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🔶चीता परियोजना 🐆
▪️भारत में 70 साल बाद फिर से हो चुकी हैं चीतों की एंट्री
▪️कूनो पालपुर राष्ट्रीय अभयारण्य (मध्य प्रदेश)
▪️करौली और धौलपुर भी बन चुके हैं इस प्रोजेक्ट के हिस्सेदार
▪️चर्चा में क्यों - वर्ष 1952 में, भारत में चीते की प्रजाति को कर दिया था विलुप्त घोषित।
▪️हाल ही में नामिबिया देश से लाए गए है 8 चीते।
▪️भारत में बाघ को राष्ट्रीय पशु का दर्जा हासिल है
▪️इसकी देखरेख और संरक्षण के लिए सर्वोत्तम उपाय सरकार की ओर किए जाते हैं
▪️यही कारण है कि विश्व में सबसे ज्यादा बाघों की संख्या भारत में वर्तमान समय में देश में कुल 52 टाइगर रिजर्व हैं
▪️भारत का पहला बाघ रिजर्व जिम कार्बेट है
▪️पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा बाघ भारत में पाए जाते हैं
▪️देश के कुल 18 राज्यों में बाघ पाए जाते हैं
▪️2019 में आई रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में 2967 बाघ हैं
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▪️भारत में 70 साल बाद फिर से हो चुकी हैं चीतों की एंट्री
▪️कूनो पालपुर राष्ट्रीय अभयारण्य (मध्य प्रदेश)
▪️करौली और धौलपुर भी बन चुके हैं इस प्रोजेक्ट के हिस्सेदार
▪️चर्चा में क्यों - वर्ष 1952 में, भारत में चीते की प्रजाति को कर दिया था विलुप्त घोषित।
▪️हाल ही में नामिबिया देश से लाए गए है 8 चीते।
▪️भारत में बाघ को राष्ट्रीय पशु का दर्जा हासिल है
▪️इसकी देखरेख और संरक्षण के लिए सर्वोत्तम उपाय सरकार की ओर किए जाते हैं
▪️यही कारण है कि विश्व में सबसे ज्यादा बाघों की संख्या भारत में वर्तमान समय में देश में कुल 52 टाइगर रिजर्व हैं
▪️भारत का पहला बाघ रिजर्व जिम कार्बेट है
▪️पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा बाघ भारत में पाए जाते हैं
▪️देश के कुल 18 राज्यों में बाघ पाए जाते हैं
▪️2019 में आई रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में 2967 बाघ हैं
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POLITICAL SCIENCE MODEL PAPER 4.pdf
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🔶 Sociology
1.कल्चर एंड एनवायरमेंट पुस्तक के लेखक हैं।
Ans . इरविन ऑल्टमैन, मार्टिन एम केमर्स।
2. कल्चर एंड एनवायरमेंट वीविंग न्यू कनेक्शन पुस्तक के लेखक कौन हैं।
Ans . डेविड जैंडविलेट ।
3. मीडिया कल्चर एंड एनवायरमेंट पुस्तक के लेखक हैं।
Ans एलिसन एंडरसन।
4. एनवायरमेंट एंड सोसायटी पुस्तक के लेखक कौन हैं।
Ans . एरिका काॅर्डवर्थ।
महर्षि महेश योगी का ट्रान्सेंडैंटल मेडिटेशन आंदोलन था
न्यूयॉर्क शहर में वेदांत सोसायटी की स्थापना किसने की।
Ans. विवेकानंद।
हिस्ट्री ऑफ ह्यूमन मैरिज पुस्तक के लेखक हैं।
Ans एडवर्ड वेस्टरमार्क
हर्मेन्युटिक्स का जनक कौन हैं।
Ans फ्रेडरिक स्क्लेअर्मेचेर।
गहन हर्मेन्युटिक्स व्याख्यात्मक ज्ञान का एक रूप कहा है।
Ans . जै हेबरमास।
ट्रस्टी शिप का काॅन्सेप्ट किसने दिया।
Ans. महात्मा गांधी।
गठबंधन सिध्दांत के मुख्य प्रस्तावक कौन हैं।
