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1. What is the weightage assigned to the "Teaching, Learning, and Resources" (TLR) parameter in the NIRF ranking framework?
Anonymous Quiz
7%
a) 20%
61%
b) 30%
23%
c) 40%
9%
d) 50%
🔥1
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Q. Which of the following is NOT a sub-parameter under the "Research and Professional Practice" (RP) parameter in the NIRF ranking framework?
Anonymous Quiz
17%
a) Research publications
17%
b) Citations
14%
c) Patents
52%
d) Student placements
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Today's 16 AUGUST 2024 Current Affairs (English Medium)
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Today's 16 AUGUST 2024 Current Affairs (Hindi Medium)
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Q. एनआईआरएफ रैंकिंग फ्रेमवर्क में "स्नातक परिणाम" (जीओ) पैरामीटर का क्या उद्देश्य है?
Anonymous Quiz
13%
ए) संस्थानों के अनुसंधान आउटपुट का मूल्यांकन करने के लिए
41%
बी) संस्थानों की शिक्षण गुणवत्ता का आकलन करने के लिए
32%
सी) स्नातकों की रोजगारिता को मापने के लिए
14%
डी) संस्थानों के बुनियादी ढांचे का मूल्यांकन करने के लिए
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Q. What is the purpose of the "Graduation Outcomes" (GO) parameter in the NIRF ranking framework?
Anonymous Quiz
17%
a) To evaluate the research output of institutions
27%
b) To assess the teaching quality of institutions
50%
c) To measure the employability of graduates
5%
d) To evaluate the infrastructure of institutions
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यूजीसी नेट जेआरएफ, यूनिट 10 के लिए भारत में उच्च शिक्षा डिजिटल पहल: @Professor_Adda *Like & Share*
भारत में उच्च शिक्षा डिजिटल पहल
1. डिजिटल इंडिया पहल:
- लॉन्च: 2015
- उद्देश्य: भारत को डिजिटल रूप से सशक्त समाज और ज्ञान अर्थव्यवस्था में बदलना।
- फोकस क्षेत्र: डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, डिजिटल गवर्नेंस, डिजिटल अर्थव्यवस्था, डिजिटल नागरिकता।
2. स्वयं SWAYAM (युवा महत्वाकांक्षी दिमागों के लिए सक्रिय सीखने का अध्ययन जाल):
- लॉन्च: 2017
- उद्देश्य: ऑनलाइन पाठ्यक्रमों और डिग्री कार्यक्रमों के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुँच प्रदान करना।
- पेशकश: इंजीनियरिंग, मानविकी और सामाजिक विज्ञान सहित विभिन्न विषयों में पाठ्यक्रम।
3. एमओओसी MOOC (बड़े पैमाने पर खुले ऑनलाइन पाठ्यक्रम):
- लॉन्च: 2014
- उद्देश्य: ऑनलाइन पाठ्यक्रमों के माध्यम से लचीले सीखने के अवसर प्रदान करना।
- पेशकश: विभिन्न विषयों में पाठ्यक्रमों की एक विस्तृत श्रृंखला, स्व-गति सीखने को सक्षम करना।
4. ऑनलाइन लैब्स (OLabs):
- लॉन्च: 2013
- उद्देश्य: वर्चुअल प्रयोगशालाओं के माध्यम से व्यावहारिक शिक्षण और व्यावहारिक कौशल की सुविधा प्रदान करना।
- फोकस क्षेत्र: भौतिकी, रसायन विज्ञान, जीवविज्ञान, और बहुत कुछ।
5. भारतीय राष्ट्रीय डिजिटल लाइब्रेरी (NDLI):
- लॉन्च: 2016
- उद्देश्य: शैक्षणिक संसाधनों के विशाल डिजिटल भंडार तक पहुँच प्रदान करना।
- उपलब्ध संसाधन: 10 मिलियन से अधिक ई-पुस्तकें, शोध पत्र और शैक्षणिक दस्तावेज।
6. स्पोकन ट्यूटोरियल प्रोजेक्ट:
- लॉन्च: 2009
- उद्देश्य: स्व-गति ट्यूटोरियल के माध्यम से मुफ़्त और ओपन-सोर्स सॉफ़्टवेयर पर प्रशिक्षण प्रदान करना।
- कवर किए गए विषय: लिनक्स, जावा, पायथन और अन्य सॉफ़्टवेयर टूल।
7. राष्ट्रीय शैक्षणिक डिपॉजिटरी (NAD):
- लॉन्च: 2017
- उद्देश्य: शैक्षणिक रिकॉर्ड और प्रमाणपत्रों का सुरक्षित भंडारण और साझाकरण।
