लेवल 2 sci maths में 8 प्रश्न डिलीट
लेवल 1 संस्कृत विभाग 4 प्रश्न डिलीट
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RPSC_स्कूल_व्याख्याता_इतिहास_पेपर_01_06_26.pdf
5.2 MB
RPSC स्कूल व्याख्याता इतिहास पेपर 01-06-26.pdf
जसनाथी सम्प्रदाय की प्रधान पीठ 'कतरियासर' (बीकानेर) है, जहाँ आश्विन शुक्ल सप्तमी को मेला भरता है।
• शीतला माता का मंदिर 'चाकसू' (जयपुर) में है, जहाँ प्रतिवर्ष शीतलाष्टमी (चैत्र शुक्ल अष्टमी) को मेला भरता है। इस मंदिर का निर्माण 'माधोसिंह प्रथम' द्वारा करवाया गया। यहाँ शीतला माता के खण्डित प्रतिमा की पूजा की जाती है।
जाम्भोजी का जन्म 'पीपासर' (नागौर) में हुआ। जाम्भोजी ने 1485 ई. में 'समराथल' (बीकानेर) में विश्नोई सम्प्रदाय की स्थापना की। 1536 ई. में जाम्भोजी की 'मुकाम' नोखा (बीकानेर) में मृत्यु हो गई, वहाँ विश्नोई सम्प्रदाय की प्रधान पीठ है। यहाँ फाल्गुन व आश्विन अमावस्या को मेला भरता है।
जीण माता का मंदिर 'रेवासा' (सीकर) में है। इस मंदिर का निर्माण पृथ्वीराज प्रथम के समय 'राजा हट्टड़' ने करवाया था। यहाँ नवरात्रों में मेला भरता है।
अक्सर पूछे गए सवाल ❤️👍🏼
• शीतला माता का मंदिर 'चाकसू' (जयपुर) में है, जहाँ प्रतिवर्ष शीतलाष्टमी (चैत्र शुक्ल अष्टमी) को मेला भरता है। इस मंदिर का निर्माण 'माधोसिंह प्रथम' द्वारा करवाया गया। यहाँ शीतला माता के खण्डित प्रतिमा की पूजा की जाती है।
जाम्भोजी का जन्म 'पीपासर' (नागौर) में हुआ। जाम्भोजी ने 1485 ई. में 'समराथल' (बीकानेर) में विश्नोई सम्प्रदाय की स्थापना की। 1536 ई. में जाम्भोजी की 'मुकाम' नोखा (बीकानेर) में मृत्यु हो गई, वहाँ विश्नोई सम्प्रदाय की प्रधान पीठ है। यहाँ फाल्गुन व आश्विन अमावस्या को मेला भरता है।
जीण माता का मंदिर 'रेवासा' (सीकर) में है। इस मंदिर का निर्माण पृथ्वीराज प्रथम के समय 'राजा हट्टड़' ने करवाया था। यहाँ नवरात्रों में मेला भरता है।
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अच्छा प्रश्न...(नया सवाल)
घटियाला के शिलालेख (861 ई.):- यह लेख चार लेखों के समूह में जोधपुर से बीस मील उत्तर पश्चिम में घंटियाला गांव में एक जैन मन्दिर जिसे माता की शालभी कहते हैं से प्राप्त हुए हैं। यह लेख संस्कृत भाषा में गद्य-पद्य के मिश्रित रूप में लिखे गये हैं। इन लेखों में मण्डोर के प्रतिहारों की वंशावली व उपलब्धियों की जानकारी मिलती है। इन लेखों में से दो लेखों को क्रमशः विनायक तथा सिद्धम् से आरम्भ किया गया है।
इन अभिलेखों से प्रतिहारों के प्रमुख शासक हरिश्चन्द्र नामक ब्राह्मण जिसकी उपाधि 'रोहिल्लद्धि' भी थी के बारे में जानकारी मिलती है। हरिश्चन्द्र के चार पुत्रों भोग,भट्ट, कक्क व रञ्जिल द्वारा मण्डोर दुर्ग का ऊंचा प्राकार बनवाया जाने का उल्लेख मिलता है
#फैक्ट ❤️👍🏼
घटियाला के शिलालेख (861 ई.):- यह लेख चार लेखों के समूह में जोधपुर से बीस मील उत्तर पश्चिम में घंटियाला गांव में एक जैन मन्दिर जिसे माता की शालभी कहते हैं से प्राप्त हुए हैं। यह लेख संस्कृत भाषा में गद्य-पद्य के मिश्रित रूप में लिखे गये हैं। इन लेखों में मण्डोर के प्रतिहारों की वंशावली व उपलब्धियों की जानकारी मिलती है। इन लेखों में से दो लेखों को क्रमशः विनायक तथा सिद्धम् से आरम्भ किया गया है।
इन अभिलेखों से प्रतिहारों के प्रमुख शासक हरिश्चन्द्र नामक ब्राह्मण जिसकी उपाधि 'रोहिल्लद्धि' भी थी के बारे में जानकारी मिलती है। हरिश्चन्द्र के चार पुत्रों भोग,भट्ट, कक्क व रञ्जिल द्वारा मण्डोर दुर्ग का ऊंचा प्राकार बनवाया जाने का उल्लेख मिलता है
#फैक्ट ❤️👍🏼
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