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पीएम स्वनिधि योजना (PM SVANidhi Yojana)
PM SVANidhi = Prime Minister Street Vendor’s AtmaNirbhar Nidhi

शुरुआत: 1 जून 2020
मंत्रालय: आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय (MoHUA)

उद्देश्य

• कोविड-19 से प्रभावित रेहड़ी-पटरी (Street Vendors) वालों को आर्थिक सहायता प्रदान करना।
• छोटे विक्रेताओं को आत्मनिर्भर बनाना।

लाभार्थी

• शहरी क्षेत्रों के स्ट्रीट वेंडर्स/फेरीवाले।
• सब्जी विक्रेता, फल विक्रेता, ठेला चालक, छोटे दुकानदार आदि।

ऋण सुविधा (Loan Facility)
यह योजना एक Step-wise Loan Structure प्रदान करती है:

1. पहला ऋण: ₹15,000
2. दूसरा ऋण: ₹25,000
3. तीसरा ऋण: ₹50,000

विशेषताएँ

• बिना गारंटी (Collateral-Free Loan)
• समय पर भुगतान करने पर अगला बड़ा ऋण प्राप्त होता है।

अन्य प्रमुख लाभ

• UPI-Linked RuPay Credit Card: ₹30,000 तक की सीमा।
• डिजिटल भुगतान को बढ़ावा।
• Digital Cashback: डिजिटल लेन-देन पर ₹1600 कैशबैक।
• 8 सामाजिक कल्याण योजनाओं से जोड़ने का प्रावधान।

योजना की विशेषताएँ

1. वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion) को बढ़ावा।
2. डिजिटल अर्थव्यवस्था को मजबूत करना।
3. छोटे व्यापारियों की आजीविका सुरक्षा।
4. आत्मनिर्भर भारत अभियान से जुड़ी योजना।


रैपिड रिवीजन रेडी

राजा राममोहन राय से संबंधित तथ्य

• 1809: एकेश्वरवाद का उपहार पुस्तक लिखी
• 1814: आत्मीय सभा की स्थापना
• 1817: डेविड हेयर के साथ हिंदू कॉलेज की स्थापना
• 1820: प्रिंसेप्स ऑफ़ जीसस पुस्तक लिखी
• 1825: वेदांत कॉलेज की स्थापना
• 1828: ब्रह्म सभा (ब्रह्म समाज) की स्थापना
• 1829: लॉर्ड विलियम बेंटिक के साथ सती प्रथा उन्मूलन


Rapid Revision Ready

राज्य के नीति निदेशक तत्वों में गाँधीवादी सिद्धांत
राज्य के नीति निदेशक तत्वों में गाँधीवादी सिद्धान्त को प्रतिबिंबित करने वाले प्रावधान निम्नलिखित हैं:

• अनुच्छेद 40: राज्य ग्राम पंचायतों को स्वशासन की इकाइयों के रूप में संगठित करने के लिये कदम उठाएगा।
• अनुच्छेद 43: राज्य ग्रामीण क्षेत्रों में व्यक्तिगत या सहकारी आधार पर कुटीर उद्योगों को बढ़ावा देने का प्रयास करेगा।
• अनुच्छेद 43B: सहकारी समितियों के स्वैच्छिक गठन, स्वायत्त कामकाज, लोकतांत्रिक नियंत्रण और पेशेवर प्रबंधन को बढ़ावा देना।
• अनुच्छेद 46: राज्य समाज के कमज़ोर वर्गों, विशेषकर अनुसूचित जातियों (एससी), अनुसूचित जनजातियों (एसटी) और अन्य कमज़ोर वर्गों के शैक्षिक और आर्थिक हितों को बढ़ावा देगा।
• अनुच्छेद 47: राज्य सार्वजनिक स्वास्थ्य में सुधार के लिये कदम उठाएगा और नशीले पेय तथा स्वास्थ्य के लिये हानिकारक नशीले पदार्थों के सेवन पर रोक लगाएगा।
• अनुच्छेद 48: गायों, बछड़ों और अन्य दुधारू पशुओं के वध पर रोक लगाने तथा मवेशियों को पालने एवं उनकी नस्लों में सुधार करने के लिए।


विश्व की प्रमुख झीलें

• कैस्पियन सागर: पूर्व सोवियत संघ एवं ईरान
• सुपीरियर झील: कनाडा तथा संयुक्त राज्य अमेरिका
• विक्टोरिया झील: युगाण्डा, तंजानिया तथा केन्या
• ह्यूरन झील: कनाडा तथा संयुक्त राज्य अमेरिका
• मिशिगन झील: संयुक्त राज्य अमेरिका
• टांगानिका झील: कांगो, तंजानिया, जाम्बिया तथा बुरुण्डी
• बैकाल झील: रूस
• ग्रेट बियर झील: कनाडा
• अरल सागर: रूस
• ग्रेट स्लेव झील: कनाडा
• ईरी झील: कनाडा तथा संयुक्त राज्य अमेरिका


रैपिड रिवीजन रेडी

मौर्यकालीन प्रशासन

• मंत्री/अधिकारी
• समाहर्ता = आय का संग्रहकर्ता
• सन्नीघाता = राजकीय कोष का अध्यक्ष
• प्रशास्ता = कारागार का अध्यक्ष
• नायक = नगर रक्षा का अध्यक्ष
• सीताअध्यक्ष = राजकीय भूमि का संरक्षक
• पण्याअध्यक्ष = वाणिज्य विभाग का प्रमुख

उत्तर प्रदेश में स्थित आठ महाजनपद क्षेत्र और उनकी राजधानी

1. मल्ल (देवरिया, बस्ती, गोरखपुर और सिद्धार्थनगर के जिले) - राजधानी: कुशीनारा और पावा
2. काशी (वाराणसी) - राजधानी: वाराणसी
3. कोशल (फैजाबाद, गोंडा, बहराइच के जिले) - राजधानी: उत्तर कोसल / दक्षिण कोसल / अयोध्या
4. वत्स (इलाहाबाद और मिर्जापुर के जिले) - राजधानी: कौशाम्बी
5. चेदि (बुंदेलखंड क्षेत्र) - राजधानी: शक्तिमती
6. पांचाल (रुहेलखंड, पश्चिमी यूपी) - राजधानी: अहिछत्र और कांपिल्य
7. शूरसेन (ब्रजमंडल) - राजधानी: मथुरा
8. कुरु (मेरठ और दक्षिण-पूर्वी हरियाणा) - राजधानी: इंद्रप्रस्थ

सैयद वंश के शासक

• खिज्र खान (1414-1421 ई.) - 'रैयत-ए-आला'
• मुबारक शाह (1421-1434 ई.)
• मुहम्मद शाह (1434-1445 ई.)
• अलाउद्दीन आलम शाह (1445-1451 ई.)

