मत पूछो कितना गमगीन हूं गंगा जी और जमना जी
मैं खुद अपना सूग नशीं हूं गंगा जी और जमना जी
बान नदी के पास अमरोहे में जो लड़का रहता था
अब वो कहां है मैं तो वहीं हूं गंगा जी और जमना जी
जौन ऐलिया
मैं खुद अपना सूग नशीं हूं गंगा जी और जमना जी
बान नदी के पास अमरोहे में जो लड़का रहता था
अब वो कहां है मैं तो वहीं हूं गंगा जी और जमना जी
जौन ऐलिया
👍2
मैं अपना एक मिनट भी बर्बाद नहीं करना चाहता
किसी अनजान से हाथ मिलाने में
यूँ ही रस्मन मुस्कुरा कर किसी से बात करने में
किसी को जानने की झूठी दिलचस्पी दिखाने में
"मैं ठीक हूँ, आप बताएँ", का जवाब देने में
किसी का दुखड़ा सुनने में
किसी के कंधे पर हाथ रखकर कहने में कि सब ठीक हो जाएगा।
मेरे पास अपनी समस्याएँ हैं
ढेरों ग़म हैं
सैकड़ों ज़िम्मेदारियाँ
और वक़्त बहुत कम है
वक़्त इतना कम है मुझपे
कि मैं ये सब कुछ छोड़कर
धूप सेंकते हुए एक बूढ़े के पास जाकर बैठ जाऊँगा
और कहूँगा, "आज ठण्ड कुछ कम है, कल से"।
साहिल त्यागी बेजार
किसी अनजान से हाथ मिलाने में
यूँ ही रस्मन मुस्कुरा कर किसी से बात करने में
किसी को जानने की झूठी दिलचस्पी दिखाने में
"मैं ठीक हूँ, आप बताएँ", का जवाब देने में
किसी का दुखड़ा सुनने में
किसी के कंधे पर हाथ रखकर कहने में कि सब ठीक हो जाएगा।
मेरे पास अपनी समस्याएँ हैं
ढेरों ग़म हैं
सैकड़ों ज़िम्मेदारियाँ
और वक़्त बहुत कम है
वक़्त इतना कम है मुझपे
कि मैं ये सब कुछ छोड़कर
धूप सेंकते हुए एक बूढ़े के पास जाकर बैठ जाऊँगा
और कहूँगा, "आज ठण्ड कुछ कम है, कल से"।
साहिल त्यागी बेजार
❤5👍1
प्यारी शायरी
मैंने मुद्दत से कोई ख्वाब नहीं देखा हाथ रख दे मेरी आंखों पे, के नींद आए...
उसने आंखें चूम ली हैं
ख्वाब अच्छे आ रहें हैं
ख्वाब अच्छे आ रहें हैं
👍3
न हारा है इश्क और न दुनिया थकी है
दिया जल रहा है, हवा चल रही है
--- खुमार बारा बांकवी
दिया जल रहा है, हवा चल रही है
--- खुमार बारा बांकवी
👍3❤2
तो अभी जीत के आया है खुशी बनती है
तुझ को एहसास नहीं है के तो हारा क्या है?
सज्जाद कातिब
तुझ को एहसास नहीं है के तो हारा क्या है?
सज्जाद कातिब
👍3
उसे हंसते नहीं देखा, कई दिन से
मेरा सूरज नहीं निकला, कई दिन से
सुलगती हैं, मेरे हाथों की पूरें
उसे छूकर नहीं देखा, कई दिन से
मेरा सूरज नहीं निकला, कई दिन से
सुलगती हैं, मेरे हाथों की पूरें
उसे छूकर नहीं देखा, कई दिन से
--- अख्तर शुमार
👍4
पतझड़ में बहारों की फजा ढूंढ रहा है
पागल है जो दुनिया में वफा ढूंढ रहा है
खुद अपने हाथों से वो घर अपना जलाकर
अब सर को छुपाने की जगह ढूंढ रहा है
कल रात तो ये शख्स जिया बांट रहा था
क्यों दिन के उजाले में दिया ढूंढ रहा है
शायद के अभी उस पे जवाल आया हुआ है
जुगनू जो अंधेरे में जिया ढूंढ रहा है
उसको तो कभी मुझ से मोहब्बत ही नहीं थी
क्यों आज वो फिर मेरा पता ढूंढ रहा है
सागर सिद्दीकी
पागल है जो दुनिया में वफा ढूंढ रहा है
खुद अपने हाथों से वो घर अपना जलाकर
अब सर को छुपाने की जगह ढूंढ रहा है
कल रात तो ये शख्स जिया बांट रहा था
क्यों दिन के उजाले में दिया ढूंढ रहा है
शायद के अभी उस पे जवाल आया हुआ है
जुगनू जो अंधेरे में जिया ढूंढ रहा है
उसको तो कभी मुझ से मोहब्बत ही नहीं थी
क्यों आज वो फिर मेरा पता ढूंढ रहा है
किस शहरे मुनाफिक में ये तुम आ गए सागर
एक दूजे की हर शख्स खता ढूंढ रहा है
सागर सिद्दीकी
👍1🔥1
वो इस खुशफहमी में हैं के हमें मयस्सर नहीं कोई
हम इस कश्मकश में हैं के दिल किस किस को दें!!
