🔸वर्ष 1572-73 ई. में अकबर ने क्रमशः चार दूत मण्डल राणा प्रताप के पास भेजे, किन्तु वे प्रताप को (जैसी की अकबर की मंशा थी-राणा के द्वारा व्यक्तिगत समर्पण) मुगल दरबार में उपस्थित होने के लिए तैयार न कर सके-
1. सितम्बर 1572- जलाल खां कोरची।
2. अप्रैल 1573- मानसिंह।
श्यामलदास कृत वीर विनोद में लिखा है कि प्रताप ने मानसिंह के लिए उदयसागर की पाल (कर्नल टॉड ने भी इससे सहमति प्रकट की है) भोज का आयोजन किया लेकिन स्वयं इस भोज में उपस्थित नही हुए, जिसे मानसिंह ने अपना अपमान समझा तथा अकबर को युद्ध के लिए भड़काया। वहीं अमरकाव्य वंशावली में दोनों की भेंट को सौहार्दपूर्ण होना लिखा गया। डॉ. गोपीनाथ शर्मा ने प्रताप व मानसिंह की भेंट गोगुन्दा में होना बताया है।।
3. सितम्बर अक्टूबर 1573-भगवंतदास। भगवंत दास का आना कुछ अधिक फलप्रद साबित हुआ। अकबर द्वारा भेजे गए खिलअत को राणा ने धारण किया और राणा का बेटा अमरसिंह भगवंत दास के साथ मुगलों की राजधानी गया।।
4. सितंबर 1573-टोडरमल ।।
1. सितम्बर 1572- जलाल खां कोरची।
2. अप्रैल 1573- मानसिंह।
श्यामलदास कृत वीर विनोद में लिखा है कि प्रताप ने मानसिंह के लिए उदयसागर की पाल (कर्नल टॉड ने भी इससे सहमति प्रकट की है) भोज का आयोजन किया लेकिन स्वयं इस भोज में उपस्थित नही हुए, जिसे मानसिंह ने अपना अपमान समझा तथा अकबर को युद्ध के लिए भड़काया। वहीं अमरकाव्य वंशावली में दोनों की भेंट को सौहार्दपूर्ण होना लिखा गया। डॉ. गोपीनाथ शर्मा ने प्रताप व मानसिंह की भेंट गोगुन्दा में होना बताया है।।
3. सितम्बर अक्टूबर 1573-भगवंतदास। भगवंत दास का आना कुछ अधिक फलप्रद साबित हुआ। अकबर द्वारा भेजे गए खिलअत को राणा ने धारण किया और राणा का बेटा अमरसिंह भगवंत दास के साथ मुगलों की राजधानी गया।।
4. सितंबर 1573-टोडरमल ।।
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✔️ सिवाना दुर्ग 954में स्थापना
✔️मेहरानगढ़ दुर्ग 1459में स्थापना
✔️ अकबर का दुर्ग अजमेर 1571-72के दौरान निर्माण
✔️ जूनागढ़ दुर्ग बीकानेर 1589में नींव रखी गई
✔️ चूरू का किला 1739में निर्माण करवाया गया कुशाल सिंह द्वारा
✔️ गागरोन दुर्ग का निर्माण 11वीं शताब्दी में
✔️जैसलमेर दुर्ग का निर्माण 1155में
स्रोत RBSE
✔️मेहरानगढ़ दुर्ग 1459में स्थापना
✔️ अकबर का दुर्ग अजमेर 1571-72के दौरान निर्माण
✔️ जूनागढ़ दुर्ग बीकानेर 1589में नींव रखी गई
✔️ चूरू का किला 1739में निर्माण करवाया गया कुशाल सिंह द्वारा
✔️ गागरोन दुर्ग का निर्माण 11वीं शताब्दी में
✔️जैसलमेर दुर्ग का निर्माण 1155में
स्रोत RBSE
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Notice177903061428.pdf
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🔴 राजस्थान हाईकोर्ट वाहन चालक भर्ती परीक्षा 2025 (कुल 58 पद) का परिणाम जारी
राजस्थान से चुने गए, राज्य सभा के 3 सदस्य श्री नीरज डांगी, श्री राजेन्द्र गहलोत व श्री रवनीत सिंह का कार्यकाल 21 जून 2026 को समाप्त हो रहा है
स्वगणना मकान जनगणना अभियान में, जयपुर जिले ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए, राजस्थान में प्रथम स्थान प्राप्त किया है
🔴RPSC School Lecture (1st Grade) भर्ती परीक्षा 2025 (कुल 3944 पद) प्रवेश पत्र व परीक्षा शहर जारी करने के संबंध में अधिसूचना जारी ✅
👉परीक्षा-शहर (Exam City) 07 दिन पहले जारी होगें
👉प्रवेश-पत्र (Admit Card) परीक्षा से 03 दिन पूर्व जारी होंगे
👉 परीक्षा 31 मई 2026 से शुरू होगी...
