Forwarded from Professor Adda NET SET CUET
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What is http [ http क्या है ] ?
1⃣ Hypertext technology program 2⃣Hypertext transfer program 3⃣ Hypertext topology protocol 4⃣ Hypertext transfer protocol
1⃣ Hypertext technology program 2⃣Hypertext transfer program 3⃣ Hypertext topology protocol 4⃣ Hypertext transfer protocol
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13%
A
22%
B
16%
C
49%
D
1⃣MPLAD is a Central Sector Scheme which was announced in December 1993.
2⃣Initially, it came under the control of the Ministry of Rural Later, in October 1994, it was transferred to the Ministry of Statistics and Programme Implementation.
Functioning:
3⃣Each year, MPs receive 5 crore in two instalments of Rs. 2.5 crore each. Funds under MPLADS are non-lapsable.
4⃣Lok Sabha MPs have to recommend the district authorities projects in their Lok Sabha constituencies,
while Rajya Sabha MPs have to spend it in the state that has elected them to the House.
Nominated Members of both the Rajya Sabha and Lok Sabha can recommend works anywhere in the country.
Join chat.whatsapp.com/CiiXpWAUEZK0GiEKGiDMRE
2⃣Initially, it came under the control of the Ministry of Rural Later, in October 1994, it was transferred to the Ministry of Statistics and Programme Implementation.
Functioning:
3⃣Each year, MPs receive 5 crore in two instalments of Rs. 2.5 crore each. Funds under MPLADS are non-lapsable.
4⃣Lok Sabha MPs have to recommend the district authorities projects in their Lok Sabha constituencies,
while Rajya Sabha MPs have to spend it in the state that has elected them to the House.
Nominated Members of both the Rajya Sabha and Lok Sabha can recommend works anywhere in the country.
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National Science Day 🔬 भारत में हर साल 28 फरवरी को ही राष्ट्रीय विज्ञान दिवस मनाया जात इस दिन सीवी रमन ने सबसे बड़ी वैज्ञानिक उपलब्धि हासिल की थी और वैज्ञानिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करने के लिए यह दिवस मनाया जाता है.
@PROFESSOR_ADDA
@PROFESSOR_ADDA
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🔶संगोष्ठी/विचारगोष्ठी (Seminar)
संगोष्ठी एक ऐसी प्रक्रिया है, जो शोधकर्त्ताओं के चिंतन स्तर को सुषुप्त अवस्था से जाग्रत अवस्था की ओर लाती है। इसके द्वारा मनुष्य की उच्च क्रिया शक्तियों का पोषण किया जाता है तथा उसे चिंतन की नई दिशा की ओर उन्मुख किया जाता है। इसे चिंतन की अंतःप्रक्रिया भी कहते हैं।
◾️इसमें सामूहिक परिचर्चा करके विषय के जटिल पक्षों की सरल व्याख्या की जाती है। संगोष्ठी में प्रतिभाग करने वाले सभी सदस्यों को अपने विचारों को रखने की पूर्ण स्वतंत्रता होती है।
◾️संगोष्ठी की प्रक्रिया (Process of Seminar)
• संगोष्ठी हेतु किसी प्रकरण या विषय का चयन किया जाता है।
• संगोष्ठी का प्रकरण पूर्व नियोजित होता है।