- विशेषताएँ: शैक्षणिक दस्तावेज़ों को संग्रहीत करने, सत्यापित करने और उन तक पहुँचने के लिए डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म।
8. ई-शोध सिंधु:
- लॉन्च: 2015
- उद्देश्य: शोध पत्रों और पत्रिकाओं के विशाल संग्रह तक पहुँच प्रदान करना।
- पेशकश: 10,000 से अधिक पत्रिकाएँ और 15 मिलियन शोध पत्र।
9. विद्वान:
- लॉन्च: 2016
- उद्देश्य: विशेषज्ञों का एक राष्ट्रीय नेटवर्क बनाना और शोध सहयोग को बढ़ावा देना।
- विशेषताएँ: विशेषज्ञों के लिए डिजिटल प्रोफ़ाइल, अकादमिक नेटवर्किंग और सहयोग को सक्षम बनाना।
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10. शोध गंगोत्री:
- लॉन्च: 2016
- उद्देश्य: शोध प्रस्तावों और शोध प्रबंधों के लिए एक डिजिटल संग्रह प्रदान करना।
- विशेषताएँ: शोधकर्ताओं के लिए अपने शोध कार्य को साझा करने और सहयोग करने के लिए मंच।
11. ई-यंत्र:
- लॉन्च: 2012
- उद्देश्य: रोबोटिक्स और एम्बेडेड सिस्टम में प्रशिक्षण प्रदान करना।
- पेशकश: रोबोटिक्स के साथ सीखने और प्रयोग करने के लिए डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म।
12. FOSSEE (शिक्षा के लिए मुफ़्त और ओपन सोर्स सॉफ़्टवेयर):
- लॉन्च: 2009
- उद्देश्य: शिक्षा में मुफ़्त और ओपन-सोर्स सॉफ़्टवेयर को अपनाने को बढ़ावा देना।
- पेशकश: शिक्षकों और छात्रों के लिए प्रशिक्षण और संसाधन।
13. राष्ट्रीय ज्ञान नेटवर्क (NKN):
- लॉन्च: 2010
- उद्देश्य: पूरे भारत में शैक्षणिक संस्थानों को हाई-स्पीड नेटवर्क के ज़रिए जोड़ना।
- विशेषताएँ: संस्थानों के बीच ज्ञान साझा करने और सहयोग के लिए डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म।
14. वर्चुअल लैब:
- लॉन्च: 2013
- उद्देश्य: प्रयोगशाला उपकरणों और प्रयोगों तक दूरस्थ पहुँच प्रदान करना।
- कवर किए गए विषय: भौतिकी, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान, और बहुत कुछ।
15. ऑनलाइन प्रमाणन पाठ्यक्रम:
- लॉन्च: 2016
- उद्देश्य: ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म के माध्यम से प्रमाणन पाठ्यक्रम प्रदान करना।
- उपलब्ध पाठ्यक्रम: इंजीनियरिंग, मानविकी और सामाजिक विज्ञान सहित विभिन्न विषय।
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भारत में उच्च शिक्षा डिजिटल पहल
1. डिजिटल इंडिया पहल:
- लॉन्च: 2015
- उद्देश्य: भारत को डिजिटल रूप से सशक्त समाज और ज्ञान अर्थव्यवस्था में बदलना।
- फोकस क्षेत्र: डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, डिजिटल गवर्नेंस, डिजिटल अर्थव्यवस्था, डिजिटल नागरिकता।
2. स्वयं SWAYAM (युवा महत्वाकांक्षी दिमागों के लिए सक्रिय सीखने का अध्ययन जाल):
- लॉन्च: 2017
- उद्देश्य: ऑनलाइन पाठ्यक्रमों और डिग्री कार्यक्रमों के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुँच प्रदान करना।
- पेशकश: इंजीनियरिंग, मानविकी और सामाजिक विज्ञान सहित विभिन्न विषयों में पाठ्यक्रम।
3. एमओओसी MOOC (बड़े पैमाने पर खुले ऑनलाइन पाठ्यक्रम):
- लॉन्च: 2014
- उद्देश्य: ऑनलाइन पाठ्यक्रमों के माध्यम से लचीले सीखने के अवसर प्रदान करना।
- पेशकश: विभिन्न विषयों में पाठ्यक्रमों की एक विस्तृत श्रृंखला, स्व-गति सीखने को सक्षम करना।
4. ऑनलाइन लैब्स (OLabs):
- लॉन्च: 2013
- उद्देश्य: वर्चुअल प्रयोगशालाओं के माध्यम से व्यावहारिक शिक्षण और व्यावहारिक कौशल की सुविधा प्रदान करना।
- फोकस क्षेत्र: भौतिकी, रसायन विज्ञान, जीवविज्ञान, और बहुत कुछ।
5. भारतीय राष्ट्रीय डिजिटल लाइब्रेरी (NDLI):
- लॉन्च: 2016
- उद्देश्य: शैक्षणिक संसाधनों के विशाल डिजिटल भंडार तक पहुँच प्रदान करना।
- उपलब्ध संसाधन: 10 मिलियन से अधिक ई-पुस्तकें, शोध पत्र और शैक्षणिक दस्तावेज।
6. स्पोकन ट्यूटोरियल प्रोजेक्ट:
- लॉन्च: 2009
- उद्देश्य: स्व-गति ट्यूटोरियल के माध्यम से मुफ़्त और ओपन-सोर्स सॉफ़्टवेयर पर प्रशिक्षण प्रदान करना।
- कवर किए गए विषय: लिनक्स, जावा, पायथन और अन्य सॉफ़्टवेयर टूल।