👉परीक्षा-शहर (Exam City) 07 दिन पहले जारी होगें
👉प्रवेश-पत्र (Admit Card) परीक्षा से 03 दिन पूर्व जारी होंगे
👉 परीक्षा 31 मई 2026 से शुरू होगी...
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1.झालरापाटन का सूर्य मंदिर:
अन्य नाम : पद्मनाभ मंदिर, बड़ा मंदिर, सात सहेलियों का मंदिर। इस मंदिर का निर्माण विक्रम सम्वत 372 में नागभट्ट द्वितीय द्वारा।
2. सूर्य मंदिर, चित्तौड़गढ़ : चित्तौड़गढ़ दुर्ग में स्थित राजस्थान का सबसे प्राचीन सूर्य मंदिर। वर्तमान नाम कालिका माता मंदिर
3. सूर्य मंदिर :ओसियां (जोधपुर ग्रामीण)
4.सूर्य मंदिर : रणकपुर (पाली), अन्यनाम-सूर्य नारायण मंदिर
5.सूर्य मंदिर : गलता जी (जयपुर), मंदिर का निर्माण सवाई जयसिंह के दूत श्री राव कृपाराम जी द्वारा। मंदिर में सूर्य भगवान की पत्नी रेणुका की प्रतिमा।
6. देवका सूर्य मंदिर : देवका (बाड़मेर)
7.सूर्य मंदिर : मंदसर (उदयपुर)
8. सूर्य मंदिर : लोहर्गल (झुंझुनू)
9. सूर्य मंदिर : आमेर (जयपुर)
10. सूर्य मंदिर : बूढ़ादीत (कोटा)
विशेष : मध्यकालीन राजस्थान में सर्वाधिक सूर्य मंदिर एवं सूर्य मूर्तियों वाला परगना सिरोह रहा था।
अन्य नाम : पद्मनाभ मंदिर, बड़ा मंदिर, सात सहेलियों का मंदिर। इस मंदिर का निर्माण विक्रम सम्वत 372 में नागभट्ट द्वितीय द्वारा।
2. सूर्य मंदिर, चित्तौड़गढ़ : चित्तौड़गढ़ दुर्ग में स्थित राजस्थान का सबसे प्राचीन सूर्य मंदिर। वर्तमान नाम कालिका माता मंदिर
3. सूर्य मंदिर :ओसियां (जोधपुर ग्रामीण)
4.सूर्य मंदिर : रणकपुर (पाली), अन्यनाम-सूर्य नारायण मंदिर
5.सूर्य मंदिर : गलता जी (जयपुर), मंदिर का निर्माण सवाई जयसिंह के दूत श्री राव कृपाराम जी द्वारा। मंदिर में सूर्य भगवान की पत्नी रेणुका की प्रतिमा।
6. देवका सूर्य मंदिर : देवका (बाड़मेर)
7.सूर्य मंदिर : मंदसर (उदयपुर)
8. सूर्य मंदिर : लोहर्गल (झुंझुनू)
9. सूर्य मंदिर : आमेर (जयपुर)
10. सूर्य मंदिर : बूढ़ादीत (कोटा)
विशेष : मध्यकालीन राजस्थान में सर्वाधिक सूर्य मंदिर एवं सूर्य मूर्तियों वाला परगना सिरोह रहा था।
तेजाजी से सम्बन्धित स्थल:
(i) खरनाल (नागौर) – जन्म स्थान
(ii) सेंदरिया (अजमेर) – सर्प ने डसा
(iii) सुरसुरा (अजमेर) – मृत्यु, समाधि स्थल
(iv) पनेर (अजमेर) – ससुराल
(v) परबतसर (नागौर) – मेले का स्थल
(vi) भांवता (अजमेर) – गौमुत्र से सर्पदंश का इलाज
(vii) दुगारी (बूंदी) – तेजाजी की कर्मस्थली रही।
(i) खरनाल (नागौर) – जन्म स्थान
(ii) सेंदरिया (अजमेर) – सर्प ने डसा
(iii) सुरसुरा (अजमेर) – मृत्यु, समाधि स्थल
(iv) पनेर (अजमेर) – ससुराल
(v) परबतसर (नागौर) – मेले का स्थल
(vi) भांवता (अजमेर) – गौमुत्र से सर्पदंश का इलाज
(vii) दुगारी (बूंदी) – तेजाजी की कर्मस्थली रही।
रणथंबोर में चौहानवंश -
चौहान वंश की रणथंभोर शाखा के संस्थापक गोविन्दराज था जिसने 1194 में रणथंबोर में चौहान वंश की स्थापना की ।
इल्तुतमिश के समय यहां का शासक वीर नारायण था जिसे इल्तुतमिश ने जहर देकर मार डाला।
रजिया के समय वाग्भट्ट रणथंभौर का शासक था
जैत्र सिंह के 32 वर्षों के शासन काल की स्मृति में हम्मीर देव ने 32 खम्भो की छतरी का निर्माण करवाया था
