Forwarded from PROFESSORS ADDA
Q. एक शोधार्थी किसी जिले में विद्यालय को बीच में छोड़ देने वाले छात्रों की दर पर अभिभावकों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति के प्रभाव का अध्ययन करने की योजना बनाता है। यह किस प्रकार का शोध होगा?
PROFESSORS ADDA
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Anonymous Quiz
15%
(a) परिकल्पना निरूपण शोध
43%
(b) प्रायोगिक परिकल्पना परीक्षण शोध
27%
(c) गैर-प्रायोगिक परिकल्पना परीक्षण शोध
15%
(d) नृजातीय शोध
👍2
👍9❤1
❤5👍2
Forwarded from Professor Adda NET SET CUET
🔶संगोष्ठी/विचारगोष्ठी (Seminar)
संगोष्ठी एक ऐसी प्रक्रिया है, जो शोधकर्त्ताओं के चिंतन स्तर को सुषुप्त अवस्था से जाग्रत अवस्था की ओर लाती है। इसके द्वारा मनुष्य की उच्च क्रिया शक्तियों का पोषण किया जाता है तथा उसे चिंतन की नई दिशा की ओर उन्मुख किया जाता है। इसे चिंतन की अंतःप्रक्रिया भी कहते हैं।
◾️इसमें सामूहिक परिचर्चा करके विषय के जटिल पक्षों की सरल व्याख्या की जाती है। संगोष्ठी में प्रतिभाग करने वाले सभी सदस्यों को अपने विचारों को रखने की पूर्ण स्वतंत्रता होती है।
◾️संगोष्ठी की प्रक्रिया (Process of Seminar)
• संगोष्ठी हेतु किसी प्रकरण या विषय का चयन किया जाता है।
• संगोष्ठी का प्रकरण पूर्व नियोजित होता है।
• प्रकरण प्रपत्र तैयार करने वाला व्यक्ति वक्ता कहलाता है।
• प्रकरण की प्रमुख विषयवस्तु सभी को पहले ही बता दी जाती है, जिससे संप्रेषण और विषयवस्तु के स्वरूप को समझने में सहायता मिलती है।
• विभिन्न संस्थाओं से व्यक्तियों को आमंत्रित किया जाता है।
• संगोष्ठी के कार्य संचालन के लिये सहभागियों में से ही अध्यक्ष का चयन किया जाता है।
• संचालन प्रक्रिया अध्यक्ष निर्धारित करता है। • परिचर्चा में अध्यक्ष की अनुमति से सभी वक्ता अपने-अपने विचार रखते हैं।
• प्रकरण प्रस्तुत करने के पश्चात् अध्यक्ष प्रश्न पूछने का अवसर प्रदान करता है।
• उसके बाद अध्यक्ष अपने विचार प्रस्तुत करता है।
• संगोष्ठी की कार्यप्रणाली तथा परिचर्चा के प्रमुख अवयवों/तत्त्वों का
आलेख तैयार किया जाता है।
• प्रकरण तथा वाद-विवादों के निष्कर्षों को प्रकाशित किया जाता है।
♦संगोष्ठी के प्रकार (Types of Seminar)
संगोष्ठी चार प्रकार की होती है
• लघु संगोष्ठी (Mini Seminar): कक्षा में किसी विषय पर चर्चा करने के लिये आयोजित संगोष्ठी को 'मिनी सेमिनार' अथवा लघु संगोष्ठी कहा जाता है।
• मुख्य या बड़ी संगोष्ठी (Main Seminar): जो सेमिनार किसी संस्था या विभाग के स्तर पर आयोजित किया जाता है, उसे 'मुख्य संगोष्ठी या मेन सेमिनार' कहते हैं।
• राष्ट्रीय संगोष्ठी (National Seminar): राष्ट्रीय स्तर पर किसी संगठन द्वारा आयोजित संगोष्ठी को 'राष्ट्रीय संगोष्ठी' कहते हैं।
• अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी (International Seminar): ऐसी संगोष्ठियाँ जिनका आयोजन यूनेस्को एवं अन्य अंतर्राष्ट्रीय संगठनों द्वारा किया जाता है, उन्हें अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी कहते हैं।
🔶🔶🔶कार्यशाला (Workshop)🔶🔶🔶