मध्यकालीन इतिहास की अत्यधिक महत्वपूर्ण पुस्तक और उनके लेखक

• ताज-उल-मसिर - हसन निजामी
• तबकात-ए-नासिरी - मिनहाजुद्दिन सिराज
• फवाद-उल-फवाद - अमीर हसन देहलवी
• तारीख़-ए-फिरोजशाही - जियाउद्दीन बरनी
• फुतुहात-ए-फिरोजशाही - फिरोज शाह तुगलक
• फुतुह-उस-सलातिन - अब्दुल मलिक इसामी

अमीर खुसरो की रचनाएं

• किरान-उस-सादेन - इसमें बुगरा खां और उसके बेटे कैकुवाद के मिलन का वर्णन है।
• मिफ्ताह-उल-फतह - जलालुद्दीन खिलजी के सैन्य अभियानों आदि का वर्णन।
• खजाइन-उल-फुतूह - अलाउद्दीन खिलजी के शासन का वर्णन।
• नूह-सिपेहर - मुबारक खिलजी का चाटुकारिता पूर्ण वर्णन।
• आशिका - गुजरात के राजकरण की पुत्री देवल रानी और अलाउद्दीन के पुत्र खिजर खान की प्रेम कथा का वर्णन।
• तुगलकनामा - गयासुद्दीन तुगलक की विजय का चित्रण तथा खुसरो शाह के साथ उनके संघर्ष का वर्णन।

अलाउद्दीन खिलजी के आक्रमण / शासक

• देवगिरी पर पहली बार आक्रमण (1296) - रामचंद्र
• गुजरात (1299) - रायकर्ण
• रणथम्भौर (1301) - हम्मीर देव
• चित्तौड़ (1303) - रतन सेन
• मालवा (1305) - महलक देव
• देवगिरि (1306) - रामदेव
• वारंगल (1308) - रुद्रदेव
• द्वारसमुद्र (1310) - होयसल वंश
रैपिड रिवीजन रेडी

प्रमुख संविधान संशोधन

• प्रथम संविधान संशोधन (1951): नौवीं अनुसूची जोड़ी गई।
• 7वां संशोधन (1956):
• लोकसभा के सदस्यों की संख्या में वृद्धि।
• दो या दो से अधिक राज्यों के लिए एक उच्च न्यायालय का प्रावधान।

• 31वां संशोधन (1972): लोकसभा सीटें 525 से बढ़ाकर 545 कर दी गईं।
• 36वां संशोधन (1975): सिक्किम को भारत का पूर्ण राज्य बनाया गया।
• 39वां संशोधन (1975): राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, स्पीकर और प्रधानमंत्री के चुनाव को चुनौती नहीं दी जा सकती।
• 42वाँ संशोधन (1976): इस संशोधन के तहत भारतीय संविधान में तीन नए शब्द 'समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष एवं अखंडता' जोड़े गए।
• 44वें संशोधन अधिनियम (1978): मौलिक अधिकारों की सूची से संपत्ति के अधिकार को हटा दिया। संपत्ति का अधिकार कोई मौलिक अधिकार नहीं है, केवल कानूनी अधिकार है।
• 52वां संशोधन (1985): दल-बदल विरोधी कानूनों का प्रावधान (नई दसवीं अनुसूची जोड़ी गई)।
• 58वां संशोधन (1987): संविधान के प्राधिकृत हिन्दी पाठ को प्रकाशित करने हेतु।
• 61वां संशोधन (1989): मतदान की आयु 21 से घटाकर 18 वर्ष कर दी गई।
• 69वां संशोधन (1991): दिल्ली को 'राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली' का विशेष दर्जा दिया गया।
• 70वां संशोधन (1992): राष्ट्रपति चुनाव के लिए पांडिचेरी और दिल्ली विधायिका के सदस्यों को निर्वाचक मंडल में शामिल करने का प्रावधान।
• 73वां संशोधन (1992): पंचायती राज संस्थाओं को संवैधानिक दर्जा दिया गया।
• 74वां संशोधन (1992): शहरी स्थानीय निकायों को संवैधानिक दर्जा दिया गया।
• 86वाँ संशोधन (2002): प्रारंभिक शिक्षा को मौलिक अधिकार बनाया गया।
• 89वांँ संशोधन (2003): अनुच्छेद 338-A के तहत राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग का गठन।
• 91वाँ संशोधन (2003): मंत्रिपरिषद में प्रधान मंत्री सहित मंत्रियों की कुल संख्या लोकसभा की कुल संख्या के 15% से अधिक नहीं होगी।

वित्त आयोग
आर्टिकल 280 के अनुसार

• वित्त आयोग में एक अध्यक्ष और चार सदस्यों की नियुक्ति भारत का राष्ट्रपति करता है, लेकिन उनकी योग्यता का निर्धारण संसद करती है।
• आर्टिकल 281: राष्ट्रपति वित्त आयोग की सिफारिश को संसद के सदन के पटल पर रखवाएगा।
• इस आयोग का गठन प्रति पांचवें वर्ष पर किया जाता है।
• पहले वित्त आयोग के अध्यक्ष: के.सी. नियोगी

विभिन्न वित्त आयोगों के अध्यक्ष:

• दूसरे: के. संथानम
• 11वें: A.M. खुसरो
• 12वें: सी. रंगराजन
• 13वें: विजय केलकर
• 14वें: Y.V. रेड्डी
• 15वें: N.K. सिंह
• 16वें: अरविंद पनगढ़िया

धन विधेयक और वित्त विधेयक

धन विधेयक

• धन विधेयक के संबंध में विशेष प्रक्रिया का प्रावधान अनुच्छेद 109 में दिया गया है।
• धन विधेयक से संबंधित विषय अनुच्छेद 110 के अंतर्गत आते हैं।
• धन विधेयक राज्यसभा में प्रस्तुत नहीं किया जा सकता है।
• धन विधेयक राष्ट्रपति के पूर्व हस्ताक्षर द्वारा पारित किया जा सकता है।
• राष्ट्रपति द्वारा पुनर्विचार के लिए नहीं लौटाया जा सकता है।

वित्त विधेयक

• वित्त विधेयक की प्रक्रिया अनुच्छेद 117 में है।
• वित्त विधेयक में अनुच्छेद 110 में वर्णित विषय के साथ अन्य मामले भी उल्लिखित हैं।
• अनुच्छेद 117 (3) के अंतर्गत प्रस्तावित विषयों को छोड़कर अन्य वित्त विधेयकों को राज्यसभा में प्रस्तावित नहीं किया जा सकता है।
• वित्त विधेयक (अनुच्छेद 117 (3)) साधारण विधेयक की तरह ही पारित होते हैं।
• राष्ट्रपति द्वारा पुनर्विचार के लिए लौटाया जा सकता है।


रैपिड रिवीजन रेडी: वैदिक कालीन प्रशासन

वैदिक कालीन पद और उनकी भूमिकाएँ
इस खंड में, हम वैदिक काल के दौरान प्रशासन में विभिन्न पदों और उनकी जिम्मेदारियों पर प्रकाश डालते हैं।

• कुलपति: परिवार का मुखिया
• ग्रामणी: ग्राम का मुखिया
• स्पास: जासूस / संदेशवाहक
• व्रजपति: चारागाहों का अधिकारी
• भागुदह: राजस्व संग्राहक
• जीवगृह: पुलिस अधिकारी
• अक्षवपा: लेखपाल
• अथापति: मुख्य न्यायाधीश
• संगृहीत्री: कोषाध्यक्ष
• तक्षण: बढ़ई
• पलागला: संदेशवाहक
• गोविंकार्टना: वनों और खेलों के रक्षक
भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन की महत्वपूर्ण घटनाएँ (काल क्रम में)
यह सूची भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन की प्रमुख घटनाओं को उनके कालानुक्रम के अनुसार प्रस्तुत करती है।

प्रारंभिक घटनाएँ (1885-1914)

• 1885 - कांग्रेस की स्थापना।
• 1905 - बंगाल का विभाजन।
• 1906 - मुस्लिम लीग का गठन।
• 1907 - कांग्रेस का विभाजन।
• 1908 - खुदीराम बोस को फाँसी।
• 1909 - मार्ले-मिंटो सुधार अधिनियम।
• 1913 - गदर आंदोलन।
• 1914 - प्रथम विश्व युद्ध की शुरुआत।

गांधीवादी युग की शुरुआत (1915-1929)

• 1915 - गांधी जी का भारत आगमन।
• 1916 - लखनऊ समझौता।
• 1916 - होमरूल लीग आंदोलन।
• 1917 - चंपारण सत्याग्रह।
• 1918 - अहमदाबाद मील मजदूर आंदोलन।
• 1918 - खेड़ा आंदोलन।
• 1919 - रॉलेट एक्ट।
• 1919 - जलियांवाला बाग हत्याकांड।
• 1919 - खिलाफत आंदोलन।
• 1920 - असहयोग आंदोलन।
• 1922 - चौरी चौरा कांड।
• 1923 - स्वराज पार्टी का गठन।
• 1924 - कांग्रेस का बेलगाम अधिवेशन।
• 1925 - काकोरी कांड।
• 1928 - साइमन कमीशन का आगमन।
• 1929 - लाहौर अधिवेशन।
• 1929 - दांडी मार्च की घोषणा।

स्वतंत्रता की ओर (1930-1947)

• 1930 - सविनय अवज्ञा आंदोलन।
• 1931 - गांधी-इरविन समझौता।
• 1930 - प्रथम गोलमेज सम्मेलन।
• 1931 - द्वितीय गोलमेज सम्मेलन।
• 1932 - तृतीय गोलमेज सम्मेलन।
• 1932 - पूना समझौता।
• 1940 - व्यक्तिगत सत्याग्रह।
• 1940 - पाकिस्तान की मांग।
• 1942 - क्रिप्स मिशन।
• 1942 - भारत छोड़ो आंदोलन।
• 1942 - आजाद हिंद फौज का गठन।
• 1945 - वेवेल योजना / शिमला समझौता।
• 1946 - नौसेना विद्रोह।
• 1946 - कैबिनेट मिशन।
• 1947 - माउंटबेटन योजना।


विधेयक के प्रकार

धन विधेयक (आर्टिकल–110)
धन विधेयक की मुख्य विशेषताएंँ:

• केवल मंत्रिमंडल के सदस्य द्वारा प्रस्तुत किया जाता है।
• केवल लोकसभा में लाया जाता है।
• राष्ट्रपति की पूर्व अनुमति की आवश्यकता होती है।
• लोकसभा अध्यक्ष द्वारा प्रमाणित किया जाता है।
• राज्यसभा को पारित करने हेतु 14 दिन का समय मिलता है।
• राज्यसभा न तो इसे अस्वीकार कर सकती है और न ही इसमें संशोधन कर सकती है।
• केवल अपनी सिफारिश दे सकती है।
• लोकसभा सिफारिशों को मानने हेतु बाध्य नहीं है।
• संयुक्त बैठक का प्रावधान नहीं है।
• राष्ट्रपति इसे सहमत/असहमति दे सकता है, परन्तु पुनर्विचार हेतु वापस नहीं भेज सकता।