7. राष्ट्रीय शैक्षणिक डिपॉजिटरी (NAD):
- लॉन्च: 2017
- उद्देश्य: शैक्षणिक रिकॉर्ड और प्रमाणपत्रों का सुरक्षित भंडारण और साझाकरण।
- विशेषताएँ: शैक्षणिक दस्तावेज़ों को संग्रहीत करने, सत्यापित करने और उन तक पहुँचने के लिए डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म।
8. ई-शोध सिंधु:
- लॉन्च: 2015
- उद्देश्य: शोध पत्रों और पत्रिकाओं के विशाल संग्रह तक पहुँच प्रदान करना।
- पेशकश: 10,000 से अधिक पत्रिकाएँ और 15 मिलियन शोध पत्र।
9. विद्वान:
- लॉन्च: 2016
- उद्देश्य: विशेषज्ञों का एक राष्ट्रीय नेटवर्क बनाना और शोध सहयोग को बढ़ावा देना।
- विशेषताएँ: विशेषज्ञों के लिए डिजिटल प्रोफ़ाइल, अकादमिक नेटवर्किंग और सहयोग को सक्षम बनाना।
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10. शोध गंगोत्री:
- लॉन्च: 2016
- उद्देश्य: शोध प्रस्तावों और शोध प्रबंधों के लिए एक डिजिटल संग्रह प्रदान करना।
- विशेषताएँ: शोधकर्ताओं के लिए अपने शोध कार्य को साझा करने और सहयोग करने के लिए मंच।
11. ई-यंत्र:
- लॉन्च: 2012
- उद्देश्य: रोबोटिक्स और एम्बेडेड सिस्टम में प्रशिक्षण प्रदान करना।
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12. FOSSEE (शिक्षा के लिए मुफ़्त और ओपन सोर्स सॉफ़्टवेयर):
- लॉन्च: 2009
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13. राष्ट्रीय ज्ञान नेटवर्क (NKN):
- लॉन्च: 2010
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14. वर्चुअल लैब:
- लॉन्च: 2013
- उद्देश्य: प्रयोगशाला उपकरणों और प्रयोगों तक दूरस्थ पहुँच प्रदान करना।
- कवर किए गए विषय: भौतिकी, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान, और बहुत कुछ।
15. ऑनलाइन प्रमाणन पाठ्यक्रम:
- लॉन्च: 2016
- उद्देश्य: ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म के माध्यम से प्रमाणन पाठ्यक्रम प्रदान करना।
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नीति संगत क्षेत्रों में शोध के लिए निम्नलिखित में से किस संगठन को 'इम्प्रेस' पहल सौंपा गया है?
(A) आई आई ए एस
(C) आई सी पी आर
(B) आई सी एस एस आर
(D) आई सी एच आर
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व्याख्या (B) सामाजिक विज्ञान के क्षेत्र में प्रभावी अनुसन्धान कार्य को प्रोत्साहित करने के लिए वर्ष 1969 में इण्डियन काउन्सिल ऑफ सोशल साइन्स रिसर्च (ICSSR) का गठन किया गया था। नीति संगत क्षेत्रों में शोध के लिए इसी संगठन (ICSSR) को इम्प्रेस पहल सौंपा गया है। ICSSR का दस्तावेज केन्द्र NASSDOC ( नेशनल सोशल साइंस डॉक्यूमेंटेशन सेंटर) कहलाता हैं, जो लाइब्रेरी एवं सोशल साइन्स रिसर्च के क्षेत्र में शोध कार्य हेतु आवश्यक सूचनाएँ उपलब्ध करवाता है। यह कोविड-19 महामारी जैसी समस्याओं पर भी विशेष रूप से शोध कर रहा है।
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(C) आई सी पी आर
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व्याख्या (B) सामाजिक विज्ञान के क्षेत्र में प्रभावी अनुसन्धान कार्य को प्रोत्साहित करने के लिए वर्ष 1969 में इण्डियन काउन्सिल ऑफ सोशल साइन्स रिसर्च (ICSSR) का गठन किया गया था। नीति संगत क्षेत्रों में शोध के लिए इसी संगठन (ICSSR) को इम्प्रेस पहल सौंपा गया है। ICSSR का दस्तावेज केन्द्र NASSDOC ( नेशनल सोशल साइंस डॉक्यूमेंटेशन सेंटर) कहलाता हैं, जो लाइब्रेरी एवं सोशल साइन्स रिसर्च के क्षेत्र में शोध कार्य हेतु आवश्यक सूचनाएँ उपलब्ध करवाता है। यह कोविड-19 महामारी जैसी समस्याओं पर भी विशेष रूप से शोध कर रहा है।
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पेरिस समझौते के अन्तर्गत जलवायु परिवर्तन सम्बन्धी वचनबद्धता में वैश्विक तापन को 2°C से नीचे सीमित रखने के लिए ग्रीन हाऊस गैस उत्सर्जन में कितनी भिन्नीय कटौती शामिल हैं?
