*जसनाथी सम्प्रदाय*
▪️संस्थापक – जसनाथ जी जाट
जसनाथ जी का जन्म 1482 ई. में कतरियासर (बीकानेर) में हुआ।
▪️प्रधान पीठ – कतरियासर (बीकानेर) में है।
▪️यह सम्प्रदाय 36 नियमों का पालन करता है।
▪️पवित्र ग्रन्थ सिमूदड़ा और कोडाग्रन्थ है।
▪️इस सम्प्रदाय का प्रचार-प्रसार परमहंस मण्डली द्वारा किया जाता है।
▪️इस सम्प्रदाय के लोग अग्नि नृत्य में सिद्धहस्त हैं जिसके दौरान सिर पर मतीरा फोडने की कला का प्रदर्शन किया जाता है।
▪️दिल्ली के सुलतान सिकंदर लोदी न जसनाथ जी को प्रधान पीठ स्थापित करने के लिए भूमि दान में दी थी।
▪️जसनाथ जी को ज्ञान की प्राप्ति गोरखमालिया (बीकानेर) नामक स्थान पर हुई।
▪️इस सम्प्रदाय की पांच उप-पीठे है।
1. बमलू (बीकानेर)
2. लिखमादेसर (बीकानेर)
3. पूनरासर (बीकानेर)
4. मालासर (बीकानेर)
5. पांचला (नागौर)
यहाँ से काफी बार प्रश्न बनता है
▪️संस्थापक – जसनाथ जी जाट
जसनाथ जी का जन्म 1482 ई. में कतरियासर (बीकानेर) में हुआ।
▪️प्रधान पीठ – कतरियासर (बीकानेर) में है।
▪️यह सम्प्रदाय 36 नियमों का पालन करता है।
▪️पवित्र ग्रन्थ सिमूदड़ा और कोडाग्रन्थ है।
▪️इस सम्प्रदाय का प्रचार-प्रसार परमहंस मण्डली द्वारा किया जाता है।
▪️इस सम्प्रदाय के लोग अग्नि नृत्य में सिद्धहस्त हैं जिसके दौरान सिर पर मतीरा फोडने की कला का प्रदर्शन किया जाता है।
▪️दिल्ली के सुलतान सिकंदर लोदी न जसनाथ जी को प्रधान पीठ स्थापित करने के लिए भूमि दान में दी थी।
▪️जसनाथ जी को ज्ञान की प्राप्ति गोरखमालिया (बीकानेर) नामक स्थान पर हुई।
▪️इस सम्प्रदाय की पांच उप-पीठे है।
1. बमलू (बीकानेर)
2. लिखमादेसर (बीकानेर)
3. पूनरासर (बीकानेर)
4. मालासर (बीकानेर)
5. पांचला (नागौर)
यहाँ से काफी बार प्रश्न बनता है
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एक जिला एक उत्पाद (ODOP) नीति 2024 के तहत सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों (MSMEs) को प्रोत्साहित करने और स्थानीय उत्पादों के निर्यात को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा देने के लिए वित्तीय सहायता दी जाती है।
• इस योजना के अंतर्गत नए उद्यमों (Units) की स्थापना के लिए अधिकतम 20 लाख रुपये तक का मार्जिन मनी अनुदान (Margin Money Subsidy) प्रदान किया जाता है।
• इसके तहत सूक्ष्म उद्यमों को परियोजना लागत का 25% (अधिकतम 15 लाख रुपये) और लघु उद्यमों को परियोजना लागत का 15% (अधिकतम 20 लाख रुपये) का मार्जिन मनी अनुदान मिलता है। इसके अतिरिक्त, विशेष श्रेणियों (जैसे SC, ST, महिला और दिव्यांग) को 5 लाख रुपये की अतिरिक्त सहायता की पात्रता भी होती है।
• इस योजना के अंतर्गत नए उद्यमों (Units) की स्थापना के लिए अधिकतम 20 लाख रुपये तक का मार्जिन मनी अनुदान (Margin Money Subsidy) प्रदान किया जाता है।
• इसके तहत सूक्ष्म उद्यमों को परियोजना लागत का 25% (अधिकतम 15 लाख रुपये) और लघु उद्यमों को परियोजना लागत का 15% (अधिकतम 20 लाख रुपये) का मार्जिन मनी अनुदान मिलता है। इसके अतिरिक्त, विशेष श्रेणियों (जैसे SC, ST, महिला और दिव्यांग) को 5 लाख रुपये की अतिरिक्त सहायता की पात्रता भी होती है।
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NEET UG पेपर लीक मामला : NTA से पेपर के दोनों सेट लीक हुए, दूसरे के सवाल भी हूबहू क्वेश्चन बैंक में शामिल थे ✅
मनीषा मांधरे के बनाए सेट में अधिकतर सवाल परीक्षा में आए थे बायोलॉजी के पेपर लीक की 'मास्टरमाइंड' भी पुणे से गिरफ्तार ✅
परीक्षा के दो सेट प्रिंट होते हैं एक परीक्षा में आता है दूसरा रिजर्व रहता है - दोनों लीक ...
