Forwarded from Professor Adda NET SET CUET
PROFESSORS ADDA:
🔶🔶🔶संगोष्ठी (Seminar)🔶🔶🔶
◾️संगोष्ठी एक ऐसी प्रक्रिया है, जो शोधकर्त्ताओं के चिंतन स्तर को सुषुप्त अवस्था से जाग्रत अवस्था की ओर लाती है। इसके द्वारा मनुष्य की उच्च क्रिया शक्तियों का पोषण किया जाता है तथा उसे चिंतन की नई दिशा की ओर उन्मुख किया जाता है। इसे चिंतन की अंतःप्रक्रिया भी कहते हैं। इसमें सामूहिक परिचर्चा करके विषय के जटिल पक्षों की सरल व्याख्या की जाती है। संगोष्ठी में प्रतिभाग करने वाले सभी सदस्यों को अपने विचारों को रखने की पूर्ण स्वतंत्रता होती है।
◾️संगोष्ठी की प्रक्रिया (Process of Seminar)
• संगोष्ठी हेतु किसी प्रकरण या विषय का चयन किया जाता है।
• संगोष्ठी का प्रकरण पूर्व नियोजित होता है।
• प्रकरण प्रपत्र तैयार करने वाला व्यक्ति वक्ता कहलाता है।
• प्रकरण की प्रमुख विषयवस्तु सभी को पहले ही बता दी जाती है, जिससे संप्रेषण और विषयवस्तु के स्वरूप को समझने में सहायता मिलती है।
• विभिन्न संस्थाओं से व्यक्तियों को आमंत्रित किया जाता है।
• संगोष्ठी के कार्य संचालन के लिये सहभागियों में से ही अध्यक्ष का चयन किया जाता है।
• संचालन प्रक्रिया अध्यक्ष निर्धारित करता है। • परिचर्चा में अध्यक्ष की अनुमति से सभी वक्ता अपने-अपने विचार रखते हैं।
• प्रकरण प्रस्तुत करने के पश्चात् अध्यक्ष प्रश्न पूछने का अवसर प्रदान करता है।
• उसके बाद अध्यक्ष अपने विचार प्रस्तुत करता है।
• संगोष्ठी की कार्यप्रणाली तथा परिचर्चा के प्रमुख अवयवों/तत्त्वों का
आलेख तैयार किया जाता है।
• प्रकरण तथा वाद-विवादों के निष्कर्षों को प्रकाशित किया जाता है।
◾️ Professors Adda ( 7690022111)
संगोष्ठी के प्रकार (Types of Seminar)
संगोष्ठी चार प्रकार की होती है
• लघु संगोष्ठी (Mini Seminar): कक्षा में किसी विषय पर चर्चा करने के लिये आयोजित संगोष्ठी को 'मिनी सेमिनार' अथवा लघु संगोष्ठी कहा जाता है।
• मुख्य या बड़ी संगोष्ठी (Main Seminar): जो सेमिनार किसी संस्था या विभाग के स्तर पर आयोजित किया जाता है, उसे 'मुख्य संगोष्ठी या मेन सेमिनार' कहते हैं।
• राष्ट्रीय संगोष्ठी (National Seminar): राष्ट्रीय स्तर पर किसी संगठन द्वारा आयोजित संगोष्ठी को 'राष्ट्रीय संगोष्ठी' कहते हैं।
• अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी (International Seminar): ऐसी संगोष्ठियाँ जिनका आयोजन यूनेस्को एवं अन्य अंतर्राष्ट्रीय संगठनों द्वारा किया जाता है, उन्हें अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी कहते हैं।
🔶🔶🔶सम्मेलन (Conferences)🔶🔶🔶
सम्मेलन एक औपचारिक बैठक को संदर्भित करता है, जहाँ प्रतिभागी विभिन्न विषयों पर सूचनाओं एवं विचारों का आदान-प्रदान करते हैं। इसके द्वारा सदस्य या प्रतिभागी अपनी व्यक्तिगत एवं सामूहिक समस्याओं पर विचार करते हैं।
