🔶रूस - यूक्रेन युद्ध मे और तुर्की
▪️रूस - यूक्रेन युद्ध में तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन दिलचस्प प्लेयर बनकर उभरे हैं। वह रूस और यूक्रेन दोनों से दोस्ती निभा रहे हैं। उनका देश नैटो का भी मेंबर है। यानी वह एक साथ रूस, यूक्रेन और अमेरिका-यूरोप सबके साथ हैं। यूक्रेन पर हमला करने के बाद जहां अमेरिका और ज्यादातर यूरोपीय देशों के लिए रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन खलनायक बन गए, वहीं अर्दोआन उनसे अभी भी दोस्ती निभा रहे हैं, जो बरसों पुरानी है ।
पश्चिमी देशों के रूस पर कड़े प्रतिबंध लगाने के बावजूद तुर्की और रूस के बीच व्यापार बढ़ रहा है। दोनों देशों के बीच इस साल अभी तक 50 अरब डॉलर का व्यापार हो चुका है, जो 2021 में 37 अरब डॉलर से कुछ अधिक रहा था। तुर्की की अर्थव्यवस्था पिछले कुछ सालों से जबरदस्त संकट में है। वहां महंगाई दर 83 फीसदी है। ऐसे में रूस के साथ व्यापार और वहां से निवेश बढ़ने से अर्दोआन को काफी राहत मिलेगी क्योंकि अगले साल तुर्की में चुनाव होने वाले हैं।
अर्दोआन और पूतिन की दोस्ती में फायदा सिर्फ तुर्की को ही नहीं हो रहा, यह रूस के भी हक में है। रूस की कंपनियां पश्चिमी देशों आर्थिक प्रतिबंधों से बचने के लिए तुर्की जा रही हैं। सिर्फ अगस्त में 128 नई रूसी कंपनियों ने तुर्की में रजिस्ट्रेशन कराया। और एक रूसी कंपनी ने तो न्यूक्लियर प्लांट बनाने के लिए तुर्की को 5 अरब डॉलर का कर्ज भी दिया है। दुनिया के मंच पर अपनी इमेज ठीक करने के लिए भी पुतिन को एक साथी चाहिए। अर्दोआन यह काम भी कर रहे हैं। इसीलिए तुर्की की यूक्रेन को दी गई मदद से पूतिन नाराज नहीं हैं।
अर्दोआन ने युद्ध शुरू होने के बाद यूक्रेन को हथियारबंद ड्रोन बेचे हैं। हाल में पूतिन ने यूक्रेन के जिन इलाकों को रूस में मिलाने की घोषणा की है, अर्दोआन ने उसकी भी आलोचना की है। तुर्की इसके साथ यूक्रेन को मॉडर्न कॉर्वेट्स बनाने में भी मदद कर रहा है। यही नहीं, तुर्की की मदद से ही यूक्रेन से अनाज का समुद्री रास्ते से निर्यात शुरू हो पाया। यह रास्ता रूस ने बंद कर रखा था और अर्दोआन ने कुछ समय पहले इसे शुरू करवाने के लिए पूतिन के साथ समझौता करवाया।
वैसे, रूस और तुर्की के रिश्तों में इस तरह का विरोधाभास नया नहीं है। अजरबैजान और आर्मीनिया की लड़ाई में भी दोनों एक दूसरे के खिलाफ रहे हैं। सीरिया और लीबिया में भी। फिर भी तुर्की और रूस के राष्ट्राध्यक्षों की दोस्ती अटूट बनी हुई है। अर्दोआन इसका पूरा हक भी अदा कर रहे हैं। वह खुलकर पूतिन की हिमायत और पश्चिमी देशों को कोस रहे हैं। पिछले महीने जब रूस ने पश्चिम के नए प्रतिबंधों की वजह से यूरोप की गैस सप्लाई रोकी, तब अर्दोआन ने कहा कि यूरोप को अपने किए का फल मिल रहा है। दिलचस्प बात यह है कि इस युद्ध को रोकने की एक उम्मीद भी कई लोगों को अर्दोआन से ही है। अगर वह ऐसा कर पाए तो इससे दुनिया को बड़ी राहत मिलेगी।
@PROFESSOR_ADDA
▪️रूस - यूक्रेन युद्ध में तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन दिलचस्प प्लेयर बनकर उभरे हैं। वह रूस और यूक्रेन दोनों से दोस्ती निभा रहे हैं। उनका देश नैटो का भी मेंबर है। यानी वह एक साथ रूस, यूक्रेन और अमेरिका-यूरोप सबके साथ हैं। यूक्रेन पर हमला करने के बाद जहां अमेरिका और ज्यादातर यूरोपीय देशों के लिए रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन खलनायक बन गए, वहीं अर्दोआन उनसे अभी भी दोस्ती निभा रहे हैं, जो बरसों पुरानी है ।
