Forwarded from Professor Adda NET SET CUET
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#ASER 2022 #ugcnet2023
Recently, the 17th Annual Status of Education Report (ASER) 2022 was released by NGO Pratham, which highlights the impact of the pandemic on education.
The report unveils high enrolment of children in schools which is a good performance indicator for government programmes like Nipun bharat mission
💎What is ASER?
The ASER, is an annual, citizen-led household survey that aims to understand whether children in rural India are enrolled in school and whether they are learning.
ASER has been conducted every year since 2005 in all rural districts of India. It is the largest citizen-led survey in India.
ASER surveys provided representative estimates of the enrolment status of children aged 3-16 and the basic reading and arithmetic levels of children aged 5-16 at the national, state and district level.
Enrollment in Government Schools:
According to the ASER, 2022 the country has seen an increase in the enrollment of children in government schools.
Basic Reading and Arithmetic Skills:
There has been a decline in the basic reading and arithmetic skills of young children in Class 3 and Class 5 in India.
Proportion of Girls not Enrolled:
The decrease in the proportion of girls not enrolled in schools for the age group 11-14 from 4.1% in 2018 to 2% in 2022 is a significant improvement and a positive development.
This indicates that efforts to promote gender equality in education have been effective and have helped to increase the enrollment of girls in schools.
#ugcnet2023
As per syllabus conceptual Videos & Personal guidance available by EXPERTS.
Let's CRACK JRF 👍👍💐💐
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(Feb/March 2023#ugcnet exam)
t.me/PROFESSOR_ADDA
Recently, the 17th Annual Status of Education Report (ASER) 2022 was released by NGO Pratham, which highlights the impact of the pandemic on education.
The report unveils high enrolment of children in schools which is a good performance indicator for government programmes like Nipun bharat mission
💎What is ASER?
The ASER, is an annual, citizen-led household survey that aims to understand whether children in rural India are enrolled in school and whether they are learning.
ASER has been conducted every year since 2005 in all rural districts of India. It is the largest citizen-led survey in India.
ASER surveys provided representative estimates of the enrolment status of children aged 3-16 and the basic reading and arithmetic levels of children aged 5-16 at the national, state and district level.
Enrollment in Government Schools:
According to the ASER, 2022 the country has seen an increase in the enrollment of children in government schools.
Basic Reading and Arithmetic Skills:
There has been a decline in the basic reading and arithmetic skills of young children in Class 3 and Class 5 in India.
Proportion of Girls not Enrolled:
The decrease in the proportion of girls not enrolled in schools for the age group 11-14 from 4.1% in 2018 to 2% in 2022 is a significant improvement and a positive development.
This indicates that efforts to promote gender equality in education have been effective and have helped to increase the enrollment of girls in schools.
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🔶 Key Concept #ugcnet2023
◾️Atal Innovation Mission (AIM),NITI Aayog is Government of India’s flagship initiative to promote a culture of innovation and entrepreneurship in the country and was setup in 2016.
◾️ Professors Adda ( UGC NET JRF)
◾️AIM has launched the Atal Tinkering Lab (ATL) program. ATL is a state-of-the-art space established in a school with a goal to foster curiosity and innovation in young minds, between grade 6th to 12th across the country through 21st century tools and technologies such as Internet of Things, 3D printing, rapid prototyping tools, robotics, miniaturized electronics,do-it-yourself kits and many more.