मुहम्मद शाह और केहब्रू को शरण देने के कारण अल्लाउद्दीन खिलजी 1301 ई. मैं रणथंभोर दुर्ग पर आक्रमण किया और रणथंभौर का प्रथम शाका संपन्न होता हैं(रंगदेवी के नेतृत्व मैं जौहर होता हैं)
और उलगु खां को दुर्ग सौप दिया जाता है
नुसरत खां इस अभियान में मारा गया था
चौहान वंश की रणथंभोर शाखा के संस्थापक गोविन्दराज था जिसने 1194 में रणथंबोर में चौहान वंश की स्थापना की ।
इल्तुतमिश के समय यहां का शासक वीर नारायण था जिसे इल्तुतमिश ने जहर देकर मार डाला।
रजिया के समय वाग्भट्ट रणथंभौर का शासक था
जैत्र सिंह के 32 वर्षों के शासन काल की स्मृति में हम्मीर देव ने 32 खम्भो की छतरी का निर्माण करवाया था
मुहम्मद शाह और केहब्रू को शरण देने के कारण अल्लाउद्दीन खिलजी 1301 ई. मैं रणथंभोर दुर्ग पर आक्रमण किया और रणथंभौर का प्रथम शाका संपन्न होता हैं(रंगदेवी के नेतृत्व मैं जौहर होता हैं)
और उलगु खां को दुर्ग सौप दिया जाता है
नुसरत खां इस अभियान में मारा गया था
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Pyq's❤️
• ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती दरगाह का निर्माण इल्तुतमीश द्वारा प्रारम्भ करवाया गया।
• इसकी मुख्य मजार का निर्माण मांडु सुल्तान गयासुद्दीन खिलजी द्वारा करवाया गया।
• ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती की "दरगाह" पर आने वाला पहला सुल्तान मुहम्मद बिन तुगलक था। [Reet L2 2022]
• ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती की दरगाह में ‘बुलन्द दरवाजे’ का निर्माण मालवा के सुल्तान महमूद खिलजी ने करवाया। [Asst Prof 2023]
• मेवाड़ के महाराणा जगतसिंह 2nd ने अजमेर दरगाह के लिए चार गाँव अनुदान में दिए [Jr Sci Asst 2019]
• ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह के लिए मुगल बादशाह अकबर द्वारा व्यवस्थार्थ दिए गए गाँवों की संख्या 18 थी। [Rpsc SI 2021]
• इसके मुख्य प्रवेश द्वार 'निजाम द्वार' का निर्माण हैदराबाद के निजाम 'मीर उस्मान अली खान' द्वारा करवाया गया।
दो देग - लाली
(1) बड़ी देग : अकबर द्वारा भेंट
(2) छोटी देग : जहाँगीर द्वारा भेंट
• ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती दरगाह का निर्माण इल्तुतमीश द्वारा प्रारम्भ करवाया गया।
• इसकी मुख्य मजार का निर्माण मांडु सुल्तान गयासुद्दीन खिलजी द्वारा करवाया गया।
• ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती की "दरगाह" पर आने वाला पहला सुल्तान मुहम्मद बिन तुगलक था। [Reet L2 2022]
• ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती की दरगाह में ‘बुलन्द दरवाजे’ का निर्माण मालवा के सुल्तान महमूद खिलजी ने करवाया। [Asst Prof 2023]
• मेवाड़ के महाराणा जगतसिंह 2nd ने अजमेर दरगाह के लिए चार गाँव अनुदान में दिए [Jr Sci Asst 2019]
• ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह के लिए मुगल बादशाह अकबर द्वारा व्यवस्थार्थ दिए गए गाँवों की संख्या 18 थी। [Rpsc SI 2021]
• इसके मुख्य प्रवेश द्वार 'निजाम द्वार' का निर्माण हैदराबाद के निजाम 'मीर उस्मान अली खान' द्वारा करवाया गया।
दो देग - लाली
(1) बड़ी देग : अकबर द्वारा भेंट
(2) छोटी देग : जहाँगीर द्वारा भेंट
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