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यत्र योगेश्वरः कृष्णो यत्र पार्थो धनुर्धरः।
तत्र श्रीर्विजयो भूतिर्ध्रुवा नीतिर्मतिर्मम।।
जहाँ योगेश्वर भगवान् श्रीकृष्ण हैं और जहाँ धनुर्धारी अर्जुन हैं, वहाँ ही श्री, विजय, विभूति और अचल नीति है -- ऐसा मेरा मत है।
Jai Yogeshwar Bhagwan Sri Krishna 🙏❤️
Jai Mahayoddha Arjun 🙏🚩
Karna bhakts can cry harder 🌚
तत्र श्रीर्विजयो भूतिर्ध्रुवा नीतिर्मतिर्मम।।
जहाँ योगेश्वर भगवान् श्रीकृष्ण हैं और जहाँ धनुर्धारी अर्जुन हैं, वहाँ ही श्री, विजय, विभूति और अचल नीति है -- ऐसा मेरा मत है।
Srimad Bhagavad Gita 18.78
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For history and archaeology
@history_of_manuvadii
🔥11😁2
Sacrificial pits and fire worshiping at Sanghol , an ancient site where Indus valley and Mauryan Shunga and Kushana Vedic rituals meet.
ये साइट बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि यहाँ पर उत्तर हड़प्पा काल का अंतिम चरण और समकालीन बारा संस्कृति के साक्ष्य मिले हैं जो ये सिद्ध करता है कि यहाँ पर कभी ना कभी हड़प्पा और बारा संस्कृति का प्रभाव था।
यहां मिले यज्ञकुंडों में हमें हवन सामग्री के पदारथ जैसे चावल, जौ, गेहूं, उड़द, मूंग मसूर और तिल भी देखने को मिलते हैं
साथ ही वही सभी कटी हुई लकड़ियों का उपयोग हुआ है जिनका उपयोग यज्ञ में होता है
यहाँ पर ड्राईफ्रूट्स जैसे बादाम किशमिश खजूर वगैरा की आहुति देने का भी प्रमाण प्राप्त हुआ है
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@history_of_manuvadii
ये साइट बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि यहाँ पर उत्तर हड़प्पा काल का अंतिम चरण और समकालीन बारा संस्कृति के साक्ष्य मिले हैं जो ये सिद्ध करता है कि यहाँ पर कभी ना कभी हड़प्पा और बारा संस्कृति का प्रभाव था।
यहां मिले यज्ञकुंडों में हमें हवन सामग्री के पदारथ जैसे चावल, जौ, गेहूं, उड़द, मूंग मसूर और तिल भी देखने को मिलते हैं
साथ ही वही सभी कटी हुई लकड़ियों का उपयोग हुआ है जिनका उपयोग यज्ञ में होता है
यहाँ पर ड्राईफ्रूट्स जैसे बादाम किशमिश खजूर वगैरा की आहुति देने का भी प्रमाण प्राप्त हुआ है
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नवबौद्धों के नीले ख़्वाब : पार्ट 7
हमारे पास नवबौद्ध भाइयों के लिए एक और उपहार है ।
अशोक के शिलालेखों पर आए " ब्राह्मण " शब्द का ब्राह्मी रूप ।
आप यहां पर देख सकते हैं कि स्पष्ट रूप से ब्राह्मी लिपि में ब्राह्मण शब्द लिखा हुआ है न कि बमण समण , जैसा कि हमें प्राकृत-पाली के अन्य शिलालेखों में अक्सर देखने को मिलता है ।
वैसे अब कुछ नवीन भंते कहेंगे कि ये बुद्ध बोधिसत्व वाले ब्राह्मण हैं , ना कि विदेशी मनुवादी ब्राह्मण । इसका खंडन हम अगले पार्ट में करेंगे जहां पर खुद बौद्ध मतानुयायी प्रमाण देंगे ।
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होलीकोत्सव के इस पावन अवसर पर आप सभी लोगों को हार्दिक शुभकामनाएं ।
हमारे पास नवबौद्ध भाइयों के लिए एक और उपहार है ।
अशोक के शिलालेखों पर आए " ब्राह्मण " शब्द का ब्राह्मी रूप ।
आप यहां पर देख सकते हैं कि स्पष्ट रूप से ब्राह्मी लिपि में ब्राह्मण शब्द लिखा हुआ है न कि बमण समण , जैसा कि हमें प्राकृत-पाली के अन्य शिलालेखों में अक्सर देखने को मिलता है ।
वैसे अब कुछ नवीन भंते कहेंगे कि ये बुद्ध बोधिसत्व वाले ब्राह्मण हैं , ना कि विदेशी मनुवादी ब्राह्मण । इसका खंडन हम अगले पार्ट में करेंगे जहां पर खुद बौद्ध मतानुयायी प्रमाण देंगे ।
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नवबौद्धों के नीले सपने : भाग 8
क्या ब्राह्मण बौद्ध थे ?