मनीषा मांधरे के बनाए सेट में अधिकतर सवाल परीक्षा में आए थे बायोलॉजी के पेपर लीक की 'मास्टरमाइंड' भी पुणे से गिरफ्तार ✅
परीक्षा के दो सेट प्रिंट होते हैं एक परीक्षा में आता है दूसरा रिजर्व रहता है - दोनों लीक ...
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🔸वर्ष 1572-73 ई. में अकबर ने क्रमशः चार दूत मण्डल राणा प्रताप के पास भेजे, किन्तु वे प्रताप को (जैसी की अकबर की मंशा थी-राणा के द्वारा व्यक्तिगत समर्पण) मुगल दरबार में उपस्थित होने के लिए तैयार न कर सके-
1. सितम्बर 1572- जलाल खां कोरची।
2. अप्रैल 1573- मानसिंह।
श्यामलदास कृत वीर विनोद में लिखा है कि प्रताप ने मानसिंह के लिए उदयसागर की पाल (कर्नल टॉड ने भी इससे सहमति प्रकट की है) भोज का आयोजन किया लेकिन स्वयं इस भोज में उपस्थित नही हुए, जिसे मानसिंह ने अपना अपमान समझा तथा अकबर को युद्ध के लिए भड़काया। वहीं अमरकाव्य वंशावली में दोनों की भेंट को सौहार्दपूर्ण होना लिखा गया। डॉ. गोपीनाथ शर्मा ने प्रताप व मानसिंह की भेंट गोगुन्दा में होना बताया है।।
3. सितम्बर अक्टूबर 1573-भगवंतदास। भगवंत दास का आना कुछ अधिक फलप्रद साबित हुआ। अकबर द्वारा भेजे गए खिलअत को राणा ने धारण किया और राणा का बेटा अमरसिंह भगवंत दास के साथ मुगलों की राजधानी गया।।
4. सितंबर 1573-टोडरमल ।।
1. सितम्बर 1572- जलाल खां कोरची।
2. अप्रैल 1573- मानसिंह।
श्यामलदास कृत वीर विनोद में लिखा है कि प्रताप ने मानसिंह के लिए उदयसागर की पाल (कर्नल टॉड ने भी इससे सहमति प्रकट की है) भोज का आयोजन किया लेकिन स्वयं इस भोज में उपस्थित नही हुए, जिसे मानसिंह ने अपना अपमान समझा तथा अकबर को युद्ध के लिए भड़काया। वहीं अमरकाव्य वंशावली में दोनों की भेंट को सौहार्दपूर्ण होना लिखा गया। डॉ. गोपीनाथ शर्मा ने प्रताप व मानसिंह की भेंट गोगुन्दा में होना बताया है।।
3. सितम्बर अक्टूबर 1573-भगवंतदास। भगवंत दास का आना कुछ अधिक फलप्रद साबित हुआ। अकबर द्वारा भेजे गए खिलअत को राणा ने धारण किया और राणा का बेटा अमरसिंह भगवंत दास के साथ मुगलों की राजधानी गया।।
4. सितंबर 1573-टोडरमल ।।
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