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#ugc #highereducation
केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने उच्च शिक्षा पर अखिल भारतीय सर्वेक्षण (All India Survey on Higher Education- AISHE) 2020-2021 के आँकड़े जारी किये हैं जिसमें वर्ष 2019-20 की तुलना में देश भर में छात्र नामांकन में 7.5% की वृद्धि देखी गई।
इस सर्वेक्षण में यह भी पता चला है कि वर्ष 2020-21 में, यानी जिस वर्ष कोविड-19 महामारी शुरू हुई थी, दूरस्थ शिक्षा कार्यक्रमों में नामांकन में 7% की वृद्धि देखी गई थी।
AISHE:
देश में उच्च शिक्षा की स्थिति को प्रस्तुत करने के लिये शिक्षा मंत्रालय ने वर्ष 2010-11 से एक वार्षिक वेब-आधारित AISHE आयोजित करने का लक्ष्य रखा है।
इसके तहत शिक्षक, छात्र नामांकन, विभिन्न कार्यक्रम, परीक्षा परिणाम, शिक्षा संबंधी वित्त, बुनियादी ढाँचे जैसे कई मापदंडों पर डेटा एकत्रित किया जा रहा है।
शैक्षिक विकास के विभिन्न संकेतक जैसे- संस्थान घनत्त्व, सकल नामांकन अनुपात, छात्र-शिक्षक अनुपात, लैंगिक समानता सूचकांक, प्रति छात्र व्यय की गणना भी AISHE के माध्यम से एकत्र किये गए आँकड़ों के आधार पर की जाएगी।
यह शिक्षा क्षेत्र के विकास के लिये सूचित नीतिगत निर्णय लेने और अनुसंधान करने में काफी उपयोगी होगा।
AISHE डेटा के प्रमुख बिंदु:
छात्र नामांकन:
सभी नामांकनों (वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार) के लिये सकल नामांकन अनुपात (GER) 2 अंक बढ़कर 27.3 हो गया।
उच्चतम नामांकन स्नातक स्तर पर देखा गया, जो कुल नामांकन का 78.9% था।
उच्च शिक्षा कार्यक्रमों में महिला नामांकन, जो कि वर्ष 2019-20 में 45% था, यह वर्ष 2020-21 में कुल नामांकन का 49% हो गया।
परंतु विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (STEM) में नामांकन (उच्च शिक्षा के सभी स्तरों पर) के समग्र आँकड़े बताते हैं कि महिलाएँ पुरुषों से पीछे हैं, जिनका इन क्षेत्रों में 56% से अधिक नामांकन हुआ है।
लैंगिक समानता सूचकांक (GPI), महिला GER और पुरुष GER अनुपात वर्ष 2017-18 के 1 से बढ़कर वर्ष 2020-21 में 1.05 हो गया है।
दिव्यांग जन श्रेणी में छात्रों की संख्या वर्ष 2019-20 के 92,831 से घटकर वर्ष 2020-21 में 79,035 हो गई।
उच्च शिक्षा के लिये नामांकन करने वाले मुस्लिम छात्रों का अनुपात वर्ष 2019-20 में 5.5% से गिरकर 2020-21 में 4.6% हो गया।
उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, मध्य प्रदेश, कर्नाटक और राजस्थान नामांकित छात्रों की संख्या के मामले में शीर्ष 6 राज्य हैं।
विश्वविद्यालय और कॉलेज: वर्ष 2020-21 के दौरान विश्वविद्यालयों की संख्या में 70 की वृद्धि हुई है और कॉलेजों की संख्या में 1,453 की वृद्धि हुई है।
वर्ष 2020-21 में 21.4% सरकारी कॉलेजों में कुल नामांकन का 34.5% हिस्सा था, जबकि शेष 65.5% निजी सहायता प्राप्त और निजी गैर-सहायता प्राप्त कॉलेजों में देखा गया था।
उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, राजस्थान, तमिलनाडु, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश और गुजरात कॉलेजों की संख्या के मामले में शीर्ष 8 राज्य हैं।
संकाय/फैकल्टी: प्रति 100 पुरुष फैकल्टी पर महिला फैकल्टी का आँकड़ा वर्ष 2014-15 में 63 और 2019-20 में 74 से वर्ष 2020-21 में 75 हो गया है।
@PROFESSOR_ADDA
Unit 10 (NET PAPER 1)
केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने उच्च शिक्षा पर अखिल भारतीय सर्वेक्षण (All India Survey on Higher Education- AISHE) 2020-2021 के आँकड़े जारी किये हैं जिसमें वर्ष 2019-20 की तुलना में देश भर में छात्र नामांकन में 7.5% की वृद्धि देखी गई।