Ans. क्लाउड लेवी स्ट्राॅस।
अवकाश वर्ग का सिद्धांत किसने दिया था ।
Ans . टी वेब्लने ।
सांस्कृतिक पारिस्थितिकी शब्द किसने गढ़ा है।
Ans. जुलियन स्टीवर्ड
सांस्कृतिक पारिस्थितिकी शब्द किसने गढ़ा है।
Ans. जुलियन स्टीवर्ड
ट्रोबि यांड आइलैंडर्स का अध्ययन किसने किया।
Ans बी मैलिनोबस्की
ऐतिहासिक ( हिस्टोरिस्मस) शब्द जर्मन दार्शनिक द्वारा गढ़ा गया था।
Ans . कार्ल विल्हेम फ्रेडरिक श्लेगल ।
इमाइल दुर्खीम की पुस्तक आत्महत्या किस सन् में प्रकाशित हुई।
Ans 1897
एंथोनी गिन्डेंस की पुस्तक इमाइल दुर्खीम किस सन् में प्रकाशित हुई।
Ans 1978
वेदिक इंडिया पुस्तक किसकी हैं।
Ans जी एस घुर्ये
Six villages of Bengal किसकी प्रख्यात पुस्तक हैं।
रामकृष्ण मुखर्जी
द थर्ड वेव किसकी पुस्तक हैं।
Ans एल्विन टाॅफलर
जर्मन आइडियोलॉजी 1994 पुस्तक के लेखक कौन हैं।
लुईस डुयूमो
किसके अनुसार एक उपकल्पना एक प्रस्थापना है जिसका परीक्षण किया जाना है।
Ans बोगाडर्स ।
सार्वभौमिक व्याख्यात्मक किसने दिया।
Ans . गेडमर ।
किसने हठधर्मी विज्ञान की अवधारणा दी।
Ans. कार्ल पापर।
निगमनात्मक पद्धति किसने दी।
Ans अरस्तू।
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1.कल्चर एंड एनवायरमेंट पुस्तक के लेखक हैं।
Ans . इरविन ऑल्टमैन, मार्टिन एम केमर्स।
2. कल्चर एंड एनवायरमेंट वीविंग न्यू कनेक्शन पुस्तक के लेखक कौन हैं।
Ans . डेविड जैंडविलेट ।
3. मीडिया कल्चर एंड एनवायरमेंट पुस्तक के लेखक हैं।
Ans एलिसन एंडरसन।
4. एनवायरमेंट एंड सोसायटी पुस्तक के लेखक कौन हैं।
Ans . एरिका काॅर्डवर्थ।
महर्षि महेश योगी का ट्रान्सेंडैंटल मेडिटेशन आंदोलन था
न्यूयॉर्क शहर में वेदांत सोसायटी की स्थापना किसने की।
Ans. विवेकानंद।
हिस्ट्री ऑफ ह्यूमन मैरिज पुस्तक के लेखक हैं।
Ans एडवर्ड वेस्टरमार्क
हर्मेन्युटिक्स का जनक कौन हैं।
Ans फ्रेडरिक स्क्लेअर्मेचेर।
गहन हर्मेन्युटिक्स व्याख्यात्मक ज्ञान का एक रूप कहा है।
Ans . जै हेबरमास।
ट्रस्टी शिप का काॅन्सेप्ट किसने दिया।
Ans. महात्मा गांधी।
गठबंधन सिध्दांत के मुख्य प्रस्तावक कौन हैं।
Ans. क्लाउड लेवी स्ट्राॅस।
अवकाश वर्ग का सिद्धांत किसने दिया था ।
Ans . टी वेब्लने ।
सांस्कृतिक पारिस्थितिकी शब्द किसने गढ़ा है।
Ans. जुलियन स्टीवर्ड
सांस्कृतिक पारिस्थितिकी शब्द किसने गढ़ा है।
Ans. जुलियन स्टीवर्ड
ट्रोबि यांड आइलैंडर्स का अध्ययन किसने किया।
Ans बी मैलिनोबस्की
ऐतिहासिक ( हिस्टोरिस्मस) शब्द जर्मन दार्शनिक द्वारा गढ़ा गया था।
Ans . कार्ल विल्हेम फ्रेडरिक श्लेगल ।
इमाइल दुर्खीम की पुस्तक आत्महत्या किस सन् में प्रकाशित हुई।
Ans 1897
एंथोनी गिन्डेंस की पुस्तक इमाइल दुर्खीम किस सन् में प्रकाशित हुई।
Ans 1978
वेदिक इंडिया पुस्तक किसकी हैं।
Ans जी एस घुर्ये
Six villages of Bengal किसकी प्रख्यात पुस्तक हैं।
रामकृष्ण मुखर्जी
द थर्ड वेव किसकी पुस्तक हैं।
Ans एल्विन टाॅफलर
जर्मन आइडियोलॉजी 1994 पुस्तक के लेखक कौन हैं।
लुईस डुयूमो
किसके अनुसार एक उपकल्पना एक प्रस्थापना है जिसका परीक्षण किया जाना है।