हम इस कश्मकश में हैं के दिल किस किस को दें!!
👍3
मैं नहीं जानता, सीने से लगाने के सिवा
कोई रोता हुआ लौट आए तो, क्या बोलते हैं
--जैन शकील
कोई रोता हुआ लौट आए तो, क्या बोलते हैं
--जैन शकील
❤5👍1
किसी दिन जिंदगानी में करिश्मा क्यों नहीं होता
मैं हर दिन जाग जाता हूं, जिंदा क्यों नहीं होता
मैं हर दिन जाग जाता हूं, जिंदा क्यों नहीं होता
❤5👍2
कैसे गुजर गई है जवानी न पूछिए
दिल रो रहा है क्यों?, ये कहानी न पूछिए
बरबाद कर दिया है दिल दागदार ने
मेरी कहानी मेरी जुबानी न पूछिए
क्या पूछते हो इश्क में हम कैसे लुट गए
ये हो चुकी है बात पुरानी न पूछिए
अल्ताफ जिसने दुनिया से बेगाना कर दिया
आई थी एक रात सुहानी न पूछिए
दिल रो रहा है क्यों?, ये कहानी न पूछिए
बरबाद कर दिया है दिल दागदार ने
मेरी कहानी मेरी जुबानी न पूछिए
क्या पूछते हो इश्क में हम कैसे लुट गए
ये हो चुकी है बात पुरानी न पूछिए
अल्ताफ जिसने दुनिया से बेगाना कर दिया
आई थी एक रात सुहानी न पूछिए
❤2
सूरतों पर, निगाह करते हो
कोई तड़पा गई तो, क्या होगा?
--- अब्दुल हमीद अदम
कोई तड़पा गई तो, क्या होगा?
--- अब्दुल हमीद अदम
❤3👍1
हंस के बोला करो, बुलाया करो
आपका घर है, आया जाया करो
मुस्कराहट है, हुस्न का जेवर
मुस्कराना, न भूल जाया करो
हद से बढ़ कर, हसीन लगते हो
झूठी कसमें, जरूर खाया करो
ता के दुनिया की, दिलकशी न घटे
नत नए, पैराहन(लिबास) में आया करो
कितने सादा मिजाज हो तुम अदम
उस गली में, बहुत न जाया करो
आपका घर है, आया जाया करो
मुस्कराहट है, हुस्न का जेवर
मुस्कराना, न भूल जाया करो
हद से बढ़ कर, हसीन लगते हो
झूठी कसमें, जरूर खाया करो
ता के दुनिया की, दिलकशी न घटे
नत नए, पैराहन(लिबास) में आया करो
कितने सादा मिजाज हो तुम अदम
उस गली में, बहुत न जाया करो
अब्दुल हमीद अदम
❤1🔥1
जब तेरे नैन, मुस्कराते हैं
जीस्त[जिंदगी] के रंज, भूल जाते हैं
एक हसीं, आंख के इशारे पर
काफ़िले, राह भूल जाते हैं
जीस्त[जिंदगी] के रंज, भूल जाते हैं
एक हसीं, आंख के इशारे पर
काफ़िले, राह भूल जाते हैं
अब्दुल हमीद अदम
🔥3
जुल्फ बरहम, संभाल कर चलिए
रास्ता, देख भाल कर चलिए
मौसम गुल है, अपनी बाहों को
मेरी बाहों में, डाल कर चलिए
कुछ न देंगे, तो क्या जियां(बरबाद) होगा
हर्ज क्या है? सवाल कर चलिए
या दोपट्टा, न लीजिए सर पर
या दोपट्टा, संभाल कर चलिए
यार दोजख में हैं मकीम, अदम
खुल्द (जन्नत) से, इंतकाल (मरना) कर चलिए
रास्ता, देख भाल कर चलिए
मौसम गुल है, अपनी बाहों को
मेरी बाहों में, डाल कर चलिए
कुछ न देंगे, तो क्या जियां(बरबाद) होगा
हर्ज क्या है? सवाल कर चलिए
या दोपट्टा, न लीजिए सर पर
या दोपट्टा, संभाल कर चलिए
यार दोजख में हैं मकीम, अदम
खुल्द (जन्नत) से, इंतकाल (मरना) कर चलिए
अब्दुल हमीद अदम