इस सर्वेक्षण में यह भी पता चला है कि वर्ष 2020-21 में, यानी जिस वर्ष कोविड-19 महामारी शुरू हुई थी, दूरस्थ शिक्षा कार्यक्रमों में नामांकन में 7% की वृद्धि देखी गई थी।
AISHE:
देश में उच्च शिक्षा की स्थिति को प्रस्तुत करने के लिये शिक्षा मंत्रालय ने वर्ष 2010-11 से एक वार्षिक वेब-आधारित AISHE आयोजित करने का लक्ष्य रखा है।
इसके तहत शिक्षक, छात्र नामांकन, विभिन्न कार्यक्रम, परीक्षा परिणाम, शिक्षा संबंधी वित्त, बुनियादी ढाँचे जैसे कई मापदंडों पर डेटा एकत्रित किया जा रहा है।
शैक्षिक विकास के विभिन्न संकेतक जैसे- संस्थान घनत्त्व, सकल नामांकन अनुपात, छात्र-शिक्षक अनुपात, लैंगिक समानता सूचकांक, प्रति छात्र व्यय की गणना भी AISHE के माध्यम से एकत्र किये गए आँकड़ों के आधार पर की जाएगी।
यह शिक्षा क्षेत्र के विकास के लिये सूचित नीतिगत निर्णय लेने और अनुसंधान करने में काफी उपयोगी होगा।
AISHE डेटा के प्रमुख बिंदु:
छात्र नामांकन:
सभी नामांकनों (वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार) के लिये सकल नामांकन अनुपात (GER) 2 अंक बढ़कर 27.3 हो गया।
उच्चतम नामांकन स्नातक स्तर पर देखा गया, जो कुल नामांकन का 78.9% था।
उच्च शिक्षा कार्यक्रमों में महिला नामांकन, जो कि वर्ष 2019-20 में 45% था, यह वर्ष 2020-21 में कुल नामांकन का 49% हो गया।
परंतु विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (STEM) में नामांकन (उच्च शिक्षा के सभी स्तरों पर) के समग्र आँकड़े बताते हैं कि महिलाएँ पुरुषों से पीछे हैं, जिनका इन क्षेत्रों में 56% से अधिक नामांकन हुआ है।
लैंगिक समानता सूचकांक (GPI), महिला GER और पुरुष GER अनुपात वर्ष 2017-18 के 1 से बढ़कर वर्ष 2020-21 में 1.05 हो गया है।
दिव्यांग जन श्रेणी में छात्रों की संख्या वर्ष 2019-20 के 92,831 से घटकर वर्ष 2020-21 में 79,035 हो गई।
उच्च शिक्षा के लिये नामांकन करने वाले मुस्लिम छात्रों का अनुपात वर्ष 2019-20 में 5.5% से गिरकर 2020-21 में 4.6% हो गया।
उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, मध्य प्रदेश, कर्नाटक और राजस्थान नामांकित छात्रों की संख्या के मामले में शीर्ष 6 राज्य हैं।
विश्वविद्यालय और कॉलेज: वर्ष 2020-21 के दौरान विश्वविद्यालयों की संख्या में 70 की वृद्धि हुई है और कॉलेजों की संख्या में 1,453 की वृद्धि हुई है।
वर्ष 2020-21 में 21.4% सरकारी कॉलेजों में कुल नामांकन का 34.5% हिस्सा था, जबकि शेष 65.5% निजी सहायता प्राप्त और निजी गैर-सहायता प्राप्त कॉलेजों में देखा गया था।
उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, राजस्थान, तमिलनाडु, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश और गुजरात कॉलेजों की संख्या के मामले में शीर्ष 8 राज्य हैं।
संकाय/फैकल्टी: प्रति 100 पुरुष फैकल्टी पर महिला फैकल्टी का आँकड़ा वर्ष 2014-15 में 63 और 2019-20 में 74 से वर्ष 2020-21 में 75 हो गया है।
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Unit 10 (NET PAPER 1)
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💎भारतीय राजव्यवस्था
◾️अध्यादेश (Ordinance)
अध्यादेश ऐसे कानून हैं, जिन्हें केंद्रीय मंत्रिमंडल की सिफारिश पर भारत के राष्ट्रपति (भारतीय संसद) द्वारा प्रख्यापित किया जाता है, जिसका संसद के अधिनियम के समान प्रभाव होता है। उन्हें केवल तभी जारी किया जा सकता है जब संसद सत्र में नहीं हो।
वे भारत सरकार को तत्काल विधायी कार्रवाई करने में सक्षम बनाते हैं। सरल शब्दों में कहें तो जब सरकार आपात स्थिति में किसी कानून को पास कराना चाहती है, लेकिन उसे अन्य दलों का समर्थन उच्च सदन में प्राप्त नहीं हो रहा है तो सरकार अध्यादेश के रास्ते इसे पास करा सकती है। अध्यादेश की अवधि केवल 6 सप्ताह की होती है, जिसे केंद्र सरकार द्वारा पास कराने के लिए राष्ट्रपति के पास भेजा जाता है।