Ans बोगाडर्स ।
सार्वभौमिक व्याख्यात्मक किसने दिया।
Ans . गेडमर ।
किसने हठधर्मी विज्ञान की अवधारणा दी।
Ans. कार्ल पापर।
निगमनात्मक पद्धति किसने दी।
Ans अरस्तू।
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🔶संगोष्ठी/विचारगोष्ठी (Seminar)
संगोष्ठी एक ऐसी प्रक्रिया है, जो शोधकर्त्ताओं के चिंतन स्तर को सुषुप्त अवस्था से जाग्रत अवस्था की ओर लाती है। इसके द्वारा मनुष्य की उच्च क्रिया शक्तियों का पोषण किया जाता है तथा उसे चिंतन की नई दिशा की ओर उन्मुख किया जाता है। इसे चिंतन की अंतःप्रक्रिया भी कहते हैं।
◾️इसमें सामूहिक परिचर्चा करके विषय के जटिल पक्षों की सरल व्याख्या की जाती है। संगोष्ठी में प्रतिभाग करने वाले सभी सदस्यों को अपने विचारों को रखने की पूर्ण स्वतंत्रता होती है।
◾️संगोष्ठी की प्रक्रिया (Process of Seminar)
• संगोष्ठी हेतु किसी प्रकरण या विषय का चयन किया जाता है।
• संगोष्ठी का प्रकरण पूर्व नियोजित होता है।
• प्रकरण प्रपत्र तैयार करने वाला व्यक्ति वक्ता कहलाता है।
• प्रकरण की प्रमुख विषयवस्तु सभी को पहले ही बता दी जाती है, जिससे संप्रेषण और विषयवस्तु के स्वरूप को समझने में सहायता मिलती है।
• विभिन्न संस्थाओं से व्यक्तियों को आमंत्रित किया जाता है।
• संगोष्ठी के कार्य संचालन के लिये सहभागियों में से ही अध्यक्ष का चयन किया जाता है।
• संचालन प्रक्रिया अध्यक्ष निर्धारित करता है। • परिचर्चा में अध्यक्ष की अनुमति से सभी वक्ता अपने-अपने विचार रखते हैं।
• प्रकरण प्रस्तुत करने के पश्चात् अध्यक्ष प्रश्न पूछने का अवसर प्रदान करता है।
• उसके बाद अध्यक्ष अपने विचार प्रस्तुत करता है।
• संगोष्ठी की कार्यप्रणाली तथा परिचर्चा के प्रमुख अवयवों/तत्त्वों का
आलेख तैयार किया जाता है।
• प्रकरण तथा वाद-विवादों के निष्कर्षों को प्रकाशित किया जाता है।
♦संगोष्ठी के प्रकार (Types of Seminar)
संगोष्ठी चार प्रकार की होती है
• लघु संगोष्ठी (Mini Seminar): कक्षा में किसी विषय पर चर्चा करने के लिये आयोजित संगोष्ठी को 'मिनी सेमिनार' अथवा लघु संगोष्ठी कहा जाता है।
• मुख्य या बड़ी संगोष्ठी (Main Seminar): जो सेमिनार किसी संस्था या विभाग के स्तर पर आयोजित किया जाता है, उसे 'मुख्य संगोष्ठी या मेन सेमिनार' कहते हैं।
• राष्ट्रीय संगोष्ठी (National Seminar): राष्ट्रीय स्तर पर किसी संगठन द्वारा आयोजित संगोष्ठी को 'राष्ट्रीय संगोष्ठी' कहते हैं।
• अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी (International Seminar): ऐसी संगोष्ठियाँ जिनका आयोजन यूनेस्को एवं अन्य अंतर्राष्ट्रीय संगठनों द्वारा किया जाता है, उन्हें अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी कहते हैं।
🔶🔶🔶कार्यशाला (Workshop)🔶🔶🔶
◾️कार्यशाला एक छोटे समूह हेतु संक्षिप्त गहन पाठ्यक्रम है जिसमें किसी विशेष समस्या के समाधान के लिये कौशल या तकनीकी विकास पर जोर दिया जाता है। कार्यशाला अनुसंधान के वास्तविक एवं क्रियात्मक पक्ष के विकास पर बल देती है।