• प्रकरण प्रपत्र तैयार करने वाला व्यक्ति वक्ता कहलाता है।
• प्रकरण की प्रमुख विषयवस्तु सभी को पहले ही बता दी जाती है, जिससे संप्रेषण और विषयवस्तु के स्वरूप को समझने में सहायता मिलती है।
• विभिन्न संस्थाओं से व्यक्तियों को आमंत्रित किया जाता है।
• संगोष्ठी के कार्य संचालन के लिये सहभागियों में से ही अध्यक्ष का चयन किया जाता है।
• संचालन प्रक्रिया अध्यक्ष निर्धारित करता है। • परिचर्चा में अध्यक्ष की अनुमति से सभी वक्ता अपने-अपने विचार रखते हैं।
• प्रकरण प्रस्तुत करने के पश्चात् अध्यक्ष प्रश्न पूछने का अवसर प्रदान करता है।
• उसके बाद अध्यक्ष अपने विचार प्रस्तुत करता है।
• संगोष्ठी की कार्यप्रणाली तथा परिचर्चा के प्रमुख अवयवों/तत्त्वों का
आलेख तैयार किया जाता है।
• प्रकरण तथा वाद-विवादों के निष्कर्षों को प्रकाशित किया जाता है।
♦संगोष्ठी के प्रकार (Types of Seminar)
संगोष्ठी चार प्रकार की होती है
• लघु संगोष्ठी (Mini Seminar): कक्षा में किसी विषय पर चर्चा करने के लिये आयोजित संगोष्ठी को 'मिनी सेमिनार' अथवा लघु संगोष्ठी कहा जाता है।
• मुख्य या बड़ी संगोष्ठी (Main Seminar): जो सेमिनार किसी संस्था या विभाग के स्तर पर आयोजित किया जाता है, उसे 'मुख्य संगोष्ठी या मेन सेमिनार' कहते हैं।
• राष्ट्रीय संगोष्ठी (National Seminar): राष्ट्रीय स्तर पर किसी संगठन द्वारा आयोजित संगोष्ठी को 'राष्ट्रीय संगोष्ठी' कहते हैं।
• अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी (International Seminar): ऐसी संगोष्ठियाँ जिनका आयोजन यूनेस्को एवं अन्य अंतर्राष्ट्रीय संगठनों द्वारा किया जाता है, उन्हें अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी कहते हैं।
🔶🔶🔶कार्यशाला (Workshop)🔶🔶🔶
◾️कार्यशाला एक छोटे समूह हेतु संक्षिप्त गहन पाठ्यक्रम है जिसमें किसी विशेष समस्या के समाधान के लिये कौशल या तकनीकी विकास पर जोर दिया जाता है। कार्यशाला अनुसंधान के वास्तविक एवं क्रियात्मक पक्ष के विकास पर बल देती है।
♦ इससे यह बताया जाता है कि अनुसंधान के विभिन्न क्षेत्रों में, कौन-कौन सी विधियों, उपायों एवं निष्कर्षों को कब, कहाँ, कैसे और क्यों प्रयोग किया जाए तथा प्रायोगिक परिस्थितियों में किन-किन सावधानियों का ध्यान रखकर आगे बढ़ा जाए।
♦कार्यशाला को क्रियात्मक कौशलों के विकास के लिये प्रशिक्षण प्रक्रिया का एक सतत् क्षेत्र माना जाता है। इस प्रकार शोधकर्त्ताओं से
क्रियात्मक कार्य संपन्न कराया जाता है, साथ ही उन्हें व्यावसायिक प्रशिक्षण भी प्रदान किया जाता है।
◾️Join PROFESSORS ADDA
◾️'कार्यशाला' शब्द का प्रायः प्रयोग अभियांत्रिकी (Engineering) क्षेत्र में होता है। अनुसंधान के क्षेत्र में भी इसे अभियांत्रिकी से ही लिया गया है।
◾️कार्यशाला में भाग लेने वाले व्यक्ति
(Persons Participating in Workshop)
• संचालक (Convenor)
• आयोजक (Organizer)
• विषय विशेषज्ञ (Subject Expert)
• सहभागी (Participants)
◾️कार्यशाला के उद्देश्य (Objectives of Workshops )
• विषय से संबंधित जटिल समस्याओं का समाधान करना।
• किसी विषय के विविध पक्षों का विवेचन करना • समस्या के समाधान एवं उद्देश्यों की पूर्ति के लिये अनुसंधान विधियों का निर्धारण करना।
