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अनुसंधान (शोध) का अर्थ (Meaning of Research)
अनुसंधान अथवा शोध किसी सोद्देश्य निर्दिष्ट समस्या को आधार बताकर क्रमबद्ध एवं व्यवस्थित लेखन तथा परीक्षण के द्वारा बेहतर, नवीन और सामयिक ज्ञान की खोज है। अनुसंधान का स्वरूप वस्तुनिष्ठ और तथ्य केंद्रित होता है। प्रत्येक अनुसंधान किसी न किसी समस्या का तार्किक एवं वैज्ञानिक समाधान प्रस्तुत करता है, जिससे जुड़ी हुई कुछ नवीन अवधारणाओं, प्रतिस्थापनाओं और सिद्धांतों का निर्माण होता है। 'अनुसंधान' का अंग्रेजी पर्याय 'Research' शब्द 'Re' और 'Search' शब्दों से मिलकर बना है।
अनुसंधान के लिये हिंदी भाषा में प्रयुक्त अन्य शब्द-अन्वेषण, अनुशीलन, परिशीलन, मीमांसा, गवेषणा, शोध, खोज एवं रिसर्च है।
अनुसंधान (शोध) के चार अंग होते हैं
• ज्ञान क्षेत्र की किसी समस्या को सुलझाने की प्रक्रिया
• प्रासंगिक तथ्यों का संकलन
•विवेकपूर्ण अध्ययन/विश्लेषण
• परिणामस्वरूप निर्णय
अनुसंधान की प्रमुख परिभाषाएँ
(Major Definitions of Research)
पी.वी. यंग- “अनुसंधान एक ऐसी व्यवस्थित विधि है जिसके द्वारा नवीन तथ्यों को खोजने अथवा पुराने तथ्यों की विषयवस्तु, उनकी क्रमबद्धता, अंतःसंबंध, कार्य-कारण व्याख्या और उनके निहित नैसर्गिक नियमों के पुष्टिकरण का कार्य किया जाता है।”
जेम्स ड्रेवर- “किसी क्षेत्र में ज्ञान अथवा सत्यापन हेतु की जाने वाली क्रमबद्ध खोज ही अनुसंधान है। "
अनुसंधान की विशेषताएँ (Characteristics of Research)
• अनुसंधान का उद्देश्य किसी समस्या का वैज्ञानिक विधि से समाधान
ढूंढना है।
• अनुसंधान में एक सामान्य परीक्षण में विश्वसनीयता, वस्तुनिष्ठता और प्रयोग को प्राथमिकता दी जाती है।
• यह पूर्णत: तार्किक और वस्तुनिष्ठ प्रक्रिया है। परिकल्पना को सिद्ध करने के स्थान पर उसके परीक्षण पर बल दिया जाता है।
• अनुसंधान सिर्फ सूचनाओं की पुनः प्राप्ति या संग्रहण नहीं करता, बल्कि अनुसंधान में व्यापीकरण नियमों या सिद्धांतों के विकास पर बल दिया जाता है।
• अनुसंधान में आँकड़ों के संग्रहण के लिये विधियों, प्रविधियों व वैध उपकरणों का प्रयोग किया जाता है। उसके बाद इन आँकड़ों का शोधन, संलेखन, अभिकलन व विश्लेषण किया जाता है।
• अनुसंधान करने के लिये अनुसंधान प्रश्न तैयार करना आरंभिक अनिवार्यता होती है।
• अनुसंधान की गुणवत्ता अनुसंधान की प्रासंगिकता से तय होती है। • अनुसंधान किसी भी मत को ज्ञान प्राप्ति की विधि नहीं मानता है, बल्कि यह उन मत या बातों को स्वीकार करता है जिन्हें प्रेक्षण द्वारा परखा जा सके।
• अनुसंधान में वैज्ञानिक पद्धति का मुख्य उद्देश्य अनुसंधान में नए मापदंडों का प्रयोग होता है।
• अनुसंधान में व्यक्तिगत पक्षों, भावनाओं तथा विचारों को महत्त्व नहीं
दिया जाता है।
• अनुसंधान की गहराई अनुसंधान द्वारा अर्जित तथ्यों पर आधारित होती है।
•अनुसंधान कार्यों को सैद्धांतिक व व्यावहारिक तरीके से भी कर सकते हैं। सैद्धांतिक कार्य वैज्ञानिक विधि के द्वारा तथा व्यावहारिक कार्य क्रियात्मक अनुसंधान के द्वारा किया जाता है।
अनुसंधान (शोध) की प्रकृति (Nature of Research)
Professors Adda (UGC NET JRF )
• अनुसंधान एक बौद्धिक, तार्किक व वैज्ञानिक प्रक्रिया है, जो नए ज्ञान को प्रकाश में लाती है, साथ ही पुरानी त्रुटियों एवं भ्रम धारणाओं का परिमार्जन करती है।
• अनुसंधान एक वैज्ञानिक प्रक्रिया है, जो ज्ञान के प्रचार और प्रसार में सहायक होती है।
• इसमें प्राथमिक व द्वितीयक स्रोतों (Primary and Secondary Sources) से प्राप्त आँकड़ों का विश्लेषण किया जाता है, जो किसी भी तरह के पूर्वाग्रह से मुक्त होता है ।।
• आँकड़ों के विश्लेषण में सांख्यिकी विधियों का प्रयोग किया जाता है। • अनुसंधान के लिये वैज्ञानिक अभिकल्पों (Scientific Design) का प्रयोग किया जाता है।
• अनुसंधान द्वारा प्राप्त ज्ञान को सत्यापित किया जा सकता है, क्योंकि इसके अंतर्गत किया गया निरीक्षण नियंत्रित एवं वस्तुनिष्ठ होता है। • इसके द्वारा किसी नए तथ्य, विधि या वस्तु की खोज की जाती है या फिर प्राचीन तथ्य, सिद्धांत, विधि या वस्तु में परिवर्तन किया जाता है।
• आँकड़ों को प्राप्त करने के लिये विश्वसनीय एवं वैध उपकरणों का प्रयोग किया जाता है।
• अनुसंधान के जटिल घटनाक्रमों को समझने के लिये विश्लेषण विधि प्रयोग में लाई जाती है। इस विश्लेषण के लिये परिकल्पनाओं का निर्माण एवं परीक्षण किया जाता है।
• यह सुव्यवस्थित, बौद्धिक, तर्कपूर्ण तथा वस्तुनिष्ठ प्रक्रिया होती है।
अनुसंधान के प्रकार (Types of Research)
किसी भी अनुसंधान की शुरुआत एक समस्या की पहचान के साथ होती है। तत्पश्चात् समस्या को पहचान कर उसका समाधान ढूंढा जाता है.