लेकिन अध्यादेश 6 हफ्ते के भीतर फिर से संसद के पास वापस आ जाता है। इसके बाद इसे सामान्य बिल की तरह सभी चरणों से गुजरना पड़ता है।
@PROFESSOR_ADDA
◾️अध्यादेश (Ordinance)
अध्यादेश ऐसे कानून हैं, जिन्हें केंद्रीय मंत्रिमंडल की सिफारिश पर भारत के राष्ट्रपति (भारतीय संसद) द्वारा प्रख्यापित किया जाता है, जिसका संसद के अधिनियम के समान प्रभाव होता है। उन्हें केवल तभी जारी किया जा सकता है जब संसद सत्र में नहीं हो।
वे भारत सरकार को तत्काल विधायी कार्रवाई करने में सक्षम बनाते हैं। सरल शब्दों में कहें तो जब सरकार आपात स्थिति में किसी कानून को पास कराना चाहती है, लेकिन उसे अन्य दलों का समर्थन उच्च सदन में प्राप्त नहीं हो रहा है तो सरकार अध्यादेश के रास्ते इसे पास करा सकती है। अध्यादेश की अवधि केवल 6 सप्ताह की होती है, जिसे केंद्र सरकार द्वारा पास कराने के लिए राष्ट्रपति के पास भेजा जाता है।
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Rajasthan New District List: राजस्थान में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने शुक्रवार को 19 नए जिलों की घोषणा की है। इसी के साथ राजस्थान में अब कुल जिलों की संख्या 50 हो गए हैं। जिलों की घोषणा के साथ मुख्यमंत्री ने विधानसभा में तीन नए संभाग मुख्यालय बनाने की भी घोषणा की है।
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#KeyConcepts #Geography #Ugcnet
🔶भूकंप (Earthquake), पृथ्वी की सतह का हिलना है जो पृथ्वी के स्थलमंडल (Earth's lithosphere) में अचानक ऊर्जा के निकास से उत्पन्न होता है और भूकंपीय तरंगें (seismic waves) पैदा करता है.
किसी क्षेत्र की भूकंपीयता (Seismicity) या भूकंपीय गतिविधि (seismic activity), एक विशेष समय अवधि में अनुभव किए गए भूकंपों की आवृत्ति, प्रकार और आकार है.
भूकंप ज्यादातर भूगर्भीय दोषों यानी geological faults के टूटने के कारण होते हैं, लेकिन अन्य घटनाओं जैसे ज्वालामुखी गतिविधि, भूस्खलन, खदान विस्फोट और परमाणु परीक्षण के कारण भी होते हैं. भूकंप के केंद्र (epicenter) को इसका हाइपोसेंटर या फोकस कहा जाता है. हाइपोसेंटर के ठीक ऊपर, ग्राउंड लेवल पर एक बिंदु होता है जिसे epicentre कहते हैं.
पृथ्वी का कांपना या हिलना एक सामान्य घटना (common phenomenon) है जिसकी जानकारी इंसान को प्राचीन काल से है.
स्ट्रॉन्ग-मोशन एक्सेलेरोमीटर के विकास से पहले भूकंपीय तीव्रता का अनुंमान पृथ्वी के हिलने की तीव्रता के आधार पर लगाया जाता था. केवल पिछली शताब्दी में ही इस तरह के झटकों के स्रोत को पृथ्वी की पपड़ी में टूटने के रूप में पहचाना गया है. दरअसल किसी भी इलाके में कंपन की तीव्रता न केवल स्थानीय दूरी और जमीनी परिस्थितियों पर निर्भर करती है बल्कि टूटने की ताकत या परिमाण (Volume) पर भी निर्भर करती है (Measuring Earthquake in early time).
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Guidance/PDF notes /Test Series
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भूकंप की भविष्यवाणी, भूकंप विज्ञान के तहत करने की कोशिश की जाती है. यह बताए गए सीमा के भीतर भविष्य के भूकंपों के समय, स्थान और मैग्नीट्यूड के बारे में बताने सेसंबंधित है. भूकंप आने वाले समय और स्थान की भविष्यवाणी करने के लिए कई तरीके विकसित किए गए हैं लेकिन इसकी सटीक भविष्यवाणी अभी तक संभव नहीं हो सकी है (Prediction Earthquake).
भूकंप की तीव्रता मापने का पहला पैमाना चार्ल्स एफ. रिक्टर (Charles F. Richter) ने 1935 में विकसित किया था (first scale for measuring earthquake).
रिकॉर्ड किए गए इतिहास में सबसे विनाशकारी भूकंपों में से एक 1556 का था जो 23 जनवरी 1556 को शानक्सी, चीन में हुआ था. इस घटना में 830,000 से अधिक लोग मारे गए थे.