♦ इससे यह बताया जाता है कि अनुसंधान के विभिन्न क्षेत्रों में, कौन-कौन सी विधियों, उपायों एवं निष्कर्षों को कब, कहाँ, कैसे और क्यों प्रयोग किया जाए तथा प्रायोगिक परिस्थितियों में किन-किन सावधानियों का ध्यान रखकर आगे बढ़ा जाए।
♦कार्यशाला को क्रियात्मक कौशलों के विकास के लिये प्रशिक्षण प्रक्रिया का एक सतत् क्षेत्र माना जाता है। इस प्रकार शोधकर्त्ताओं से
क्रियात्मक कार्य संपन्न कराया जाता है, साथ ही उन्हें व्यावसायिक प्रशिक्षण भी प्रदान किया जाता है।
◾️Join PROFESSORS ADDA
◾️'कार्यशाला' शब्द का प्रायः प्रयोग अभियांत्रिकी (Engineering) क्षेत्र में होता है। अनुसंधान के क्षेत्र में भी इसे अभियांत्रिकी से ही लिया गया है।
◾️कार्यशाला में भाग लेने वाले व्यक्ति
(Persons Participating in Workshop)
• संचालक (Convenor)
• आयोजक (Organizer)
• विषय विशेषज्ञ (Subject Expert)
• सहभागी (Participants)
◾️कार्यशाला के उद्देश्य (Objectives of Workshops )
• विषय से संबंधित जटिल समस्याओं का समाधान करना।
• किसी विषय के विविध पक्षों का विवेचन करना • समस्या के समाधान एवं उद्देश्यों की पूर्ति के लिये अनुसंधान विधियों का निर्धारण करना।
• तात्कालिक समस्याओं के प्रति सक्रियता वर्तमान समस्याग्रस्त क्षेत्रों
के प्रति जागरूकता।
• अनुसंधान अभिकल्प या शोध डिज़ाइन को तैयार करना ।
• अनुसंधान करने की योग्यताओं का विकास करना ।
• संबंधित साहित्य संग्रह का संरक्षण करना।
• कार्यशाला के माध्यम से व्यावसायिक क्षमता का विकास करना।
• कार्यशाला में व्यक्तिगत रूप से भाग लेने एवं कार्य करने की क्षमता
विकसित करना।
• प्रविधियों, उपकरणों एवं यंत्रों के चयन की आवश्यक शर्तों की जानकारी प्राप्त करना।
संगोष्ठी एक ऐसी प्रक्रिया है, जो शोधकर्त्ताओं के चिंतन स्तर को सुषुप्त अवस्था से जाग्रत अवस्था की ओर लाती है। इसके द्वारा मनुष्य की उच्च क्रिया शक्तियों का पोषण किया जाता है तथा उसे चिंतन की नई दिशा की ओर उन्मुख किया जाता है। इसे चिंतन की अंतःप्रक्रिया भी कहते हैं।
◾️इसमें सामूहिक परिचर्चा करके विषय के जटिल पक्षों की सरल व्याख्या की जाती है। संगोष्ठी में प्रतिभाग करने वाले सभी सदस्यों को अपने विचारों को रखने की पूर्ण स्वतंत्रता होती है।
◾️संगोष्ठी की प्रक्रिया (Process of Seminar)
• संगोष्ठी हेतु किसी प्रकरण या विषय का चयन किया जाता है।
• संगोष्ठी का प्रकरण पूर्व नियोजित होता है।
• प्रकरण प्रपत्र तैयार करने वाला व्यक्ति वक्ता कहलाता है।
• प्रकरण की प्रमुख विषयवस्तु सभी को पहले ही बता दी जाती है, जिससे संप्रेषण और विषयवस्तु के स्वरूप को समझने में सहायता मिलती है।
• विभिन्न संस्थाओं से व्यक्तियों को आमंत्रित किया जाता है।
• संगोष्ठी के कार्य संचालन के लिये सहभागियों में से ही अध्यक्ष का चयन किया जाता है।
• संचालन प्रक्रिया अध्यक्ष निर्धारित करता है। • परिचर्चा में अध्यक्ष की अनुमति से सभी वक्ता अपने-अपने विचार रखते हैं।
• प्रकरण प्रस्तुत करने के पश्चात् अध्यक्ष प्रश्न पूछने का अवसर प्रदान करता है।