Continue Part 2
अनुसंधान (शोध) का अर्थ (Meaning of Research)
अनुसंधान अथवा शोध किसी सोद्देश्य निर्दिष्ट समस्या को आधार बताकर क्रमबद्ध एवं व्यवस्थित लेखन तथा परीक्षण के द्वारा बेहतर, नवीन और सामयिक ज्ञान की खोज है। अनुसंधान का स्वरूप वस्तुनिष्ठ और तथ्य केंद्रित होता है। प्रत्येक अनुसंधान किसी न किसी समस्या का तार्किक एवं वैज्ञानिक समाधान प्रस्तुत करता है, जिससे जुड़ी हुई कुछ नवीन अवधारणाओं, प्रतिस्थापनाओं और सिद्धांतों का निर्माण होता है। 'अनुसंधान' का अंग्रेजी पर्याय 'Research' शब्द 'Re' और 'Search' शब्दों से मिलकर बना है।
अनुसंधान के लिये हिंदी भाषा में प्रयुक्त अन्य शब्द-अन्वेषण, अनुशीलन, परिशीलन, मीमांसा, गवेषणा, शोध, खोज एवं रिसर्च है।
अनुसंधान (शोध) के चार अंग होते हैं
• ज्ञान क्षेत्र की किसी समस्या को सुलझाने की प्रक्रिया
• प्रासंगिक तथ्यों का संकलन
•विवेकपूर्ण अध्ययन/विश्लेषण
• परिणामस्वरूप निर्णय
अनुसंधान की प्रमुख परिभाषाएँ
(Major Definitions of Research)
पी.वी. यंग- “अनुसंधान एक ऐसी व्यवस्थित विधि है जिसके द्वारा नवीन तथ्यों को खोजने अथवा पुराने तथ्यों की विषयवस्तु, उनकी क्रमबद्धता, अंतःसंबंध, कार्य-कारण व्याख्या और उनके निहित नैसर्गिक नियमों के पुष्टिकरण का कार्य किया जाता है।”
जेम्स ड्रेवर- “किसी क्षेत्र में ज्ञान अथवा सत्यापन हेतु की जाने वाली क्रमबद्ध खोज ही अनुसंधान है। "
अनुसंधान की विशेषताएँ (Characteristics of Research)
• अनुसंधान का उद्देश्य किसी समस्या का वैज्ञानिक विधि से समाधान
ढूंढना है।
• अनुसंधान में एक सामान्य परीक्षण में विश्वसनीयता, वस्तुनिष्ठता और प्रयोग को प्राथमिकता दी जाती है।
• यह पूर्णत: तार्किक और वस्तुनिष्ठ प्रक्रिया है। परिकल्पना को सिद्ध करने के स्थान पर उसके परीक्षण पर बल दिया जाता है।
• अनुसंधान सिर्फ सूचनाओं की पुनः प्राप्ति या संग्रहण नहीं करता, बल्कि अनुसंधान में व्यापीकरण नियमों या सिद्धांतों के विकास पर बल दिया जाता है।
• अनुसंधान में आँकड़ों के संग्रहण के लिये विधियों, प्रविधियों व वैध उपकरणों का प्रयोग किया जाता है। उसके बाद इन आँकड़ों का शोधन, संलेखन, अभिकलन व विश्लेषण किया जाता है।
• अनुसंधान करने के लिये अनुसंधान प्रश्न तैयार करना आरंभिक अनिवार्यता होती है।
• अनुसंधान की गुणवत्ता अनुसंधान की प्रासंगिकता से तय होती है। • अनुसंधान किसी भी मत को ज्ञान प्राप्ति की विधि नहीं मानता है, बल्कि यह उन मत या बातों को स्वीकार करता है जिन्हें प्रेक्षण द्वारा परखा जा सके।
• अनुसंधान में वैज्ञानिक पद्धति का मुख्य उद्देश्य अनुसंधान में नए मापदंडों का प्रयोग होता है।
• अनुसंधान में व्यक्तिगत पक्षों, भावनाओं तथा विचारों को महत्त्व नहीं
दिया जाता है।
• अनुसंधान की गहराई अनुसंधान द्वारा अर्जित तथ्यों पर आधारित होती है।
•अनुसंधान कार्यों को सैद्धांतिक व व्यावहारिक तरीके से भी कर सकते हैं। सैद्धांतिक कार्य वैज्ञानिक विधि के द्वारा तथा व्यावहारिक कार्य क्रियात्मक अनुसंधान के द्वारा किया जाता है।
अनुसंधान (शोध) की प्रकृति (Nature of Research)
Professors Adda (UGC NET JRF )
• अनुसंधान एक बौद्धिक, तार्किक व वैज्ञानिक प्रक्रिया है, जो नए ज्ञान को प्रकाश में लाती है, साथ ही पुरानी त्रुटियों एवं भ्रम धारणाओं का परिमार्जन करती है।
• अनुसंधान एक वैज्ञानिक प्रक्रिया है, जो ज्ञान के प्रचार और प्रसार में सहायक होती है।
• इसमें प्राथमिक व द्वितीयक स्रोतों (Primary and Secondary Sources) से प्राप्त आँकड़ों का विश्लेषण किया जाता है, जो किसी भी तरह के पूर्वाग्रह से मुक्त होता है ।।
• आँकड़ों के विश्लेषण में सांख्यिकी विधियों का प्रयोग किया जाता है। • अनुसंधान के लिये वैज्ञानिक अभिकल्पों (Scientific Design) का प्रयोग किया जाता है।
• अनुसंधान द्वारा प्राप्त ज्ञान को सत्यापित किया जा सकता है, क्योंकि इसके अंतर्गत किया गया निरीक्षण नियंत्रित एवं वस्तुनिष्ठ होता है। • इसके द्वारा किसी नए तथ्य, विधि या वस्तु की खोज की जाती है या फिर प्राचीन तथ्य, सिद्धांत, विधि या वस्तु में परिवर्तन किया जाता है।
• आँकड़ों को प्राप्त करने के लिये विश्वसनीय एवं वैध उपकरणों का प्रयोग किया जाता है।
• अनुसंधान के जटिल घटनाक्रमों को समझने के लिये विश्लेषण विधि प्रयोग में लाई जाती है। इस विश्लेषण के लिये परिकल्पनाओं का निर्माण एवं परीक्षण किया जाता है।
• यह सुव्यवस्थित, बौद्धिक, तर्कपूर्ण तथा वस्तुनिष्ठ प्रक्रिया होती है।
अनुसंधान के प्रकार (Types of Research)
किसी भी अनुसंधान की शुरुआत एक समस्या की पहचान के साथ होती है। तत्पश्चात् समस्या को पहचान कर उसका समाधान ढूंढा जाता है.
