Research Aptitude UNIT -- 2
स्रोत- *प्रोफेसरस अड्डा UGC NET STUDY MATERIAL*
⚡TOPIC -- आइये जानते हैं *साहित्यिक चोरी*
👉*'साहित्यिक चोरी (Plagiarism)* से अभिप्राय किसी अन्य के द्वारा किए गए कार्य, विचार, उपाय या शैली आदि को अधिकांशतः नकल करते हुए मैलिक कृति के रूप में प्रकाशिन करना है।
साहित्यिक चोरी तब मानी जाती है जब हम किसी के द्वारा लिखे गए साहित्य को बिना उसका संदर्भ दिए अपने नाम से प्रकाशित कर लेते हैं।
UGC अधिसूचना (2018) के अनुसार, साहित्यिक चोरी को परिभाषित करने की प्रयोजनार्थ उसकी गम्भीरता के बढ़ते क्रम में साहित्यिक चोरी को निम्नवत स्तरों में मापा गया है-
1. *शून्य स्तर* : दस प्रतिशत तक समानता- थोडी बहुत समानताएँ, कोई दण्ड नहीं।
2. *प्रथम स्तर* : दस प्रतिशत से चालीस प्रतिशत तक समानताएँ।
3. *द्वितीय स्तर* : चालीस प्रतिशत से साठ प्रतिशत तक समानताएँ।
4. *तृतीय स्तर* : साठ प्रतिशत से अधिक समानताएँ।
किसी संकाय सदस्य को एक वार्षिक वेतन वृद्धि न दिए जाने का दण्ड दिया जाएगा, यदि वह अनुसंधान प्रकाशन प्रस्तुत करने में द्वितीय स्तर की साहित्यिक चोरी करता है।
Source- *PROFESSORS ADDA UGC NET STUDY MATERIAL* Join Telegram https://t.me/PROFESSOR_ADDA
Topic Know About *'Plagiarism'*
'👉*Plagiarism* ' means copying the work, ideas, methods or style of someone else and publishing it as an original work.
Plagiarism is considered when we publish literature written by someone else in our name without giving any reference to it.
According to the UGC notification (2018), for the purpose of defining plagiarism, plagiarism has been measured in the following levels in increasing order of its severity-
1. *Zero level* : Similarity up to ten percent - some similarities, no penalty.
2. *First level* : Similarities from ten percent to forty percent.
3. *Second level* : Similarities from forty percent to sixty percent.
4. *Third level* : More than sixty percent similarities.
A faculty member will be punished by not giving one annual increment if he commits second level plagiarism in submitting a research publication.
NET JRF notes 📲7690022-111
Professors Adda{1 Stop Solution}
[UGC-NET SET JRF/AsstProf]
Guidance/PDF notes /Test Series
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स्रोत- *प्रोफेसरस अड्डा UGC NET STUDY MATERIAL*
⚡TOPIC -- आइये जानते हैं *साहित्यिक चोरी*
👉*'साहित्यिक चोरी (Plagiarism)* से अभिप्राय किसी अन्य के द्वारा किए गए कार्य, विचार, उपाय या शैली आदि को अधिकांशतः नकल करते हुए मैलिक कृति के रूप में प्रकाशिन करना है।
साहित्यिक चोरी तब मानी जाती है जब हम किसी के द्वारा लिखे गए साहित्य को बिना उसका संदर्भ दिए अपने नाम से प्रकाशित कर लेते हैं।
UGC अधिसूचना (2018) के अनुसार, साहित्यिक चोरी को परिभाषित करने की प्रयोजनार्थ उसकी गम्भीरता के बढ़ते क्रम में साहित्यिक चोरी को निम्नवत स्तरों में मापा गया है-
1. *शून्य स्तर* : दस प्रतिशत तक समानता- थोडी बहुत समानताएँ, कोई दण्ड नहीं।
2. *प्रथम स्तर* : दस प्रतिशत से चालीस प्रतिशत तक समानताएँ।
3. *द्वितीय स्तर* : चालीस प्रतिशत से साठ प्रतिशत तक समानताएँ।
4. *तृतीय स्तर* : साठ प्रतिशत से अधिक समानताएँ।
किसी संकाय सदस्य को एक वार्षिक वेतन वृद्धि न दिए जाने का दण्ड दिया जाएगा, यदि वह अनुसंधान प्रकाशन प्रस्तुत करने में द्वितीय स्तर की साहित्यिक चोरी करता है।
Source- *PROFESSORS ADDA UGC NET STUDY MATERIAL* Join Telegram https://t.me/PROFESSOR_ADDA
Topic Know About *'Plagiarism'*
'👉*Plagiarism* ' means copying the work, ideas, methods or style of someone else and publishing it as an original work.
Plagiarism is considered when we publish literature written by someone else in our name without giving any reference to it.
According to the UGC notification (2018), for the purpose of defining plagiarism, plagiarism has been measured in the following levels in increasing order of its severity-
1. *Zero level* : Similarity up to ten percent - some similarities, no penalty.
2. *First level* : Similarities from ten percent to forty percent.
3. *Second level* : Similarities from forty percent to sixty percent.
4. *Third level* : More than sixty percent similarities.
A faculty member will be punished by not giving one annual increment if he commits second level plagiarism in submitting a research publication.
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PROFESSORS ADDA:
अनुसंधान (शोध) का अर्थ (Meaning of Research)......
