Rankup RAS 4th Paper Test Schedule.pdf
1.9 MB
Rankup RAS 4th Paper Test Schedule.pdf
Role_of_State_in_Economic_Development_with_Special_reference_to.pdf
2.3 MB
Role of State in Economic Development with Special reference to Industrial Development(1).pdf
अर्थव्यवस्था में राज्य की भूमिका को निर्धारित करने वाले तत्त्व
विकासशील देश में अनेक आर्थिक अवरोध आर्थिक विकास की गति को अवरुद्ध करते हैं। देश में पूँजी का अभाव, प्राकृतिक साधनों का अल्प दोहन, बचत एवं विनियोग की कमी, औद्योगीकरण का अभाव, पूँजी निर्माण की कमी, बढ़ती बेरोजगारी आदि अनेक समस्याएँ विकासशील देशों में आर्थिक विकास के लिए अनुकूल वातावरण बनाने में अवरोध खड़े करती हैं; अत: इन विकासशील देशों में सरकार का दायित्व होता है कि वह देश के प्राकृतिक साधनों का उचित दोहन सुनिश्चित करने के लिए पूँजी, कुशल श्रमिक; उद्यमता, तकनीकी ज्ञान, परिवहन एवं संचार के साधन, शक्ति एवं ऊर्जा के साधन आदि (UPBoardSolutions.com) उपलब्ध कराये। सरकार इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए अनेक नीतिगत उपयोग; जैसे—राजकोषीय नीति, मौद्रिक नीति, औद्योगिक नीति, श्रम नीति आदि से आर्थिक विकास हेतु अनुकूल वातावरण बनाने में अपना योगदान देती है। देश में बचत-विनियोग को प्रोत्साहित करने व औद्योगीकरण को बढ़ावा देने, कच्चे माल की आपूर्ति सुनिश्चित करने आदि सभी कार्यों में सरकार निर्णायक भूमिका निभाती है। इस प्रकार आर्थिक विकास के लिए एक योजनाबद्ध रणनीति बनाने और उसका क्रियान्वयन करके आर्थिक उद्देश्यों की पूर्ति करने में सरकार का महत्त्वपूर्ण योगदान है। राज्य के नियन्त्रण के अभाव में सुनियोजित आर्थिक विकास सम्भव ही नहीं है। हमारे संविधान में राज्य के नीति-निदेशक तत्त्वों में आर्थिक सुरक्षा सम्बन्धी तत्त्वों को प्रमुख स्थान दिया गया है। ये तत्त्व प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से अर्थव्यवस्था के संचालन में सरकार की जिम्मेदारी की सीमा को निश्चित करते हैं। संविधान में वर्णित महत्त्वपूर्ण नीति-निदेशक सिद्धान्त जो हमारे आर्थिक जीवन को प्रभावित करते हैं, निम्नलिखित हैं –
सभी नागरिकों के लिए जीविका के पर्याप्त साधन जुटाना।
सामान्य हित के लिए समाज के भौतिक साधनों का उचित वितरण।
एक उचित सीमा से अधिक धन के केन्द्रीकरण पर रोक।
स्त्रियों और पुरुषों दोनों के समान काम के लिए समान वेतन।
श्रमिकों की शक्ति व स्वास्थ्य की रक्षा तथा श्रमिकों को (UPBoardSolutions.com) उनकी अपनी आयु एवं स्वास्थ्य की दृष्टि से बहुत अधिक खतरनाक कार्यों को स्वीकार करने के लिए बाध्य करने वाली परिस्थितियों को हटाना।
बच्चों की शोषण से रक्षा करना।
काम और शिक्षा का अधिकार तथा बेकारी, बीमारी और वृद्धावस्था में सार्वजनिक सहायता उपलब्ध कराना।
काम के उचित वातावरण को सुरक्षित बनाना।
रोजगार और जीवन को उचित स्तर दिलाना।
कमजोर वर्गों, विशेषकर अनुसूचित जातियों एवं जनजातियों के लोगों के आर्थिक हितों को प्रोत्साहन देना।
वैज्ञानिक आधार पर कृषि एवं पशुपालन को संगठित करना।