यह एक प्रकार के बड़े समूह की सभा होती है, जहाँ सदस्य आपस में विचारों का आदान-प्रदान एवं अपने ज्ञान का संग्रहण करते हैं। प्रतिभागियों (Participants) के समूह द्वारा सम्मेलन के उद्देश्य व कार्यप्रणाली को समूह के वरिष्ठ व्यक्ति या नेता द्वारा स्पष्ट किया जाता है। उच्च शिक्षा के क्षेत्र में अधिगम के लिये एक महत्त्वपूर्ण विधि है। शोधकर्त्ता (अनुसंधानकर्त्ता) इसके द्वारा अनुसंधान के क्षेत्र में संज्ञानात्मक (ज्ञानात्मक) एवं भावनात्मक उद्देश्यों की प्राप्ति करता है। सम्मेलन के द्वारा विचारों और मुद्दों की व्यापक रेंज को संभव बनाया जा सकता है।
◾️सम्मेलन के प्रकार (Type of Conferences)
सम्मेलन के तीन प्रकार होते हैं
• क्षेत्रीय सम्मेलन (Regional Conference ) : क्षेत्रीय समस्याओं के संदर्भ में सम्मेलन का आयोजन।
• राष्ट्रीय सम्मेलन (National Conference): राष्ट्र संबंधी विषयों, जैसे- धार्मिक, सामाजिक, शैक्षिक आदि पर सम्मेलन का आयोजन।
• समान विचारधारा वाले लोगों से मिलने व बातचीत करने का अवसर मिलता है।
• संयम, धैर्य, कार्य कुशलता तथा सहनशीलता जैसे गुणों का विकास होता है।
• अनुसंधान संबंधी समस्याओं के प्रत्येक पक्ष का स्पष्ट निरूपण होता है।
• सहयोगात्मक भावना द्वारा समस्या समाधान की क्षमताओं का विकास होता है।
सम्मेलन (Conferences) सम्मेलन एक औपचारिक बैठक को संदर्भित करता है, जहाँ प्रतिभागी विभिन्न विषयों पर सूचनाओं एवं विचारों का आदान-प्रदान करते हैं। इसके द्वारा सदस्य या प्रतिभागी अपनी व्यक्तिगत एवं सामूहिक समस्याओं पर विचार करते हैं।
◾️सम्मेलन के प्रकार (Type of Conferences)
सम्मेलन के तीन प्रकार होते हैं
🔶 Continue Part 2
🔶🔶🔶संगोष्ठी (Seminar)🔶🔶🔶
◾️संगोष्ठी एक ऐसी प्रक्रिया है, जो शोधकर्त्ताओं के चिंतन स्तर को सुषुप्त अवस्था से जाग्रत अवस्था की ओर लाती है। इसके द्वारा मनुष्य की उच्च क्रिया शक्तियों का पोषण किया जाता है तथा उसे चिंतन की नई दिशा की ओर उन्मुख किया जाता है। इसे चिंतन की अंतःप्रक्रिया भी कहते हैं। इसमें सामूहिक परिचर्चा करके विषय के जटिल पक्षों की सरल व्याख्या की जाती है। संगोष्ठी में प्रतिभाग करने वाले सभी सदस्यों को अपने विचारों को रखने की पूर्ण स्वतंत्रता होती है।
◾️संगोष्ठी की प्रक्रिया (Process of Seminar)
• संगोष्ठी हेतु किसी प्रकरण या विषय का चयन किया जाता है।
• संगोष्ठी का प्रकरण पूर्व नियोजित होता है।
• प्रकरण प्रपत्र तैयार करने वाला व्यक्ति वक्ता कहलाता है।
• प्रकरण की प्रमुख विषयवस्तु सभी को पहले ही बता दी जाती है, जिससे संप्रेषण और विषयवस्तु के स्वरूप को समझने में सहायता मिलती है।
• विभिन्न संस्थाओं से व्यक्तियों को आमंत्रित किया जाता है।
• संगोष्ठी के कार्य संचालन के लिये सहभागियों में से ही अध्यक्ष का चयन किया जाता है।
• संचालन प्रक्रिया अध्यक्ष निर्धारित करता है। • परिचर्चा में अध्यक्ष की अनुमति से सभी वक्ता अपने-अपने विचार रखते हैं।
• प्रकरण प्रस्तुत करने के पश्चात् अध्यक्ष प्रश्न पूछने का अवसर प्रदान करता है।
• उसके बाद अध्यक्ष अपने विचार प्रस्तुत करता है।
• संगोष्ठी की कार्यप्रणाली तथा परिचर्चा के प्रमुख अवयवों/तत्त्वों का