वित्त विधेयक (आर्टिकल–117)
वित्त विधेयक की मुख्य विशेषताएंँ:

• प्रारम्भ लोकसभा में होता है।
• लोकसभा से पारित होने के बाद इसकी प्रकृति साधारण विधेयक की तरह हो जाती है।
• राज्यसभा इसे अनिश्चित काल हेतु रोक सकती है।
• गतिरोध की स्थिति में संयुक्त बैठक का प्रावधान है।
• सभी धन विधेयक वित्त विधेयक होते हैं, परंतु सभी वित्त विधेयक धन विधेयक नहीं होते।
• राष्ट्रपति इसे सहमति/असहमति/पुनर्विचार हेतु लौटा सकता है।


रैपिड रिवीजन रेडी

17 सतत विकास लक्ष्य 2030

• लक्ष्य 1: गरीबी उन्मूलन
• लक्ष्य 2: शून्य भूखमरी
• लक्ष्य 3: अच्छा स्वास्थ्य और खुशहाली
• लक्ष्य 4: गुणवत्तापूर्ण शिक्षा
• लक्ष्य 5: लैंगिक समानता
• लक्ष्य 6: स्वच्छ जल और स्वच्छता
• लक्ष्य 7: सस्ती और स्वच्छ ऊर्जा
• लक्ष्य 8: अच्छा कार्य और आर्थिक विकास
• लक्ष्य 9: उद्योग, नवाचार और बुनियादी ढाँचा
• लक्ष्य 10: असमानता कम करना
• लक्ष्य 11: टिकाऊ शहर और समुदाय
• लक्ष्य 12: जिम्मेदार उपभोग और उत्पादन
• लक्ष्य 13: जलवायु कार्रवाई
• लक्ष्य 14: जल के नीचे जीवन
• लक्ष्य 15: भूमि पर जीवन
• लक्ष्य 16: शांति और न्याय मजबूत संस्थाएँ
• लक्ष्य 17: लक्ष्य प्राप्त करने के लिए साझेदारी

जैवनिम्नीकरणीय प्रदूषक
जिन्हें प्रकृति में सरल, हानिरहित पदार्थों में तोड़ा जा सकता है

उदाहरण-

• घरेलू अपशिष्ट (कूड़ा), मूत्र, मल पदार्थ, सीवेज
• कृषि अवशेष, कागज, लकड़ी, कपड़ा, मवेशियों का गोबर
• जानवरों की हड्डियाँ, चमड़ा, ऊन, वनस्पति

अकबर के कुछ महत्वपूर्ण कार्य

• 1562 - दास प्रथा का अंत
• 1562 - अकबर की 'हरमदल' से मुक्ति
• 1563 - तीर्थयात्रा कर समाप्त
• 1564 - जजिया कर समाप्त
• 1571 - फतेहपुर सीकरी की स्थापना एवं राजधानी का आगरा से फतेहपुर स्थानान्तरण
• 1575 - इबादत खाने की स्थापना
• 1579 - महजर की घोषणा
• 1580 - 'दहसाला प्रणाली (टोडरमल द्वारा) लागू।
• 1582 - दीन-ए-इलाही की घोषणा

महत्वपूर्ण अभिलेख

• हाथीगुम्फा अभिलेख - कलिंग राजा खारवेल
• जूनागढ़ (गिरनार) अभिलेख - रुद्रदामन
• नासिक अभिलेख - गौतमी बलश्री
• प्रयाग स्तम्भ लेख - समुद्रगुप्त
• ऐहोल अभिलेख - पुलकेशिन-II
• मन्दसौर अभिलेख - मालवा नरेश यशोवर्मन
• ग्वालियर अभिलेख - प्रतिहार नरेश भोज
• भितरी एवं जूनागढ़ अभिलेख - स्कन्दगुप्त
• देवपाड़ा अभिलेख - बंगाल शासक विजयसेन

पेशवाओं के काल में मराठा

• बालाजी विश्वनाथ (1713-20 ई.)
• बाजीराव प्रथम (1720-40 ई.)
• बालाजी बाजीराव (1740-61 ई.)
• (नाना साहब) पानीपत का तीसरा युद्ध (14 जनवरी, 1761 ई.)

• माधवराव प्रथम (1761-72 ई.)
• नारायण राव (1772-73 ई.)
• माधव नारायण राव (1774-95 ई.)
• बाजीराव द्वितीय (1795 ई.-1818 ई.)

आंग्ल-मैसूर युद्ध

प्रथम आंग्ल मैसूर युद्ध (1767-69 ई.)

• मद्रास की संधि
• हैदर अली और अंग्रेज गवर्नर बैरलस्ट के बीच, जिसमे अंग्रेजों की हार हुई।

द्वितीय आंग्ल मैसूर युद्ध (1780-84 ई.)

• मंगलोर की संधि
• हैदर अली और अंग्रेज वारेन हेस्टिंग्स के बीच,

तृतीय आंग्ल मैसूर युद्ध (1790-92 ई.)

• श्रीरंगपट्टनम की संधि
• टीपू सुल्तान और अंग्रेज लार्ड कार्नवालिस के बीच लड़ाई संधि के द्वारा समाप्त हुई।

चतुर्थ आंग्ल मैसूर युद्ध (1797-99 ई.)