अनुसंधान अथवा शोध किसी सोद्देश्य निर्दिष्ट समस्या को आधार बताकर क्रमबद्ध एवं व्यवस्थित लेखन तथा परीक्षण के द्वारा बेहतर, नवीन और सामयिक ज्ञान की खोज है। अनुसंधान का स्वरूप वस्तुनिष्ठ और तथ्य केंद्रित होता है। प्रत्येक अनुसंधान किसी न किसी समस्या का तार्किक एवं वैज्ञानिक समाधान प्रस्तुत करता है, जिससे जुड़ी हुई कुछ नवीन अवधारणाओं, प्रतिस्थापनाओं और सिद्धांतों का निर्माण होता है। 'अनुसंधान' का अंग्रेजी पर्याय 'Research' शब्द 'Re' और 'Search' शब्दों से मिलकर बना है।
अनुसंधान के लिये हिंदी भाषा में प्रयुक्त अन्य शब्द-अन्वेषण, अनुशीलन, परिशीलन, मीमांसा, गवेषणा, शोध, खोज एवं रिसर्च है।
अनुसंधान (शोध) के चार अंग होते हैं
• ज्ञान क्षेत्र की किसी समस्या को सुलझाने की प्रक्रिया
• प्रासंगिक तथ्यों का संकलन
•विवेकपूर्ण अध्ययन/विश्लेषण
• परिणामस्वरूप निर्णय
अनुसंधान की प्रमुख परिभाषाएँ
(Major Definitions of Research)
पी.वी. यंग- “अनुसंधान एक ऐसी व्यवस्थित विधि है जिसके द्वारा नवीन तथ्यों को खोजने अथवा पुराने तथ्यों की विषयवस्तु, उनकी क्रमबद्धता, अंतःसंबंध, कार्य-कारण व्याख्या और उनके निहित नैसर्गिक नियमों के पुष्टिकरण का कार्य किया जाता है।”
जेम्स ड्रेवर- “किसी क्षेत्र में ज्ञान अथवा सत्यापन हेतु की जाने वाली क्रमबद्ध खोज ही अनुसंधान है। "
अनुसंधान की विशेषताएँ (Characteristics of Research)
• अनुसंधान का उद्देश्य किसी समस्या का वैज्ञानिक विधि से समाधान
ढूंढना है।
• अनुसंधान में एक सामान्य परीक्षण में विश्वसनीयता, वस्तुनिष्ठता और प्रयोग को प्राथमिकता दी जाती है।
• यह पूर्णत: तार्किक और वस्तुनिष्ठ प्रक्रिया है। परिकल्पना को सिद्ध करने के स्थान पर उसके परीक्षण पर बल दिया जाता है।
• अनुसंधान सिर्फ सूचनाओं की पुनः प्राप्ति या संग्रहण नहीं करता, बल्कि अनुसंधान में व्यापीकरण नियमों या सिद्धांतों के विकास पर बल दिया जाता है।
• अनुसंधान में आँकड़ों के संग्रहण के लिये विधियों, प्रविधियों व वैध उपकरणों का प्रयोग किया जाता है। उसके बाद इन आँकड़ों का शोधन, संलेखन, अभिकलन व विश्लेषण किया जाता है।
• अनुसंधान करने के लिये अनुसंधान प्रश्न तैयार करना आरंभिक अनिवार्यता होती है।
• अनुसंधान की गुणवत्ता अनुसंधान की प्रासंगिकता से तय होती है। • अनुसंधान किसी भी मत को ज्ञान प्राप्ति की विधि नहीं मानता है, बल्कि यह उन मत या बातों को स्वीकार करता है जिन्हें प्रेक्षण द्वारा परखा जा सके।
• अनुसंधान में वैज्ञानिक पद्धति का मुख्य उद्देश्य अनुसंधान में नए मापदंडों का प्रयोग होता है।
• अनुसंधान में व्यक्तिगत पक्षों, भावनाओं तथा विचारों को महत्त्व नहीं
दिया जाता है।
• अनुसंधान की गहराई अनुसंधान द्वारा अर्जित तथ्यों पर आधारित होती है।
•अनुसंधान कार्यों को सैद्धांतिक व व्यावहारिक तरीके से भी कर सकते हैं। सैद्धांतिक कार्य वैज्ञानिक विधि के द्वारा तथा व्यावहारिक कार्य क्रियात्मक अनुसंधान के द्वारा किया जाता है।
अनुसंधान (शोध) की प्रकृति (Nature of Research)
Professors Adda (UGC NET JRF )
• अनुसंधान एक बौद्धिक, तार्किक व वैज्ञानिक प्रक्रिया है, जो नए ज्ञान को प्रकाश में लाती है, साथ ही पुरानी त्रुटियों एवं भ्रम धारणाओं का परिमार्जन करती है।
• अनुसंधान एक वैज्ञानिक प्रक्रिया है, जो ज्ञान के प्रचार और प्रसार में सहायक होती है।
• इसमें प्राथमिक व द्वितीयक स्रोतों (Primary and Secondary Sources) से प्राप्त आँकड़ों का विश्लेषण किया जाता है, जो किसी भी तरह के पूर्वाग्रह से मुक्त होता है ।।
• आँकड़ों के विश्लेषण में सांख्यिकी विधियों का प्रयोग किया जाता है। • अनुसंधान के लिये वैज्ञानिक अभिकल्पों (Scientific Design) का प्रयोग किया जाता है।
• अनुसंधान द्वारा प्राप्त ज्ञान को सत्यापित किया जा सकता है, क्योंकि इसके अंतर्गत किया गया निरीक्षण नियंत्रित एवं वस्तुनिष्ठ होता है। • इसके द्वारा किसी नए तथ्य, विधि या वस्तु की खोज की जाती है या फिर प्राचीन तथ्य, सिद्धांत, विधि या वस्तु में परिवर्तन किया जाता है।
• आँकड़ों को प्राप्त करने के लिये विश्वसनीय एवं वैध उपकरणों का प्रयोग किया जाता है।
• अनुसंधान के जटिल घटनाक्रमों को समझने के लिये विश्लेषण विधि प्रयोग में लाई जाती है। इस विश्लेषण के लिये परिकल्पनाओं का निर्माण एवं परीक्षण किया जाता है।
• यह सुव्यवस्थित, बौद्धिक, तर्कपूर्ण तथा वस्तुनिष्ठ प्रक्रिया होती है।
अनुसंधान (शोध) का अर्थ (Meaning of Research)......