• उसके बाद अध्यक्ष अपने विचार प्रस्तुत करता है।
• संगोष्ठी की कार्यप्रणाली तथा परिचर्चा के प्रमुख अवयवों/तत्त्वों का
आलेख तैयार किया जाता है।
• प्रकरण तथा वाद-विवादों के निष्कर्षों को प्रकाशित किया जाता है।
♦संगोष्ठी के प्रकार (Types of Seminar)
संगोष्ठी चार प्रकार की होती है
• लघु संगोष्ठी (Mini Seminar): कक्षा में किसी विषय पर चर्चा करने के लिये आयोजित संगोष्ठी को 'मिनी सेमिनार' अथवा लघु संगोष्ठी कहा जाता है।
• मुख्य या बड़ी संगोष्ठी (Main Seminar): जो सेमिनार किसी संस्था या विभाग के स्तर पर आयोजित किया जाता है, उसे 'मुख्य संगोष्ठी या मेन सेमिनार' कहते हैं।
• राष्ट्रीय संगोष्ठी (National Seminar): राष्ट्रीय स्तर पर किसी संगठन द्वारा आयोजित संगोष्ठी को 'राष्ट्रीय संगोष्ठी' कहते हैं।
• अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी (International Seminar): ऐसी संगोष्ठियाँ जिनका आयोजन यूनेस्को एवं अन्य अंतर्राष्ट्रीय संगठनों द्वारा किया जाता है, उन्हें अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी कहते हैं।
🔶🔶🔶कार्यशाला (Workshop)🔶🔶🔶
◾️कार्यशाला एक छोटे समूह हेतु संक्षिप्त गहन पाठ्यक्रम है जिसमें किसी विशेष समस्या के समाधान के लिये कौशल या तकनीकी विकास पर जोर दिया जाता है। कार्यशाला अनुसंधान के वास्तविक एवं क्रियात्मक पक्ष के विकास पर बल देती है।
♦ इससे यह बताया जाता है कि अनुसंधान के विभिन्न क्षेत्रों में, कौन-कौन सी विधियों, उपायों एवं निष्कर्षों को कब, कहाँ, कैसे और क्यों प्रयोग किया जाए तथा प्रायोगिक परिस्थितियों में किन-किन सावधानियों का ध्यान रखकर आगे बढ़ा जाए।
♦कार्यशाला को क्रियात्मक कौशलों के विकास के लिये प्रशिक्षण प्रक्रिया का एक सतत् क्षेत्र माना जाता है। इस प्रकार शोधकर्त्ताओं से
क्रियात्मक कार्य संपन्न कराया जाता है, साथ ही उन्हें व्यावसायिक प्रशिक्षण भी प्रदान किया जाता है।
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◾️'कार्यशाला' शब्द का प्रायः प्रयोग अभियांत्रिकी (Engineering) क्षेत्र में होता है। अनुसंधान के क्षेत्र में भी इसे अभियांत्रिकी से ही लिया गया है।
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(Persons Participating in Workshop)
• संचालक (Convenor)
• आयोजक (Organizer)
• विषय विशेषज्ञ (Subject Expert)
• सहभागी (Participants)
◾️कार्यशाला के उद्देश्य (Objectives of Workshops )
• विषय से संबंधित जटिल समस्याओं का समाधान करना।
• किसी विषय के विविध पक्षों का विवेचन करना • समस्या के समाधान एवं उद्देश्यों की पूर्ति के लिये अनुसंधान विधियों का निर्धारण करना।
• तात्कालिक समस्याओं के प्रति सक्रियता वर्तमान समस्याग्रस्त क्षेत्रों
के प्रति जागरूकता।
• अनुसंधान अभिकल्प या शोध डिज़ाइन को तैयार करना ।
• अनुसंधान करने की योग्यताओं का विकास करना ।
• संबंधित साहित्य संग्रह का संरक्षण करना।
• कार्यशाला के माध्यम से व्यावसायिक क्षमता का विकास करना।
• कार्यशाला में व्यक्तिगत रूप से भाग लेने एवं कार्य करने की क्षमता