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🔶अनुसंधानों को दो वर्गों में विभक्त किया जाता है
मूलभूत अनुसंधान
(Fundamental or Basic Research)
एंड्रीआस- "मूलभूत अनुसंधान का मुख्य उद्देश्य नई प्ररचनाओं (Design) का निर्माण करना है।"
मूलभूत अनुसंधान का मुख्य ध्येय वैज्ञानिक सिद्धांतों के माध्यम से प्राकृतिक या अन्य घटनाओं की बेहतर समझ को विकसित करना है। मूलभूत अनुसंधान नए विचारों व सिद्धांतों का निर्माण करता है। जो विभिन्न क्षेत्रों में प्रगति और विकास का आधार बनता है।
• जीन पियाजे ने मूलभूत अथवा मौलिक अनुसंधान के आधार पर
ही मानव विकास का सिद्धांत दिया।
• मूलभूत अनुसंधान अथवा मौलिक अनुसंधान के सिद्धांतों का उपयोग अनुप्रयुक्त अनुसंधान में किया जाता है।
व्यावहारिक अनुसंधान
(Applied Research)
एंड्रीआस- "तथ्यों द्वारा यदि अनुसंधानकर्ता किसी क्रियात्मक समस्या का समाधान करे तो यह अनुसंधान व्यावहारिक अनुसंधान की श्रेणी में आता है।"
व्यावहारिक अनुसंधान वैज्ञानिक अध्ययन और अनुसंधान से संबंधित
है, जिसमें व्यावहारिक समस्याओं को सुलझाने का प्रयास किया जाता है। इस अनुसंधान का प्रयोग दैनिक समस्याओं एवं नवीन प्रौद्योगिकियों (Technologies) के विकास के लिये किया जाता है। व्यावहारिक शोध में प्रबंधकीय ढंग से ज्यादा संगठनात्मक शैली
प्रभावशाली होगी।
एडवर्ड और क्रॉनबैंक का वर्गीकरण
अनुसंधान का एक भाग मुख्य तथ्य ( Facts) का संकलन होता है। आधार सामग्री के अध्ययन और विश्लेषण द्वारा तथ्यों का संकलन और संयोजन किया जाता है। मानविकी और समाज विज्ञान जुड़े अनुसंधानों में किसी न किसी रूप में व्यक्तिगत प्रभाव लक्षित होता ही है, लेकिन शोधकर्त्ता की विश्लेषणात्मक क्षमता उसे वस्तुनिष्ठ और तार्किक निष्कर्ष प्रदान करती है।
अनुसंधान एक विकासोन्मुख प्रत्यय है, इसकी प्रकृति गत्यात्मक है. दृष्टिकोण वैज्ञानिक है, विकास अभिसंचयी है तथा ज्ञान एवं विद्वता का दिग्दर्शक है। इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए एडवर्ड तथा क्रॉनबैंक का वर्गीकरण उचित प्रतीत होता है। जो निम्न 4 रूपों में है
सर्वेक्षण अनुसंधान (Survey Research)
इस प्रकार के अनुसंधान का संबंध दो या दो से अधिक चरों से संबंधित घटनाओं के आँकड़ों का संकलन व वर्गीकरण से होता है, ताकि दोनों चरों के मध्य साहचर्यात्मक संबंधों को जाना जा सके। इस प्रकार के अनुसंधान का स्वरूप अन्वेषणात्मक (Exploratory) रहता है। इसके द्वारा जनसंख्या का अध्ययन सफलतापूर्वक किया जा सकता है।
प्रविधि अनुसंधान (Technical Research)
इस प्रकार के अनुसंधान का संबंध अवलोकन (निरीक्षण) विधि से संबंधित समस्याओं के समाधान से है। जब किसी चर के अवलोकन की एक या एक से अधिक विधियाँ उपलब्ध हों तो प्रविधि अनुसंधान इन विधियों का तुलनात्मक अध्ययन करके उसके गुण व कारकों के आधार पर प्रभाविता का स्पष्टीकरण करता है।
व्यावहारिक अनुसंधान (Applied Research)
इस प्रकार के अनुसंधान द्वारा व्यावहारिक समस्याओं का समाधान प्रस्तुत किया जाता है।
उदाहरण- अगर किसी दैनिक समस्या के समाधान के लिये हमारे पास अनेक विधियाँ हों और हमें सर्वोत्तम विधि का चुनाव करना हो तो इस प्रकार का अनुसंधान उसमें सहायक होता है।
आलोचनात्मक अनुसंधान (Critical Research)
इस प्रकार का अनुसंधान पूर्व-धारणा पर आधारित होता है, जहाँ अनुसंधानकर्त्ता यह विचार करता है कि यदि यह अनुसंधान किया जाए तो कुछ विशेष ज्ञान की प्राप्ति होगी या कुछ नए तथ्य प्रकाश में आएंगे।
मूलभूत अनुसंधान
(Fundamental or Basic Research)
एंड्रीआस- "मूलभूत अनुसंधान का मुख्य उद्देश्य नई प्ररचनाओं (Design) का निर्माण करना है।"
मूलभूत अनुसंधान का मुख्य ध्येय वैज्ञानिक सिद्धांतों के माध्यम से प्राकृतिक या अन्य घटनाओं की बेहतर समझ को विकसित करना है। मूलभूत अनुसंधान नए विचारों व सिद्धांतों का निर्माण करता है। जो विभिन्न क्षेत्रों में प्रगति और विकास का आधार बनता है।
• जीन पियाजे ने मूलभूत अथवा मौलिक अनुसंधान के आधार पर
ही मानव विकास का सिद्धांत दिया।
• मूलभूत अनुसंधान अथवा मौलिक अनुसंधान के सिद्धांतों का उपयोग अनुप्रयुक्त अनुसंधान में किया जाता है।
व्यावहारिक अनुसंधान
(Applied Research)
एंड्रीआस- "तथ्यों द्वारा यदि अनुसंधानकर्ता किसी क्रियात्मक समस्या का समाधान करे तो यह अनुसंधान व्यावहारिक अनुसंधान की श्रेणी में आता है।"
व्यावहारिक अनुसंधान वैज्ञानिक अध्ययन और अनुसंधान से संबंधित
है, जिसमें व्यावहारिक समस्याओं को सुलझाने का प्रयास किया जाता है। इस अनुसंधान का प्रयोग दैनिक समस्याओं एवं नवीन प्रौद्योगिकियों (Technologies) के विकास के लिये किया जाता है। व्यावहारिक शोध में प्रबंधकीय ढंग से ज्यादा संगठनात्मक शैली
प्रभावशाली होगी।
एडवर्ड और क्रॉनबैंक का वर्गीकरण
अनुसंधान का एक भाग मुख्य तथ्य ( Facts) का संकलन होता है। आधार सामग्री के अध्ययन और विश्लेषण द्वारा तथ्यों का संकलन और संयोजन किया जाता है। मानविकी और समाज विज्ञान जुड़े अनुसंधानों में किसी न किसी रूप में व्यक्तिगत प्रभाव लक्षित होता ही है, लेकिन शोधकर्त्ता की विश्लेषणात्मक क्षमता उसे वस्तुनिष्ठ और तार्किक निष्कर्ष प्रदान करती है।
अनुसंधान एक विकासोन्मुख प्रत्यय है, इसकी प्रकृति गत्यात्मक है. दृष्टिकोण वैज्ञानिक है, विकास अभिसंचयी है तथा ज्ञान एवं विद्वता का दिग्दर्शक है। इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए एडवर्ड तथा क्रॉनबैंक का वर्गीकरण उचित प्रतीत होता है। जो निम्न 4 रूपों में है
सर्वेक्षण अनुसंधान (Survey Research)
इस प्रकार के अनुसंधान का संबंध दो या दो से अधिक चरों से संबंधित घटनाओं के आँकड़ों का संकलन व वर्गीकरण से होता है, ताकि दोनों चरों के मध्य साहचर्यात्मक संबंधों को जाना जा सके। इस प्रकार के अनुसंधान का स्वरूप अन्वेषणात्मक (Exploratory) रहता है। इसके द्वारा जनसंख्या का अध्ययन सफलतापूर्वक किया जा सकता है।
प्रविधि अनुसंधान (Technical Research)
इस प्रकार के अनुसंधान का संबंध अवलोकन (निरीक्षण) विधि से संबंधित समस्याओं के समाधान से है। जब किसी चर के अवलोकन की एक या एक से अधिक विधियाँ उपलब्ध हों तो प्रविधि अनुसंधान इन विधियों का तुलनात्मक अध्ययन करके उसके गुण व कारकों के आधार पर प्रभाविता का स्पष्टीकरण करता है।
व्यावहारिक अनुसंधान (Applied Research)
इस प्रकार के अनुसंधान द्वारा व्यावहारिक समस्याओं का समाधान प्रस्तुत किया जाता है।
उदाहरण- अगर किसी दैनिक समस्या के समाधान के लिये हमारे पास अनेक विधियाँ हों और हमें सर्वोत्तम विधि का चुनाव करना हो तो इस प्रकार का अनुसंधान उसमें सहायक होता है।
आलोचनात्मक अनुसंधान (Critical Research)
इस प्रकार का अनुसंधान पूर्व-धारणा पर आधारित होता है, जहाँ अनुसंधानकर्त्ता यह विचार करता है कि यदि यह अनुसंधान किया जाए तो कुछ विशेष ज्ञान की प्राप्ति होगी या कुछ नए तथ्य प्रकाश में आएंगे।
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मूलभूत अनुसंधान
(Fundamental or Basic Research)
एंड्रीआस- "मूलभूत अनुसंधान का मुख्य उद्देश्य नई
