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#TRACNX/ DC
FOR EDUCATIONAL PURPOSES ONLY
BOX SE GARDAN BAHAR AAYEE HAI
ALHAMDULILLAH
#TRACNX/ DC
FOR EDUCATIONAL PURPOSES ONLY
BOX SE GARDAN BAHAR AAYEE HAI
ALHAMDULILLAH
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What is going on in Bihar?
Saurav, a 16 year old commerce student, had borrowed Rs 50k each from his friends and was investing money through trading apps for the last five months but he suffered a loss.
When friends pressured him to ask for money back, he committed suicide.
Why invest money by taking loan, this is the biggest mistake
Don't do it at all 🙏
Saurav, a 16 year old commerce student, had borrowed Rs 50k each from his friends and was investing money through trading apps for the last five months but he suffered a loss.
When friends pressured him to ask for money back, he committed suicide.
Why invest money by taking loan, this is the biggest mistake
Don't do it at all 🙏
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Forwarded from Wahiduzzaman Siddiquey
औरतों का सही परिचय....!!
हां.... "मैं राष्ट्र निर्माता - Nation Builder हूं...!!"
✍️: मुफ्ती वहीदुज़्ज़मां सिद्दीकी
ज़्यादातर महिलाएं जब अपना परिचय देती हैं तो कहती हैं कि मैं "हाउस वाइफ - House Wife" हूं।
अगर पूछा जाये कि यह क्या होता है?
तो इसका जवाब देती है , वही जो पूरे दिन घर पर रहती है, कभी रसोई में, कभी कपड़ों को सही करने में, कभी मौसी / बहनों / बुआ के साथ बातचीत में और अक्सर बच्चों की देखभाल में व्यस्त रहती है, जो दिन भर इधर से उधर दौड़ती भागती रहती है.
मैं कहता कि उस परिभाषा के अनुसार यह घरेलू मक्खी (House Fly) जैसी कुछ है।
मैं अपनी मां / बहनों से पूछता हूँ के आप अपने सही परिचय क्यूँ नहीं करवाती??
क्यूँ अपने परिचय में यह नहीं कहती कि "मैं राष्ट्र निर्माता - Nation Builder" हूं...!!
हां.... मैं राष्ट्र निर्माता (Nation Builder) हूं...!!
हां, मैं इस उम्माह और राष्ट्र के भविष्य का वास्तुकार / मैमार (architect) हूं.
मैं वह महान काम कर रहा हूं जिसमें साल के 12 महीने में कोई छुट्टी नहीं है, कोई Casual Leave नहीं है, कोई Medical Leave नहीं है कोई Annual Leave नहीं है और न हमें ऐसी छुट्टी चाहिए....!!
मैं वही हूं जो उमर बिन अब्दुल अज़ीज़ रह, मुहम्मद बिन क़ासिम रह, सलाहुद्दीन अय्यूबी रह, तारिक बिन ज़ियाद रह, सुल्तान फतेह रह, नूरुद्दीन जंगी रह, इमाम बुखारी रह, इमाम अबू हनीफा रह, टीपू सुल्तान रह, शेर शाह सूरी रह, अल्लामा मुहम्मद इक़बाल रह, मुहम्मद अली जौहर रह. जैसे गाजी और उलेमाओं की मैमार हैं।
ऐसे हजारों / लाखों के पीछे जिनकी छुपी हुई क़ुरबानी है।
जिनके क़ुरबानी और मुशक्कतों के बिना, हमें ऐसे अज़ीम हस्तियों से फायदा उठाने का मौक़ा नहीं मिल पाता...!
हम शायद उनमें से किसी की मां का नाम नहीं जानते, लेकिन आप उन महिलाओं के बारे में क्या सोचते हैं जो उनके जैसे महान लोगों की मां और पत्नियां थीं...???
उन अज़ीम माऔं और पत्नियों की कुरबानी और Contribution के बिना, क्या उन हज़रात ने वह अज़ीम काम सर अंजाम दे दिया जिनको आज तक ज़माना याद करता है
साल के 365 दिन महिला दिवस होते हैं। उनका मां, पत्नी, बेटी और बहन होना कोई छोटी बात नहीं बल्कि बहुत बड़ी बात है.