अनुसंधान अथवा शोध किसी सोद्देश्य निर्दिष्ट समस्या को आधार बताकर क्रमबद्ध एवं व्यवस्थित लेखन तथा परीक्षण के द्वारा बेहतर, नवीन और सामयिक ज्ञान की खोज है। अनुसंधान का स्वरूप वस्तुनिष्ठ और तथ्य केंद्रित होता है। प्रत्येक अनुसंधान किसी न किसी समस्या का तार्किक एवं वैज्ञानिक समाधान प्रस्तुत करता है, जिससे जुड़ी हुई कुछ नवीन अवधारणाओं, प्रतिस्थापनाओं और सिद्धांतों का निर्माण होता है। 'अनुसंधान' का अंग्रेजी पर्याय 'Research' शब्द 'Re' और 'Search' शब्दों से मिलकर बना है।
अनुसंधान के लिये हिंदी भाषा में प्रयुक्त अन्य शब्द-अन्वेषण, अनुशीलन, परिशीलन, मीमांसा, गवेषणा, शोध, खोज एवं रिसर्च है।
अनुसंधान (शोध) के चार अंग होते हैं
• ज्ञान क्षेत्र की किसी समस्या को सुलझाने की प्रक्रिया
• प्रासंगिक तथ्यों का संकलन
•विवेकपूर्ण अध्ययन/विश्लेषण
• परिणामस्वरूप निर्णय
अनुसंधान की प्रमुख परिभाषाएँ
(Major Definitions of Research)
पी.वी. यंग- “अनुसंधान एक ऐसी व्यवस्थित विधि है जिसके द्वारा नवीन तथ्यों को खोजने अथवा पुराने तथ्यों की विषयवस्तु, उनकी क्रमबद्धता, अंतःसंबंध, कार्य-कारण व्याख्या और उनके निहित नैसर्गिक नियमों के पुष्टिकरण का कार्य किया जाता है।”
जेम्स ड्रेवर- “किसी क्षेत्र में ज्ञान अथवा सत्यापन हेतु की जाने वाली क्रमबद्ध खोज ही अनुसंधान है। "
अनुसंधान की विशेषताएँ (Characteristics of Research)
• अनुसंधान का उद्देश्य किसी समस्या का वैज्ञानिक विधि से समाधान
ढूंढना है।
• अनुसंधान में एक सामान्य परीक्षण में विश्वसनीयता, वस्तुनिष्ठता और प्रयोग को प्राथमिकता दी जाती है।
• यह पूर्णत: तार्किक और वस्तुनिष्ठ प्रक्रिया है। परिकल्पना को सिद्ध करने के स्थान पर उसके परीक्षण पर बल दिया जाता है।
• अनुसंधान सिर्फ सूचनाओं की पुनः प्राप्ति या संग्रहण नहीं करता, बल्कि अनुसंधान में व्यापीकरण नियमों या सिद्धांतों के विकास पर बल दिया जाता है।
• अनुसंधान में आँकड़ों के संग्रहण के लिये विधियों, प्रविधियों व वैध उपकरणों का प्रयोग किया जाता है। उसके बाद इन आँकड़ों का शोधन, संलेखन, अभिकलन व विश्लेषण किया जाता है।
• अनुसंधान करने के लिये अनुसंधान प्रश्न तैयार करना आरंभिक अनिवार्यता होती है।
• अनुसंधान की गुणवत्ता अनुसंधान की प्रासंगिकता से तय होती है। • अनुसंधान किसी भी मत को ज्ञान प्राप्ति की विधि नहीं मानता है, बल्कि यह उन मत या बातों को स्वीकार करता है जिन्हें प्रेक्षण द्वारा परखा जा सके।
• अनुसंधान में वैज्ञानिक पद्धति का मुख्य उद्देश्य अनुसंधान में नए मापदंडों का प्रयोग होता है।
• अनुसंधान में व्यक्तिगत पक्षों, भावनाओं तथा विचारों को महत्त्व नहीं
दिया जाता है।
• अनुसंधान की गहराई अनुसंधान द्वारा अर्जित तथ्यों पर आधारित होती है।
•अनुसंधान कार्यों को सैद्धांतिक व व्यावहारिक तरीके से भी कर सकते हैं। सैद्धांतिक कार्य वैज्ञानिक विधि के द्वारा तथा व्यावहारिक कार्य क्रियात्मक अनुसंधान के द्वारा किया जाता है।
अनुसंधान (शोध) की प्रकृति (Nature of Research)
Professors Adda (UGC NET JRF )
• अनुसंधान एक बौद्धिक, तार्किक व वैज्ञानिक प्रक्रिया है, जो नए ज्ञान को प्रकाश में लाती है, साथ ही पुरानी त्रुटियों एवं भ्रम धारणाओं का परिमार्जन करती है।
• अनुसंधान एक वैज्ञानिक प्रक्रिया है, जो ज्ञान के प्रचार और प्रसार में सहायक होती है।
• इसमें प्राथमिक व द्वितीयक स्रोतों (Primary and Secondary Sources) से प्राप्त आँकड़ों का विश्लेषण किया जाता है, जो किसी भी तरह के पूर्वाग्रह से मुक्त होता है ।।
• आँकड़ों के विश्लेषण में सांख्यिकी विधियों का प्रयोग किया जाता है। • अनुसंधान के लिये वैज्ञानिक अभिकल्पों (Scientific Design) का प्रयोग किया जाता है।
• अनुसंधान द्वारा प्राप्त ज्ञान को सत्यापित किया जा सकता है, क्योंकि इसके अंतर्गत किया गया निरीक्षण नियंत्रित एवं वस्तुनिष्ठ होता है। • इसके द्वारा किसी नए तथ्य, विधि या वस्तु की खोज की जाती है या फिर प्राचीन तथ्य, सिद्धांत, विधि या वस्तु में परिवर्तन किया जाता है।
• आँकड़ों को प्राप्त करने के लिये विश्वसनीय एवं वैध उपकरणों का प्रयोग किया जाता है।
• अनुसंधान के जटिल घटनाक्रमों को समझने के लिये विश्लेषण विधि प्रयोग में लाई जाती है। इस विश्लेषण के लिये परिकल्पनाओं का निर्माण एवं परीक्षण किया जाता है।
• यह सुव्यवस्थित, बौद्धिक, तर्कपूर्ण तथा वस्तुनिष्ठ प्रक्रिया होती है।
#ugc #paper_1 प्रमुख संविधान संशोधन - जहां से हर बार प्रश्न एग्जाम में पूछे जाते हैं
ProfessorsAdda[NET SET PGT AP] Join WhatsAp Group7690022-111
▪️1st (1950) - भूमि सुधार