कई नव बौद्धों का दावा है कि अशोक के शिलालेखों में वर्णित ब्राह्मण वास्तव में बौद्ध हैं। आइए इसका पर्दाफाश करें.
फ़ाहियान, एक चीनी बौद्ध जो चौथी शताब्दी के अंत में भारत आया था, उल्लेख करता है:
1. ब्राह्मण और श्रमण एक धर्मशाला में जगह के लिए लड़ रहे थे ।
2. बहुत से ब्राह्मण विधर्मी थे, जो पेड़ों को उखाड़ते थे और बुद्ध की वाणी से घृणा करते थे ।
तो मुझे बताओ, यदि ब्राह्मण पहले से ही बौद्ध थे, तो वे विधर्मी होने के बाद बौद्ध धर्म में कैसे परिवर्तित हो गए ?
इससे सिद्ध हुआ कि ब्राह्मण बुद्ध के दर्शन के विरोधी थे और वैदिक धर्म का पालन करते थे ।
ये ब्राह्मण वही थे जिनका नाम श्रमणों के साथ लिया जाता है ।
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क्या ब्राह्मण बौद्ध थे ?
कई नव बौद्धों का दावा है कि अशोक के शिलालेखों में वर्णित ब्राह्मण वास्तव में बौद्ध हैं। आइए इसका पर्दाफाश करें.
फ़ाहियान, एक चीनी बौद्ध जो चौथी शताब्दी के अंत में भारत आया था, उल्लेख करता है:
1. ब्राह्मण और श्रमण एक धर्मशाला में जगह के लिए लड़ रहे थे ।
2. बहुत से ब्राह्मण विधर्मी थे, जो पेड़ों को उखाड़ते थे और बुद्ध की वाणी से घृणा करते थे ।
अब बहुत से लोग कहेंगे कि संभवतः ये वे लोग थे जो बुद्ध को पसंद नहीं करते लेकिन एक समय में ये बौद्ध थे ।
फिर सुनिए, फाह्यान ने यह भी उल्लेख किया है कि कई ब्राह्मणों को बौद्ध धर्म में परिवर्तित कर दिया गया था क्योंकि उन्होंने देवों को प्रबुद्ध आत्माओं के रूप में देखा था जो बहुत सारे प्रसाद के साथ बुद्ध के विहार की पूजा कर रहे थे ।
तो मुझे बताओ, यदि ब्राह्मण पहले से ही बौद्ध थे, तो वे विधर्मी होने के बाद बौद्ध धर्म में कैसे परिवर्तित हो गए ?
इससे सिद्ध हुआ कि ब्राह्मण बुद्ध के दर्शन के विरोधी थे और वैदिक धर्म का पालन करते थे ।
ये ब्राह्मण वही थे जिनका नाम श्रमणों के साथ लिया जाता है ।
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होलीकोत्सव की हार्दिक शुभकामनाएं...
जय रुक्मिणी श्रीकृष्ण 🙏
कृष्णं वंदे जगतगुरुं 🕉️🚩
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जय रुक्मिणी श्रीकृष्ण 🙏
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Art Credit : Vedic PFP Arts
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Evidences of Vedas before 12th century : Part 7
Mandsaur Fragmentary Inscription of Kumaravarmana
Hence proved that Vedas were also present before 12th century.
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Mandsaur Fragmentary Inscription of Kumaravarmana
Date : 7th century CE { 1400 years old }
Script : Siddhamatrika
Language : Sanskrit
God mentioned : Lord Purushottama { Vishnu } and Upendra { Vamana Avatar of Vishnu }
Description : It mentions :
1. constructions of Some places.
2. Supremacy of Lord Narayana as he is the param purusha described in Vedas and Upavedas as well as the most excellent amongst the Devas.
3. Mentions attacking the Land of Dasyus [ enemies ] , city called Dasapura.
4. Comparing the king with Indra as the king of 30 gods { 11 Adityas , 11 Rudras , 8 Vasus }
5. Accomplishing the tasks as per Vedas and a praiser and doer of Yagya and Dana [ donations ].
Hence proved that Vedas were also present before 12th century.
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