यह इतना बड़ा है कि मेरे नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) उन मां बहनों के लिए अपनी चादर फैला दिया करते थे।
अल्लाह हमें अपनी माँ बहनों के सही मक़ाम और रुतबा पहचानने की तौफीक अता फरमाए।
आमीन
अगर आपको यह आर्टिकल पसंद आया हो तो इसे अपने दोस्तों के साथ ज़रूर शेयर करें।
ऐ-काश तेरे दिल में उतर जाये मेरी बात.....!!!
https://www.facebook.com/share/p/ezwsFcQyTbiqzDYK/?mibextid=oFDknk
हां.... "मैं राष्ट्र निर्माता - Nation Builder हूं...!!"
✍️: मुफ्ती वहीदुज़्ज़मां सिद्दीकी
ज़्यादातर महिलाएं जब अपना परिचय देती हैं तो कहती हैं कि मैं "हाउस वाइफ - House Wife" हूं।
अगर पूछा जाये कि यह क्या होता है?
तो इसका जवाब देती है , वही जो पूरे दिन घर पर रहती है, कभी रसोई में, कभी कपड़ों को सही करने में, कभी मौसी / बहनों / बुआ के साथ बातचीत में और अक्सर बच्चों की देखभाल में व्यस्त रहती है, जो दिन भर इधर से उधर दौड़ती भागती रहती है.
मैं कहता कि उस परिभाषा के अनुसार यह घरेलू मक्खी (House Fly) जैसी कुछ है।
मैं अपनी मां / बहनों से पूछता हूँ के आप अपने सही परिचय क्यूँ नहीं करवाती??
क्यूँ अपने परिचय में यह नहीं कहती कि "मैं राष्ट्र निर्माता - Nation Builder" हूं...!!
हां.... मैं राष्ट्र निर्माता (Nation Builder) हूं...!!
हां, मैं इस उम्माह और राष्ट्र के भविष्य का वास्तुकार / मैमार (architect) हूं.
मैं वह महान काम कर रहा हूं जिसमें साल के 12 महीने में कोई छुट्टी नहीं है, कोई Casual Leave नहीं है, कोई Medical Leave नहीं है कोई Annual Leave नहीं है और न हमें ऐसी छुट्टी चाहिए....!!
मैं वही हूं जो उमर बिन अब्दुल अज़ीज़ रह, मुहम्मद बिन क़ासिम रह, सलाहुद्दीन अय्यूबी रह, तारिक बिन ज़ियाद रह, सुल्तान फतेह रह, नूरुद्दीन जंगी रह, इमाम बुखारी रह, इमाम अबू हनीफा रह, टीपू सुल्तान रह, शेर शाह सूरी रह, अल्लामा मुहम्मद इक़बाल रह, मुहम्मद अली जौहर रह. जैसे गाजी और उलेमाओं की मैमार हैं।
ऐसे हजारों / लाखों के पीछे जिनकी छुपी हुई क़ुरबानी है।
जिनके क़ुरबानी और मुशक्कतों के बिना, हमें ऐसे अज़ीम हस्तियों से फायदा उठाने का मौक़ा नहीं मिल पाता...!
हम शायद उनमें से किसी की मां का नाम नहीं जानते, लेकिन आप उन महिलाओं के बारे में क्या सोचते हैं जो उनके जैसे महान लोगों की मां और पत्नियां थीं...???
उन अज़ीम माऔं और पत्नियों की कुरबानी और Contribution के बिना, क्या उन हज़रात ने वह अज़ीम काम सर अंजाम दे दिया जिनको आज तक ज़माना याद करता है
साल के 365 दिन महिला दिवस होते हैं। उनका मां, पत्नी, बेटी और बहन होना कोई छोटी बात नहीं बल्कि बहुत बड़ी बात है.
यह इतना बड़ा है कि मेरे नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) उन मां बहनों के लिए अपनी चादर फैला दिया करते थे।
अल्लाह हमें अपनी माँ बहनों के सही मक़ाम और रुतबा पहचानने की तौफीक अता फरमाए।
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