• टीपू सुल्तान और अंग्रेजों लार्ड वेलेजली के बीच, टीपू की हार हुई वह युद्ध के मध्य दिवंगत हुआ, मैसूर शक्ति का पतन हुआ।

बौद्ध संगीतियां

प्रथम बौद्ध संगीति-राजगृह (483 ई पू)

• शासक- (हर्यंक वंश) अजातशत्रु के संरक्षण में
• अध्यक्ष- महाकश्यप
• इसमें आनंद ने सुत्तपिटक की रचना की जिसमें बुद्ध की शिक्षाओं का समावेश है।

द्वितीय बौद्ध संगीति-वैशाली (383 ईपू)

• शासक (शिशुनाग वंश) कालाशोक
• अध्यक्ष- सबकामी
• इसमें बौद्ध व्यवस्था स्थाविरवादियो और महासांघिकों में विभाजित हो गई।

तृतीय बौद्ध संगीति-पाटलिपुत्र (250 ई पू)

• शासक(मौर्य वंश) अशोक
• अध्यक्ष- मोगलीपुत्त तिस्स
• अभिधम्म पिटक का संकलन इसी परिषद में किया गया था।
• बौद्ध धर्म प्रचारकों को विभिन्न देशों में भेजा गया

चतुर्थ बौद्ध संगीति कश्मीर में (72 ई)

• शासक- (कुषाण वंश) कनिष्क
• अध्यक्ष- वसुमित्र और अश्वघोष
• इसमें बौद्धधर्म अंततः हीनयान और महायान में विभाजित हो गया।


(Rapid Revision Ready)

राष्ट्रपति से संबंधित महत्वपूर्ण अनुच्छेद

• अनुच्छेद 52: भारत का राष्ट्रपति
• अनुच्छेद 53: संघ की कार्यपालिका शक्ति
• अनुच्छेद 54: राष्ट्रपति का निर्वाचन मंडल
• अनुच्छेद 55: राष्ट्रपति की निर्वाचन पद्धति
• अनुच्छेद 56: राष्ट्रपति की पदावधि
• अनुच्छेद 57: पुनर्विचार के लिए पात्रता
• अनुच्छेद 58: निर्वाचन के लिए योग्यताएं
• अनुच्छेद 59: राष्ट्रपति पद के लिए शर्तें
• अनुच्छेद 60: राष्ट्रपति द्वारा शपथ
• अनुच्छेद 61: महाभियोग की प्रक्रिया
• अनुच्छेद 62: राष्ट्रपति का पद रिक्त होने की स्थिति
• अनुच्छेद 72: क्षमादान की शक्तियां
• अनुच्छेद 73: संघ की कार्यपालिका शक्ति का विस्तार

राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त अधिकारी

• प्रधानमंत्री एवं केंद्रीय मंत्री
• राज्यों के राज्यपाल
• वित्त आयोग, राजभाषा आयोग के अध्यक्ष
• उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालय के न्यायाधीश
• भारत के महान्यायवादी तथा नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक
• संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष एवं सदस्य
• मुख्य निर्वाचन आयुक्त एवं अन्य निर्वाचन आयुक्त
• राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष एवं सदस्य
• अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष
• संघ राज्य क्षेत्रों के राज्यपाल
• दिल्ली एवं पुदुचेरी के मुख्यमंत्री

18वीं लोक सभा के प्रोटेम स्पीकर

• 20 जून, 2024 को भर्तृहरि महताब को 18वीं लोक सभा का अस्थायी अध्यक्ष (प्रोटेम स्पीकर) नियुक्त किया गया।
• प्रोटेम स्पीकर का प्राथमिक कार्य नवनिर्वाचित सदस्यों को शपथ दिलाना और अध्यक्ष के चुनाव तक निचले सदन की अध्यक्षता करना है।

प्रोटेम स्पीकर को लेकर संविधान में क्या प्रावधान है

• संविधान में स्पष्ट रूप से 'प्रोटेम स्पीकर' शब्द का प्रयोग नहीं किया गया है।
• प्रोटेम स्पीकर की नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।
• राष्ट्रपति प्रोटेम स्पीकर को पद की शपथ दिलाते हैं।
• सदन के नए अध्यक्ष के चुने जाने के बाद प्रोटेम स्पीकर का पद समाप्त हो जाता है।

नोट: लोक सभा के पहले प्रोटेम स्पीकर जी.वी. मावलंकर थे।

केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI)

• इसकी स्थापना 1963 में गृह मंत्रालय के एक संकल्प के द्वारा ‘संथानम समिति’ की सिफारिश पर की गई है।
• वर्तमान में यह ‘कार्मिक मंत्रालय’ के अधीन कार्य करती है।
• यह ‘संवैधानिक/वैधानिक निकाय’ नहीं है।
• यह अपनी शक्ति ‘दिल्ली विशेष पुलिस अधिष्ठान अधिनियम, 1946’ से प्राप्त करती है।
• मुख्यालय: नई दिल्ली

उपराष्ट्रपति से संबंधित महत्वपूर्ण अनुच्छेद

• अनुच्छेद 63: भारत के उपराष्ट्रपति
• अनुच्छेद 64: उपराष्ट्रपति का राज्यसभा का पदेन सभापति होना
• अनुच्छेद 65: उपराष्ट्रपति को राष्ट्रपति के रूप में कार्य करना
• अनुच्छेद 66: उपराष्ट्रपति का चुनाव
• अनुच्छेद 67: उपराष्ट्रपति का कार्यकाल
• अनुच्छेद 68: उपराष्ट्रपति के पद की रिक्ति को भरने के लिए चुनाव कराने का समय
• अनुच्छेद 69: उपराष्ट्रपति द्वारा शपथ या प्रतिज्ञान
• अनुच्छेद 70: अन्य आकस्मिकताओं में राष्ट्रपति के कार्यों का निर्माण
रैपिड रिवीजन

महत्वपूर्ण विटामिन और उनकी कमी से होने वाले रोग

• विटामिन ए (रेटिनॉल): रतौंधी व जीरफ्थेल्मिया, संक्रमण के प्रति प्रभाव्यता
• विटामिन बी1 (थायमिन): वृद्धि का रुकना, भूख और वजन का घटना, बेरी-बेरी, थकान का होना, पेट की खराबी
• विटामिन बी2 (राइबोफ्लेविन): जीभ पर छाले का पड़ जाना, असमय बुढ़ापा आना, प्रकाश न सह पाना, चीलोसिस
• विटामिन बी3 (निआसिन): जीभ का चिकनापन, त्वचा पर फोड़े फुंसी होना, पाचन क्रिया में गड़बड़ी
• विटामिन बी5 (पैंटोथेनिक एसिड): पेशियों में लकवा, पैरों में जलन आदि।
• विटामिन बी6 (पाईरिडॉक्सिन): त्वचा रोग, मस्तिष्क का ठीक से काम ना करना, अनीमिया