▪️35th (1974) - सिक्किम को भारतीय संघ के सह राज्य का दर्जा
▪️36th (1975) - सिक्किम को पूर्ण राज्य का दर्जा
▪️42nd (1976) - समाजवादी धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र की अखंडता को परिभाषित किया गया, नीति निदेशक तत्व को अधिक व्यापक बनाया गया, मूल कर्तव्यों को जोड़ा गया, न्यायाधीशों की न्यूनतम संख्या निर्धारित की गई
▪️44th (1978) - संपत्ति के अधिकार को मूल अधिकार से हटा दिया गया
▪️52nd (1985) - दलबदल अधिनियम लाया गया
▪️61th (1989) - मताधिकार की आयु 21 से घटाकर 18 की गई
▪️73rd (1992) - पंचायती राज व्यवस्था
▪️74th (1992) - नगर पालिका
▪️86th (2002) - 6 से 14 वर्ष के बच्चों को निशुल्क शिक्षा
▪️101वां (2016) - GST
▪️102वां (2018) - राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा
▪️103वां (2019) - EWS के लिए
▪️104वां (2019) - संविधान के अनुच्छेद 334 में संशोधन स्थानों के आरक्षण और विशेष प्रतिनिधित्व का 80 वर्ष के पश्चात ना रहना
▪️Latest 105वां (2021) - इस संशोधन ने राज्य सूचियों और पिछड़े वर्गों की पहचान करने और उन्हें अधिसूचित करने की राज्यों की शक्ति को संरक्षित किया।
://t.me/PROFESSOR_ADDA
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▪️1st (1950) - भूमि सुधार
▪️35th (1974) - सिक्किम को भारतीय संघ के सह राज्य का दर्जा
▪️36th (1975) - सिक्किम को पूर्ण राज्य का दर्जा
▪️42nd (1976) - समाजवादी धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र की अखंडता को परिभाषित किया गया, नीति निदेशक तत्व को अधिक व्यापक बनाया गया, मूल कर्तव्यों को जोड़ा गया, न्यायाधीशों की न्यूनतम संख्या निर्धारित की गई
▪️44th (1978) - संपत्ति के अधिकार को मूल अधिकार से हटा दिया गया
▪️52nd (1985) - दलबदल अधिनियम लाया गया
▪️61th (1989) - मताधिकार की आयु 21 से घटाकर 18 की गई
▪️73rd (1992) - पंचायती राज व्यवस्था
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▪️101वां (2016) - GST
▪️102वां (2018) - राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा
▪️103वां (2019) - EWS के लिए
▪️104वां (2019) - संविधान के अनुच्छेद 334 में संशोधन स्थानों के आरक्षण और विशेष प्रतिनिधित्व का 80 वर्ष के पश्चात ना रहना
▪️Latest 105वां (2021) - इस संशोधन ने राज्य सूचियों और पिछड़े वर्गों की पहचान करने और उन्हें अधिसूचित करने की राज्यों की शक्ति को संरक्षित किया।
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यूनिट 01
शिक्षण अभिवृत्ति
Teaching Aptitude
शिक्षक केन्द्रित विधि Teacher Centred Method)
इस विधि में शिक्षक जटिल सम्प्रत्ययों की व्याख्या करते हैं तथा शिक्षार्थी उन्हें समझने का प्रयास करते हैं। इस विधि में अध्यापन के दौरान कक्षा का वातावरण पूर्णतः औपचारिक और / कठोर होता है। परिणामतः विद्यार्थियों के कई प्रश्न अनुत्तरित रह जाते हैं और उनकी सहभागिता केवल व्याख्यान सुनने तक सीमित रह जाती है।
शिक्षक केन्द्रित विधि को अनुदेशात्मक विधि भी कहा जाता है। अनुदेशात्मक विधि व्याख्यान आधारित होती है, जिसमें कुछ विद्यार्थी व्याख्यान को समझने में सक्षम होते हैं और प्रश्नोत्तर प्रक्रिया में सहभागिता के क्रम को आगे बढ़ाते हैं, इसके अन्तर्गत निम्न विधियाँ आती हैं, जिनका विवरण निम्नलिखित है
1️⃣ व्याख्यान विधि (Lecture Method)
यह एक प्रकार से मौखिक शिक्षा का रूप हैं, जिसका अर्थ होता है- किसी पाठ्यपुस्तक को भाषण के रूप में पढ़ना।
व्याख्यान विधि का आशय शिक्षक द्वारा निर्मित और उपयोग में लाए जाने वाले नियोजित कार्य योजना से होता है। इसमें शिक्षक पाठ को पढ़ता है और छात्र निष्क्रिय होकर सुनता है।यह विधि उच्च स्तर की कक्षाओं के लिए उपयोगी होती है। यह ज्ञान को सैद्धान्तिक रूप में प्रस्तुत करता है तथा इस विधि के अन्तर्गत शिक्षण को प्रभावी बनाने हेतु तैयारी, प्रस्तुति तथा मूल्यांकन जैसे कारकों का सहारा लिया जाता है।
थॉमस एम. रिस्क के अनुसार, "व्याख्यान, तथ्यों, सिद्धान्तों या अन्य सम्बन्धों का प्रतिपादन है, जिनको शिक्षक अपने सुनने वालों को समझाना चाहता है।"
2️⃣ व्याख्यान-प्रदर्शन विधि
(Lecture Demonstration Method)
♦️भारतीय परिस्थितियों के अनुरूप यह सर्वाधिक उपयुक्त, व्यावहारिक व उपयोगी विधि है। यह किसी भी वस्तु की रचना व । कार्यप्रणाली का वास्तविक रूप में ज्ञान कराती है
इस विधि में विद्यार्थियों को भी क्रिया के पर्याप्त अवसर दिए जाते र है। उन्हें प्रश्न पूछने व प्रदर्शन में सहायता देने के कई अवसर न मिलते हैं। किसी घटना, परिस्थिति, वस्तु आदि को दृश्य रूप में विद्यार्थियों के समक्ष प्रदर्शित कर उसे स्पष्ट करना ही इस विधि का ध्येय होता है।