(A) 1/3
(B) 2/3
(C) 1/2
(D) 3/4
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व्याख्या (A) पेरिस समझौता एक महत्त्वपूर्ण पर्यावरणीय समझौता है, जिसे जलवायु परिवर्तन और उसके नकारात्मक प्रभावों से निपटने के लिए वर्ष 2015 में विश्व के 196 देशों द्वारा अपनाया गया था। इस समझौते का उद्देश्य वैश्विक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को 1/3 कम करना था, ताकि इस सदी में वैश्विक तापमान वृद्धि को पूर्व औद्योगिक स्तर से 2°C से कम रखा जा सके।
इसके साथ ही आगे चलकर तापमान वृद्धि को और 1.5 डिग्री सेल्सियस रखने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। यह समझौता विकसित राष्ट्रों को उनके जलवायु से निपटने के प्रयासों में विकासशील राष्ट्रों की सहायता हेतु एक मार्ग प्रदान करता है। भारत ने पेरिस जलवायु समझौते पर 2 अक्टूबर, 2016 को हस्ताक्षर किए थे।
(A) 1/3
(B) 2/3
(C) 1/2
(D) 3/4
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व्याख्या (A) पेरिस समझौता एक महत्त्वपूर्ण पर्यावरणीय समझौता है, जिसे जलवायु परिवर्तन और उसके नकारात्मक प्रभावों से निपटने के लिए वर्ष 2015 में विश्व के 196 देशों द्वारा अपनाया गया था। इस समझौते का उद्देश्य वैश्विक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को 1/3 कम करना था, ताकि इस सदी में वैश्विक तापमान वृद्धि को पूर्व औद्योगिक स्तर से 2°C से कम रखा जा सके।
इसके साथ ही आगे चलकर तापमान वृद्धि को और 1.5 डिग्री सेल्सियस रखने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। यह समझौता विकसित राष्ट्रों को उनके जलवायु से निपटने के प्रयासों में विकासशील राष्ट्रों की सहायता हेतु एक मार्ग प्रदान करता है। भारत ने पेरिस जलवायु समझौते पर 2 अक्टूबर, 2016 को हस्ताक्षर किए थे।
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यूनिट 01
शिक्षण अभिवृत्ति
Teaching Aptitude
शिक्षक केन्द्रित विधि Teacher Centred Method)
इस विधि में शिक्षक जटिल सम्प्रत्ययों की व्याख्या करते हैं तथा शिक्षार्थी उन्हें समझने का प्रयास करते हैं। इस विधि में अध्यापन के दौरान कक्षा का वातावरण पूर्णतः औपचारिक और / कठोर होता है। परिणामतः विद्यार्थियों के कई प्रश्न अनुत्तरित रह जाते हैं और उनकी सहभागिता केवल व्याख्यान सुनने तक सीमित रह जाती है।
शिक्षक केन्द्रित विधि को अनुदेशात्मक विधि भी कहा जाता है। अनुदेशात्मक विधि व्याख्यान आधारित होती है, जिसमें कुछ विद्यार्थी व्याख्यान को समझने में सक्षम होते हैं और प्रश्नोत्तर प्रक्रिया में सहभागिता के क्रम को आगे बढ़ाते हैं, इसके अन्तर्गत निम्न विधियाँ आती हैं, जिनका विवरण निम्नलिखित है
1️⃣ व्याख्यान विधि (Lecture Method)
यह एक प्रकार से मौखिक शिक्षा का रूप हैं, जिसका अर्थ होता है- किसी पाठ्यपुस्तक को भाषण के रूप में पढ़ना।
व्याख्यान विधि का आशय शिक्षक द्वारा निर्मित और उपयोग में लाए जाने वाले नियोजित कार्य योजना से होता है। इसमें शिक्षक पाठ को पढ़ता है और छात्र निष्क्रिय होकर सुनता है।यह विधि उच्च स्तर की कक्षाओं के लिए उपयोगी होती है। यह ज्ञान को सैद्धान्तिक रूप में प्रस्तुत करता है तथा इस विधि के अन्तर्गत शिक्षण को प्रभावी बनाने हेतु तैयारी, प्रस्तुति तथा मूल्यांकन जैसे कारकों का सहारा लिया जाता है।
थॉमस एम. रिस्क के अनुसार, "व्याख्यान, तथ्यों, सिद्धान्तों या अन्य सम्बन्धों का प्रतिपादन है, जिनको शिक्षक अपने सुनने वालों को समझाना चाहता है।"
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2️⃣ व्याख्यान-प्रदर्शन विधि
(Lecture Demonstration Method)
♦️भारतीय परिस्थितियों के अनुरूप यह सर्वाधिक उपयुक्त, व्यावहारिक व उपयोगी विधि है। यह किसी भी वस्तु की रचना व । कार्यप्रणाली का वास्तविक रूप में ज्ञान कराती है
इस विधि में विद्यार्थियों को भी क्रिया के पर्याप्त अवसर दिए जाते र है। उन्हें प्रश्न पूछने व प्रदर्शन में सहायता देने के कई अवसर न मिलते हैं। किसी घटना, परिस्थिति, वस्तु आदि को दृश्य रूप में विद्यार्थियों के समक्ष प्रदर्शित कर उसे स्पष्ट करना ही इस विधि का ध्येय होता है।
