रातों को पढ़ते-पढ़ते आँखें लाल हो गई,
माँ की उम्मीदें भी अब बेमिसाल हो गई।
कब लगेगी लाल की नौकरी, यही हर दिन सवाल है,
जिस दिन लगेगी लाला, चेहरे पर फिर लाली ही लाली है। 🔥💯
माँ की उम्मीदें भी अब बेमिसाल हो गई।
कब लगेगी लाल की नौकरी, यही हर दिन सवाल है,
जिस दिन लगेगी लाला, चेहरे पर फिर लाली ही लाली है। 🔥💯
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दिया बुझने से पहले बहुत फड़फड़ाता है,
ऐसे ही एक दिया आज भी फड़फड़ा रहा है।
पर इन हवाओं के आगे वो ज़्यादा दिन टिक नहीं पाएगा,
क्योंकि झूठ का उजाला सच के सामने कब तक जगमगाएगा। 🔥
ऐसे ही एक दिया आज भी फड़फड़ा रहा है।
पर इन हवाओं के आगे वो ज़्यादा दिन टिक नहीं पाएगा,
क्योंकि झूठ का उजाला सच के सामने कब तक जगमगाएगा। 🔥
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