प्रोटोजोआ से होने वाले रोग

रोग
प्रोटोजोआ
अमीबी पेचिश
एण्टअमीबा हिस्टोलिटिका
काला अज़ार
लीशमैनिया डोनोवानी
मलेरिया
प्लास्मोडियम परजीवी
निद्रा रोग
ट्रिपैनोसोमा ब्रुसी


गरीबी मापन की समितियां

• अलघ समिति (1979)
• पोषक तत्वों के आधार पर गरीबी मापन किया गया।
• न्यूट्रीशनल वैल्यू 2400 किलो कैलोरी ग्रामीण क्षेत्र के लिए और 2100 किलो कैलोरी शहरी क्षेत्र में निर्धारित की।

• लकड़ावाला समिति (1993)
• अपनी रिपोर्ट में राज्य-विशिष्ट गरीबी रेखाएँ बनाई जानी चाहिए।
• इन्हें शहरी क्षेत्रों में CPI-IW तथा ग्रामीण क्षेत्रों में CPI-AL का उपयोग करते हुए अद्यतन किया जाना चाहिए।

• तेंदुलकर समिति (2009)
• शहरी क्षेत्र में रह रहे परिवारों के संदर्भ में गरीबी रेखा को 1000 रुपए (प्रति व्यक्ति प्रति माह)।
• ग्रामीण परिवारों के लिये इसे 816 रुपए निर्धारित किया था।

• रंगराजन समिति (2014)
• अखिल भारतीय स्तर पर ग्रामीण क्षेत्र में 972 रुपए प्रतिमाह (32 ₹ प्रतिदिन)।
• शहरी क्षेत्र में 1407 रुपए प्रतिमाह (47 ₹ प्रतिदिन) निर्धारित किया था।

बेरोजगारी के प्रकार

• चक्रीय बेरोजगारी: यह बाजार में उत्पन्न मंदी के कारण मांग की कमी से उत्पन्न होती है और मांग बढ़ने पर समाप्त हो जाती है जैसे विकसित देशों में।
• घर्षण जनित बेरोजगारी: एक रोजगार छोड़कर दूसरे रोजगार प्राप्त के मध्य की अवधि।
• संरचनात्मक बेरोजगारी: कौशल की कमी, योग्यता, रोजगार के अनुरूप काम ना मिल पाने की स्थिति।
• मौसमी बेरोजगारी: कृषि क्षेत्र में मौसम के अनुसार काम तथा शेष समय में बेरोजगारी।
• प्रच्छन्न बेरोजगारी: किसी काम में आवश्यकता से अधिक लगे हुए लोग जिनको निकालने पर उत्पादन का स्तर समान रहे।


रैपिड रिवीजन रेडी

ब्रिटिश भारत में लोकसेवा संबंधी आयोग

• एचिंसन आयोग (1886) – लॉर्ड डफरिन
• ईसलिंग्टन आयोग (1912) – लॉर्ड हार्डिंग-II
• ली आयोग (1923) – लॉर्ड रीडिंग

भारत सरकार अधिनियम, 1935 के अंतर्गत संघीय लोक सेवा आयोग के गठन का प्रावधान ली आयोग के सुझाव पर किया गया था।

• भूमि सुधार के उद्देश्य से भारत में स्थायी बंदोबस्त प्रणाली लॉर्ड कार्नवालिस द्वारा लागू की गई।
• भारत में साम्राज्य विस्तार के उद्देश्य से सहायक संधि प्रणाली की शुरूआत लॉर्ड वेलेजली द्वारा की गई।
• व्यपगत का सिद्धांत या राज्य हड़प नीति (Doctrine of Lapse) को लॉर्ड डलहौजी द्वारा लागू किया गया था।
• लॉर्ड लिटन के कार्यकाल में स्ट्रेची आयोग (1880 ई. भारत का प्रथम अकाल आयोग) अकाल आयोग का गठन किया गया।
• भारत में स्थायी स्वशासन का जनक लॉर्ड रिपन को माना जाता है।
• रैय्यतवाड़ी भू-राजस्व व्यवस्था थी जो सर्वाधिक ब्रिटिश क्षेत्रों पर लागू की गई।

ब्रिटिशकाल में विभिन्न क्षेत्रों पर अधिकार

• नेपाल (1816) – लॉर्ड हेस्टिंग्स
• सिंध (1843) – लॉर्ड एलनबरो
• भूटान (1865) – लॉर्ड लारेंस
• बर्मा (1885) – लॉर्ड डफरिन

प्रमुख शिक्षा आयोग

• चार्ल्स वुड डिस्पैच (1854) – लॉर्ड डलहौजी
• हंटर आयोग (1882) – लॉर्ड रिपन
• रैले आयोग (विश्वविद्यालय आयोग) (1902) – लॉर्ड कर्जन
• सैडलर आयोग (1917) – लॉर्ड चेम्सफोर्ड
• इंचकैप आयोग (1923) – लॉर्ड रीडिंग
• हार्डोंग समिति (प्राथमिक शिक्षा) (1929) – लॉर्ड इरविन
• लिंडसे आयोग (प्रौढ़ शिक्षा) (1929) – लॉर्ड इरविन
• सार्जेंट आयोग (1944) – लॉर्ड वेवेल
• राधाकृष्णन आयोग (1948) – लॉर्ड माउंटबेटन
• भारत में शिक्षा के क्षेत्र में विकास के लिये एनी बेसेंट ने वर्ष 1898 में सेंट्रल हिंदू कॉलेज की स्थापना की, जो वर्ष 1916 में मदनमोहन मालवीय जी के प्रयासों से बनारस हिंदू विश्वविद्यालय बना।
• एशियाटिक सोसायटी ऑफ बंगाल के अधीन सर्वप्रथम भगवद्गीता का अंग्रेजी में अनुवाद चार्ल्स विल्किंस ने किया था तथा कालिदास की प्रसिद्ध रचना अभिज्ञान शाकुंतलम् का पहली बार अंग्रेजी में अनुवाद सर विलियम जोंस द्वारा किया गया था।
• वर्ष 1784 में कलकत्ता में एशियाटिक सोसायटी ऑफ बंगाल की स्थापना सर विलियम जोंस द्वारा की गई।