3️⃣ समूह शिक्षण विधि (Team Teaching Method)
समूह शिक्षण विधि की शुरुआत अमेरिका में हुई थी। इस विधि को द्वितीय विश्व युद्ध के समय अमेरिकी क्षेत्र को प्रशिक्षण देने के लिए शुरू किया गया था। समूह शिक्षण पद्धति वृहत समूह में अध्यापन कार्य का एक परिवर्तनात्मक दृष्टिकोण है।
इसमें एक शिक्षक के स्थान पर दो या अधिक शिक्षक सम्मिलित होते हैं, जो योजना निर्माण, उसके क्रियान्वयन और शिक्षार्थियों के समूह में सीखने के अनुभव का मूल्यांकन करते हैं। इस शिक्षण विधि में एक ही समय में दो या अधिक शिक्षक विषय सम्बन्धी ज्ञान देते हैं।
एक शिक्षक जहाँ प्रकरण सम्बन्धी व्याख्या और उसके सैद्धान्तिक पक्षों को रखता है, वहीं दूसरा शिक्षक उसके व्यावहारिक पक्षों का स्पष्टीकरण देता है। अन्य शिक्षक उस प्रकरण के समसामयिक पक्षों की जानकारी देते हैं और उसकी प्रासंगिकता और महत्ता को स्पष्ट करते हैं। पैनल चर्चा, विचार गोष्ठी आदि शिक्षण सम्बन्धी विधियाँ इसी समूह शिक्षण के विभिन्न रूप
🔷 सूक्ष्म शिक्षण (Micro Teaching)
सूक्ष्म शिक्षण, शिक्षण का एक नवीन अनुसन्धान है, जिसमें एक समय में एक ही शिक्षण कौशल को चुना जा सकता है। यह शिक्षक के व्यवहार को निश्चित उद्देश्यों के अनुसार ढालने में सहायक होता है। इस प्रक्रिया के उपयोग द्वारा शिक्षक अपनी कक्षाओं को रोचक, उद्देश्यपूर्ण एवं ज्ञान की प्रयोगशाला के रूप में बनाने में समर्थ होते हैं। यह एक प्रशिक्षण तकनीक है और इसे किसी भी स्थिति में शिक्षण तकनीक समझना उचित नहीं है।
♦️ सूक्ष्म शिक्षण के उद्देश्य
▪️प्रशिक्षु को सीखने और नए शिक्षण कौशल को नियन्त्रित परिस्थितियों में आत्मसात् करने योग्य बनाना।
▪️शिक्षार्थियों में नए कौशल का विकास करना ।
▪️प्रशिक्षु को शिक्षण में विश्वास करने योग्य बनाना।
♦️ सूक्ष्म शिक्षण के लाभ
▪️सूक्ष्म शिक्षण एक प्रशिक्षण उपकरण है, जिससे शिक्षण अभ्यास और प्रभावी शिक्षक तैयार किए जाते हैं।
▪️यह शिक्षण को सुगमता प्रदान करता है। इस शिक्षण कार्यक्रम को वास्तविक एवं कृत्रिम दोनों कक्षा में किया जा सकता है।
टेलीविजन /वीडियो प्रस्तुति विधि (Television or Video Presentation Method)
टेलीविजन या वीडियो प्रस्तुति विधि शिक्षण विधि की ऑडियो प्रस्तुति से अधिक बेहतर और दृश्यमान प्रकृति की होती है। इसके द्वारा शिक्षण गतिविधि अच्छे तरीके से शिक्षाथों तक सम्प्रेषित/ पहुँचाने का कार्य किया जाता है।
शिक्षण अभिवृत्ति
Teaching Aptitude
शिक्षक केन्द्रित विधि Teacher Centred Method)
इस विधि में शिक्षक जटिल सम्प्रत्ययों की व्याख्या करते हैं तथा शिक्षार्थी उन्हें समझने का प्रयास करते हैं। इस विधि में अध्यापन के दौरान कक्षा का वातावरण पूर्णतः औपचारिक और / कठोर होता है। परिणामतः विद्यार्थियों के कई प्रश्न अनुत्तरित रह जाते हैं और उनकी सहभागिता केवल व्याख्यान सुनने तक सीमित रह जाती है।
शिक्षक केन्द्रित विधि को अनुदेशात्मक विधि भी कहा जाता है। अनुदेशात्मक विधि व्याख्यान आधारित होती है, जिसमें कुछ विद्यार्थी व्याख्यान को समझने में सक्षम होते हैं और प्रश्नोत्तर प्रक्रिया में सहभागिता के क्रम को आगे बढ़ाते हैं, इसके अन्तर्गत निम्न विधियाँ आती हैं, जिनका विवरण निम्नलिखित है
1️⃣ व्याख्यान विधि (Lecture Method)
यह एक प्रकार से मौखिक शिक्षा का रूप हैं, जिसका अर्थ होता है- किसी पाठ्यपुस्तक को भाषण के रूप में पढ़ना।
व्याख्यान विधि का आशय शिक्षक द्वारा निर्मित और उपयोग में लाए जाने वाले नियोजित कार्य योजना से होता है। इसमें शिक्षक पाठ को पढ़ता है और छात्र निष्क्रिय होकर सुनता है।यह विधि उच्च स्तर की कक्षाओं के लिए उपयोगी होती है। यह ज्ञान को सैद्धान्तिक रूप में प्रस्तुत करता है तथा इस विधि के अन्तर्गत शिक्षण को प्रभावी बनाने हेतु तैयारी, प्रस्तुति तथा मूल्यांकन जैसे कारकों का सहारा लिया जाता है।
थॉमस एम. रिस्क के अनुसार, "व्याख्यान, तथ्यों, सिद्धान्तों या अन्य सम्बन्धों का प्रतिपादन है, जिनको शिक्षक अपने सुनने वालों को समझाना चाहता है।"
2️⃣ व्याख्यान-प्रदर्शन विधि
(Lecture Demonstration Method)
♦️भारतीय परिस्थितियों के अनुरूप यह सर्वाधिक उपयुक्त, व्यावहारिक व उपयोगी विधि है। यह किसी भी वस्तु की रचना व । कार्यप्रणाली का वास्तविक रूप में ज्ञान कराती है
इस विधि में विद्यार्थियों को भी क्रिया के पर्याप्त अवसर दिए जाते र है। उन्हें प्रश्न पूछने व प्रदर्शन में सहायता देने के कई अवसर न मिलते हैं। किसी घटना, परिस्थिति, वस्तु आदि को दृश्य रूप में विद्यार्थियों के समक्ष प्रदर्शित कर उसे स्पष्ट करना ही इस विधि का ध्येय होता है।