पश्चिमी देशों के रूस पर कड़े प्रतिबंध लगाने के बावजूद तुर्की और रूस के बीच व्यापार बढ़ रहा है। दोनों देशों के बीच इस साल अभी तक 50 अरब डॉलर का व्यापार हो चुका है, जो 2021 में 37 अरब डॉलर से कुछ अधिक रहा था। तुर्की की अर्थव्यवस्था पिछले कुछ सालों से जबरदस्त संकट में है। वहां महंगाई दर 83 फीसदी है। ऐसे में रूस के साथ व्यापार और वहां से निवेश बढ़ने से अर्दोआन को काफी राहत मिलेगी क्योंकि अगले साल तुर्की में चुनाव होने वाले हैं।
अर्दोआन और पूतिन की दोस्ती में फायदा सिर्फ तुर्की को ही नहीं हो रहा, यह रूस के भी हक में है। रूस की कंपनियां पश्चिमी देशों आर्थिक प्रतिबंधों से बचने के लिए तुर्की जा रही हैं। सिर्फ अगस्त में 128 नई रूसी कंपनियों ने तुर्की में रजिस्ट्रेशन कराया। और एक रूसी कंपनी ने तो न्यूक्लियर प्लांट बनाने के लिए तुर्की को 5 अरब डॉलर का कर्ज भी दिया है। दुनिया के मंच पर अपनी इमेज ठीक करने के लिए भी पुतिन को एक साथी चाहिए। अर्दोआन यह काम भी कर रहे हैं। इसीलिए तुर्की की यूक्रेन को दी गई मदद से पूतिन नाराज नहीं हैं।
अर्दोआन ने युद्ध शुरू होने के बाद यूक्रेन को हथियारबंद ड्रोन बेचे हैं। हाल में पूतिन ने यूक्रेन के जिन इलाकों को रूस में मिलाने की घोषणा की है, अर्दोआन ने उसकी भी आलोचना की है। तुर्की इसके साथ यूक्रेन को मॉडर्न कॉर्वेट्स बनाने में भी मदद कर रहा है। यही नहीं, तुर्की की मदद से ही यूक्रेन से अनाज का समुद्री रास्ते से निर्यात शुरू हो पाया। यह रास्ता रूस ने बंद कर रखा था और अर्दोआन ने कुछ समय पहले इसे शुरू करवाने के लिए पूतिन के साथ समझौता करवाया।
वैसे, रूस और तुर्की के रिश्तों में इस तरह का विरोधाभास नया नहीं है। अजरबैजान और आर्मीनिया की लड़ाई में भी दोनों एक दूसरे के खिलाफ रहे हैं। सीरिया और लीबिया में भी। फिर भी तुर्की और रूस के राष्ट्राध्यक्षों की दोस्ती अटूट बनी हुई है। अर्दोआन इसका पूरा हक भी अदा कर रहे हैं। वह खुलकर पूतिन की हिमायत और पश्चिमी देशों को कोस रहे हैं। पिछले महीने जब रूस ने पश्चिम के नए प्रतिबंधों की वजह से यूरोप की गैस सप्लाई रोकी, तब अर्दोआन ने कहा कि यूरोप को अपने किए का फल मिल रहा है। दिलचस्प बात यह है कि इस युद्ध को रोकने की एक उम्मीद भी कई लोगों को अर्दोआन से ही है। अगर वह ऐसा कर पाए तो इससे दुनिया को बड़ी राहत मिलेगी।
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🔶इंटरपोल ने खालिस्तानी आतंकवादी गुरपतवंत पन्नू सिंह के खिलाफ रेड नोटिस जारी करने के भारत के प्रस्ताव को खारिज कर दिया है।
▪️इंटरपोल (INTERPOL)
इंटरपोल का पूरा नाम अंतरर्राष्ट्रीय आपराधिक पुलिस संगठन (International criminal police organization) है ।
• यह एक अंतर-सरकारी संगठन है ।
इसकी स्थापना 7 सितंबर 1923 में की गई थी
• वर्तमान में इसके कुल 195 सदस्य देश हैं
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• भारत वर्ष 1949 में इसका सदस्य बना ।
• इसका मुख्यालय लिओन (फ्रांस) में स्थित है ।
▪️इंटरपोल (INTERPOL)
इंटरपोल का पूरा नाम अंतरर्राष्ट्रीय आपराधिक पुलिस संगठन (International criminal police organization) है ।
• यह एक अंतर-सरकारी संगठन है ।
इसकी स्थापना 7 सितंबर 1923 में की गई थी
• वर्तमान में इसके कुल 195 सदस्य देश हैं
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• इसका मुख्यालय लिओन (फ्रांस) में स्थित है ।
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