• तात्कालिक समस्याओं के प्रति सक्रियता वर्तमान समस्याग्रस्त क्षेत्रों
के प्रति जागरूकता।
• अनुसंधान अभिकल्प या शोध डिज़ाइन को तैयार करना ।
• अनुसंधान करने की योग्यताओं का विकास करना ।
• संबंधित साहित्य संग्रह का संरक्षण करना।
• कार्यशाला के माध्यम से व्यावसायिक क्षमता का विकास करना।
• कार्यशाला में व्यक्तिगत रूप से भाग लेने एवं कार्य करने की क्षमता
विकसित करना।
• प्रविधियों, उपकरणों एवं यंत्रों के चयन की आवश्यक शर्तों की जानकारी प्राप्त करना।
संगोष्ठी एक ऐसी प्रक्रिया है, जो शोधकर्त्ताओं के चिंतन स्तर को सुषुप्त अवस्था से जाग्रत अवस्था की ओर लाती है। इसके द्वारा मनुष्य की उच्च क्रिया शक्तियों का पोषण किया जाता है तथा उसे चिंतन की नई दिशा की ओर उन्मुख किया जाता है। इसे चिंतन की अंतःप्रक्रिया भी कहते हैं।
◾️इसमें सामूहिक परिचर्चा करके विषय के जटिल पक्षों की सरल व्याख्या की जाती है। संगोष्ठी में प्रतिभाग करने वाले सभी सदस्यों को अपने विचारों को रखने की पूर्ण स्वतंत्रता होती है।
◾️संगोष्ठी की प्रक्रिया (Process of Seminar)
• संगोष्ठी हेतु किसी प्रकरण या विषय का चयन किया जाता है।
• संगोष्ठी का प्रकरण पूर्व नियोजित होता है।
• प्रकरण प्रपत्र तैयार करने वाला व्यक्ति वक्ता कहलाता है।
• प्रकरण की प्रमुख विषयवस्तु सभी को पहले ही बता दी जाती है, जिससे संप्रेषण और विषयवस्तु के स्वरूप को समझने में सहायता मिलती है।
• विभिन्न संस्थाओं से व्यक्तियों को आमंत्रित किया जाता है।
• संगोष्ठी के कार्य संचालन के लिये सहभागियों में से ही अध्यक्ष का चयन किया जाता है।
• संचालन प्रक्रिया अध्यक्ष निर्धारित करता है। • परिचर्चा में अध्यक्ष की अनुमति से सभी वक्ता अपने-अपने विचार रखते हैं।
• प्रकरण प्रस्तुत करने के पश्चात् अध्यक्ष प्रश्न पूछने का अवसर प्रदान करता है।
• उसके बाद अध्यक्ष अपने विचार प्रस्तुत करता है।
• संगोष्ठी की कार्यप्रणाली तथा परिचर्चा के प्रमुख अवयवों/तत्त्वों का
आलेख तैयार किया जाता है।
• प्रकरण तथा वाद-विवादों के निष्कर्षों को प्रकाशित किया जाता है।
♦संगोष्ठी के प्रकार (Types of Seminar)
संगोष्ठी चार प्रकार की होती है
• लघु संगोष्ठी (Mini Seminar): कक्षा में किसी विषय पर चर्चा करने के लिये आयोजित संगोष्ठी को 'मिनी सेमिनार' अथवा लघु संगोष्ठी कहा जाता है।
• मुख्य या बड़ी संगोष्ठी (Main Seminar): जो सेमिनार किसी संस्था या विभाग के स्तर पर आयोजित किया जाता है, उसे 'मुख्य संगोष्ठी या मेन सेमिनार' कहते हैं।
• राष्ट्रीय संगोष्ठी (National Seminar): राष्ट्रीय स्तर पर किसी संगठन द्वारा आयोजित संगोष्ठी को 'राष्ट्रीय संगोष्ठी' कहते हैं।
• अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी (International Seminar): ऐसी संगोष्ठियाँ जिनका आयोजन यूनेस्को एवं अन्य अंतर्राष्ट्रीय संगठनों द्वारा किया जाता है, उन्हें अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी कहते हैं।
🔶🔶🔶कार्यशाला (Workshop)🔶🔶🔶
◾️कार्यशाला एक छोटे समूह हेतु संक्षिप्त गहन पाठ्यक्रम है जिसमें किसी विशेष समस्या के समाधान के लिये कौशल या तकनीकी विकास पर जोर दिया जाता है। कार्यशाला अनुसंधान के वास्तविक एवं क्रियात्मक पक्ष के विकास पर बल देती है।