3️⃣ समूह शिक्षण विधि (Team Teaching Method)
समूह शिक्षण विधि की शुरुआत अमेरिका में हुई थी। इस विधि को द्वितीय विश्व युद्ध के समय अमेरिकी क्षेत्र को प्रशिक्षण देने के लिए शुरू किया गया था। समूह शिक्षण पद्धति वृहत समूह में अध्यापन कार्य का एक परिवर्तनात्मक दृष्टिकोण है।
इसमें एक शिक्षक के स्थान पर दो या अधिक शिक्षक सम्मिलित होते हैं, जो योजना निर्माण, उसके क्रियान्वयन और शिक्षार्थियों के समूह में सीखने के अनुभव का मूल्यांकन करते हैं। इस शिक्षण विधि में एक ही समय में दो या अधिक शिक्षक विषय सम्बन्धी ज्ञान देते हैं।
एक शिक्षक जहाँ प्रकरण सम्बन्धी व्याख्या और उसके सैद्धान्तिक पक्षों को रखता है, वहीं दूसरा शिक्षक उसके व्यावहारिक पक्षों का स्पष्टीकरण देता है। अन्य शिक्षक उस प्रकरण के समसामयिक पक्षों की जानकारी देते हैं और उसकी प्रासंगिकता और महत्ता को स्पष्ट करते हैं। पैनल चर्चा, विचार गोष्ठी आदि शिक्षण सम्बन्धी विधियाँ इसी समूह शिक्षण के विभिन्न रूप
🔷 सूक्ष्म शिक्षण (Micro Teaching)
सूक्ष्म शिक्षण, शिक्षण का एक नवीन अनुसन्धान है, जिसमें एक समय में एक ही शिक्षण कौशल को चुना जा सकता है। यह शिक्षक के व्यवहार को निश्चित उद्देश्यों के अनुसार ढालने में सहायक होता है। इस प्रक्रिया के उपयोग द्वारा शिक्षक अपनी कक्षाओं को रोचक, उद्देश्यपूर्ण एवं ज्ञान की प्रयोगशाला के रूप में बनाने में समर्थ होते हैं। यह एक प्रशिक्षण तकनीक है और इसे किसी भी स्थिति में शिक्षण तकनीक समझना उचित नहीं है।
♦️ सूक्ष्म शिक्षण के उद्देश्य
▪️प्रशिक्षु को सीखने और नए शिक्षण कौशल को नियन्त्रित परिस्थितियों में आत्मसात् करने योग्य बनाना।
▪️शिक्षार्थियों में नए कौशल का विकास करना ।
▪️प्रशिक्षु को शिक्षण में विश्वास करने योग्य बनाना।
♦️ सूक्ष्म शिक्षण के लाभ
▪️सूक्ष्म शिक्षण एक प्रशिक्षण उपकरण है, जिससे शिक्षण अभ्यास और प्रभावी शिक्षक तैयार किए जाते हैं।
▪️यह शिक्षण को सुगमता प्रदान करता है। इस शिक्षण कार्यक्रम को वास्तविक एवं कृत्रिम दोनों कक्षा में किया जा सकता है।
टेलीविजन /वीडियो प्रस्तुति विधि (Television or Video Presentation Method)
टेलीविजन या वीडियो प्रस्तुति विधि शिक्षण विधि की ऑडियो प्रस्तुति से अधिक बेहतर और दृश्यमान प्रकृति की होती है। इसके द्वारा शिक्षण गतिविधि अच्छे तरीके से शिक्षाथों तक सम्प्रेषित/ पहुँचाने का कार्य किया जाता है।
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#UMANG #NET_PAPER1st
(Unified Mobile Application for New-age Governance) is developed by the Ministry of Electronics and Information Technology (MeitY) and National e-Governance Division (NeGD) to drive Mobile Governance in India. UMANG provides a single platform for all Indian Citizens to access pan India e-Gov services ranging from Central to Local Government bodies. It provides a unified approach where citizens can install one application to avail multiple government services. The international version was launched for select countries that include USA, UK, Canada, Australia, UAE, Netherlands, Singapore, Australia and New Zealand. It will help Indian international students, NRIs and Indian tourists abroad, to avail Government of India services, anytime.
🔶Topic of the day
🏆 PROFESSORS ADDA
Your Success is Our Mission .
An Intiative of Subject experts .
One stop Solution For UGC net paper 1 and all Subjects 📣 7690022111
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👍3
Evaluation System
Types of Evaluation
♦️On the basis of the purpose and the time involved, the evaluation can be divided into the following categories:
1️⃣Dignostic Evaluation
2️⃣Formative Evaluation
3️⃣Summative Evaluation
🔷 Diagnostic Evaluation This type of evaluation is usually done in the beginning of the teaching learning process in order to find out the specific weaknesses in individual or in a class as a whole. It helps in designing of the courses and curricula according to the capabilities of the learner to help him overcome his deficiencies in knowledge, skills and abilities.