इतिहास की प्रमुख घटनाएँ एवं उनके घटित वर्ष

प्राचीन भारत की घटनाएँ

• भारत में आर्यों का आगमन: 1500 ई०पू०
• महावीर का जन्म: 540 ई०पू०
• महावीर का निर्वाण: 468 ई०पू०
• गौतम बुद्ध का जन्म: 563 ई०पू०
• गौतम बुद्ध का महापरिनिर्वाण: 483 ई०पू०
• सिकंदर का भारत पर आक्रमण: 326-325 ई०पू०
• अशोक द्वारा कलिंग पर विजय: 261 ई०पू०
• विक्रम संवत् का आरम्भ: 58 ई०पू०
• शक संवत् का आरम्भ: 78 ई०पू०
• हिजरी संवत् का आरम्भ: 622 ई०
• फाह्यान की भारत यात्रा: 405-11 ई०
• हर्षवर्धन का शासन: 606-647 ई०
• हेनसांग की भारत यात्रा: 630 ई०

मध्यकालीन भारत की घटनाएँ

• सोमनाथ मंदिर पर आक्रमण: 1025 ई०
• तराईन का प्रथम युद्ध: 1191 ई०
• तराईन का द्वितीय युद्ध: 1192 ई०
• गुलाम वंश की स्थापना: 1206 ई०
• वास्कोडिगामा का भारत आगमन: 1498 ई०
• पानीपत का प्रथम युद्ध: 1526 ई०
• पानीपत का द्वितीय युद्ध: 1556 ई०
• अकबर का राज्यारोहण: 1556 ई०
• तालिकोटा का युद्ध: 1565 ई०
• हल्दी घाटी का युद्ध: 1576 ई०
• दीन-ए-इलाही धर्म की स्थापना: 1582 ई०

आधुनिक भारत की घटनाएँ

• प्लासी का युद्ध: 1757 ई०
• बक्सर का युद्ध: 1764 ई०
• पानीपत का तृतीय युद्ध: 1761 ई०
• प्रथम आंग्ल-मैसूर युद्ध: 1776-69 ई०
• द्वितीय आंग्ल-मैसूर युद्ध: 1780-84 ई०
• तृतीय आंग्ल-मैसूर युद्ध: 1790-92 ई०
• बंगाल में स्थायी बंदोबस्त: 1793 ई०
• चतुर्थ आंग्ल-मैसूर युद्ध: 1799 ई०
• बंगाल में प्रथम विभाजन: 1905 ई०
• मुस्लिम लीग की स्थापना: 1906 ई०
• मार्ले-मिंटो सुधार: 1909 ई०
• प्रथम विश्वयुद्ध: 1914 -18 ई०
• असहयोग आंदोलन: 1920 - 22 ई०
• साइमन कमीशन का आगमन: 1928 ई०
• दांडी मार्च नमक सत्याग्रह: 1930 ई०
• प्रथम गोलमेज सम्मेलन: 1930 ई०
• गाँधी इरविन समझौता: 1931 ई०
• द्वितीय गोलमेज सम्मेलन: 1931 ई०
• तृतीय गोलमेज सम्मेलन: 1932 ई०
• द्वितीय विश्वयुद्ध: 1939 - 45 ई०
• क्रिप्स मिशन का आगमन: 1942 ई०
• कैबिनेट मिशन का आगमन: 1946 ई०
• महात्मा गांधी की हत्या: 1948 ई०
• चीन का भारत पर आक्रमण: 1962 ई०
• भारत-पाक युद्ध: 1965 ई०
• ताशकंद समझौता: 1966 ई०
• कारगिल युद्ध: 1999 ई०

विश्व की प्रमुख क्रांतियाँ

• चीनी क्रांति: 1911 ई०
• फ्रांसीसी क्रांति: 1789 ई०
• रूसी क्रांति: 1917 ई०


रैपिड रिवीजन रेडी



लोक लेखा समिति



• इसका गठन भारत सरकार अधिनियम 1919 के तहत सर्वप्रथम 1921 में किया गया था।

• वर्तमान में इस समिति में कुल सदस्यों की संख्या 22 होती है।

• जिसमें 15 सदस्य लोकसभा से तथा सात सदस्य राज्यसभा से लिए जाते हैं।

• लोकसभा तथा राज्यसभा के सदस्यों का निर्वाचन अपने-अपने सदन के सदस्यों में से आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति से एकल संक्रमणीय मत द्वारा होता है।

• इस समिति के अध्यक्ष को लोकसभा अध्यक्ष द्वारा नियुक्त किया जाता है।

• इसके सदस्यों का कार्यकाल 1 वर्ष होता है।

• इस समिति का अध्यक्ष विपक्ष के किसी सदस्य को बनाया जाता है।

• यह समिति आम व्ययों पर निगरानी रखती है तथा प्राक्कलन समिति के साथ मिलकर सार्वजनिक व्यय पर संसदीय नियंत्रण सुनिश्चित करती है।



प्राक्कलन समिति



• यह स्थाई समितियों में सबसे बड़ी समिति है।

• इस समिति का गठन सिर्फ लोकसभा में किया जाता है।

• इसके सदस्यों की संख्या 30 होती है।

• राज्यसभा के सदस्य इसमें शामिल नहीं होते।

• इसका अध्यक्ष लोकसभा अध्यक्ष द्वारा नियुक्त किया जाता है।

• सर्वप्रथम इस समिति का गठन वर्ष 1950 में हुआ था।

• इसका गठन लोकसभा में बजट प्रस्तुत किए जाने के बाद होता है।



महाधिवक्ता



• संविधान के अनुच्छेद 165 के तहत राज्य के महाधिवक्ता की व्यवस्था की गई है।

• महाधिवक्ता राज्यपाल के प्रसादपर्यंत पद धारण करता है।

• यह राज्य का सर्वोच्च विधि अधिकारी होता है।

• उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की योग्यता रखने वाले व्यक्ति को राज्यपाल राज्य का महाधिवक्ता नियुक्त करता है।

