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आज (तारीख-29.08.2026)
रोजगार और शिक्षा जगत की खबरें,बिहार
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🚨 बिना अनुमति PhD, MA या MSc करने वाले शिक्षक फंस सकते हैं!
1800 शिक्षकों पर निलंबन एवं वेतन रोकने की तैयारी की खबर
बिहार के सरकारी स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों के लिए शिक्षा विभाग ने उच्च शिक्षा को लेकर सख्त रुख अपनाने के संकेत दिए हैं।
📌 समझिए पूरा मामला क्या है?
विभाग आमतौर पर शिक्षकों को Distance/Online माध्यम से उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत अनुमति दे देता है।
लेकिन मामला उन शिक्षकों का है, जिन्होंने सरकारी सेवा में रहते हुए विभागीय अनुमति लिए बिना Regular/Regular Mode में MA, MSc या PhD में नामांकन कराया और पढ़ाई की।
👉 ऐसे मामलों में विभाग यह जांच कर सकता है कि:
🔹 शिक्षक ने उच्च शिक्षा के लिए विभाग से पूर्व अनुमति ली थी या नहीं?
🔹 जिस संस्थान/विश्वविद्यालय में नामांकन लिया गया, वहां कोर्स Regular था या Distance/Online?
🔹 Regular course के दौरान शिक्षक की विद्यालय में उपस्थिति और सरकारी सेवा कैसे चलती रही?
🔹 क्या शिक्षक ने विभाग को अपने अध्ययन की जानकारी दी थी या नहीं?
⚠️ महत्वपूर्ण बात
यह समझना जरूरी है कि MA, MSc या PhD करना अपने आप में गलत नहीं है।
मुद्दा मुख्य रूप से विभागीय अनुमति और सेवा नियमों के पालन का है।
अगर किसी शिक्षक ने नियमानुसार अनुमति लेकर उच्च शिक्षा प्राप्त की है, तो उसका मामला अलग होगा।
वहीं, बिना अनुमति Regular course करने वाले शिक्षकों पर विभागीय जांच के बाद कार्रवाई की संभावना बन सकती है।
1800 शिक्षकों पर निलंबन एवं वेतन रोकने की तैयारी की खबर
बिहार के सरकारी स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों के लिए शिक्षा विभाग ने उच्च शिक्षा को लेकर सख्त रुख अपनाने के संकेत दिए हैं।
📌 समझिए पूरा मामला क्या है?
विभाग आमतौर पर शिक्षकों को Distance/Online माध्यम से उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत अनुमति दे देता है।
लेकिन मामला उन शिक्षकों का है, जिन्होंने सरकारी सेवा में रहते हुए विभागीय अनुमति लिए बिना Regular/Regular Mode में MA, MSc या PhD में नामांकन कराया और पढ़ाई की।
👉 ऐसे मामलों में विभाग यह जांच कर सकता है कि:
🔹 शिक्षक ने उच्च शिक्षा के लिए विभाग से पूर्व अनुमति ली थी या नहीं?
🔹 जिस संस्थान/विश्वविद्यालय में नामांकन लिया गया, वहां कोर्स Regular था या Distance/Online?
🔹 Regular course के दौरान शिक्षक की विद्यालय में उपस्थिति और सरकारी सेवा कैसे चलती रही?
🔹 क्या शिक्षक ने विभाग को अपने अध्ययन की जानकारी दी थी या नहीं?
⚠️ महत्वपूर्ण बात
यह समझना जरूरी है कि MA, MSc या PhD करना अपने आप में गलत नहीं है।
मुद्दा मुख्य रूप से विभागीय अनुमति और सेवा नियमों के पालन का है।
अगर किसी शिक्षक ने नियमानुसार अनुमति लेकर उच्च शिक्षा प्राप्त की है, तो उसका मामला अलग होगा।
वहीं, बिना अनुमति Regular course करने वाले शिक्षकों पर विभागीय जांच के बाद कार्रवाई की संभावना बन सकती है।