मूलभूत अनुसंधान का मुख्य ध्येय वैज्ञानिक सिद्धांतों के माध्यम से प्राकृतिक या अन्य घटनाओं की बेहतर समझ को विकसित करना है। मूलभूत अनुसंधान नए विचारों व सिद्धांतों का निर्माण करता है। जो विभिन्न क्षेत्रों में प्रगति और विकास का आधार बनता है।
• जीन पियाजे ने मूलभूत अथवा मौलिक अनुसंधान के आधार पर
ही मानव विकास का सिद्धांत दिया।
• मूलभूत अनुसंधान अथवा मौलिक अनुसंधान के सिद्धांतों का उपयोग अनुप्रयुक्त अनुसंधान में किया जाता है।
व्यावहारिक अनुसंधान (Applied Research)
एंड्रीआस- "तथ्यों द्वारा यदि अनुसंधानकर्त्ता किसी क्रियात्मक समस्या का समाधान करे तो यह अनुसंधान व्यावहारिक अनुसंधान की श्रेणी में आता है। "
व्यावहारिक अनुसंधान वैज्ञानिक अध्ययन और अनुसंधान से संबंधित है, जिसमें व्यावहारिक समस्याओं को सुलझाने का प्रयास किया जाता है। इस अनुसंधान का प्रयोग दैनिक समस्याओं एवं नवीन प्रौद्योगिकियों (Technologies) के विकास के लिये किया जाता है।
व्यावहारिक शोध में प्रबंधकीय ढंग से ज्यादा संगठनात्मक शैली
प्रभावशाली होगी।
एडवर्ड और क्रॉनबैंक का वर्गीकरण
अनुसंधान का एक भाग मुख्य तथ्य ( Facts) का संकलन होता है। आधार सामग्री के अध्ययन और विश्लेषण द्वारा तथ्यों का संकलन और संयोजन किया जाता है। मानविकी और समाज विज्ञान से जुड़े अनुसंधानों में किसी न किसी रूप में व्यक्तिगत प्रभाव लक्षित होता ही है, लेकिन शोधकर्त्ता की विश्लेषणात्मक क्षमता उसे वस्तुनिष्ठ और तार्किक निष्कर्ष प्रदान करती है।
अनुसंधान एक विकासोन्मुख प्रत्यय है, इसकी प्रकृति गत्यात्मक है, दृष्टिकोण वैज्ञानिक है, विकास अभिसंचयी है तथा ज्ञान एवं विद्वता का दिग्दर्शक है। इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए एडवर्ड तथा क्रॉनबैंक का वर्गीकरण उचित प्रतीत होता है। जो निम्न 4 रूपों में है
सर्वेक्षण अनुसंधान (Survey Research)
इस प्रकार के अनुसंधान का संबंध दो या दो से अधिक चरों से संबंधित घटनाओं के आँकड़ों का संकलन व वर्गीकरण से होता है, ताकि दोनों चरों के मध्य साहचर्यात्मक संबंधों को जाना जा सके। इस प्रकार के अनुसंधान का स्वरूप अन्वेषणात्मक (Exploratory) रहता है। इसके द्वारा जनसंख्या का अध्ययन सफलतापूर्वक किया जा सकता है।
प्रविधि अनुसंधान (Technical Research)
इस प्रकार के अनुसंधान का संबंध अवलोकन (निरीक्षण) विधि से संबंधित समस्याओं के समाधान से है। जब किसी चर के अवलोकन की एक या एक से अधिक विधियाँ उपलब्ध हो तो प्रविधि अनुसंधान इन विधियों का तुलनात्मक अध्ययन करके उसके गुण व कारकों के आधार पर प्रभाविता का स्पष्टीकरण करता है।
व्यावहारिक अनुसंधान (Applied Research)
इस प्रकार के अनुसंधान द्वारा व्यावहारिक समस्याओं का समाधान प्रस्तुत किया जाता है।
उदाहरण- अगर किसी दैनिक समस्या के समाधान के लिये हमारे पास अनेक विधियाँ हों और हमें सर्वोत्तम विधि का चुनाव करना हो तो इस प्रकार का अनुसंधान उसमें सहायक होता है।
आलोचनात्मक अनुसंधान
(Critical Research)
इस प्रकार का अनुसंधान पूर्व-धारणा पर आधारित होता है, जहाँ अनुसंधानकर्त्ता यह विचार करता है कि यदि यह अनुसंधान किया जाए तो कुछ विशेष ज्ञान की प्राप्ति होगी या कुछ नए तथ्य प्रकाश में आएंगे।
(Fundamental or Basic Research)
एंड्रीआस- "मूलभूत अनुसंधान का मुख्य उद्देश्य नई
मूलभूत अनुसंधान का मुख्य ध्येय वैज्ञानिक सिद्धांतों के माध्यम से प्राकृतिक या अन्य घटनाओं की बेहतर समझ को विकसित करना है। मूलभूत अनुसंधान नए विचारों व सिद्धांतों का निर्माण करता है। जो विभिन्न क्षेत्रों में प्रगति और विकास का आधार बनता है।
• जीन पियाजे ने मूलभूत अथवा मौलिक अनुसंधान के आधार पर
ही मानव विकास का सिद्धांत दिया।
• मूलभूत अनुसंधान अथवा मौलिक अनुसंधान के सिद्धांतों का उपयोग अनुप्रयुक्त अनुसंधान में किया जाता है।
व्यावहारिक अनुसंधान (Applied Research)
एंड्रीआस- "तथ्यों द्वारा यदि अनुसंधानकर्त्ता किसी क्रियात्मक समस्या का समाधान करे तो यह अनुसंधान व्यावहारिक अनुसंधान की श्रेणी में आता है। "
व्यावहारिक अनुसंधान वैज्ञानिक अध्ययन और अनुसंधान से संबंधित है, जिसमें व्यावहारिक समस्याओं को सुलझाने का प्रयास किया जाता है। इस अनुसंधान का प्रयोग दैनिक समस्याओं एवं नवीन प्रौद्योगिकियों (Technologies) के विकास के लिये किया जाता है।
व्यावहारिक शोध में प्रबंधकीय ढंग से ज्यादा संगठनात्मक शैली
प्रभावशाली होगी।
एडवर्ड और क्रॉनबैंक का वर्गीकरण
अनुसंधान का एक भाग मुख्य तथ्य ( Facts) का संकलन होता है। आधार सामग्री के अध्ययन और विश्लेषण द्वारा तथ्यों का संकलन और संयोजन किया जाता है। मानविकी और समाज विज्ञान से जुड़े अनुसंधानों में किसी न किसी रूप में व्यक्तिगत प्रभाव लक्षित होता ही है, लेकिन शोधकर्त्ता की विश्लेषणात्मक क्षमता उसे वस्तुनिष्ठ और तार्किक निष्कर्ष प्रदान करती है।
अनुसंधान एक विकासोन्मुख प्रत्यय है, इसकी प्रकृति गत्यात्मक है, दृष्टिकोण वैज्ञानिक है, विकास अभिसंचयी है तथा ज्ञान एवं विद्वता का दिग्दर्शक है। इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए एडवर्ड तथा क्रॉनबैंक का वर्गीकरण उचित प्रतीत होता है। जो निम्न 4 रूपों में है
सर्वेक्षण अनुसंधान (Survey Research)
इस प्रकार के अनुसंधान का संबंध दो या दो से अधिक चरों से संबंधित घटनाओं के आँकड़ों का संकलन व वर्गीकरण से होता है, ताकि दोनों चरों के मध्य साहचर्यात्मक संबंधों को जाना जा सके। इस प्रकार के अनुसंधान का स्वरूप अन्वेषणात्मक (Exploratory) रहता है। इसके द्वारा जनसंख्या का अध्ययन सफलतापूर्वक किया जा सकता है।
प्रविधि अनुसंधान (Technical Research)
इस प्रकार के अनुसंधान का संबंध अवलोकन (निरीक्षण) विधि से संबंधित समस्याओं के समाधान से है। जब किसी चर के अवलोकन की एक या एक से अधिक विधियाँ उपलब्ध हो तो प्रविधि अनुसंधान इन विधियों का तुलनात्मक अध्ययन करके उसके गुण व कारकों के आधार पर प्रभाविता का स्पष्टीकरण करता है।
व्यावहारिक अनुसंधान (Applied Research)
इस प्रकार के अनुसंधान द्वारा व्यावहारिक समस्याओं का समाधान प्रस्तुत किया जाता है।
उदाहरण- अगर किसी दैनिक समस्या के समाधान के लिये हमारे पास अनेक विधियाँ हों और हमें सर्वोत्तम विधि का चुनाव करना हो तो इस प्रकार का अनुसंधान उसमें सहायक होता है।
आलोचनात्मक अनुसंधान
(Critical Research)
इस प्रकार का अनुसंधान पूर्व-धारणा पर आधारित होता है, जहाँ अनुसंधानकर्त्ता यह विचार करता है कि यदि यह अनुसंधान किया जाए तो कुछ विशेष ज्ञान की प्राप्ति होगी या कुछ नए तथ्य प्रकाश में आएंगे।
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▪️PROFESSORS ADDA
🔶Plato was the first political philosopher in the Western world who lived through the period of the Peloponnesian War. This war almost changed the face of the existing empire and that of the succeeding others. Plato lived in that wonderful period of Greek history when arts, such as politics, art and philosophy, were at their peak. He laid the foundations of Western philosophy and science along with his teacher, Socrates and disciple, Aristotle.
