खड़नाल : तेजाजी का जन्म स्थल
ददरेवा : गोगाजी का जन्म स्थल
कोलू : पाबूजी का जन्म स्थल
आसींद : देवनारायण जी का जन्म स्थल
#important ❤️☘
ददरेवा : गोगाजी का जन्म स्थल
कोलू : पाबूजी का जन्म स्थल
आसींद : देवनारायण जी का जन्म स्थल
#important ❤️☘
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लोकदेवता के अवतारों के सम्बन्ध में-
(i) पाबूजी - लक्ष्मण का अवतार
(ii) रामदेवजी – श्रीकृष्ण का अवतार
(iii) देवनारायणजी – भगवान विष्णु का अवतार
(iv) वीर कल्लाजी - शेषनाग का अवतार
#important ❤️☘
(i) पाबूजी - लक्ष्मण का अवतार
(ii) रामदेवजी – श्रीकृष्ण का अवतार
(iii) देवनारायणजी – भगवान विष्णु का अवतार
(iv) वीर कल्लाजी - शेषनाग का अवतार
#important ❤️☘
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राजस्थानी भाषा में वर्ष 2025 का साहित्य अकादमी पुरस्कार डॉ॰ जितेंद्र कुमार सोनी (आईएएस) को उनके कहानी संग्रह ‘भरखमा’ के लिए देने की घोषणा हुई हैं।
पपीहा गीत : 'पपीहा' पक्षी को सम्बोन्धित कर गाया जाने वाला गीत, जिसमें प्रेमिका अपने शादी शुदा प्रेमी कों बगीचे में बुलाती है, लेकिन प्रेमी ठुकरा देता है अर्थात दाम्पत्य प्रेम का परिचायक है।
कागा गीत : इसमें विरहणी महिला कौए को सम्बोन्धित करके अपने प्रियतम के आने का शगुन मनाती है। कौए को विभिन्न प्रकार के लालच देकर उड़ने को कहती है। जिसके बोल है- 'उड़-उड़ रे म्हारा काला रे कागला, जद म्हारा पिवजी घर आवै'
पीपली : मारवाड़, बीकानेर, शेखावाटी क्षेत्र में वर्षा ऋतु में गाया जाने वाला गीत। जिसमें प्रेयसी अपने परदेश गए पति को बुलाती है।
झोरावा : पति परदेश जाने पर उसके वियोग में जैसलमेर क्षेत्र में गाया जाने वाला गीत।
कुरजां : एक विरह गीत है, जिसमें विरहनी अपने प्रियतम को कुरजां पक्षी के माध्यम से संदेश पहुंचाना चाहती है।
सपना/सुपनो : विरह गीत, जिसमें विरहणी को रात्री में आया सपने के बारे में अपनी सखियों को बताती है।
प्रमुख विरह गीत ❤️☘
कागा गीत : इसमें विरहणी महिला कौए को सम्बोन्धित करके अपने प्रियतम के आने का शगुन मनाती है। कौए को विभिन्न प्रकार के लालच देकर उड़ने को कहती है। जिसके बोल है- 'उड़-उड़ रे म्हारा काला रे कागला, जद म्हारा पिवजी घर आवै'
पीपली : मारवाड़, बीकानेर, शेखावाटी क्षेत्र में वर्षा ऋतु में गाया जाने वाला गीत। जिसमें प्रेयसी अपने परदेश गए पति को बुलाती है।
झोरावा : पति परदेश जाने पर उसके वियोग में जैसलमेर क्षेत्र में गाया जाने वाला गीत।
कुरजां : एक विरह गीत है, जिसमें विरहनी अपने प्रियतम को कुरजां पक्षी के माध्यम से संदेश पहुंचाना चाहती है।
सपना/सुपनो : विरह गीत, जिसमें विरहणी को रात्री में आया सपने के बारे में अपनी सखियों को बताती है।