♦ इससे यह बताया जाता है कि अनुसंधान के विभिन्न क्षेत्रों में, कौन-कौन सी विधियों, उपायों एवं निष्कर्षों को कब, कहाँ, कैसे और क्यों प्रयोग किया जाए तथा प्रायोगिक परिस्थितियों में किन-किन सावधानियों का ध्यान रखकर आगे बढ़ा जाए।
♦कार्यशाला को क्रियात्मक कौशलों के विकास के लिये प्रशिक्षण प्रक्रिया का एक सतत् क्षेत्र माना जाता है। इस प्रकार शोधकर्त्ताओं से
क्रियात्मक कार्य संपन्न कराया जाता है, साथ ही उन्हें व्यावसायिक प्रशिक्षण भी प्रदान किया जाता है।
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◾️'कार्यशाला' शब्द का प्रायः प्रयोग अभियांत्रिकी (Engineering) क्षेत्र में होता है। अनुसंधान के क्षेत्र में भी इसे अभियांत्रिकी से ही लिया गया है।
◾️कार्यशाला में भाग लेने वाले व्यक्ति
(Persons Participating in Workshop)
• संचालक (Convenor)
• आयोजक (Organizer)
• विषय विशेषज्ञ (Subject Expert)
• सहभागी (Participants)
◾️कार्यशाला के उद्देश्य (Objectives of Workshops )
• विषय से संबंधित जटिल समस्याओं का समाधान करना।
• किसी विषय के विविध पक्षों का विवेचन करना • समस्या के समाधान एवं उद्देश्यों की पूर्ति के लिये अनुसंधान विधियों का निर्धारण करना।
• तात्कालिक समस्याओं के प्रति सक्रियता वर्तमान समस्याग्रस्त क्षेत्रों
के प्रति जागरूकता।
• अनुसंधान अभिकल्प या शोध डिज़ाइन को तैयार करना ।
• अनुसंधान करने की योग्यताओं का विकास करना ।
• संबंधित साहित्य संग्रह का संरक्षण करना।
• कार्यशाला के माध्यम से व्यावसायिक क्षमता का विकास करना।
• कार्यशाला में व्यक्तिगत रूप से भाग लेने एवं कार्य करने की क्षमता
विकसित करना।
• प्रविधियों, उपकरणों एवं यंत्रों के चयन की आवश्यक शर्तों की जानकारी प्राप्त करना।
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PROFESSORS ADDA:
अनुसंधान (शोध) का अर्थ (Meaning of Research)
अनुसंधान अथवा शोध किसी सोद्देश्य निर्दिष्ट समस्या को आधार बताकर क्रमबद्ध एवं व्यवस्थित लेखन तथा परीक्षण के द्वारा बेहतर, नवीन और सामयिक ज्ञान की खोज है। अनुसंधान का स्वरूप वस्तुनिष्ठ और तथ्य केंद्रित होता है। प्रत्येक अनुसंधान किसी न किसी समस्या का तार्किक एवं वैज्ञानिक समाधान प्रस्तुत करता है, जिससे जुड़ी हुई कुछ नवीन अवधारणाओं, प्रतिस्थापनाओं और सिद्धांतों का निर्माण होता है। 'अनुसंधान' का अंग्रेजी पर्याय 'Research' शब्द 'Re' और 'Search' शब्दों से मिलकर बना है।
अनुसंधान के लिये हिंदी भाषा में प्रयुक्त अन्य शब्द-अन्वेषण, अनुशीलन, परिशीलन, मीमांसा, गवेषणा, शोध, खोज एवं रिसर्च है।
अनुसंधान (शोध) के चार अंग होते हैं
• ज्ञान क्षेत्र की किसी समस्या को सुलझाने की प्रक्रिया
• प्रासंगिक तथ्यों का संकलन
•विवेकपूर्ण अध्ययन/विश्लेषण
• परिणामस्वरूप निर्णय
अनुसंधान की प्रमुख परिभाषाएँ
(Major Definitions of Research)
पी.वी. यंग- “अनुसंधान एक ऐसी व्यवस्थित विधि है जिसके द्वारा नवीन तथ्यों को खोजने अथवा पुराने तथ्यों की विषयवस्तु, उनकी क्रमबद्धता, अंतःसंबंध, कार्य-कारण व्याख्या और उनके निहित नैसर्गिक नियमों के पुष्टिकरण का कार्य किया जाता है।”
जेम्स ड्रेवर- “किसी क्षेत्र में ज्ञान अथवा सत्यापन हेतु की जाने वाली क्रमबद्ध खोज ही अनुसंधान है। "