विकसित करना।
• प्रविधियों, उपकरणों एवं यंत्रों के चयन की आवश्यक शर्तों की जानकारी प्राप्त करना।
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🔶🔶🔶संगोष्ठी (Seminar)🔶🔶🔶
◾️संगोष्ठी एक ऐसी प्रक्रिया है, जो शोधकर्त्ताओं के चिंतन स्तर को सुषुप्त अवस्था से जाग्रत अवस्था की ओर लाती है। इसके द्वारा मनुष्य की उच्च क्रिया शक्तियों का पोषण किया जाता है तथा उसे चिंतन की नई दिशा की ओर उन्मुख किया जाता है। इसे चिंतन की अंतःप्रक्रिया भी कहते हैं। इसमें सामूहिक परिचर्चा करके विषय के जटिल पक्षों की सरल व्याख्या की जाती है। संगोष्ठी में प्रतिभाग करने वाले सभी सदस्यों को अपने विचारों को रखने की पूर्ण स्वतंत्रता होती है।
◾️संगोष्ठी की प्रक्रिया (Process of Seminar)
• संगोष्ठी हेतु किसी प्रकरण या विषय का चयन किया जाता है।
• संगोष्ठी का प्रकरण पूर्व नियोजित होता है।
• प्रकरण प्रपत्र तैयार करने वाला व्यक्ति वक्ता कहलाता है।
• प्रकरण की प्रमुख विषयवस्तु सभी को पहले ही बता दी जाती है, जिससे संप्रेषण और विषयवस्तु के स्वरूप को समझने में सहायता मिलती है।
• विभिन्न संस्थाओं से व्यक्तियों को आमंत्रित किया जाता है।
• संगोष्ठी के कार्य संचालन के लिये सहभागियों में से ही अध्यक्ष का चयन किया जाता है।
• संचालन प्रक्रिया अध्यक्ष निर्धारित करता है। • परिचर्चा में अध्यक्ष की अनुमति से सभी वक्ता अपने-अपने विचार रखते हैं।
• प्रकरण प्रस्तुत करने के पश्चात् अध्यक्ष प्रश्न पूछने का अवसर प्रदान करता है।
• उसके बाद अध्यक्ष अपने विचार प्रस्तुत करता है।
• संगोष्ठी की कार्यप्रणाली तथा परिचर्चा के प्रमुख अवयवों/तत्त्वों का
आलेख तैयार किया जाता है।
• प्रकरण तथा वाद-विवादों के निष्कर्षों को प्रकाशित किया जाता है।
◾️ Professors Adda ( 7690022111)
संगोष्ठी के प्रकार (Types of Seminar)
संगोष्ठी चार प्रकार की होती है
• लघु संगोष्ठी (Mini Seminar): कक्षा में किसी विषय पर चर्चा करने के लिये आयोजित संगोष्ठी को 'मिनी सेमिनार' अथवा लघु संगोष्ठी कहा जाता है।
• मुख्य या बड़ी संगोष्ठी (Main Seminar): जो सेमिनार किसी संस्था या विभाग के स्तर पर आयोजित किया जाता है, उसे 'मुख्य संगोष्ठी या मेन सेमिनार' कहते हैं।
• राष्ट्रीय संगोष्ठी (National Seminar): राष्ट्रीय स्तर पर किसी संगठन द्वारा आयोजित संगोष्ठी को 'राष्ट्रीय संगोष्ठी' कहते हैं।
• अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी (International Seminar): ऐसी संगोष्ठियाँ जिनका आयोजन यूनेस्को एवं अन्य अंतर्राष्ट्रीय संगठनों द्वारा किया जाता है, उन्हें अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी कहते हैं।
🔶🔶🔶सम्मेलन (Conferences)🔶🔶🔶
सम्मेलन एक औपचारिक बैठक को संदर्भित करता है, जहाँ प्रतिभागी विभिन्न विषयों पर सूचनाओं एवं विचारों का आदान-प्रदान करते हैं। इसके द्वारा सदस्य या प्रतिभागी अपनी व्यक्तिगत एवं सामूहिक समस्याओं पर विचार करते हैं।