3️⃣ समूह शिक्षण विधि (Team Teaching Method)
समूह शिक्षण विधि की शुरुआत अमेरिका में हुई थी। इस विधि को द्वितीय विश्व युद्ध के समय अमेरिकी क्षेत्र को प्रशिक्षण देने के लिए शुरू किया गया था। समूह शिक्षण पद्धति वृहत समूह में अध्यापन कार्य का एक परिवर्तनात्मक दृष्टिकोण है।
इसमें एक शिक्षक के स्थान पर दो या अधिक शिक्षक सम्मिलित होते हैं, जो योजना निर्माण, उसके क्रियान्वयन और शिक्षार्थियों के समूह में सीखने के अनुभव का मूल्यांकन करते हैं। इस शिक्षण विधि में एक ही समय में दो या अधिक शिक्षक विषय सम्बन्धी ज्ञान देते हैं।
एक शिक्षक जहाँ प्रकरण सम्बन्धी व्याख्या और उसके सैद्धान्तिक पक्षों को रखता है, वहीं दूसरा शिक्षक उसके व्यावहारिक पक्षों का स्पष्टीकरण देता है। अन्य शिक्षक उस प्रकरण के समसामयिक पक्षों की जानकारी देते हैं और उसकी प्रासंगिकता और महत्ता को स्पष्ट करते हैं। पैनल चर्चा, विचार गोष्ठी आदि शिक्षण सम्बन्धी विधियाँ इसी समूह शिक्षण के विभिन्न रूप
🔷 सूक्ष्म शिक्षण (Micro Teaching)
सूक्ष्म शिक्षण, शिक्षण का एक नवीन अनुसन्धान है, जिसमें एक समय में एक ही शिक्षण कौशल को चुना जा सकता है। यह शिक्षक के व्यवहार को निश्चित उद्देश्यों के अनुसार ढालने में सहायक होता है। इस प्रक्रिया के उपयोग द्वारा शिक्षक अपनी कक्षाओं को रोचक, उद्देश्यपूर्ण एवं ज्ञान की प्रयोगशाला के रूप में बनाने में समर्थ होते हैं। यह एक प्रशिक्षण तकनीक है और इसे किसी भी स्थिति में शिक्षण तकनीक समझना उचित नहीं है।
♦️ सूक्ष्म शिक्षण के उद्देश्य
▪️प्रशिक्षु को सीखने और नए शिक्षण कौशल को नियन्त्रित परिस्थितियों में आत्मसात् करने योग्य बनाना।
▪️शिक्षार्थियों में नए कौशल का विकास करना ।
▪️प्रशिक्षु को शिक्षण में विश्वास करने योग्य बनाना।
♦️ सूक्ष्म शिक्षण के लाभ
▪️सूक्ष्म शिक्षण एक प्रशिक्षण उपकरण है, जिससे शिक्षण अभ्यास और प्रभावी शिक्षक तैयार किए जाते हैं।
▪️यह शिक्षण को सुगमता प्रदान करता है। इस शिक्षण कार्यक्रम को वास्तविक एवं कृत्रिम दोनों कक्षा में किया जा सकता है।
टेलीविजन /वीडियो प्रस्तुति विधि (Television or Video Presentation Method)
टेलीविजन या वीडियो प्रस्तुति विधि शिक्षण विधि की ऑडियो प्रस्तुति से अधिक बेहतर और दृश्यमान प्रकृति की होती है। इसके द्वारा शिक्षण गतिविधि अच्छे तरीके से शिक्षाथों तक सम्प्रेषित/ पहुँचाने का कार्य किया जाता है।
शिक्षण अभिवृत्ति
Teaching Aptitude
शिक्षक केन्द्रित विधि Teacher Centred Method)
इस विधि में शिक्षक जटिल सम्प्रत्ययों की व्याख्या करते हैं तथा शिक्षार्थी उन्हें समझने का प्रयास करते हैं। इस विधि में अध्यापन के दौरान कक्षा का वातावरण पूर्णतः औपचारिक और / कठोर होता है। परिणामतः विद्यार्थियों के कई प्रश्न अनुत्तरित रह जाते हैं और उनकी सहभागिता केवल व्याख्यान सुनने तक सीमित रह जाती है।
शिक्षक केन्द्रित विधि को अनुदेशात्मक विधि भी कहा जाता है। अनुदेशात्मक विधि व्याख्यान आधारित होती है, जिसमें कुछ विद्यार्थी व्याख्यान को समझने में सक्षम होते हैं और प्रश्नोत्तर प्रक्रिया में सहभागिता के क्रम को आगे बढ़ाते हैं, इसके अन्तर्गत निम्न विधियाँ आती हैं, जिनका विवरण निम्नलिखित है
1️⃣ व्याख्यान विधि (Lecture Method)
यह एक प्रकार से मौखिक शिक्षा का रूप हैं, जिसका अर्थ होता है- किसी पाठ्यपुस्तक को भाषण के रूप में पढ़ना।
व्याख्यान विधि का आशय शिक्षक द्वारा निर्मित और उपयोग में लाए जाने वाले नियोजित कार्य योजना से होता है। इसमें शिक्षक पाठ को पढ़ता है और छात्र निष्क्रिय होकर सुनता है।यह विधि उच्च स्तर की कक्षाओं के लिए उपयोगी होती है। यह ज्ञान को सैद्धान्तिक रूप में प्रस्तुत करता है तथा इस विधि के अन्तर्गत शिक्षण को प्रभावी बनाने हेतु तैयारी, प्रस्तुति तथा मूल्यांकन जैसे कारकों का सहारा लिया जाता है।
थॉमस एम. रिस्क के अनुसार, "व्याख्यान, तथ्यों, सिद्धान्तों या अन्य सम्बन्धों का प्रतिपादन है, जिनको शिक्षक अपने सुनने वालों को समझाना चाहता है।"