आलेख तैयार किया जाता है।
• प्रकरण तथा वाद-विवादों के निष्कर्षों को प्रकाशित किया जाता है।
◾️ Professors Adda ( 7690022111)
संगोष्ठी के प्रकार (Types of Seminar)
संगोष्ठी चार प्रकार की होती है
• लघु संगोष्ठी (Mini Seminar): कक्षा में किसी विषय पर चर्चा करने के लिये आयोजित संगोष्ठी को 'मिनी सेमिनार' अथवा लघु संगोष्ठी कहा जाता है।
• मुख्य या बड़ी संगोष्ठी (Main Seminar): जो सेमिनार किसी संस्था या विभाग के स्तर पर आयोजित किया जाता है, उसे 'मुख्य संगोष्ठी या मेन सेमिनार' कहते हैं।
• राष्ट्रीय संगोष्ठी (National Seminar): राष्ट्रीय स्तर पर किसी संगठन द्वारा आयोजित संगोष्ठी को 'राष्ट्रीय संगोष्ठी' कहते हैं।
• अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी (International Seminar): ऐसी संगोष्ठियाँ जिनका आयोजन यूनेस्को एवं अन्य अंतर्राष्ट्रीय संगठनों द्वारा किया जाता है, उन्हें अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी कहते हैं।
🔶🔶🔶सम्मेलन (Conferences)🔶🔶🔶
सम्मेलन एक औपचारिक बैठक को संदर्भित करता है, जहाँ प्रतिभागी विभिन्न विषयों पर सूचनाओं एवं विचारों का आदान-प्रदान करते हैं। इसके द्वारा सदस्य या प्रतिभागी अपनी व्यक्तिगत एवं सामूहिक समस्याओं पर विचार करते हैं।
यह एक प्रकार के बड़े समूह की सभा होती है, जहाँ सदस्य आपस में विचारों का आदान-प्रदान एवं अपने ज्ञान का संग्रहण करते हैं। प्रतिभागियों (Participants) के समूह द्वारा सम्मेलन के उद्देश्य व कार्यप्रणाली को समूह के वरिष्ठ व्यक्ति या नेता द्वारा स्पष्ट किया जाता है। उच्च शिक्षा के क्षेत्र में अधिगम के लिये एक महत्त्वपूर्ण विधि है। शोधकर्त्ता (अनुसंधानकर्त्ता) इसके द्वारा अनुसंधान के क्षेत्र में संज्ञानात्मक (ज्ञानात्मक) एवं भावनात्मक उद्देश्यों की प्राप्ति करता है। सम्मेलन के द्वारा विचारों और मुद्दों की व्यापक रेंज को संभव बनाया जा सकता है।
◾️सम्मेलन के प्रकार (Type of Conferences)
सम्मेलन के तीन प्रकार होते हैं
• क्षेत्रीय सम्मेलन (Regional Conference ) : क्षेत्रीय समस्याओं के संदर्भ में सम्मेलन का आयोजन।
• राष्ट्रीय सम्मेलन (National Conference): राष्ट्र संबंधी विषयों, जैसे- धार्मिक, सामाजिक, शैक्षिक आदि पर सम्मेलन का आयोजन।
• समान विचारधारा वाले लोगों से मिलने व बातचीत करने का अवसर मिलता है।
• संयम, धैर्य, कार्य कुशलता तथा सहनशीलता जैसे गुणों का विकास होता है।
• अनुसंधान संबंधी समस्याओं के प्रत्येक पक्ष का स्पष्ट निरूपण होता है।
• सहयोगात्मक भावना द्वारा समस्या समाधान की क्षमताओं का विकास होता है।
सम्मेलन (Conferences) सम्मेलन एक औपचारिक बैठक को संदर्भित करता है, जहाँ प्रतिभागी विभिन्न विषयों पर सूचनाओं एवं विचारों का आदान-प्रदान करते हैं। इसके द्वारा सदस्य या प्रतिभागी अपनी व्यक्तिगत एवं सामूहिक समस्याओं पर विचार करते हैं।
◾️सम्मेलन के प्रकार (Type of Conferences)
सम्मेलन के तीन प्रकार होते हैं
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