भरी दुपहरी में अंधियारा
सूरज परछाई से हारा.
अंतरतम का नेह निचोड़ें
बुझी हुई बाती सुलगाएं।
आओ फिर से दिया जलाएं..
हम पड़ाव को समझे मंज़िल
लक्ष्य हुआ आँखों से ओझल.
वर्त्तमान के मोह-जाल में
आने वाला कल न भुलाएं।
आओ फिर से दिया जलाएँ..
आहुति बाकी यज्ञ अधूरा
अपनों के विघ्नों ने घेरा.
अंतिम जय का वज्र बनाने
नव दधीचि हड्डियां गलाएं।
आओ फिर से दिया जलाएँ..
~श्री अटल बिहारी वाजपेयी..
आप सभी को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं बधाइयां 🎉🎉
सूरज परछाई से हारा.
अंतरतम का नेह निचोड़ें
बुझी हुई बाती सुलगाएं।
आओ फिर से दिया जलाएं..
हम पड़ाव को समझे मंज़िल
लक्ष्य हुआ आँखों से ओझल.
वर्त्तमान के मोह-जाल में
आने वाला कल न भुलाएं।
आओ फिर से दिया जलाएँ..
आहुति बाकी यज्ञ अधूरा
अपनों के विघ्नों ने घेरा.
अंतिम जय का वज्र बनाने
नव दधीचि हड्डियां गलाएं।
आओ फिर से दिया जलाएँ..
~श्री अटल बिहारी वाजपेयी..
आप सभी को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं बधाइयां 🎉🎉
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