यह एक प्रकार के बड़े समूह की सभा होती है, जहाँ सदस्य आपस में विचारों का आदान-प्रदान एवं अपने ज्ञान का संग्रहण करते हैं। प्रतिभागियों (Participants) के समूह द्वारा सम्मेलन के उद्देश्य व कार्यप्रणाली को समूह के वरिष्ठ व्यक्ति या नेता द्वारा स्पष्ट किया जाता है। उच्च शिक्षा के क्षेत्र में अधिगम के लिये एक महत्त्वपूर्ण विधि है। शोधकर्त्ता (अनुसंधानकर्त्ता) इसके द्वारा अनुसंधान के क्षेत्र में संज्ञानात्मक (ज्ञानात्मक) एवं भावनात्मक उद्देश्यों की प्राप्ति करता है। सम्मेलन के द्वारा विचारों और मुद्दों की व्यापक रेंज को संभव बनाया जा सकता है।
◾️सम्मेलन के प्रकार (Type of Conferences)
सम्मेलन के तीन प्रकार होते हैं
• क्षेत्रीय सम्मेलन (Regional Conference ) : क्षेत्रीय समस्याओं के संदर्भ में सम्मेलन का आयोजन।
• राष्ट्रीय सम्मेलन (National Conference): राष्ट्र संबंधी विषयों, जैसे- धार्मिक, सामाजिक, शैक्षिक आदि पर सम्मेलन का आयोजन।
• समान विचारधारा वाले लोगों से मिलने व बातचीत करने का अवसर मिलता है।
• संयम, धैर्य, कार्य कुशलता तथा सहनशीलता जैसे गुणों का विकास होता है।
• अनुसंधान संबंधी समस्याओं के प्रत्येक पक्ष का स्पष्ट निरूपण होता है।
• सहयोगात्मक भावना द्वारा समस्या समाधान की क्षमताओं का विकास होता है।
सम्मेलन (Conferences) सम्मेलन एक औपचारिक बैठक को संदर्भित करता है, जहाँ प्रतिभागी विभिन्न विषयों पर सूचनाओं एवं विचारों का आदान-प्रदान करते हैं। इसके द्वारा सदस्य या प्रतिभागी अपनी व्यक्तिगत एवं सामूहिक समस्याओं पर विचार करते हैं।
◾️सम्मेलन के प्रकार (Type of Conferences)
सम्मेलन के तीन प्रकार होते हैं
🔶 Continue Part 2
🔶🔶🔶संगोष्ठी (Seminar)🔶🔶🔶
◾️संगोष्ठी एक ऐसी प्रक्रिया है, जो शोधकर्त्ताओं के चिंतन स्तर को सुषुप्त अवस्था से जाग्रत अवस्था की ओर लाती है। इसके द्वारा मनुष्य की उच्च क्रिया शक्तियों का पोषण किया जाता है तथा उसे चिंतन की नई दिशा की ओर उन्मुख किया जाता है। इसे चिंतन की अंतःप्रक्रिया भी कहते हैं। इसमें सामूहिक परिचर्चा करके विषय के जटिल पक्षों की सरल व्याख्या की जाती है। संगोष्ठी में प्रतिभाग करने वाले सभी सदस्यों को अपने विचारों को रखने की पूर्ण स्वतंत्रता होती है।
◾️संगोष्ठी की प्रक्रिया (Process of Seminar)
• संगोष्ठी हेतु किसी प्रकरण या विषय का चयन किया जाता है।
• संगोष्ठी का प्रकरण पूर्व नियोजित होता है।
• प्रकरण प्रपत्र तैयार करने वाला व्यक्ति वक्ता कहलाता है।
• प्रकरण की प्रमुख विषयवस्तु सभी को पहले ही बता दी जाती है, जिससे संप्रेषण और विषयवस्तु के स्वरूप को समझने में सहायता मिलती है।
• विभिन्न संस्थाओं से व्यक्तियों को आमंत्रित किया जाता है।
• संगोष्ठी के कार्य संचालन के लिये सहभागियों में से ही अध्यक्ष का चयन किया जाता है।
• संचालन प्रक्रिया अध्यक्ष निर्धारित करता है। • परिचर्चा में अध्यक्ष की अनुमति से सभी वक्ता अपने-अपने विचार रखते हैं।
• प्रकरण प्रस्तुत करने के पश्चात् अध्यक्ष प्रश्न पूछने का अवसर प्रदान करता है।
• उसके बाद अध्यक्ष अपने विचार प्रस्तुत करता है।
• संगोष्ठी की कार्यप्रणाली तथा परिचर्चा के प्रमुख अवयवों/तत्त्वों का