दूसरा, 1976 का तांगशान भूकंप, जिसमें 240,000 से 655,000 लोग मारे गए थे. वह 20वीं सदी का सबसे घातक भूकंप था. 22 मई 1960 को चिली में आया भूकंप सबसे बड़ा भूकंप है. सिस्मोग्राफ पर इसकी सीव्रता 9.5 मापी गई थी. इसका केंद्र कैनेटे, चिली के पास था. सबसे शक्तिशाली भूकंप, गुड फ्राइडे भूकंप जो 27 मार्च 1964 में प्रिंस विलियम साउंड, अलास्का में आया था इसकी तीव्रता चिली के भूकंप से लगभग दोगुनी थी. हालांकि, इन सबमें से केवल 2004 का हिंद महासागर का भूकंप इतिहास के सबसे घातक भूकंपों में से एक मापा गया है (Major Earthquakes in History).
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🔶भूकंप (Earthquake), पृथ्वी की सतह का हिलना है जो पृथ्वी के स्थलमंडल (Earth's lithosphere) में अचानक ऊर्जा के निकास से उत्पन्न होता है और भूकंपीय तरंगें (seismic waves) पैदा करता है.
किसी क्षेत्र की भूकंपीयता (Seismicity) या भूकंपीय गतिविधि (seismic activity), एक विशेष समय अवधि में अनुभव किए गए भूकंपों की आवृत्ति, प्रकार और आकार है.
भूकंप ज्यादातर भूगर्भीय दोषों यानी geological faults के टूटने के कारण होते हैं, लेकिन अन्य घटनाओं जैसे ज्वालामुखी गतिविधि, भूस्खलन, खदान विस्फोट और परमाणु परीक्षण के कारण भी होते हैं. भूकंप के केंद्र (epicenter) को इसका हाइपोसेंटर या फोकस कहा जाता है. हाइपोसेंटर के ठीक ऊपर, ग्राउंड लेवल पर एक बिंदु होता है जिसे epicentre कहते हैं.
पृथ्वी का कांपना या हिलना एक सामान्य घटना (common phenomenon) है जिसकी जानकारी इंसान को प्राचीन काल से है.
स्ट्रॉन्ग-मोशन एक्सेलेरोमीटर के विकास से पहले भूकंपीय तीव्रता का अनुंमान पृथ्वी के हिलने की तीव्रता के आधार पर लगाया जाता था. केवल पिछली शताब्दी में ही इस तरह के झटकों के स्रोत को पृथ्वी की पपड़ी में टूटने के रूप में पहचाना गया है. दरअसल किसी भी इलाके में कंपन की तीव्रता न केवल स्थानीय दूरी और जमीनी परिस्थितियों पर निर्भर करती है बल्कि टूटने की ताकत या परिमाण (Volume) पर भी निर्भर करती है (Measuring Earthquake in early time).
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भूकंप की भविष्यवाणी, भूकंप विज्ञान के तहत करने की कोशिश की जाती है. यह बताए गए सीमा के भीतर भविष्य के भूकंपों के समय, स्थान और मैग्नीट्यूड के बारे में बताने सेसंबंधित है. भूकंप आने वाले समय और स्थान की भविष्यवाणी करने के लिए कई तरीके विकसित किए गए हैं लेकिन इसकी सटीक भविष्यवाणी अभी तक संभव नहीं हो सकी है (Prediction Earthquake).
भूकंप की तीव्रता मापने का पहला पैमाना चार्ल्स एफ. रिक्टर (Charles F. Richter) ने 1935 में विकसित किया था (first scale for measuring earthquake).
रिकॉर्ड किए गए इतिहास में सबसे विनाशकारी भूकंपों में से एक 1556 का था जो 23 जनवरी 1556 को शानक्सी, चीन में हुआ था. इस घटना में 830,000 से अधिक लोग मारे गए थे.
दूसरा, 1976 का तांगशान भूकंप, जिसमें 240,000 से 655,000 लोग मारे गए थे. वह 20वीं सदी का सबसे घातक भूकंप था. 22 मई 1960 को चिली में आया भूकंप सबसे बड़ा भूकंप है. सिस्मोग्राफ पर इसकी सीव्रता 9.5 मापी गई थी. इसका केंद्र कैनेटे, चिली के पास था. सबसे शक्तिशाली भूकंप, गुड फ्राइडे भूकंप जो 27 मार्च 1964 में प्रिंस विलियम साउंड, अलास्का में आया था इसकी तीव्रता चिली के भूकंप से लगभग दोगुनी थी. हालांकि, इन सबमें से केवल 2004 का हिंद महासागर का भूकंप इतिहास के सबसे घातक भूकंपों में से एक मापा गया है (Major Earthquakes in History).
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