🔷 Formative Evaluation- It is related to the decision-making process at the level of development of the learner as well as formulation of the curriculum for particular class or examination boards. It helps in providing feed-back at appropriate strategies of the teaching and learning process which help in making changes in the curriculum, teaching strategies and the learning environment. Generally Formative evaluation isdone during the process of teaching and learning with
the following objectives:
1️⃣ To monitor students' learning for providing them Individualized instruction.
2️⃣ To evaluate teaching effectiveness.
3️⃣ To evaluate courses and curricula with the purpose of modification, updating or replacement, if necessary.
4️⃣ To evaluate curriculum material.
5️⃣ To evaluate the learning environment with a view to improving it.
🔷 Summative Evaluation - It is related with judgement-making process about a finished product or process. Terminal (Final) examinations-whether internal or external-are the best examples of summa- tive evaluation. Inspite of it summative evaluation is not only restricted as a terminal in its approach. Cumulative assessments where they are undertaken completely for the purpose of selection, promotion, prediction, recor- ding and such other administrative purposes, should be considered as a series of summative evaluations
Types of Evaluation
♦️On the basis of the purpose and the time involved, the evaluation can be divided into the following categories:
1️⃣Dignostic Evaluation
2️⃣Formative Evaluation
3️⃣Summative Evaluation
🔷 Diagnostic Evaluation This type of evaluation is usually done in the beginning of the teaching learning process in order to find out the specific weaknesses in individual or in a class as a whole. It helps in designing of the courses and curricula according to the capabilities of the learner to help him overcome his deficiencies in knowledge, skills and abilities.
🔷 Formative Evaluation- It is related to the decision-making process at the level of development of the learner as well as formulation of the curriculum for particular class or examination boards. It helps in providing feed-back at appropriate strategies of the teaching and learning process which help in making changes in the curriculum, teaching strategies and the learning environment. Generally Formative evaluation isdone during the process of teaching and learning with
the following objectives:
1️⃣ To monitor students' learning for providing them Individualized instruction.
2️⃣ To evaluate teaching effectiveness.
3️⃣ To evaluate courses and curricula with the purpose of modification, updating or replacement, if necessary.
4️⃣ To evaluate curriculum material.
5️⃣ To evaluate the learning environment with a view to improving it.
🔷 Summative Evaluation - It is related with judgement-making process about a finished product or process. Terminal (Final) examinations-whether internal or external-are the best examples of summa- tive evaluation. Inspite of it summative evaluation is not only restricted as a terminal in its approach. Cumulative assessments where they are undertaken completely for the purpose of selection, promotion, prediction, recor- ding and such other administrative purposes, should be considered as a series of summative evaluations
👍4
Forwarded from NET SET JRF notes Professor Adda
Today's 10 Aug 2024 Current Affairs Quiz (English Medium)
Forwarded from NET SET JRF notes Professor Adda
Today's 10 Aug 2024 Current Affairs Quiz (Hindi Medium)
Forwarded from NET SET JRF notes Professor Adda
Q. निम्नलिखित में से कौन सा सतत् विकास लक्ष्य नहीं है?
Anonymous Quiz
26%
(a) लैंगिक निष्पक्षता
14%
(b) जलवायु संबंधी पहल
37%
(c) ओजोन परत का संरक्षण
23%
(d) अंतर्वर्ती जलीय जीवन
👍2
Forwarded from NET SET JRF notes Professor Adda
Q. सहस्त्राब्दी विकास लक्ष्यों के लिए समय सीमा थी
Anonymous Quiz
9%
(a) 2000-2005
64%
(b) 2000-2015
19%
(c) 2005-2010
8%
(d) 2000-2012
🔥1
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8. Which of the following acronyms is incorrectly matched with its expanded form?
