात है किसके दूध का , तो पदार्थ व भावार्थ में ही उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि पशुओं का दूध , न कि बकरे का ।
और जहां तक विज्ञान की बात है , तो वह किसी के भाष्य से नहीं , वेदों से आता है ।
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अरे मूर्ख बोल क्या रहा है , पहले यही स्पष्ट कर दे । मैंने तो चैनल और अपने बायो में भी दोनों जगह खुद को अज्ञेयवादी वैदिक बताया है 😂
दूसरी चीज तो खुद को बहुत बड़ा डिबेटर कहता है और इतने गंदे शब्दों का इस्तेमाल करता है , इसी से तेरी औकात पता चल जाती है ।
अगर तू सनातन धर्म के किसी भी विद्वान को गालियां देगा तो मैं बर्दाश्त करने वाला नहीं हूं ।
अब तेरी इस दो कौड़ी की पोस्ट का खंडन सुन ।
वैदिक संस्कृत में मेदः का अर्थ चिकना होता है । आचार्य महीधर ने भी इसके भाष्य में मेद का अर्थ वपा ( चिकना/मेद ) ही किया है ( मेदो वपारूपां )
श्रीराम शर्मा आचार्य ने भी मेद का अर्थ औषधि का चिकना भाग ही ग्रहण किया है ।
दूध दही मक्खन यहां तक कि , मांसाहारी लोग जो इन पशुओं का वसा/मेद आदि लेते हैं वह सब चिकने पदार्थों में ही आता है ।
महर्षि ने दूध का उदाहरण दिया है , और जहां तक बात है किसके दूध का , तो पदार्थ व भावार्थ में ही उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि पशुओं का दूध , न कि बकरे का ।
और जहां तक विज्ञान की बात है , तो वह किसी के भाष्य से नहीं , वेदों से आता है ।
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और ये लोग वेदों के विज्ञान पर बात करना चाहते हैं 😂😂😂 Join us at 👇⬇️ @scienceinsightdharma @history_of_manuvadii
अनपढ़ आदमी को नाम लिखना तो आता नहीं बस गालियां देना आता है । अगली बार अगर नाम ना लिखवा पाना तो मेरा यूजरनेम ही चेंप लेना ।
ईसाइयों का विज्ञान बस यहीं तक सीमित है । जिस चीज को तर्कसंगत नहीं पाते , उसे चमत्कार बोलकर भाग लेते हैं ।
तुझे डिबेट में मैंने कितनी बार बुलाया पर तू आया नहीं । मुसलमानों से खुद के चैनल पर डिबेट करता है , और हमें खुद डर के मारे गूगल मीट पर बुलाता है । 😂
अब तूने विज्ञान की बात कर ही ली है तो अभी थोड़ी देर में तुझे बाइबल का विज्ञान भी दिखा देता हूं ।
ईसाइयों का विज्ञान बस यहीं तक सीमित है । जिस चीज को तर्कसंगत नहीं पाते , उसे चमत्कार बोलकर भाग लेते हैं ।
तुझे डिबेट में मैंने कितनी बार बुलाया पर तू आया नहीं । मुसलमानों से खुद के चैनल पर डिबेट करता है , और हमें खुद डर के मारे गूगल मीट पर बुलाता है । 😂
अब तूने विज्ञान की बात कर ही ली है तो अभी थोड़ी देर में तुझे बाइबल का विज्ञान भी दिखा देता हूं ।
जहां तक तूने कहा कि 1000 साल पुराना धर्म है , तो मैं तुझे खुली चुनौती देता हूं मेरे न्यूट्रल डिस्कशन ग्रुप में आजा , 1 v/s 1 कर लेते हैं इतिहास पर ।
सिद्ध करो अपनी बात ।
@lafndar
सशङ्खचक्रं सकिरीटकुण्डलं
सपीतवस्त्रं सरसीरुहेक्षणम् ।
सहारवक्षःस्थलकौस्तुभश्रियं
नमामि विष्णुं शिरसा चतुर्भुजम् ॥
छायायां पारिजातस्य हेमसिंहासनोपरि
आसीनमम्बुदश्याममायताक्षमलंकृतम् ।
चन्द्राननं चतुर्बाहुं श्रीवत्साङ्कित वक्षसं
रुक्मिणी सत्यभामाभ्यां सहितं कृष्णमाश्रये ॥
Jai Lakshmi Narayana
Jai Rukmini Keshava 🗿🚩🙏
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सपीतवस्त्रं सरसीरुहेक्षणम् ।
सहारवक्षःस्थलकौस्तुभश्रियं
नमामि विष्णुं शिरसा चतुर्भुजम् ॥
छायायां पारिजातस्य हेमसिंहासनोपरि
आसीनमम्बुदश्याममायताक्षमलंकृतम् ।
चन्द्राननं चतुर्बाहुं श्रीवत्साङ्कित वक्षसं
रुक्मिणी सत्यभामाभ्यां सहितं कृष्णमाश्रये ॥
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Created by : Mystical Garuda
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