आज (तारीख-24.08.2026)
रोजगार और शिक्षा जगत की खबरें,बिहार
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🌠BPSC के प्रेस कॉन्फ्रेंस में एग्जामिनेशन कंट्रोलर राजेश कुमार सिंह ने कहा, TRE 4 का एग्जाम दिसंबर या जनवरी में हो सकता है। 2 स्टेज PT और MAINS में एग्जाम होंगे। साथ ही नेगेटिव मार्किंग भी रहेगी।
🌠BPSC शिक्षक भर्ती और परीक्षाओं से जुड़े नए दिशा-निर्देश
📌 OMR गोला भरना :- BPSC ने स्पष्ट किया है कि OMR शीट पर गोले रंगने के लिए अतिरिक्त समय दिया जा सकता है
📌 परीक्षा का स्वरूप :- शिक्षक नियुक्ति परीक्षा (TRE) अब प्रारंभिक (PT) और मुख्य (Mains) दो चरणों में आयोजित होगी
📌 रिजल्ट का अनुपात :- TRE प्रारंभिक परीक्षा का रिजल्ट 2.5 गुना जारी होगा, जबकि अन्य (AEDO) परीक्षाओं में प्री परीक्षा का 10 गुना रिजल्ट जारी किया जाएगा
📌 नेगेटिव मार्किंग :- भविष्य में BPSC की सभी बहुविकल्पीय (MCQ) परीक्षाओं में नेगेटिव मार्किंग का प्रावधान अनिवार्य रूप से लागू रहेगा
📌 OMR गोला भरना :- BPSC ने स्पष्ट किया है कि OMR शीट पर गोले रंगने के लिए अतिरिक्त समय दिया जा सकता है
📌 परीक्षा का स्वरूप :- शिक्षक नियुक्ति परीक्षा (TRE) अब प्रारंभिक (PT) और मुख्य (Mains) दो चरणों में आयोजित होगी
📌 रिजल्ट का अनुपात :- TRE प्रारंभिक परीक्षा का रिजल्ट 2.5 गुना जारी होगा, जबकि अन्य (AEDO) परीक्षाओं में प्री परीक्षा का 10 गुना रिजल्ट जारी किया जाएगा
📌 नेगेटिव मार्किंग :- भविष्य में BPSC की सभी बहुविकल्पीय (MCQ) परीक्षाओं में नेगेटिव मार्किंग का प्रावधान अनिवार्य रूप से लागू रहेगा
🌠BPSC के दो चरणों में परीक्षा और नेगेटिव मार्किंग पर आयोग का जवाब
BPSC की परीक्षा को लेकर उठ रहे सवालों पर आयोग ने सफाई दी है। आयोग की ओर से कहा गया है कि दो चरणों में परीक्षा कराने का फैसला सिर्फ बिहार में नहीं है, बल्कि देश के कई आयोग पहले से ही दो या तीन चरणों में परीक्षाएं आयोजित करते हैं। UPSC, UPPSC, गुजरात, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों में भी अलग-अलग परीक्षाओं में मल्टी-स्टेज एग्जाम का प्रावधान है।
आयोग ने कहा कि अब BPSC की परीक्षाओं को भी कम से कम दो चरणों में कराने का नियम तय किया गया है। आयोग का दावा है कि इस फैसले पर सभी पहलुओं से विचार किया गया है और परीक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से यह व्यवस्था लागू की गई है।
नेगेटिव मार्किंग पर भी आयोग की सफाई
नेगेटिव मार्किंग को लेकर आयोग ने कहा कि BPSC की सभी वस्तुनिष्ठ परीक्षाओं में नेगेटिव मार्किंग का प्रावधान है। किसी एक परीक्षा के लिए अलग नियम नहीं बनाया गया है। आयोग के मुताबिक सभी अभ्यर्थियों के लिए नेगेटिव मार्किंग समान है और इसका उद्देश्य गलत उत्तर देकर चयन की संभावना को कम करना है।