•Plato’s political theory was intended to change the existing conditions, rather than merely creating an exercise in abstract thinking.
•For Plato, knowledge must be certain and infallible.
•In Meno, Plato, through Socrates, puts forth the idea that knowledge is a mere recollection of what a soul already knows before its incarnation.
•In Phaedo, Plato develops his theory of recollection, which paves the path for his theory of forms.
•Plato’s dialogue Theaetetus is solely concerned with the question ‘what is knowledge?’
•Since judgement in the internal reasoning function of the soul, Theatetus introduces true judgement as knowledge.
•According to Plato’s communism, the guardians would live in communes. They will not marry. Instead, they will mix freely with women. Their children will not know their father as the guardians will not know their children.
•It must be remembered that Plato’s communism applies only to the ruling elite, not to the vast majority of the population.
•Plato claims it is through education that the future rulers will come to recognize that the desire for power and pleasure is not the basis of political or individual happiness and fulfilment.
•Plato argues that education should begin at a young age with the learning of basic skills such as reading, writing, recitation, and so on.
•In The Laws, Plato is not concerned with who will be fit to rule and govern the state after receiving education, but is concerned with the number of people that education will transform as patriots.
@PROFESSOR_ADDA
🔶Plato was the first political philosopher in the Western world who lived through the period of the Peloponnesian War. This war almost changed the face of the existing empire and that of the succeeding others. Plato lived in that wonderful period of Greek history when arts, such as politics, art and philosophy, were at their peak. He laid the foundations of Western philosophy and science along with his teacher, Socrates and disciple, Aristotle.
•Plato’s political theory was intended to change the existing conditions, rather than merely creating an exercise in abstract thinking.
•For Plato, knowledge must be certain and infallible.
•In Meno, Plato, through Socrates, puts forth the idea that knowledge is a mere recollection of what a soul already knows before its incarnation.
•In Phaedo, Plato develops his theory of recollection, which paves the path for his theory of forms.
•Plato’s dialogue Theaetetus is solely concerned with the question ‘what is knowledge?’
•Since judgement in the internal reasoning function of the soul, Theatetus introduces true judgement as knowledge.
•According to Plato’s communism, the guardians would live in communes. They will not marry. Instead, they will mix freely with women. Their children will not know their father as the guardians will not know their children.
•It must be remembered that Plato’s communism applies only to the ruling elite, not to the vast majority of the population.
•Plato claims it is through education that the future rulers will come to recognize that the desire for power and pleasure is not the basis of political or individual happiness and fulfilment.
•Plato argues that education should begin at a young age with the learning of basic skills such as reading, writing, recitation, and so on.
•In The Laws, Plato is not concerned with who will be fit to rule and govern the state after receiving education, but is concerned with the number of people that education will transform as patriots.
@PROFESSOR_ADDA
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▪️PROFESSORS ADDA
(POLITICAL SCIENCE)
🔶Aristotle’s works are divided into logic, physical works, psychological works, philosophical works and works on natural history.
• Aristotle defined the soul as the expression or realization of a natural body.
• Aristotle viewed ethics as an attempt to find out the highest good or the final purpose or end.
• According to Aristotle, the moral ideal in political administration is merely a different aspect of what is applicable to individual happiness.
• He defines a Constitution as the arrangement of magistracies, that is, the way power is exercised in the government by official and legislators.
• Aristotle gives his general theory of citizenship in Politics III.
• The city-state according to Aristotle comprised several such citizens.
• In Aristotle’s political theory laws are the expression of what a political society considers to be justice. They are also the expression of the right to live and the way to shape the entire community for good.
• The next important point in Aristotle’s idea of law is the rule of law and its relation to the rule of best man.
• Aristotle distinguishes two kinds of justice—universal or general justice and particular justice. He defines the former as the whole of virtue, while the latter as a particular type of virtue of a character, which coordinate with virtues like liberality, courage, and so on.
• Aristotle defines particular injustice as taking more or less than what rightfully one’s, and particular justice as the mean of the two.
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(POLITICAL SCIENCE)
🔶Aristotle’s works are divided into logic, physical works, psychological works, philosophical works and works on natural history.
• Aristotle defined the soul as the expression or realization of a natural body.
• Aristotle viewed ethics as an attempt to find out the highest good or the final purpose or end.
• According to Aristotle, the moral ideal in political administration is merely a different aspect of what is applicable to individual happiness.
• He defines a Constitution as the arrangement of magistracies, that is, the way power is exercised in the government by official and legislators.
• Aristotle gives his general theory of citizenship in Politics III.
• The city-state according to Aristotle comprised several such citizens.
• In Aristotle’s political theory laws are the expression of what a political society considers to be justice. They are also the expression of the right to live and the way to shape the entire community for good.
• The next important point in Aristotle’s idea of law is the rule of law and its relation to the rule of best man.
• Aristotle distinguishes two kinds of justice—universal or general justice and particular justice. He defines the former as the whole of virtue, while the latter as a particular type of virtue of a character, which coordinate with virtues like liberality, courage, and so on.
• Aristotle defines particular injustice as taking more or less than what rightfully one’s, and particular justice as the mean of the two.
@PROFESSOR_ADDA
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#Machiavelli
• The political and intellectual tendencies of the medieval age greatly influenced Machiavelli.
• In the period of turmoil, Machiavelli wrote his voluminous book The Prince.
• Machiavelli got his inspiration from Aristotle.
• Machiavelli’ s theory of human nature has a close family resemblance with the Calvinistic doctrine of Original Sin.
• Machiavelli not only separated morality from politics, but also relegated religion to a very subordinate position in his political system and it is because of this that it is thought that the modern study of politics begins with Machiavelli.
• Machiavelli wrote The Prince and the Discourses primarily from the point of view of the preservation of the state.
• An aristocracy, specifically a landed aristocracy, was the cause of factious quarrels and civil disorder.
• Machiavelli mainly studied practical and not speculative politics.
@PROFESSOR_ADDA
• The political and intellectual tendencies of the medieval age greatly influenced Machiavelli.
• In the period of turmoil, Machiavelli wrote his voluminous book The Prince.
• Machiavelli got his inspiration from Aristotle.
• Machiavelli’ s theory of human nature has a close family resemblance with the Calvinistic doctrine of Original Sin.
• Machiavelli not only separated morality from politics, but also relegated religion to a very subordinate position in his political system and it is because of this that it is thought that the modern study of politics begins with Machiavelli.
• Machiavelli wrote The Prince and the Discourses primarily from the point of view of the preservation of the state.
• An aristocracy, specifically a landed aristocracy, was the cause of factious quarrels and civil disorder.