◾️कार्यशाला एक छोटे समूह हेतु संक्षिप्त गहन पाठ्यक्रम है जिसमें किसी विशेष समस्या के समाधान के लिये कौशल या तकनीकी विकास पर जोर दिया जाता है। कार्यशाला अनुसंधान के वास्तविक एवं क्रियात्मक पक्ष के विकास पर बल देती है।
♦ इससे यह बताया जाता है कि अनुसंधान के विभिन्न क्षेत्रों में, कौन-कौन सी विधियों, उपायों एवं निष्कर्षों को कब, कहाँ, कैसे और क्यों प्रयोग किया जाए तथा प्रायोगिक परिस्थितियों में किन-किन सावधानियों का ध्यान रखकर आगे बढ़ा जाए।
♦कार्यशाला को क्रियात्मक कौशलों के विकास के लिये प्रशिक्षण प्रक्रिया का एक सतत् क्षेत्र माना जाता है। इस प्रकार शोधकर्त्ताओं से
क्रियात्मक कार्य संपन्न कराया जाता है, साथ ही उन्हें व्यावसायिक प्रशिक्षण भी प्रदान किया जाता है।
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◾️'कार्यशाला' शब्द का प्रायः प्रयोग अभियांत्रिकी (Engineering) क्षेत्र में होता है। अनुसंधान के क्षेत्र में भी इसे अभियांत्रिकी से ही लिया गया है।
◾️कार्यशाला में भाग लेने वाले व्यक्ति
(Persons Participating in Workshop)
• संचालक (Convenor)
• आयोजक (Organizer)
• विषय विशेषज्ञ (Subject Expert)
• सहभागी (Participants)
◾️कार्यशाला के उद्देश्य (Objectives of Workshops )
• विषय से संबंधित जटिल समस्याओं का समाधान करना।
• किसी विषय के विविध पक्षों का विवेचन करना • समस्या के समाधान एवं उद्देश्यों की पूर्ति के लिये अनुसंधान विधियों का निर्धारण करना।
• तात्कालिक समस्याओं के प्रति सक्रियता वर्तमान समस्याग्रस्त क्षेत्रों
के प्रति जागरूकता।
• अनुसंधान अभिकल्प या शोध डिज़ाइन को तैयार करना ।
• अनुसंधान करने की योग्यताओं का विकास करना ।
• संबंधित साहित्य संग्रह का संरक्षण करना।
• कार्यशाला के माध्यम से व्यावसायिक क्षमता का विकास करना।
• कार्यशाला में व्यक्तिगत रूप से भाग लेने एवं कार्य करने की क्षमता
विकसित करना।
• प्रविधियों, उपकरणों एवं यंत्रों के चयन की आवश्यक शर्तों की जानकारी प्राप्त करना।
संगोष्ठी एक ऐसी प्रक्रिया है, जो शोधकर्त्ताओं के चिंतन स्तर को सुषुप्त अवस्था से जाग्रत अवस्था की ओर लाती है। इसके द्वारा मनुष्य की उच्च क्रिया शक्तियों का पोषण किया जाता है तथा उसे चिंतन की नई दिशा की ओर उन्मुख किया जाता है। इसे चिंतन की अंतःप्रक्रिया भी कहते हैं।
◾️इसमें सामूहिक परिचर्चा करके विषय के जटिल पक्षों की सरल व्याख्या की जाती है। संगोष्ठी में प्रतिभाग करने वाले सभी सदस्यों को अपने विचारों को रखने की पूर्ण स्वतंत्रता होती है।
◾️संगोष्ठी की प्रक्रिया (Process of Seminar)
• संगोष्ठी हेतु किसी प्रकरण या विषय का चयन किया जाता है।
• संगोष्ठी का प्रकरण पूर्व नियोजित होता है।
• प्रकरण प्रपत्र तैयार करने वाला व्यक्ति वक्ता कहलाता है।
• प्रकरण की प्रमुख विषयवस्तु सभी को पहले ही बता दी जाती है, जिससे संप्रेषण और विषयवस्तु के स्वरूप को समझने में सहायता मिलती है।
• विभिन्न संस्थाओं से व्यक्तियों को आमंत्रित किया जाता है।
• संगोष्ठी के कार्य संचालन के लिये सहभागियों में से ही अध्यक्ष का चयन किया जाता है।
• संचालन प्रक्रिया अध्यक्ष निर्धारित करता है। • परिचर्चा में अध्यक्ष की अनुमति से सभी वक्ता अपने-अपने विचार रखते हैं।
• प्रकरण प्रस्तुत करने के पश्चात् अध्यक्ष प्रश्न पूछने का अवसर प्रदान करता है।