अनुसंधान की विशेषताएँ (Characteristics of Research)
• अनुसंधान का उद्देश्य किसी समस्या का वैज्ञानिक विधि से समाधान
ढूंढना है।
• अनुसंधान में एक सामान्य परीक्षण में विश्वसनीयता, वस्तुनिष्ठता और प्रयोग को प्राथमिकता दी जाती है।
• यह पूर्णत: तार्किक और वस्तुनिष्ठ प्रक्रिया है। परिकल्पना को सिद्ध करने के स्थान पर उसके परीक्षण पर बल दिया जाता है।
• अनुसंधान सिर्फ सूचनाओं की पुनः प्राप्ति या संग्रहण नहीं करता, बल्कि अनुसंधान में व्यापीकरण नियमों या सिद्धांतों के विकास पर बल दिया जाता है।
• अनुसंधान में आँकड़ों के संग्रहण के लिये विधियों, प्रविधियों व वैध उपकरणों का प्रयोग किया जाता है। उसके बाद इन आँकड़ों का शोधन, संलेखन, अभिकलन व विश्लेषण किया जाता है।
• अनुसंधान करने के लिये अनुसंधान प्रश्न तैयार करना आरंभिक अनिवार्यता होती है।
• अनुसंधान की गुणवत्ता अनुसंधान की प्रासंगिकता से तय होती है। • अनुसंधान किसी भी मत को ज्ञान प्राप्ति की विधि नहीं मानता है, बल्कि यह उन मत या बातों को स्वीकार करता है जिन्हें प्रेक्षण द्वारा परखा जा सके।
• अनुसंधान में वैज्ञानिक पद्धति का मुख्य उद्देश्य अनुसंधान में नए मापदंडों का प्रयोग होता है।
• अनुसंधान में व्यक्तिगत पक्षों, भावनाओं तथा विचारों को महत्त्व नहीं
दिया जाता है।
• अनुसंधान की गहराई अनुसंधान द्वारा अर्जित तथ्यों पर आधारित होती है।
•अनुसंधान कार्यों को सैद्धांतिक व व्यावहारिक तरीके से भी कर सकते हैं। सैद्धांतिक कार्य वैज्ञानिक विधि के द्वारा तथा व्यावहारिक कार्य क्रियात्मक अनुसंधान के द्वारा किया जाता है।
अनुसंधान (शोध) की प्रकृति (Nature of Research)
Professors Adda (UGC NET JRF )
• अनुसंधान एक बौद्धिक, तार्किक व वैज्ञानिक प्रक्रिया है, जो नए ज्ञान को प्रकाश में लाती है, साथ ही पुरानी त्रुटियों एवं भ्रम धारणाओं का परिमार्जन करती है।
• अनुसंधान एक वैज्ञानिक प्रक्रिया है, जो ज्ञान के प्रचार और प्रसार में सहायक होती है।
• इसमें प्राथमिक व द्वितीयक स्रोतों (Primary and Secondary Sources) से प्राप्त आँकड़ों का विश्लेषण किया जाता है, जो किसी भी तरह के पूर्वाग्रह से मुक्त होता है ।।
• आँकड़ों के विश्लेषण में सांख्यिकी विधियों का प्रयोग किया जाता है। • अनुसंधान के लिये वैज्ञानिक अभिकल्पों (Scientific Design) का प्रयोग किया जाता है।
• अनुसंधान द्वारा प्राप्त ज्ञान को सत्यापित किया जा सकता है, क्योंकि इसके अंतर्गत किया गया निरीक्षण नियंत्रित एवं वस्तुनिष्ठ होता है। • इसके द्वारा किसी नए तथ्य, विधि या वस्तु की खोज की जाती है या फिर प्राचीन तथ्य, सिद्धांत, विधि या वस्तु में परिवर्तन किया जाता है।
• आँकड़ों को प्राप्त करने के लिये विश्वसनीय एवं वैध उपकरणों का प्रयोग किया जाता है।
• अनुसंधान के जटिल घटनाक्रमों को समझने के लिये विश्लेषण विधि प्रयोग में लाई जाती है। इस विश्लेषण के लिये परिकल्पनाओं का निर्माण एवं परीक्षण किया जाता है।
• यह सुव्यवस्थित, बौद्धिक, तर्कपूर्ण तथा वस्तुनिष्ठ प्रक्रिया होती है।
अनुसंधान के प्रकार (Types of Research)
किसी भी अनुसंधान की शुरुआत एक समस्या की पहचान के साथ होती है। तत्पश्चात् समस्या को पहचान कर उसका समाधान ढूंढा जाता है.