• Machiavelli mainly studied practical and not speculative politics.
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Forwarded from Professor Adda NET SET CUET
How many schools will be developed under PM SHRI (school for rising India)SCHEME.
PM श्री योजना के तहत कितने स्कूल आधुनिक रूप में विकसित किये जायेंगे?
PM श्री योजना के तहत कितने स्कूल आधुनिक रूप में विकसित किये जायेंगे?
Anonymous Quiz
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39%
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Forwarded from Professor Adda NET SET CUET
PROFESSORS ADDA:
अनुसंधान (शोध) का अर्थ (Meaning of Research)
अनुसंधान अथवा शोध किसी सोद्देश्य निर्दिष्ट समस्या को आधार बताकर क्रमबद्ध एवं व्यवस्थित लेखन तथा परीक्षण के द्वारा बेहतर, नवीन और सामयिक ज्ञान की खोज है। अनुसंधान का स्वरूप वस्तुनिष्ठ और तथ्य केंद्रित होता है। प्रत्येक अनुसंधान किसी न किसी समस्या का तार्किक एवं वैज्ञानिक समाधान प्रस्तुत करता है, जिससे जुड़ी हुई कुछ नवीन अवधारणाओं, प्रतिस्थापनाओं और सिद्धांतों का निर्माण होता है। 'अनुसंधान' का अंग्रेजी पर्याय 'Research' शब्द 'Re' और 'Search' शब्दों से मिलकर बना है।
अनुसंधान के लिये हिंदी भाषा में प्रयुक्त अन्य शब्द-अन्वेषण, अनुशीलन, परिशीलन, मीमांसा, गवेषणा, शोध, खोज एवं रिसर्च है।
अनुसंधान (शोध) के चार अंग होते हैं
• ज्ञान क्षेत्र की किसी समस्या को सुलझाने की प्रक्रिया
• प्रासंगिक तथ्यों का संकलन
•विवेकपूर्ण अध्ययन/विश्लेषण
• परिणामस्वरूप निर्णय
अनुसंधान की प्रमुख परिभाषाएँ
(Major Definitions of Research)
पी.वी. यंग- “अनुसंधान एक ऐसी व्यवस्थित विधि है जिसके द्वारा नवीन तथ्यों को खोजने अथवा पुराने तथ्यों की विषयवस्तु, उनकी क्रमबद्धता, अंतःसंबंध, कार्य-कारण व्याख्या और उनके निहित नैसर्गिक नियमों के पुष्टिकरण का कार्य किया जाता है।”
जेम्स ड्रेवर- “किसी क्षेत्र में ज्ञान अथवा सत्यापन हेतु की जाने वाली क्रमबद्ध खोज ही अनुसंधान है। "
अनुसंधान की विशेषताएँ (Characteristics of Research)
• अनुसंधान का उद्देश्य किसी समस्या का वैज्ञानिक विधि से समाधान
ढूंढना है।
• अनुसंधान में एक सामान्य परीक्षण में विश्वसनीयता, वस्तुनिष्ठता और प्रयोग को प्राथमिकता दी जाती है।
• यह पूर्णत: तार्किक और वस्तुनिष्ठ प्रक्रिया है। परिकल्पना को सिद्ध करने के स्थान पर उसके परीक्षण पर बल दिया जाता है।
• अनुसंधान सिर्फ सूचनाओं की पुनः प्राप्ति या संग्रहण नहीं करता, बल्कि अनुसंधान में व्यापीकरण नियमों या सिद्धांतों के विकास पर बल दिया जाता है।
• अनुसंधान में आँकड़ों के संग्रहण के लिये विधियों, प्रविधियों व वैध उपकरणों का प्रयोग किया जाता है। उसके बाद इन आँकड़ों का शोधन, संलेखन, अभिकलन व विश्लेषण किया जाता है।
• अनुसंधान करने के लिये अनुसंधान प्रश्न तैयार करना आरंभिक अनिवार्यता होती है।
• अनुसंधान की गुणवत्ता अनुसंधान की प्रासंगिकता से तय होती है। • अनुसंधान किसी भी मत को ज्ञान प्राप्ति की विधि नहीं मानता है, बल्कि यह उन मत या बातों को स्वीकार करता है जिन्हें प्रेक्षण द्वारा परखा जा सके।
• अनुसंधान में वैज्ञानिक पद्धति का मुख्य उद्देश्य अनुसंधान में नए मापदंडों का प्रयोग होता है।
• अनुसंधान में व्यक्तिगत पक्षों, भावनाओं तथा विचारों को महत्त्व नहीं
दिया जाता है।
• अनुसंधान की गहराई अनुसंधान द्वारा अर्जित तथ्यों पर आधारित होती है।
•अनुसंधान कार्यों को सैद्धांतिक व व्यावहारिक तरीके से भी कर सकते हैं। सैद्धांतिक कार्य वैज्ञानिक विधि के द्वारा तथा व्यावहारिक कार्य क्रियात्मक अनुसंधान के द्वारा किया जाता है।
अनुसंधान (शोध) की प्रकृति (Nature of Research)
Professors Adda (UGC NET JRF )
• अनुसंधान एक बौद्धिक, तार्किक व वैज्ञानिक प्रक्रिया है, जो नए ज्ञान को प्रकाश में लाती है, साथ ही पुरानी त्रुटियों एवं भ्रम धारणाओं का परिमार्जन करती है।
• अनुसंधान एक वैज्ञानिक प्रक्रिया है, जो ज्ञान के प्रचार और प्रसार में सहायक होती है।
• इसमें प्राथमिक व द्वितीयक स्रोतों (Primary and Secondary Sources) से प्राप्त आँकड़ों का विश्लेषण किया जाता है, जो किसी भी तरह के पूर्वाग्रह से मुक्त होता है ।।
• आँकड़ों के विश्लेषण में सांख्यिकी विधियों का प्रयोग किया जाता है। • अनुसंधान के लिये वैज्ञानिक अभिकल्पों (Scientific Design) का प्रयोग किया जाता है।
• अनुसंधान द्वारा प्राप्त ज्ञान को सत्यापित किया जा सकता है, क्योंकि इसके अंतर्गत किया गया निरीक्षण नियंत्रित एवं वस्तुनिष्ठ होता है। • इसके द्वारा किसी नए तथ्य, विधि या वस्तु की खोज की जाती है या फिर प्राचीन तथ्य, सिद्धांत, विधि या वस्तु में परिवर्तन किया जाता है।
• आँकड़ों को प्राप्त करने के लिये विश्वसनीय एवं वैध उपकरणों का प्रयोग किया जाता है।
• अनुसंधान के जटिल घटनाक्रमों को समझने के लिये विश्लेषण विधि प्रयोग में लाई जाती है। इस विश्लेषण के लिये परिकल्पनाओं का निर्माण एवं परीक्षण किया जाता है।
• यह सुव्यवस्थित, बौद्धिक, तर्कपूर्ण तथा वस्तुनिष्ठ प्रक्रिया होती है।
अनुसंधान के प्रकार (Types of Research)
किसी भी अनुसंधान की शुरुआत एक समस्या की पहचान के साथ होती है। तत्पश्चात् समस्या को पहचान कर उसका समाधान ढूंढा जाता है.