हिंदी और अंग्रेजी माध्यम के अभ्यर्थियों के अंकों पर सवाल
हिंदी माध्यम के अभ्यर्थियों को कम और अंग्रेजी माध्यम के अभ्यर्थियों को ज्यादा अंक मिलने के आरोप पर आयोग ने सवाल उठाए हैं। आयोग का कहना है कि परीक्षा फॉर्म में अभ्यर्थियों से यह जानकारी ली ही नहीं जाती कि उन्होंने किस माध्यम से पढ़ाई की है। ऐसे में आयोग के पास हिंदी और अंग्रेजी माध्यम के अभ्यर्थियों का अलग-अलग डेटा मौजूद नहीं है।
आयोग ने कहा कि बिना डेटा के यह दावा करना कि हिंदी माध्यम के अभ्यर्थियों को कम और अंग्रेजी माध्यम के अभ्यर्थियों को ज्यादा अंक मिले, सही नहीं है। कॉपियों के मूल्यांकन के लिए अनुभवी शिक्षकों और प्रोफेसरों की सेवाएं ली जाती हैं और हिंदी या अंग्रेजी में उत्तर लिखने के आधार पर भेदभाव नहीं किया जाता।
60 प्रतिशत से ज्यादा अंक देने पर रोक के आरोप को भी बताया गलत
आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि कॉपी में 60 प्रतिशत से अधिक अंक देने पर कोई प्रतिबंध नहीं है। आयोग के मुताबिक ओवर मार्किंग और अंडर मार्किंग की स्थिति में मूल्यांकन की प्रक्रिया निर्धारित है। अगर किसी अभ्यर्थी ने वास्तव में बहुत अच्छा प्रदर्शन किया है तो उसे 60 प्रतिशत से अधिक अंक दिए जा सकते हैं।
परीक्षा की तारीख पर आयोग ने बताई वजह
वहीं, परीक्षा की तारीख को लेकर आयोग ने कहा कि फिलहाल एक सितंबर से 30 सितंबर तक आवेदन की प्रक्रिया चलेगी। जब तक यह पता नहीं चल जाता कि कितने अभ्यर्थी आवेदन करते हैं, तब तक परीक्षा की निश्चित तारीख घोषित करना मुश्किल है।
आयोग के मुताबिक बिहार में एक बार में करीब पांच लाख तक अभ्यर्थियों की वस्तुनिष्ठ परीक्षा कराई जा सकती है। अगर पांच लाख से कम आवेदन आते हैं तो अलग-अलग कक्षाओं के लिए तीन तारीखों में परीक्षा आयोजित की जा सकती है। लेकिन आवेदन की संख्या पांच लाख से ज्यादा होने पर परीक्षा दो चरणों में करानी पड़ सकती है और इसके लिए छह तारीखों की जरूरत पड़ सकती है।
आयोग ने साफ कहा कि आवेदन की संख्या सामने आने के बाद ही परीक्षा की तारीख और परीक्षा कराने की पूरी व्यवस्था तय की जाएगी।
BPSC की परीक्षा को लेकर उठ रहे सवालों पर आयोग ने सफाई दी है। आयोग की ओर से कहा गया है कि दो चरणों में परीक्षा कराने का फैसला सिर्फ बिहार में नहीं है, बल्कि देश के कई आयोग पहले से ही दो या तीन चरणों में परीक्षाएं आयोजित करते हैं। UPSC, UPPSC, गुजरात, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों में भी अलग-अलग परीक्षाओं में मल्टी-स्टेज एग्जाम का प्रावधान है।
आयोग ने कहा कि अब BPSC की परीक्षाओं को भी कम से कम दो चरणों में कराने का नियम तय किया गया है। आयोग का दावा है कि इस फैसले पर सभी पहलुओं से विचार किया गया है और परीक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से यह व्यवस्था लागू की गई है।