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2️⃣ व्याख्यान-प्रदर्शन विधि
(Lecture Demonstration Method)
♦️भारतीय परिस्थितियों के अनुरूप यह सर्वाधिक उपयुक्त, व्यावहारिक व उपयोगी विधि है। यह किसी भी वस्तु की रचना व । कार्यप्रणाली का वास्तविक रूप में ज्ञान कराती है
इस विधि में विद्यार्थियों को भी क्रिया के पर्याप्त अवसर दिए जाते र है। उन्हें प्रश्न पूछने व प्रदर्शन में सहायता देने के कई अवसर न मिलते हैं। किसी घटना, परिस्थिति, वस्तु आदि को दृश्य रूप में विद्यार्थियों के समक्ष प्रदर्शित कर उसे स्पष्ट करना ही इस विधि का ध्येय होता है।
3️⃣ समूह शिक्षण विधि (Team Teaching Method)
समूह शिक्षण विधि की शुरुआत अमेरिका में हुई थी। इस विधि को द्वितीय विश्व युद्ध के समय अमेरिकी क्षेत्र को प्रशिक्षण देने के लिए शुरू किया गया था। समूह शिक्षण पद्धति वृहत समूह में अध्यापन कार्य का एक परिवर्तनात्मक दृष्टिकोण है।
इसमें एक शिक्षक के स्थान पर दो या अधिक शिक्षक सम्मिलित होते हैं, जो योजना निर्माण, उसके क्रियान्वयन और शिक्षार्थियों के समूह में सीखने के अनुभव का मूल्यांकन करते हैं। इस शिक्षण विधि में एक ही समय में दो या अधिक शिक्षक विषय सम्बन्धी ज्ञान देते हैं।
एक शिक्षक जहाँ प्रकरण सम्बन्धी व्याख्या और उसके सैद्धान्तिक पक्षों को रखता है, वहीं दूसरा शिक्षक उसके व्यावहारिक पक्षों का स्पष्टीकरण देता है। अन्य शिक्षक उस प्रकरण के समसामयिक पक्षों की जानकारी देते हैं और उसकी प्रासंगिकता और महत्ता को स्पष्ट करते हैं। पैनल चर्चा, विचार गोष्ठी आदि शिक्षण सम्बन्धी विधियाँ इसी समूह शिक्षण के विभिन्न रूप
🔷 सूक्ष्म शिक्षण (Micro Teaching)
सूक्ष्म शिक्षण, शिक्षण का एक नवीन अनुसन्धान है, जिसमें एक समय में एक ही शिक्षण कौशल को चुना जा सकता है। यह शिक्षक के व्यवहार को निश्चित उद्देश्यों के अनुसार ढालने में सहायक होता है। इस प्रक्रिया के उपयोग द्वारा शिक्षक अपनी कक्षाओं को रोचक, उद्देश्यपूर्ण एवं ज्ञान की प्रयोगशाला के रूप में बनाने में समर्थ होते हैं। यह एक प्रशिक्षण तकनीक है और इसे किसी भी स्थिति में शिक्षण तकनीक समझना उचित नहीं है।
♦️ सूक्ष्म शिक्षण के उद्देश्य
▪️प्रशिक्षु को सीखने और नए शिक्षण कौशल को नियन्त्रित परिस्थितियों में आत्मसात् करने योग्य बनाना।
▪️शिक्षार्थियों में नए कौशल का विकास करना ।
▪️प्रशिक्षु को शिक्षण में विश्वास करने योग्य बनाना।
♦️ सूक्ष्म शिक्षण के लाभ
▪️सूक्ष्म शिक्षण एक प्रशिक्षण उपकरण है, जिससे शिक्षण अभ्यास और प्रभावी शिक्षक तैयार किए जाते हैं।
▪️यह शिक्षण को सुगमता प्रदान करता है। इस शिक्षण कार्यक्रम को वास्तविक एवं कृत्रिम दोनों कक्षा में किया जा सकता है।
टेलीविजन /वीडियो प्रस्तुति विधि (Television or Video Presentation Method)
टेलीविजन या वीडियो प्रस्तुति विधि शिक्षण विधि की ऑडियो प्रस्तुति से अधिक बेहतर और दृश्यमान प्रकृति की होती है। इसके द्वारा शिक्षण गतिविधि अच्छे तरीके से शिक्षाथों तक सम्प्रेषित/ पहुँचाने का कार्य किया जाता है।
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Forwarded from NET SET JRF notes Professor Adda
यूनिट 01
शिक्षण अभिवृत्ति
Teaching Aptitude
शिक्षार्थी केन्द्रित विधि
♦️शिक्षार्थी केन्द्रित शिक्षण विधि में व्यक्तिगत शिक्षण को
दिया जाता है। इसमें शिक्षक का मुख्य ध्यान शिक्षार्थियों की कल्पनाओं, जिज्ञासाओं एवं कठिनाइयों को सुलझाने के प्रति होता है। इस शिक्षण विधि का यूएसए के शिक्षा मनोवैज्ञानिक जॉन डिवी ने समर्थन किया है। शिक्षार्थी केन्द्रित रणनीति के अन्तर्गत अपनाई जाने वाली शिक्षण विधियाँ निम्न हैं, जिनका विवरण निम्नलिखित है
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1️⃣ कार्यक्रम अनुदेश विधि (Programme Instruction Method)
कार्यक्रम अनुदेश विधि शिक्षण की उच्च स्तर पर संरचित पद्धति (Highly Structured System) का एक सामान्य उदाहरण है। यह तार्किक क्रम पर आधारित शिक्षण विधि है, जिसमें छात्र प्रत्येक चरण के पश्चात् तुरन्त प्रतिपुष्टि (Feed Back) प्राप्त करने में सक्षम होते हैं।