Continue Part 2
अनुसंधान (शोध) का अर्थ (Meaning of Research)
अनुसंधान अथवा शोध किसी सोद्देश्य निर्दिष्ट समस्या को आधार बताकर क्रमबद्ध एवं व्यवस्थित लेखन तथा परीक्षण के द्वारा बेहतर, नवीन और सामयिक ज्ञान की खोज है। अनुसंधान का स्वरूप वस्तुनिष्ठ और तथ्य केंद्रित होता है। प्रत्येक अनुसंधान किसी न किसी समस्या का तार्किक एवं वैज्ञानिक समाधान प्रस्तुत करता है, जिससे जुड़ी हुई कुछ नवीन अवधारणाओं, प्रतिस्थापनाओं और सिद्धांतों का निर्माण होता है। 'अनुसंधान' का अंग्रेजी पर्याय 'Research' शब्द 'Re' और 'Search' शब्दों से मिलकर बना है।
अनुसंधान के लिये हिंदी भाषा में प्रयुक्त अन्य शब्द-अन्वेषण, अनुशीलन, परिशीलन, मीमांसा, गवेषणा, शोध, खोज एवं रिसर्च है।
अनुसंधान (शोध) के चार अंग होते हैं
• ज्ञान क्षेत्र की किसी समस्या को सुलझाने की प्रक्रिया
• प्रासंगिक तथ्यों का संकलन
•विवेकपूर्ण अध्ययन/विश्लेषण
• परिणामस्वरूप निर्णय
अनुसंधान की प्रमुख परिभाषाएँ
(Major Definitions of Research)
पी.वी. यंग- “अनुसंधान एक ऐसी व्यवस्थित विधि है जिसके द्वारा नवीन तथ्यों को खोजने अथवा पुराने तथ्यों की विषयवस्तु, उनकी क्रमबद्धता, अंतःसंबंध, कार्य-कारण व्याख्या और उनके निहित नैसर्गिक नियमों के पुष्टिकरण का कार्य किया जाता है।”
जेम्स ड्रेवर- “किसी क्षेत्र में ज्ञान अथवा सत्यापन हेतु की जाने वाली क्रमबद्ध खोज ही अनुसंधान है। "
अनुसंधान की विशेषताएँ (Characteristics of Research)
• अनुसंधान का उद्देश्य किसी समस्या का वैज्ञानिक विधि से समाधान
ढूंढना है।
• अनुसंधान में एक सामान्य परीक्षण में विश्वसनीयता, वस्तुनिष्ठता और प्रयोग को प्राथमिकता दी जाती है।
• यह पूर्णत: तार्किक और वस्तुनिष्ठ प्रक्रिया है। परिकल्पना को सिद्ध करने के स्थान पर उसके परीक्षण पर बल दिया जाता है।
• अनुसंधान सिर्फ सूचनाओं की पुनः प्राप्ति या संग्रहण नहीं करता, बल्कि अनुसंधान में व्यापीकरण नियमों या सिद्धांतों के विकास पर बल दिया जाता है।
• अनुसंधान में आँकड़ों के संग्रहण के लिये विधियों, प्रविधियों व वैध उपकरणों का प्रयोग किया जाता है। उसके बाद इन आँकड़ों का शोधन, संलेखन, अभिकलन व विश्लेषण किया जाता है।
• अनुसंधान करने के लिये अनुसंधान प्रश्न तैयार करना आरंभिक अनिवार्यता होती है।
• अनुसंधान की गुणवत्ता अनुसंधान की प्रासंगिकता से तय होती है। • अनुसंधान किसी भी मत को ज्ञान प्राप्ति की विधि नहीं मानता है, बल्कि यह उन मत या बातों को स्वीकार करता है जिन्हें प्रेक्षण द्वारा परखा जा सके।
• अनुसंधान में वैज्ञानिक पद्धति का मुख्य उद्देश्य अनुसंधान में नए मापदंडों का प्रयोग होता है।
• अनुसंधान में व्यक्तिगत पक्षों, भावनाओं तथा विचारों को महत्त्व नहीं
दिया जाता है।
• अनुसंधान की गहराई अनुसंधान द्वारा अर्जित तथ्यों पर आधारित होती है।
•अनुसंधान कार्यों को सैद्धांतिक व व्यावहारिक तरीके से भी कर सकते हैं। सैद्धांतिक कार्य वैज्ञानिक विधि के द्वारा तथा व्यावहारिक कार्य क्रियात्मक अनुसंधान के द्वारा किया जाता है।
अनुसंधान (शोध) की प्रकृति (Nature of Research)
Professors Adda (UGC NET JRF )
• अनुसंधान एक बौद्धिक, तार्किक व वैज्ञानिक प्रक्रिया है, जो नए ज्ञान को प्रकाश में लाती है, साथ ही पुरानी त्रुटियों एवं भ्रम धारणाओं का परिमार्जन करती है।
• अनुसंधान एक वैज्ञानिक प्रक्रिया है, जो ज्ञान के प्रचार और प्रसार में सहायक होती है।
• इसमें प्राथमिक व द्वितीयक स्रोतों (Primary and Secondary Sources) से प्राप्त आँकड़ों का विश्लेषण किया जाता है, जो किसी भी तरह के पूर्वाग्रह से मुक्त होता है ।।
• आँकड़ों के विश्लेषण में सांख्यिकी विधियों का प्रयोग किया जाता है। • अनुसंधान के लिये वैज्ञानिक अभिकल्पों (Scientific Design) का प्रयोग किया जाता है।
• अनुसंधान द्वारा प्राप्त ज्ञान को सत्यापित किया जा सकता है, क्योंकि इसके अंतर्गत किया गया निरीक्षण नियंत्रित एवं वस्तुनिष्ठ होता है। • इसके द्वारा किसी नए तथ्य, विधि या वस्तु की खोज की जाती है या फिर प्राचीन तथ्य, सिद्धांत, विधि या वस्तु में परिवर्तन किया जाता है।
• आँकड़ों को प्राप्त करने के लिये विश्वसनीय एवं वैध उपकरणों का प्रयोग किया जाता है।
• अनुसंधान के जटिल घटनाक्रमों को समझने के लिये विश्लेषण विधि प्रयोग में लाई जाती है। इस विश्लेषण के लिये परिकल्पनाओं का निर्माण एवं परीक्षण किया जाता है।
• यह सुव्यवस्थित, बौद्धिक, तर्कपूर्ण तथा वस्तुनिष्ठ प्रक्रिया होती है।
अनुसंधान के प्रकार (Types of Research)
किसी भी अनुसंधान की शुरुआत एक समस्या की पहचान के साथ होती है। तत्पश्चात् समस्या को पहचान कर उसका समाधान ढूंढा जाता है.