Continue Part 2 🔶🔶
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अनुसंधान (शोध) का अर्थ (Meaning of Research)
अनुसंधान अथवा शोध किसी सोद्देश्य निर्दिष्ट समस्या को आधार बताकर क्रमबद्ध एवं व्यवस्थित लेखन तथा परीक्षण के द्वारा बेहतर, नवीन और सामयिक ज्ञान की खोज है। अनुसंधान का स्वरूप वस्तुनिष्ठ और तथ्य केंद्रित होता है। प्रत्येक अनुसंधान किसी न किसी समस्या का तार्किक एवं वैज्ञानिक समाधान प्रस्तुत करता है, जिससे जुड़ी हुई कुछ नवीन अवधारणाओं, प्रतिस्थापनाओं और सिद्धांतों का निर्माण होता है। 'अनुसंधान' का अंग्रेजी पर्याय 'Research' शब्द 'Re' और 'Search' शब्दों से मिलकर बना है।
अनुसंधान के लिये हिंदी भाषा में प्रयुक्त अन्य शब्द-अन्वेषण, अनुशीलन, परिशीलन, मीमांसा, गवेषणा, शोध, खोज एवं रिसर्च है।
अनुसंधान (शोध) के चार अंग होते हैं
• ज्ञान क्षेत्र की किसी समस्या को सुलझाने की प्रक्रिया
• प्रासंगिक तथ्यों का संकलन
•विवेकपूर्ण अध्ययन/विश्लेषण
• परिणामस्वरूप निर्णय
अनुसंधान की प्रमुख परिभाषाएँ
(Major Definitions of Research)
पी.वी. यंग- “अनुसंधान एक ऐसी व्यवस्थित विधि है जिसके द्वारा नवीन तथ्यों को खोजने अथवा पुराने तथ्यों की विषयवस्तु, उनकी क्रमबद्धता, अंतःसंबंध, कार्य-कारण व्याख्या और उनके निहित नैसर्गिक नियमों के पुष्टिकरण का कार्य किया जाता है।”
जेम्स ड्रेवर- “किसी क्षेत्र में ज्ञान अथवा सत्यापन हेतु की जाने वाली क्रमबद्ध खोज ही अनुसंधान है। "
अनुसंधान की विशेषताएँ (Characteristics of Research)
• अनुसंधान का उद्देश्य किसी समस्या का वैज्ञानिक विधि से समाधान
ढूंढना है।
• अनुसंधान में एक सामान्य परीक्षण में विश्वसनीयता, वस्तुनिष्ठता और प्रयोग को प्राथमिकता दी जाती है।
• यह पूर्णत: तार्किक और वस्तुनिष्ठ प्रक्रिया है। परिकल्पना को सिद्ध करने के स्थान पर उसके परीक्षण पर बल दिया जाता है।
• अनुसंधान सिर्फ सूचनाओं की पुनः प्राप्ति या संग्रहण नहीं करता, बल्कि अनुसंधान में व्यापीकरण नियमों या सिद्धांतों के विकास पर बल दिया जाता है।
• अनुसंधान में आँकड़ों के संग्रहण के लिये विधियों, प्रविधियों व वैध उपकरणों का प्रयोग किया जाता है। उसके बाद इन आँकड़ों का शोधन, संलेखन, अभिकलन व विश्लेषण किया जाता है।
• अनुसंधान करने के लिये अनुसंधान प्रश्न तैयार करना आरंभिक अनिवार्यता होती है।
• अनुसंधान की गुणवत्ता अनुसंधान की प्रासंगिकता से तय होती है। • अनुसंधान किसी भी मत को ज्ञान प्राप्ति की विधि नहीं मानता है, बल्कि यह उन मत या बातों को स्वीकार करता है जिन्हें प्रेक्षण द्वारा परखा जा सके।
• अनुसंधान में वैज्ञानिक पद्धति का मुख्य उद्देश्य अनुसंधान में नए मापदंडों का प्रयोग होता है।
• अनुसंधान में व्यक्तिगत पक्षों, भावनाओं तथा विचारों को महत्त्व नहीं
दिया जाता है।
• अनुसंधान की गहराई अनुसंधान द्वारा अर्जित तथ्यों पर आधारित होती है।
