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Ye Sabke liye hai..
Koi stock sell karne ke baad hame aksar afsos hota hai kaas ruk gye hote ..
Ham sabka yahi haal hai..
Allah hame Har haal me Shukar/Sabar Karne wala banaye...
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Ham sabka yahi haal hai..
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Jazakallahu khair
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Assalamualaykum Jinhe Bhi Ipo laga hai..
Wo apne profit se sadqa jaroor kare ..
Taaki aage bhi apko aise dehro Ipo allot ho.. ☺️☺️
Wo apne profit se sadqa jaroor kare ..
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👍24❤2💯2
शरिया कंप्लायंट शेयर किसे कहते है?
हम अक्सर सुनते है के मुसलमानो को सिर्फ शरिया कंप्लायंट शेयर्स में इन्वेस्ट करना हलाल है। लेकिन क्या है ये शरिया कंप्लायंट शेयर्स?
किसी भी कंपनीको शरिया कंप्लायंट होने के लिए कुछ स्क्रीनिंग प्रोसेस से गुजरना होता है। जब वो कंपनी उस प्रोसेस में पास होती है, तब वो शरिया कंप्लायंट कहलाती है।
कैसी होती है स्क्रीनिंग प्रोसेस?
शरिया कंप्लायंट स्क्रीनिंग में 2 तरह की स्क्रीनिंग होती है।
1. बिजनेस स्क्रीनिंग,
2. फाइनेंशियल स्क्रीनिंग
तो पहले हम जानते है बिजनेस स्क्रीनिंग के बारे में।
बिजनेस स्क्रीनिंग में कंपनी के कारोबार को देखा जाता है। इसमें ये देखा जाता है के कंपनी किसी हराम काम में तो इंवॉल्व नही।
जैसे,
1. सूद,
2. शराब,
3. जुआ,
4. तंबाकू,
5. सुअर का मांस,
6. पोर्नोग्राफी,
7. म्यूजिक, एंटरटेनमेंट etc.
जो कंपनिया ऊपर बताए गए कारोबार से अपने कुल इनकम के 5% से ज्यादा कमाती है ऐसी कंपनी में इन्वेस्ट करना जायज़ नहीं।
अब हम समझते है फाइनेंशियल स्क्रीनिंग को।
फाइनेंशियल स्क्रीनिंग में 3 तरह की स्क्रीनिंग होती है।
a) डेट कंप्लायंस: कंपनी का कर्ज जो सूद पे लिया गया है, वो कंपनी के 3 साल के एवरेज मार्केट कैपिटल से 33% से ज्यादा ना हो।
मान के चलो किसी कंपनी की कैपिटल ₹100 करोड़ है और कंपनी का सूद वाला कर्ज 31 करोड़ है तो ऐसे में ये शेयर डेट कंप्लायंस पास करती है।
b) कैश कंप्लायंस: जिस कंपनी का लिक्विड कैश या कंपनी के छोटे मोटे इन्वेस्टमेंट जो बिजनेस एक्टिविटी में नही लगे है वो कंपनी के 3 साल के एवरेज कैपिटल वैल्यू से 33% से ज्यादा नहीं होना चाहिए।
c) रिसीवेबल कंप्लायंस: जिस कंपनी का अकाउंट रिसीवेबल यानी मार्केट में जो पैसा या एसेट अभी तक रिसीव नहीं हुआ है, उधार है वो कंपनी के 3 साल के एवरेज कैपिटल के 49% से ज्यादा नहीं होना चाहिए।
जो कंपनी इन सभी स्क्रीनिंग में पास होती है, उन्हें शरिया कंप्लायंट कहा जाता है।
ऐसी कंपनियों में इन्वेस्ट करना और पैसा कमाना हलाल है।
सोर्स: Islamicly
ज्यादा जानकारी के लिए ग्रुप जॉइं करे।।
https://t.me/shariahshare
Ye choti sa pragraph hai..
Isko padhe aur samjhe...
हम अक्सर सुनते है के मुसलमानो को सिर्फ शरिया कंप्लायंट शेयर्स में इन्वेस्ट करना हलाल है। लेकिन क्या है ये शरिया कंप्लायंट शेयर्स?
किसी भी कंपनीको शरिया कंप्लायंट होने के लिए कुछ स्क्रीनिंग प्रोसेस से गुजरना होता है। जब वो कंपनी उस प्रोसेस में पास होती है, तब वो शरिया कंप्लायंट कहलाती है।
कैसी होती है स्क्रीनिंग प्रोसेस?
शरिया कंप्लायंट स्क्रीनिंग में 2 तरह की स्क्रीनिंग होती है।
1. बिजनेस स्क्रीनिंग,
2. फाइनेंशियल स्क्रीनिंग
तो पहले हम जानते है बिजनेस स्क्रीनिंग के बारे में।
बिजनेस स्क्रीनिंग में कंपनी के कारोबार को देखा जाता है। इसमें ये देखा जाता है के कंपनी किसी हराम काम में तो इंवॉल्व नही।
जैसे,
1. सूद,
2. शराब,
3. जुआ,
4. तंबाकू,
5. सुअर का मांस,
6. पोर्नोग्राफी,
7. म्यूजिक, एंटरटेनमेंट etc.
जो कंपनिया ऊपर बताए गए कारोबार से अपने कुल इनकम के 5% से ज्यादा कमाती है ऐसी कंपनी में इन्वेस्ट करना जायज़ नहीं।
अब हम समझते है फाइनेंशियल स्क्रीनिंग को।
फाइनेंशियल स्क्रीनिंग में 3 तरह की स्क्रीनिंग होती है।
a) डेट कंप्लायंस: कंपनी का कर्ज जो सूद पे लिया गया है, वो कंपनी के 3 साल के एवरेज मार्केट कैपिटल से 33% से ज्यादा ना हो।
मान के चलो किसी कंपनी की कैपिटल ₹100 करोड़ है और कंपनी का सूद वाला कर्ज 31 करोड़ है तो ऐसे में ये शेयर डेट कंप्लायंस पास करती है।
b) कैश कंप्लायंस: जिस कंपनी का लिक्विड कैश या कंपनी के छोटे मोटे इन्वेस्टमेंट जो बिजनेस एक्टिविटी में नही लगे है वो कंपनी के 3 साल के एवरेज कैपिटल वैल्यू से 33% से ज्यादा नहीं होना चाहिए।
c) रिसीवेबल कंप्लायंस: जिस कंपनी का अकाउंट रिसीवेबल यानी मार्केट में जो पैसा या एसेट अभी तक रिसीव नहीं हुआ है, उधार है वो कंपनी के 3 साल के एवरेज कैपिटल के 49% से ज्यादा नहीं होना चाहिए।
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WE ARE NOT SEBI REGISTERED ANALYST.ALL POSTS, ONLY FOR EDUCATIONAL PURPOSES.NO CLAIMS RIGHTS RESERVED. NO RESPONSIBILITY FOR YOUR PROFIT & LOSS.PLEASE CONSULT YOUR FINANCIAL ADVISOR BEFORE INVEST.
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