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Forwarded from Professor Adda NET SET CUET
🔶अनुसंधानों को दो वर्गों में विभक्त किया जाता है
मूलभूत अनुसंधान
(Fundamental or Basic Research)
एंड्रीआस- "मूलभूत अनुसंधान का मुख्य उद्देश्य नई प्ररचनाओं (Design) का निर्माण करना है।"
मूलभूत अनुसंधान का मुख्य ध्येय वैज्ञानिक सिद्धांतों के माध्यम से प्राकृतिक या अन्य घटनाओं की बेहतर समझ को विकसित करना है। मूलभूत अनुसंधान नए विचारों व सिद्धांतों का निर्माण करता है। जो विभिन्न क्षेत्रों में प्रगति और विकास का आधार बनता है।
• जीन पियाजे ने मूलभूत अथवा मौलिक अनुसंधान के आधार पर
ही मानव विकास का सिद्धांत दिया।
• मूलभूत अनुसंधान अथवा मौलिक अनुसंधान के सिद्धांतों का उपयोग अनुप्रयुक्त अनुसंधान में किया जाता है।
व्यावहारिक अनुसंधान
(Applied Research)
एंड्रीआस- "तथ्यों द्वारा यदि अनुसंधानकर्ता किसी क्रियात्मक समस्या का समाधान करे तो यह अनुसंधान व्यावहारिक अनुसंधान की श्रेणी में आता है।"
व्यावहारिक अनुसंधान वैज्ञानिक अध्ययन और अनुसंधान से संबंधित
है, जिसमें व्यावहारिक समस्याओं को सुलझाने का प्रयास किया जाता है। इस अनुसंधान का प्रयोग दैनिक समस्याओं एवं नवीन प्रौद्योगिकियों (Technologies) के विकास के लिये किया जाता है। व्यावहारिक शोध में प्रबंधकीय ढंग से ज्यादा संगठनात्मक शैली
प्रभावशाली होगी।
एडवर्ड और क्रॉनबैंक का वर्गीकरण
अनुसंधान का एक भाग मुख्य तथ्य ( Facts) का संकलन होता है। आधार सामग्री के अध्ययन और विश्लेषण द्वारा तथ्यों का संकलन और संयोजन किया जाता है। मानविकी और समाज विज्ञान जुड़े अनुसंधानों में किसी न किसी रूप में व्यक्तिगत प्रभाव लक्षित होता ही है, लेकिन शोधकर्त्ता की विश्लेषणात्मक क्षमता उसे वस्तुनिष्ठ और तार्किक निष्कर्ष प्रदान करती है।
अनुसंधान एक विकासोन्मुख प्रत्यय है, इसकी प्रकृति गत्यात्मक है. दृष्टिकोण वैज्ञानिक है, विकास अभिसंचयी है तथा ज्ञान एवं विद्वता का दिग्दर्शक है। इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए एडवर्ड तथा क्रॉनबैंक का वर्गीकरण उचित प्रतीत होता है। जो निम्न 4 रूपों में है
सर्वेक्षण अनुसंधान (Survey Research)
इस प्रकार के अनुसंधान का संबंध दो या दो से अधिक चरों से संबंधित घटनाओं के आँकड़ों का संकलन व वर्गीकरण से होता है, ताकि दोनों चरों के मध्य साहचर्यात्मक संबंधों को जाना जा सके। इस प्रकार के अनुसंधान का स्वरूप अन्वेषणात्मक (Exploratory) रहता है। इसके द्वारा जनसंख्या का अध्ययन सफलतापूर्वक किया जा सकता है।
प्रविधि अनुसंधान (Technical Research)
इस प्रकार के अनुसंधान का संबंध अवलोकन (निरीक्षण) विधि से संबंधित समस्याओं के समाधान से है। जब किसी चर के अवलोकन की एक या एक से अधिक विधियाँ उपलब्ध हों तो प्रविधि अनुसंधान इन विधियों का तुलनात्मक अध्ययन करके उसके गुण व कारकों के आधार पर प्रभाविता का स्पष्टीकरण करता है।
व्यावहारिक अनुसंधान (Applied Research)
इस प्रकार के अनुसंधान द्वारा व्यावहारिक समस्याओं का समाधान प्रस्तुत किया जाता है।
उदाहरण- अगर किसी दैनिक समस्या के समाधान के लिये हमारे पास अनेक विधियाँ हों और हमें सर्वोत्तम विधि का चुनाव करना हो तो इस प्रकार का अनुसंधान उसमें सहायक होता है।
आलोचनात्मक अनुसंधान (Critical Research)
इस प्रकार का अनुसंधान पूर्व-धारणा पर आधारित होता है, जहाँ अनुसंधानकर्त्ता यह विचार करता है कि यदि यह अनुसंधान किया जाए तो कुछ विशेष ज्ञान की प्राप्ति होगी या कुछ नए तथ्य प्रकाश में आएंगे।
मूलभूत अनुसंधान
(Fundamental or Basic Research)
एंड्रीआस- "मूलभूत अनुसंधान का मुख्य उद्देश्य नई प्ररचनाओं (Design) का निर्माण करना है।"
मूलभूत अनुसंधान का मुख्य ध्येय वैज्ञानिक सिद्धांतों के माध्यम से प्राकृतिक या अन्य घटनाओं की बेहतर समझ को विकसित करना है। मूलभूत अनुसंधान नए विचारों व सिद्धांतों का निर्माण करता है। जो विभिन्न क्षेत्रों में प्रगति और विकास का आधार बनता है।
• जीन पियाजे ने मूलभूत अथवा मौलिक अनुसंधान के आधार पर
ही मानव विकास का सिद्धांत दिया।
• मूलभूत अनुसंधान अथवा मौलिक अनुसंधान के सिद्धांतों का उपयोग अनुप्रयुक्त अनुसंधान में किया जाता है।
व्यावहारिक अनुसंधान
(Applied Research)
एंड्रीआस- "तथ्यों द्वारा यदि अनुसंधानकर्ता किसी क्रियात्मक समस्या का समाधान करे तो यह अनुसंधान व्यावहारिक अनुसंधान की श्रेणी में आता है।"
व्यावहारिक अनुसंधान वैज्ञानिक अध्ययन और अनुसंधान से संबंधित
है, जिसमें व्यावहारिक समस्याओं को सुलझाने का प्रयास किया जाता है। इस अनुसंधान का प्रयोग दैनिक समस्याओं एवं नवीन प्रौद्योगिकियों (Technologies) के विकास के लिये किया जाता है। व्यावहारिक शोध में प्रबंधकीय ढंग से ज्यादा संगठनात्मक शैली
प्रभावशाली होगी।
एडवर्ड और क्रॉनबैंक का वर्गीकरण
अनुसंधान का एक भाग मुख्य तथ्य ( Facts) का संकलन होता है। आधार सामग्री के अध्ययन और विश्लेषण द्वारा तथ्यों का संकलन और संयोजन किया जाता है। मानविकी और समाज विज्ञान जुड़े अनुसंधानों में किसी न किसी रूप में व्यक्तिगत प्रभाव लक्षित होता ही है, लेकिन शोधकर्त्ता की विश्लेषणात्मक क्षमता उसे वस्तुनिष्ठ और तार्किक निष्कर्ष प्रदान करती है।
अनुसंधान एक विकासोन्मुख प्रत्यय है, इसकी प्रकृति गत्यात्मक है. दृष्टिकोण वैज्ञानिक है, विकास अभिसंचयी है तथा ज्ञान एवं विद्वता का दिग्दर्शक है। इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए एडवर्ड तथा क्रॉनबैंक का वर्गीकरण उचित प्रतीत होता है। जो निम्न 4 रूपों में है
सर्वेक्षण अनुसंधान (Survey Research)
इस प्रकार के अनुसंधान का संबंध दो या दो से अधिक चरों से संबंधित घटनाओं के आँकड़ों का संकलन व वर्गीकरण से होता है, ताकि दोनों चरों के मध्य साहचर्यात्मक संबंधों को जाना जा सके। इस प्रकार के अनुसंधान का स्वरूप अन्वेषणात्मक (Exploratory) रहता है। इसके द्वारा जनसंख्या का अध्ययन सफलतापूर्वक किया जा सकता है।
प्रविधि अनुसंधान (Technical Research)
इस प्रकार के अनुसंधान का संबंध अवलोकन (निरीक्षण) विधि से संबंधित समस्याओं के समाधान से है। जब किसी चर के अवलोकन की एक या एक से अधिक विधियाँ उपलब्ध हों तो प्रविधि अनुसंधान इन विधियों का तुलनात्मक अध्ययन करके उसके गुण व कारकों के आधार पर प्रभाविता का स्पष्टीकरण करता है।
व्यावहारिक अनुसंधान (Applied Research)
इस प्रकार के अनुसंधान द्वारा व्यावहारिक समस्याओं का समाधान प्रस्तुत किया जाता है।
उदाहरण- अगर किसी दैनिक समस्या के समाधान के लिये हमारे पास अनेक विधियाँ हों और हमें सर्वोत्तम विधि का चुनाव करना हो तो इस प्रकार का अनुसंधान उसमें सहायक होता है।
आलोचनात्मक अनुसंधान (Critical Research)
इस प्रकार का अनुसंधान पूर्व-धारणा पर आधारित होता है, जहाँ अनुसंधानकर्त्ता यह विचार करता है कि यदि यह अनुसंधान किया जाए तो कुछ विशेष ज्ञान की प्राप्ति होगी या कुछ नए तथ्य प्रकाश में आएंगे।
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