2️⃣ अधिन्यास कार्य विधि (Assignment Method)
अधिन्यास शिक्षण विधि का उपयोग विशेष प्रयोजन की पूर्ति हेतु किया जाता है। इस विधि के अन्तर्गत विद्यार्थियों की सुविधा के लिए सम्पूर्ण पाठ्यक्रम को अनेक खण्डों में विभाजित कर दिया जाता है। इसके माध्यम से छात्रों को सर्वेक्षण करना, संख्यात्मक समस्याओं का समाधान करना, अतिरिक्त जानकारी एकत्रित करना, जैसे कार्यों को पूर्ण करने का उत्तरदायित्व दिया जाता है।
अधिन्यास शिक्षण विधि में शिक्षक की भूमिका अहम है। वह छात्रों के लिए योजना तैयार करते हैं और उस कार्य की प्रतिपूर्ति के लिए जानकारी एकत्र करने के लिए छात्रों का मार्गदर्शन करते हैं। इसके दो प्रकार हैं, गृह-अधिन्यास और विद्यालय अधिन्यास विधि, जो क्रमश: घरेलू स्तर पर (गृह कार्य के रूप में) और विद्यालयी स्तर पर किया जाता है।
3️⃣ कम्प्यूटर आधारित शिक्षण विधि (Computer Based Teaching Method)
कम्प्यूटर आधारित शिक्षण प्रणाली का उद्देश्य कम्प्यूटर के माध्यम से शिक्षा पद्धति को सुव्यवस्थित ढंग से संचालित करना है। इसके द्वारा सूचना प्रवाह को गत्यात्मक रूप दिया जाता है और शिक्षण प्रणाली को अधिक वैज्ञानिकतापूर्वक करने पर ध्यान केन्द्रित किया जाता है।
कम्प्यूटर आधारित शिक्षण विधि से ऑडियो-वीडियो टेप की प्रस्तुति परम्परागत पुस्तक की तुलना में ज्यादा प्रभावोत्पादक और शीघ्र पहुँच वाली होती है। इसमें सही जानकारी प्राप्त करने के अधिक विकल्प होते हैं और शिक्षार्थी की आवश्यकतानुसार प्रतिपुष्टि (Feed back) प्राप्त करने की स्थिति भी बनी रहती है।
4️⃣ परस्पर संवादी/संवादात्मक वीडियो विधि (Interactive Video Method)
परस्पर संवादी/ संवादात्मक वीडियो शिक्षण विधि में शिक्षार्थी को किसी विषय से सम्बन्धित जानकारी, क्रमरहित ढंग (Randomly) से आसानी से उपलब्ध हो जाती है। यह विधि छात्र को एक ही प्लेटफॉर्म पर कई विषयों, मुद्दों या समस्याओं की जानकारी और उसके संशोधनात्मक उपाय की सरलता से आपूर्ति करने में सक्षम है। इसके माध्यम से शिक्षार्थी अपने परिणामों की प्रतिपुष्टि तत्काल प्राप्त कर सकते हैं
5️⃣ ब्रेनस्टोरमिंग विधि (Brainstorming Method)
इस विधि को विप्लव विधि भी कहते हैं। इस विधि में बच्चों के समूह के मध्य एक समस्या उत्पन्न की जाती है। इसमें बच्चे आपस में वार्ता करते हैं। स्वतन्त्र चिन्तन के माध्यम से विचारों पर बल दिया जाता है। प्रत्येक बच्चा एक-एक बिन्दु पर चर्चा करता है। इन सभी प्रक्रियाओं के मध्य निकले बिन्दुओं को अध्यापक ब्लैकबोर्ड पर लिखता जाता है।
6️⃣ संगोष्ठी विधि (Seminars)
संगोष्ठी विधि शिक्षण की महत्त्वपूर्ण विधि मानी जाती है। प्रकारान्तर से यह समूह चर्चा विधि का ही एक अलग रूप है। इस विधि में संगोष्ठी में भाग लेने वाले लोग एक पेपर पर अपने विचार प्रकट करने हेतु बिन्दुओं को तैयार करते हैं और संगोष्ठी के दौरान उस पर चर्चा करते हैं। इसके कई चरण होते हैं; जैसे-पेपर की तैयारी, पेपर की प्रस्तुति एवं चर्चा। इस विधि के माध्यम से विद्यार्थियों को किसी अवधारणा एवं सिद्धान्त को समझने लायक वातावरण दिया जाता है।
7️⃣ प्रकरण अध्ययन विधि (Case Study Method)
पारम्परिक अध्ययन विधि के विपरीत प्रकरण अध्ययन आधुनिक तथ्यों के विश्लेषण पर बल देता है। यह अधिगम करने वाले बालकों के लिए सकारात्मक विधि मानी जाती है एवं पारम्परिक तरीके से सीखने की प्रक्रिया का विरोध करती है। इस विधि में बालकों को चुनौती का सामना करने, निर्णय लेने आदि प्रक्रिया में सक्षम बनाया जाता है। इसमें समाजशास्त्र, इतिहास, जीवविज्ञान,
शिक्षण अभिवृत्ति
Teaching Aptitude
शिक्षार्थी केन्द्रित विधि
♦️शिक्षार्थी केन्द्रित शिक्षण विधि में व्यक्तिगत शिक्षण को
दिया जाता है। इसमें शिक्षक का मुख्य ध्यान शिक्षार्थियों की कल्पनाओं, जिज्ञासाओं एवं कठिनाइयों को सुलझाने के प्रति होता है। इस शिक्षण विधि का यूएसए के शिक्षा मनोवैज्ञानिक जॉन डिवी ने समर्थन किया है। शिक्षार्थी केन्द्रित रणनीति के अन्तर्गत अपनाई जाने वाली शिक्षण विधियाँ निम्न हैं, जिनका विवरण निम्नलिखित है