नेगेटिव मार्किंग पर भी आयोग की सफाई
नेगेटिव मार्किंग को लेकर आयोग ने कहा कि BPSC की सभी वस्तुनिष्ठ परीक्षाओं में नेगेटिव मार्किंग का प्रावधान है। किसी एक परीक्षा के लिए अलग नियम नहीं बनाया गया है। आयोग के मुताबिक सभी अभ्यर्थियों के लिए नेगेटिव मार्किंग समान है और इसका उद्देश्य गलत उत्तर देकर चयन की संभावना को कम करना है।
हिंदी और अंग्रेजी माध्यम के अभ्यर्थियों के अंकों पर सवाल
हिंदी माध्यम के अभ्यर्थियों को कम और अंग्रेजी माध्यम के अभ्यर्थियों को ज्यादा अंक मिलने के आरोप पर आयोग ने सवाल उठाए हैं। आयोग का कहना है कि परीक्षा फॉर्म में अभ्यर्थियों से यह जानकारी ली ही नहीं जाती कि उन्होंने किस माध्यम से पढ़ाई की है। ऐसे में आयोग के पास हिंदी और अंग्रेजी माध्यम के अभ्यर्थियों का अलग-अलग डेटा मौजूद नहीं है।
आयोग ने कहा कि बिना डेटा के यह दावा करना कि हिंदी माध्यम के अभ्यर्थियों को कम और अंग्रेजी माध्यम के अभ्यर्थियों को ज्यादा अंक मिले, सही नहीं है। कॉपियों के मूल्यांकन के लिए अनुभवी शिक्षकों और प्रोफेसरों की सेवाएं ली जाती हैं और हिंदी या अंग्रेजी में उत्तर लिखने के आधार पर भेदभाव नहीं किया जाता।
60 प्रतिशत से ज्यादा अंक देने पर रोक के आरोप को भी बताया गलत
आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि कॉपी में 60 प्रतिशत से अधिक अंक देने पर कोई प्रतिबंध नहीं है। आयोग के मुताबिक ओवर मार्किंग और अंडर मार्किंग की स्थिति में मूल्यांकन की प्रक्रिया निर्धारित है। अगर किसी अभ्यर्थी ने वास्तव में बहुत अच्छा प्रदर्शन किया है तो उसे 60 प्रतिशत से अधिक अंक दिए जा सकते हैं।
परीक्षा की तारीख पर आयोग ने बताई वजह
वहीं, परीक्षा की तारीख को लेकर आयोग ने कहा कि फिलहाल एक सितंबर से 30 सितंबर तक आवेदन की प्रक्रिया चलेगी। जब तक यह पता नहीं चल जाता कि कितने अभ्यर्थी आवेदन करते हैं, तब तक परीक्षा की निश्चित तारीख घोषित करना मुश्किल है।
आयोग के मुताबिक बिहार में एक बार में करीब पांच लाख तक अभ्यर्थियों की वस्तुनिष्ठ परीक्षा कराई जा सकती है। अगर पांच लाख से कम आवेदन आते हैं तो अलग-अलग कक्षाओं के लिए तीन तारीखों में परीक्षा आयोजित की जा सकती है। लेकिन आवेदन की संख्या पांच लाख से ज्यादा होने पर परीक्षा दो चरणों में करानी पड़ सकती है और इसके लिए छह तारीखों की जरूरत पड़ सकती है।
आयोग ने साफ कहा कि आवेदन की संख्या सामने आने के बाद ही परीक्षा की तारीख और परीक्षा कराने की पूरी व्यवस्था तय की जाएगी।
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🌠राज्य सरकार के अधीन विभिन्न परीक्षा बोर्डों, आयोगों, विश्वविद्यालयों एवं अन्य भर्ती एजेंसियों के द्वारा ली जाने वाली परीक्षाओं में व्यापक परीक्षा सुधार की अनुशंसा हेतु "परीक्षा सुधार पर एक विशेषज्ञ समिति" के गठन के संबंध में।👆