Anonymous Quiz
23%
(a) IMPRINT Impacting Research, Innovation and Technology
26%
(b) BHIM Bharat Interface for Money
39%
(c) UMANG United Mobile Application for New age Generation
12%
(d) PayTM - Pay Through Mobile
👍2
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8. निम्नलिखित में से कौन-से संक्षिप्ताक्षर का उसके विस्तृत रूप से मिलान गलत है?
Anonymous Quiz
20%
a. इम्प्रिंट (IMPRINT) इम्पैक्टिंग रिसर्च इनोवेशन एंड टेक्नोलॉजी
25%
b. भीम (BHIM) - भारत इंटरफेस फॉर मनी
45%
c. उमंग (UMANG) - यूनाइटेड मोबाइल एप्लिकेशन फॉर न्यू - एज जनरेशन
10%
d. पेटीएम (Pay TM) - पे थ्रू मोबाईल
👍3
Q. Arrange the following in chronological order:
(A) Yashpal Committee
(B) Radhakrishnan Commission
(C) National Commission on Teacher
(D) National Knowledge Commission
(E) Rammurti Committee
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(A) Yashpal Committee
(B) Radhakrishnan Commission
(C) National Commission on Teacher
(D) National Knowledge Commission
(E) Rammurti Committee
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Anonymous Quiz
10%
(A) (A), (B), (C), (D) and (E)
51%
(B) (B), (Ε), (A), (C) and (D)
34%
(C) (B), (C), (E), (D) and (A)
5%
(D) (A), (D), (C), (B) and (E)
Q. Which of the following statements are true regarding the Radhakrishnan Commission?
a) It focused only on higher education.
b) It was the first education commission in independent India.
c) Its recommendations were not implemented.
d) It was primarily concerned with healthcare reforms.
e) It focused on administrative reforms in higher education institutions.
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a) It focused only on higher education.
b) It was the first education commission in independent India.
c) Its recommendations were not implemented.
d) It was primarily concerned with healthcare reforms.
e) It focused on administrative reforms in higher education institutions.
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Anonymous Quiz
32%
(A) (a) and (b) only
27%
(B) (c) and (d) only
20%
(C) (a) and (e) only
22%
(D) (b) and (e) only
🔥1
*Q.* Arrange the following in chronological order:
(A) Yashpal Committee
(B) Radhakrishnan Commission
(C) National Commission on Teacher
(D) National Knowledge Commission
(E) Rammurti Committee
*Choose the correct option*
(A) (A), (B), (C), (D) and (E)
(B) (B), (Ε), (A), (C) and (D)
(C) (B), (C), (E), (D) and (A)✅
(D) (A), (D), (C), (B) and (E)
*Q.* Which of the following statements are true regarding the Radhakrishnan Commission?
a) It focused only on higher education.
b) It was the first education commission in independent India.
c) Its recommendations were not implemented.
d) It was primarily concerned with healthcare reforms.
e) It focused on administrative reforms in higher education institutions.
*Choose the correct option*
(A) (a) and (b) only
(B) (c) and (d) only
(C) (a) and (e) only
(D) (b) and (e) only ✅
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[11/08, 11:00 am] Professors Adaa:
*प्रश्न.* निम्नलिखित को कालानुक्रमिक क्रम में व्यवस्थित करें:
(A) यशपाल समिति
(B) राधाकृष्णन आयोग
(C) राष्ट्रीय शिक्षक आयोग
(D) राष्ट्रीय ज्ञान आयोग
(E) राममूर्ति समिति
*सही विकल्प चुनें*
(1) (A), (B), (C), (D) और (E)
(2) (B), (Ε), (A), (C) और (D)
(3) (B), (C), (E), (D) और (A)✅
(4) (A), (D), (C), (B) और (E)
*प्रश्न.* राधाकृष्णन आयोग के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सत्य है?
a) इसने केवल उच्च शिक्षा पर ध्यान केंद्रित किया।
b) यह स्वतंत्र भारत में पहला शिक्षा आयोग था।
c) इसकी सिफारिशों को लागू नहीं किया गया।
d) यह मुख्य रूप से स्वास्थ्य सेवा सुधारों से संबंधित था।
e) इसने उच्च शिक्षा संस्थानों में प्रशासनिक सुधारों पर ध्यान केंद्रित किया।
*सही विकल्प चुनें*
(1) (a) और (b) केवल
(2) (c) और (d) केवल
(3) (a) और (e) केवल
(4) (b) और (e) केवल ✅
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a) इसने केवल उच्च शिक्षा पर ध्यान केंद्रित किया।
b) यह स्वतंत्र भारत में पहला शिक्षा आयोग था।
c) इसकी सिफारिशों को लागू नहीं किया गया।
d) यह मुख्य रूप से स्वास्थ्य सेवा सुधारों से संबंधित था।
e) इसने उच्च शिक्षा संस्थानों में प्रशासनिक सुधारों पर ध्यान केंद्रित किया।
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