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1️⃣ कार्यक्रम अनुदेश विधि (Programme Instruction Method)
कार्यक्रम अनुदेश विधि शिक्षण की उच्च स्तर पर संरचित पद्धति (Highly Structured System) का एक सामान्य उदाहरण है। यह तार्किक क्रम पर आधारित शिक्षण विधि है, जिसमें छात्र प्रत्येक चरण के पश्चात् तुरन्त प्रतिपुष्टि (Feed Back) प्राप्त करने में सक्षम होते हैं।
2️⃣ अधिन्यास कार्य विधि (Assignment Method)
अधिन्यास शिक्षण विधि का उपयोग विशेष प्रयोजन की पूर्ति हेतु किया जाता है। इस विधि के अन्तर्गत विद्यार्थियों की सुविधा के लिए सम्पूर्ण पाठ्यक्रम को अनेक खण्डों में विभाजित कर दिया जाता है। इसके माध्यम से छात्रों को सर्वेक्षण करना, संख्यात्मक समस्याओं का समाधान करना, अतिरिक्त जानकारी एकत्रित करना, जैसे कार्यों को पूर्ण करने का उत्तरदायित्व दिया जाता है।
अधिन्यास शिक्षण विधि में शिक्षक की भूमिका अहम है। वह छात्रों के लिए योजना तैयार करते हैं और उस कार्य की प्रतिपूर्ति के लिए जानकारी एकत्र करने के लिए छात्रों का मार्गदर्शन करते हैं। इसके दो प्रकार हैं, गृह-अधिन्यास और विद्यालय अधिन्यास विधि, जो क्रमश: घरेलू स्तर पर (गृह कार्य के रूप में) और विद्यालयी स्तर पर किया जाता है।
3️⃣ कम्प्यूटर आधारित शिक्षण विधि (Computer Based Teaching Method)
कम्प्यूटर आधारित शिक्षण प्रणाली का उद्देश्य कम्प्यूटर के माध्यम से शिक्षा पद्धति को सुव्यवस्थित ढंग से संचालित करना है। इसके द्वारा सूचना प्रवाह को गत्यात्मक रूप दिया जाता है और शिक्षण प्रणाली को अधिक वैज्ञानिकतापूर्वक करने पर ध्यान केन्द्रित किया जाता है।
कम्प्यूटर आधारित शिक्षण विधि से ऑडियो-वीडियो टेप की प्रस्तुति परम्परागत पुस्तक की तुलना में ज्यादा प्रभावोत्पादक और शीघ्र पहुँच वाली होती है। इसमें सही जानकारी प्राप्त करने के अधिक विकल्प होते हैं और शिक्षार्थी की आवश्यकतानुसार प्रतिपुष्टि (Feed back) प्राप्त करने की स्थिति भी बनी रहती है।
4️⃣ परस्पर संवादी/संवादात्मक वीडियो विधि (Interactive Video Method)
परस्पर संवादी/ संवादात्मक वीडियो शिक्षण विधि में शिक्षार्थी को किसी विषय से सम्बन्धित जानकारी, क्रमरहित ढंग (Randomly) से आसानी से उपलब्ध हो जाती है। यह विधि छात्र को एक ही प्लेटफॉर्म पर कई विषयों, मुद्दों या समस्याओं की जानकारी और उसके संशोधनात्मक उपाय की सरलता से आपूर्ति करने में सक्षम है। इसके माध्यम से शिक्षार्थी अपने परिणामों की प्रतिपुष्टि तत्काल प्राप्त कर सकते हैं
5️⃣ ब्रेनस्टोरमिंग विधि (Brainstorming Method)
इस विधि को विप्लव विधि भी कहते हैं। इस विधि में बच्चों के समूह के मध्य एक समस्या उत्पन्न की जाती है। इसमें बच्चे आपस में वार्ता करते हैं। स्वतन्त्र चिन्तन के माध्यम से विचारों पर बल दिया जाता है। प्रत्येक बच्चा एक-एक बिन्दु पर चर्चा करता है। इन सभी प्रक्रियाओं के मध्य निकले बिन्दुओं को अध्यापक ब्लैकबोर्ड पर लिखता जाता है।
6️⃣ संगोष्ठी विधि (Seminars)
संगोष्ठी विधि शिक्षण की महत्त्वपूर्ण विधि मानी जाती है। प्रकारान्तर से यह समूह चर्चा विधि का ही एक अलग रूप है। इस विधि में संगोष्ठी में भाग लेने वाले लोग एक पेपर पर अपने विचार प्रकट करने हेतु बिन्दुओं को तैयार करते हैं और संगोष्ठी के दौरान उस पर चर्चा करते हैं। इसके कई चरण होते हैं; जैसे-पेपर की तैयारी, पेपर की प्रस्तुति एवं चर्चा। इस विधि के माध्यम से विद्यार्थियों को किसी अवधारणा एवं सिद्धान्त को समझने लायक वातावरण दिया जाता है।
7️⃣ प्रकरण अध्ययन विधि (Case Study Method)
पारम्परिक अध्ययन विधि के विपरीत प्रकरण अध्ययन आधुनिक तथ्यों के विश्लेषण पर बल देता है। यह अधिगम करने वाले बालकों के लिए सकारात्मक विधि मानी जाती है एवं पारम्परिक तरीके से सीखने की प्रक्रिया का विरोध करती है। इस विधि में बालकों को चुनौती का सामना करने, निर्णय लेने आदि प्रक्रिया में सक्षम बनाया जाता है। इसमें समाजशास्त्र, इतिहास, जीवविज्ञान,
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