• महाधिवक्ता को राज्य की किसी भी न्यायालय में सुनवाई का अधिकार प्राप्त है।

• यह राज्य विधान मंडल की कार्यवाही में भाग ले सकता है और संबोधित कर सकता है किंतु, मत नहीं दे सकता है।
रैपिड रिवीजन सीरीज: महत्वपूर्ण अधिनियम



रेग्यूलेटिंग एक्ट, 1773



• बंगाल के गवर्नर को बंगाल का गवर्नर-जनरल बनाया गया।

• वॉरेन हेस्टिंग्स प्रथम गवर्नर-जनरल बने।

• 1774 ई. में कलकत्ता में सुप्रीम कोर्ट की स्थापना हुई।

• मुख्य न्यायाधीश – एलिजा इम्पे (Elijah Impey)

• अन्य न्यायाधीश – चेम्बर्स (Chambers), लिमेस्टर (Lemaistre) तथा हाइड (Hyde)



• कंपनी के अधिकारियों के निजी व्यापार एवं भारतीयों से उपहार (रिश्वत) लेने पर रोक लगाई गई।

• भारत में केंद्रीकृत प्रशासन की नींव रखी गई।



पिट्स इंडिया एक्ट, 1784



• कंपनी के व्यापारिक एवं राजनीतिक कार्य अलग कर दिए गए।

• राजनीतिक मामलों के लिए 6 सदस्यीय बोर्ड ऑफ कंट्रोल (नियंत्रक मंडल) की स्थापना हुई।

• व्यापारिक मामलों का नियंत्रण कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स (निदेशक मंडल) के पास रहा।

• गवर्नर-जनरल की परिषद के सदस्यों की संख्या 4 से घटाकर 3 कर दी गई।

• भारत में द्वैध शासन (Dual System) की शुरुआत हुई।

• भारतीय राज्यों से युद्ध या संधि से पहले ब्रिटिश सरकार/बोर्ड ऑफ कंट्रोल की अनुमति आवश्यक मानी गई।



चार्टर एक्ट, 1813



• भारत के साथ कंपनी का व्यापारिक एकाधिकार समाप्त कर दिया गया।

• सभी ब्रिटिश नागरिकों को भारत में व्यापार की अनुमति दी गई।

• चीन के साथ व्यापार एवं चाय के व्यापार पर कंपनी का एकाधिकार बना रहा।

• ईसाई मिशनरियों को भारत में धर्म-प्रचार की अनुमति दी गई।

• भारतीय शिक्षा पर प्रतिवर्ष ₹1 लाख खर्च करने का प्रावधान किया गया।



1833 का चार्टर एक्ट



• बंगाल के गवर्नर जनरल को भारत का गवर्नर जनरल बना दिया गया।

• कंपनी के व्यापारिक अधिकार को पूर्णतः समाप्त कर दिया गया।

• विधिक परामर्श हेतु गवर्नर जनरल की परिषद में विधि सदस्य के रूप में चौथे सदस्य को शामिल किया गया।

• 1834 में लॉर्ड मैकाले की अध्यक्षता में चार सदस्यीय प्रथम विधि आयोग का गठन किया गया।

• मुंबई तथा मद्रास की परिषदों की विधि निर्माण की शक्तियों को वापस ले लिया गया।

• भारत में दास प्रथा को विधि विरुद्ध घोषित करके, 1843 में इसका उन्मूलन कर दिया गया।



1858 का भारत शासन अधिनियम



• 1784 के पिट्स इंडिया एक्ट द्वारा लागू द्वैध शासन प्रणाली को समाप्त कर दिया गया।

• कंपनी का शासन समाप्त कर दिया गया, भारत का शासन प्रत्यक्ष रूप से महारानी के अधीन आ गया।

• इसकी उद्घोषणा भारत के प्रथम वायसराय लॉर्ड कैनिंग ने इलाहाबाद में 1 नवंबर 1858 को की।

• निदेशक मंडल और नियंत्रक मंडल को समाप्त कर दिया गया, इसके समस्त अधिकार भारत राज्य सचिव को दे दिए गए।

• भारत सचिव की सहायता के लिए 15 सदस्यों की भारत परिषद की स्थापना की गई।

• मुगल सम्राट के पद को समाप्त कर दिया गया।

• इस अधिनियम को "एक्ट फॉर द बेटर गवर्नमेंट ऑफ इंडिया" के नाम से भी जाना जाता है।
राज्यपाल



राज्यपाल की योग्यताएँ

संविधान के अनुच्छेद 157 के तहत राज्यपाल की योग्यताओं का वर्णन है:



• वह भारत का नागरिक हो।

• आयु 35 वर्ष से अधिक हो।

• वह कोई लाभ का पद धारण न करता हो।



पद और कार्यकाल



• संविधान के अनुच्छेद 156 के अनुसार, राज्यपाल राष्ट्रपति के प्रसाद पर्यंत अपना पद धारण करता है।

• वह राष्ट्रपति को त्यागपत्र देकर अपने पद से मुक्त हो सकता है।



शपथ ग्रहण



• राज्यपाल संबंधित राज्य के मुख्य न्यायाधीश अथवा उसकी अनुपस्थिति में वरिष्ठतम न्यायाधीश के समक्ष अपने पद की शपथ लेता है।



वेतन एवं भत्ते



• राज्यपाल के वेतन भत्ते का निर्धारण संसद विधि द्वारा करती है।

• राज्यपाल के वेतन और भत्ते राज्य की संचित निधि से दिए जाते हैं।

• अनुच्छेद 158 (3क) के अनुसार, जब किसी व्यक्ति को दो या दो से अधिक राज्यों का राज्यपाल नियुक्त किया जाता है, तब उसे दिया जाने वाला वेतन राज्यों के बीच ऐसे अनुपात में आवंटित किया जाता है जो राष्ट्रपति द्वारा निर्धारित किया जाए।