विकासशील देश में अनेक आर्थिक अवरोध आर्थिक विकास की गति को अवरुद्ध करते हैं। देश में पूँजी का अभाव, प्राकृतिक साधनों का अल्प दोहन, बचत एवं विनियोग की कमी, औद्योगीकरण का अभाव, पूँजी निर्माण की कमी, बढ़ती बेरोजगारी आदि अनेक समस्याएँ विकासशील देशों में आर्थिक विकास के लिए अनुकूल वातावरण बनाने में अवरोध खड़े करती हैं; अत: इन विकासशील देशों में सरकार का दायित्व होता है कि वह देश के प्राकृतिक साधनों का उचित दोहन सुनिश्चित करने के लिए पूँजी, कुशल श्रमिक; उद्यमता, तकनीकी ज्ञान, परिवहन एवं संचार के साधन, शक्ति एवं ऊर्जा के साधन आदि (UPBoardSolutions.com) उपलब्ध कराये। सरकार इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए अनेक नीतिगत उपयोग; जैसे—राजकोषीय नीति, मौद्रिक नीति, औद्योगिक नीति, श्रम नीति आदि से आर्थिक विकास हेतु अनुकूल वातावरण बनाने में अपना योगदान देती है। देश में बचत-विनियोग को प्रोत्साहित करने व औद्योगीकरण को बढ़ावा देने, कच्चे माल की आपूर्ति सुनिश्चित करने आदि सभी कार्यों में सरकार निर्णायक भूमिका निभाती है। इस प्रकार आर्थिक विकास के लिए एक योजनाबद्ध रणनीति बनाने और उसका क्रियान्वयन करके आर्थिक उद्देश्यों की पूर्ति करने में सरकार का महत्त्वपूर्ण योगदान है। राज्य के नियन्त्रण के अभाव में सुनियोजित आर्थिक विकास सम्भव ही नहीं है। हमारे संविधान में राज्य के नीति-निदेशक तत्त्वों में आर्थिक सुरक्षा सम्बन्धी तत्त्वों को प्रमुख स्थान दिया गया है। ये तत्त्व प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से अर्थव्यवस्था के संचालन में सरकार की जिम्मेदारी की सीमा को निश्चित करते हैं। संविधान में वर्णित महत्त्वपूर्ण नीति-निदेशक सिद्धान्त जो हमारे आर्थिक जीवन को प्रभावित करते हैं, निम्नलिखित हैं –
सभी नागरिकों के लिए जीविका के पर्याप्त साधन जुटाना।
सामान्य हित के लिए समाज के भौतिक साधनों का उचित वितरण।
एक उचित सीमा से अधिक धन के केन्द्रीकरण पर रोक।
स्त्रियों और पुरुषों दोनों के समान काम के लिए समान वेतन।
श्रमिकों की शक्ति व स्वास्थ्य की रक्षा तथा श्रमिकों को (UPBoardSolutions.com) उनकी अपनी आयु एवं स्वास्थ्य की दृष्टि से बहुत अधिक खतरनाक कार्यों को स्वीकार करने के लिए बाध्य करने वाली परिस्थितियों को हटाना।
बच्चों की शोषण से रक्षा करना।
काम और शिक्षा का अधिकार तथा बेकारी, बीमारी और वृद्धावस्था में सार्वजनिक सहायता उपलब्ध कराना।
काम के उचित वातावरण को सुरक्षित बनाना।
रोजगार और जीवन को उचित स्तर दिलाना।
कमजोर वर्गों, विशेषकर अनुसूचित जातियों एवं जनजातियों के लोगों के आर्थिक हितों को प्रोत्साहन देना।
वैज्ञानिक आधार पर कृषि एवं पशुपालन को संगठित करना।
Double Entry System RAS mains.pdf
1.8 MB
Double Entry System RAS mains.pdf
ToppersSquad (Only RAS)
ancient history short notes.pdf
Help can be taken from my short notes
*ओमिक्रॉन Vs डेल्टा:* कौन है ज्यादा खतरनाक वैरिएंट, किस पर वैक्सीन का कितना असर, किससे मौत का खतरा ज्यादा? जानें सब कुछ
https://dainik-b.in/MMgZUEehDlb
*1 लाख तक जीतने के लिए भास्कर ऐप पर खेलें Quiz*, पढ़ें ताजा खबरें और फ्री ई-पेपर। अभीं खेलें - dainik-b.in/bhaskar-quiz
https://dainik-b.in/MMgZUEehDlb
*1 लाख तक जीतने के लिए भास्कर ऐप पर खेलें Quiz*, पढ़ें ताजा खबरें और फ्री ई-पेपर। अभीं खेलें - dainik-b.in/bhaskar-quiz
Dainik Bhaskar
ओमिक्रॉन Vs डेल्टा: कौन है ज्यादा खतरनाक वैरिएंट, किस पर वैक्सीन का कितना असर, किससे मौत का खतरा ज्यादा? जानें सब कुछ
दक्षिण अफ्रीका में पाए गए कोरोना के नए वैरिएंट ओमिक्रॉन ने देश में दस्तक दे दी है। 2 दिसंबर को कर्नाटक में दो ओमिक्रॉन केस पाए जाने की स्वास्थ्य मंत्रालय ने पुष्टि कर दी है। 24 नवंबर को साउथ अफ्रीका में पाए जाने के महज एक हफ्ते के अंदर ही अब ओमिक्रॉन भारत…
उत्तरदायित्व लेखांकन.pdf
1.4 MB
उत्तरदायित्व लेखांकन.pdf