Quotes Reflection
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नासमझ थे तो दोस्त थे,
समझदार हुए तो हिन्दू-मुसलमान हो गए।
जो लोग ये कहते है कि लड़किया पढ़-लिखकर क्या करेंगी, तो उन लोगो को अपनी औरतो के ऑपरेशन के वक्त लेडी डॉक्टर ढूंढने का कोई हक नही है !
धर्म कोई ख़राब नहीं होता, इंसान ही ख़राब होता है, और ख़राब इंसान का कोई धर्म नहीं होता है.
कभी-कभी छोड़ देना भी बेहतर होता है, जैसे कि

वो सवाल जिसका जवाब ना हो..

वो हाथ जो वक्त पर साथ ना दे

वो रिश्ता जो कदर ना करे,

और वो प्यार जो सिर्फ मतलब के लिए जुड़ा हो ।
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पैदा हो होने होने से मरने तक लाख रिश्ते बनते होंगे लेकीन पिता जैसा देखभाल करने वाला और माँ जैसी प्यार करने वाली दोबारा नहीं मिलेंगे..!!
कुत्तों की दौड़ में एक मर्तबा एक चीते को शामिल किया गया, लेकिन ताज्जुब की बात यह है कि जब मुकाबला शुरु हुआ तो चीता अपनी जगह से हिला भी नहीं, और कुत्ते अपनी पूरी कोशिश से मुकाबला जीतने में लगे रहे, और चीता देखता रहा।

जब मालिक से पूछा गया कि चीते ने मुकाबले में शिरकत क्यों नहीं की तो उसने एक दिलचस्प जवाब दिया: कभी कभी ख़ुद को बेहतरीन साबित करना दरअसल अपनी ही तोहीन होती है, हर जगह ख़ुद को साबित करने की ज़रूरत नहीं होती है, कुछ लोगों के सामने खामोश रहना ही बेहतरीन जवाब होता है, कुत्तों के साथ कुत्ते दौड़ते हैं शेर चीते नहीं.

इस लिए अगर हमें खुद पर यकीन हो कि हम बेहतरीन हैं तो इसके लिए ज़रूरी नहीं है कि हम ख़ुद को बेहतरीन साबित करने के लिए कुत्तों के साथ मुकाबला कर लें, बल्कि खामोश रह लें। ऐसी कई जगहें होती हैं जहाँ खामोश रहना ही समझदारी है, क्योंकि ऐसी दौड़ में शामिल होना खुद की तौहीन है।
🦁 Lion maybe the King of the Jungle.

🐺 But the Wolf never performs in Circus
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A person who walks through the market and does not buy the things they desire… is called a father.
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Don't ask permission to fly.

The wings are yours. And the sky belongs to no one.
कुछ लोग आपसे इसलिए खफा हैं, क्योंकि आप उतना नहीं टूटे जितना वो देखना चाहते थे..
कृपया उन्हें यूँ ही निराश करते रहिए..!!
"5 हज़ार स्क्वायर फ़ीट का मकान है, लेकिन हम रहते हैं 500 स्क्वायर फ़ीट में, बाकी के 4500 स्क्वायर फ़ीट में हमारा 'अहंकार' रहता है।"

घर कितना बड़ा है, यह ज़रूरी नहीं... घर कितना खुशहाल है, यही मायने रखता है।
रात में झगड़ा होने पर सुबह तक भूल जाने वाले रिश्ते ज़्यादा टिके रहते है क्योंकि दोनों में ईगो नहीं होता !
एक मां कहती हैं बेटे को...

स्वाभिमानी जरूर बनना... मगर अहंकारी नहीं,

सम्मान सबका करना... लेकिन खुद को गिराकर नहीं,

दिल खोलकर जरूर हँसना.... पर किसी का मन दुखाकर नहीं,

जिंदगी में आगे बढ़ना, पर... किसी को ठोकर मारकर नहीं !!
सांसों का रूक जाना ही मृत्यु नहीं है वह व्यक्ति भी मरा हुआ ही है

जिसने गलत को गलत कहने की नैतिकता खो दी है
बचपन में शौक था पिताजी के जैसा बनने का, जवानी में पता चला की ईश्वर की बराबरी संभव नहीं।
सीना ठोक कर गलत को गलत कहो.. इतिहास बागी बोल सकता है, गुलाम नही..!!