•अनुसंधान कार्यों को सैद्धांतिक व व्यावहारिक तरीके से भी कर सकते हैं। सैद्धांतिक कार्य वैज्ञानिक विधि के द्वारा तथा व्यावहारिक कार्य क्रियात्मक अनुसंधान के द्वारा किया जाता है।
अनुसंधान (शोध) की प्रकृति (Nature of Research)
Professors Adda (UGC NET JRF )
• अनुसंधान एक बौद्धिक, तार्किक व वैज्ञानिक प्रक्रिया है, जो नए ज्ञान को प्रकाश में लाती है, साथ ही पुरानी त्रुटियों एवं भ्रम धारणाओं का परिमार्जन करती है।
• अनुसंधान एक वैज्ञानिक प्रक्रिया है, जो ज्ञान के प्रचार और प्रसार में सहायक होती है।
• इसमें प्राथमिक व द्वितीयक स्रोतों (Primary and Secondary Sources) से प्राप्त आँकड़ों का विश्लेषण किया जाता है, जो किसी भी तरह के पूर्वाग्रह से मुक्त होता है ।।
• आँकड़ों के विश्लेषण में सांख्यिकी विधियों का प्रयोग किया जाता है। • अनुसंधान के लिये वैज्ञानिक अभिकल्पों (Scientific Design) का प्रयोग किया जाता है।
• अनुसंधान द्वारा प्राप्त ज्ञान को सत्यापित किया जा सकता है, क्योंकि इसके अंतर्गत किया गया निरीक्षण नियंत्रित एवं वस्तुनिष्ठ होता है। • इसके द्वारा किसी नए तथ्य, विधि या वस्तु की खोज की जाती है या फिर प्राचीन तथ्य, सिद्धांत, विधि या वस्तु में परिवर्तन किया जाता है।
• आँकड़ों को प्राप्त करने के लिये विश्वसनीय एवं वैध उपकरणों का प्रयोग किया जाता है।
• अनुसंधान के जटिल घटनाक्रमों को समझने के लिये विश्लेषण विधि प्रयोग में लाई जाती है। इस विश्लेषण के लिये परिकल्पनाओं का निर्माण एवं परीक्षण किया जाता है।
• यह सुव्यवस्थित, बौद्धिक, तर्कपूर्ण तथा वस्तुनिष्ठ प्रक्रिया होती है।
अनुसंधान के प्रकार (Types of Research)
किसी भी अनुसंधान की शुरुआत एक समस्या की पहचान के साथ होती है। तत्पश्चात् समस्या को पहचान कर उसका समाधान ढूंढा जाता है.
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Q. निम्नलिखित में से किस कक्षा या कक्षाओं के विद्यार्थियों के लिए सूक्ष्म शिक्षण सबसे अधिक उपयोगी होता है?
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20%
(a) केवल प्राथमिक कक्षाओं में
14%
(b) केवल जूनियर कक्षाओं में
21%
(c) केवल 10 + 2 कक्षाओं में
46%
(d) प्राथमिक और उच्च दोनों कक्षाओं के लिए
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Q. निम्नलिखित में से किस विश्वविद्यालय ने 1961 सूक्ष्म शिक्षण की अवधारणा को प्रतिपादित किया था?
Anonymous Quiz
28%
(a) स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय
36%
(b) ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय
20%
(c) दिल्ली विश्वविद्यालय
16%
(d) जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय
🙏2
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Q. जॉन डेवी ने शिक्षा के क्षेत्र में किस बात पर अधिक बल दिया है?
Anonymous Quiz
46%
(a) क्रियामूलक ज्ञान
33%
(b) सत्तावादी शिक्षण विधियों पर
15%
(c) दुहराव शिक्षण पर
6%
(d) उपरोक्त में से कोई नहीं