आलेख तैयार किया जाता है।
• प्रकरण तथा वाद-विवादों के निष्कर्षों को प्रकाशित किया जाता है।
◾️ Professors Adda ( 7690022111)
संगोष्ठी के प्रकार (Types of Seminar)
संगोष्ठी चार प्रकार की होती है
• लघु संगोष्ठी (Mini Seminar): कक्षा में किसी विषय पर चर्चा करने के लिये आयोजित संगोष्ठी को 'मिनी सेमिनार' अथवा लघु संगोष्ठी कहा जाता है।
• मुख्य या बड़ी संगोष्ठी (Main Seminar): जो सेमिनार किसी संस्था या विभाग के स्तर पर आयोजित किया जाता है, उसे 'मुख्य संगोष्ठी या मेन सेमिनार' कहते हैं।
• राष्ट्रीय संगोष्ठी (National Seminar): राष्ट्रीय स्तर पर किसी संगठन द्वारा आयोजित संगोष्ठी को 'राष्ट्रीय संगोष्ठी' कहते हैं।
• अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी (International Seminar): ऐसी संगोष्ठियाँ जिनका आयोजन यूनेस्को एवं अन्य अंतर्राष्ट्रीय संगठनों द्वारा किया जाता है, उन्हें अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी कहते हैं।
🔶🔶🔶सम्मेलन (Conferences)🔶🔶🔶
सम्मेलन एक औपचारिक बैठक को संदर्भित करता है, जहाँ प्रतिभागी विभिन्न विषयों पर सूचनाओं एवं विचारों का आदान-प्रदान करते हैं। इसके द्वारा सदस्य या प्रतिभागी अपनी व्यक्तिगत एवं सामूहिक समस्याओं पर विचार करते हैं।
यह एक प्रकार के बड़े समूह की सभा होती है, जहाँ सदस्य आपस में विचारों का आदान-प्रदान एवं अपने ज्ञान का संग्रहण करते हैं। प्रतिभागियों (Participants) के समूह द्वारा सम्मेलन के उद्देश्य व कार्यप्रणाली को समूह के वरिष्ठ व्यक्ति या नेता द्वारा स्पष्ट किया जाता है। उच्च शिक्षा के क्षेत्र में अधिगम के लिये एक महत्त्वपूर्ण विधि है। शोधकर्त्ता (अनुसंधानकर्त्ता) इसके द्वारा अनुसंधान के क्षेत्र में संज्ञानात्मक (ज्ञानात्मक) एवं भावनात्मक उद्देश्यों की प्राप्ति करता है। सम्मेलन के द्वारा विचारों और मुद्दों की व्यापक रेंज को संभव बनाया जा सकता है।
◾️सम्मेलन के प्रकार (Type of Conferences)
सम्मेलन के तीन प्रकार होते हैं
• क्षेत्रीय सम्मेलन (Regional Conference ) : क्षेत्रीय समस्याओं के संदर्भ में सम्मेलन का आयोजन।
• राष्ट्रीय सम्मेलन (National Conference): राष्ट्र संबंधी विषयों, जैसे- धार्मिक, सामाजिक, शैक्षिक आदि पर सम्मेलन का आयोजन।
• समान विचारधारा वाले लोगों से मिलने व बातचीत करने का अवसर मिलता है।
• संयम, धैर्य, कार्य कुशलता तथा सहनशीलता जैसे गुणों का विकास होता है।
• अनुसंधान संबंधी समस्याओं के प्रत्येक पक्ष का स्पष्ट निरूपण होता है।
• सहयोगात्मक भावना द्वारा समस्या समाधान की क्षमताओं का विकास होता है।
सम्मेलन (Conferences) सम्मेलन एक औपचारिक बैठक को संदर्भित करता है, जहाँ प्रतिभागी विभिन्न विषयों पर सूचनाओं एवं विचारों का आदान-प्रदान करते हैं। इसके द्वारा सदस्य या प्रतिभागी अपनी व्यक्तिगत एवं सामूहिक समस्याओं पर विचार करते हैं।
◾️सम्मेलन के प्रकार (Type of Conferences)
सम्मेलन के तीन प्रकार होते हैं
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