• उसके बाद अध्यक्ष अपने विचार प्रस्तुत करता है।
• संगोष्ठी की कार्यप्रणाली तथा परिचर्चा के प्रमुख अवयवों/तत्त्वों का
आलेख तैयार किया जाता है।
• प्रकरण तथा वाद-विवादों के निष्कर्षों को प्रकाशित किया जाता है।
♦संगोष्ठी के प्रकार (Types of Seminar)
संगोष्ठी चार प्रकार की होती है
• लघु संगोष्ठी (Mini Seminar): कक्षा में किसी विषय पर चर्चा करने के लिये आयोजित संगोष्ठी को 'मिनी सेमिनार' अथवा लघु संगोष्ठी कहा जाता है।
• मुख्य या बड़ी संगोष्ठी (Main Seminar): जो सेमिनार किसी संस्था या विभाग के स्तर पर आयोजित किया जाता है, उसे 'मुख्य संगोष्ठी या मेन सेमिनार' कहते हैं।
• राष्ट्रीय संगोष्ठी (National Seminar): राष्ट्रीय स्तर पर किसी संगठन द्वारा आयोजित संगोष्ठी को 'राष्ट्रीय संगोष्ठी' कहते हैं।
• अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी (International Seminar): ऐसी संगोष्ठियाँ जिनका आयोजन यूनेस्को एवं अन्य अंतर्राष्ट्रीय संगठनों द्वारा किया जाता है, उन्हें अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी कहते हैं।
🔶🔶🔶कार्यशाला (Workshop)🔶🔶🔶
◾️कार्यशाला एक छोटे समूह हेतु संक्षिप्त गहन पाठ्यक्रम है जिसमें किसी विशेष समस्या के समाधान के लिये कौशल या तकनीकी विकास पर जोर दिया जाता है। कार्यशाला अनुसंधान के वास्तविक एवं क्रियात्मक पक्ष के विकास पर बल देती है।
♦ इससे यह बताया जाता है कि अनुसंधान के विभिन्न क्षेत्रों में, कौन-कौन सी विधियों, उपायों एवं निष्कर्षों को कब, कहाँ, कैसे और क्यों प्रयोग किया जाए तथा प्रायोगिक परिस्थितियों में किन-किन सावधानियों का ध्यान रखकर आगे बढ़ा जाए।
♦कार्यशाला को क्रियात्मक कौशलों के विकास के लिये प्रशिक्षण प्रक्रिया का एक सतत् क्षेत्र माना जाता है। इस प्रकार शोधकर्त्ताओं से
क्रियात्मक कार्य संपन्न कराया जाता है, साथ ही उन्हें व्यावसायिक प्रशिक्षण भी प्रदान किया जाता है।
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◾️'कार्यशाला' शब्द का प्रायः प्रयोग अभियांत्रिकी (Engineering) क्षेत्र में होता है। अनुसंधान के क्षेत्र में भी इसे अभियांत्रिकी से ही लिया गया है।
◾️कार्यशाला में भाग लेने वाले व्यक्ति
(Persons Participating in Workshop)
• संचालक (Convenor)
• आयोजक (Organizer)
• विषय विशेषज्ञ (Subject Expert)
• सहभागी (Participants)
◾️कार्यशाला के उद्देश्य (Objectives of Workshops )
• विषय से संबंधित जटिल समस्याओं का समाधान करना।
• किसी विषय के विविध पक्षों का विवेचन करना • समस्या के समाधान एवं उद्देश्यों की पूर्ति के लिये अनुसंधान विधियों का निर्धारण करना।
• तात्कालिक समस्याओं के प्रति सक्रियता वर्तमान समस्याग्रस्त क्षेत्रों
के प्रति जागरूकता।
• अनुसंधान अभिकल्प या शोध डिज़ाइन को तैयार करना ।
• अनुसंधान करने की योग्यताओं का विकास करना ।
• संबंधित साहित्य संग्रह का संरक्षण करना।
• कार्यशाला के माध्यम से व्यावसायिक क्षमता का विकास करना।
• कार्यशाला में व्यक्तिगत रूप से भाग लेने एवं कार्य करने की क्षमता
विकसित करना।
• प्रविधियों, उपकरणों एवं यंत्रों के चयन की आवश्यक शर्तों की जानकारी प्राप्त करना।
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