प्रमुख विरह गीत ❤️☘
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😇 राजस्थान के लोकदेवता व उनके जन्म स्थान
🔸 रामदेव जी– ऊँडाकासमेर गाँव (बाड़मेर)
🔸 तेजा जी – खड़नाल गाँव (नागौर)
🔸 गोगा जी – ददरेवा गाँव (चूरू)
🔸 पाबू जी – कोलू गाँव (फलोदी)
🔸 देवनारायण जी – आसींद (भीलवाड़ा)
🔸 मल्लीनाथ जी – महेवा (बाड़मेर)
🔸 तल्लीनाथ जी – शेरगढ़ (जोधपुर ग्रामीण)
🔸 हड़बू जी – भुंडेल गाँव (नागौर)
🔸 झूंझार जी – इमलोहा गाँव (नीमकाथाना)
🔸 मेहाजी मांगल्या – तापू गाँव (जोधपुर)
🔸 भूरिया बाबा – पोसालिया गाँव (सिरोही)
🔸 पनराज जी – नया गाँव (जैसलमेर)
🔸 वीर फत्ता जी – सांचू गाँव (जालौर)
🔸 बिग्गा जी – रीड़ी गाँव (बीकानेर)
🔸 रूपनाथ जी – कोलू गाँव (फलोदी)
🔸 हरिराम बाबा – झोरा गाँव (नागौर)
🔸 रामदेव जी– ऊँडाकासमेर गाँव (बाड़मेर)
🔸 तेजा जी – खड़नाल गाँव (नागौर)
🔸 गोगा जी – ददरेवा गाँव (चूरू)
🔸 पाबू जी – कोलू गाँव (फलोदी)
🔸 देवनारायण जी – आसींद (भीलवाड़ा)
🔸 मल्लीनाथ जी – महेवा (बाड़मेर)
🔸 तल्लीनाथ जी – शेरगढ़ (जोधपुर ग्रामीण)
🔸 हड़बू जी – भुंडेल गाँव (नागौर)
🔸 झूंझार जी – इमलोहा गाँव (नीमकाथाना)
🔸 मेहाजी मांगल्या – तापू गाँव (जोधपुर)
🔸 भूरिया बाबा – पोसालिया गाँव (सिरोही)
🔸 पनराज जी – नया गाँव (जैसलमेर)
🔸 वीर फत्ता जी – सांचू गाँव (जालौर)
🔸 बिग्गा जी – रीड़ी गाँव (बीकानेर)
🔸 रूपनाथ जी – कोलू गाँव (फलोदी)
🔸 हरिराम बाबा – झोरा गाँव (नागौर)
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😇 राजस्थान के लोकदेवता व उनके जन्म स्थान
🔸 रामदेव जी– ऊँडाकासमेर गाँव (बाड़मेर)
🔸 तेजा जी – खड़नाल गाँव (नागौर)
🔸 गोगा जी – ददरेवा गाँव (चूरू)
🔸 पाबू जी – कोलू गाँव (फलोदी)
🔸 देवनारायण जी – आसींद (भीलवाड़ा)
🔸 मल्लीनाथ जी – महेवा (बाड़मेर)
🔸 तल्लीनाथ जी – शेरगढ़ (जोधपुर ग्रामीण)
🔸 हड़बू जी – भुंडेल गाँव (नागौर)
🔸 झूंझार जी – इमलोहा गाँव (नीमकाथाना)
🔸 मेहाजी मांगल्या – तापू गाँव (जोधपुर)
🔸 भूरिया बाबा – पोसालिया गाँव (सिरोही)
🔸 पनराज जी – नया गाँव (जैसलमेर)
🔸 वीर फत्ता जी – सांचू गाँव (जालौर)
🔸 बिग्गा जी – रीड़ी गाँव (बीकानेर)
🔸 रूपनाथ जी – कोलू गाँव (फलोदी)
🔸 हरिराम बाबा – झोरा गाँव (नागौर)
🔸 रामदेव जी– ऊँडाकासमेर गाँव (बाड़मेर)
🔸 तेजा जी – खड़नाल गाँव (नागौर)
🔸 गोगा जी – ददरेवा गाँव (चूरू)
🔸 पाबू जी – कोलू गाँव (फलोदी)
🔸 देवनारायण जी – आसींद (भीलवाड़ा)
🔸 मल्लीनाथ जी – महेवा (बाड़मेर)
🔸 तल्लीनाथ जी – शेरगढ़ (जोधपुर ग्रामीण)
🔸 हड़बू जी – भुंडेल गाँव (नागौर)
🔸 झूंझार जी – इमलोहा गाँव (नीमकाथाना)
🔸 मेहाजी मांगल्या – तापू गाँव (जोधपुर)
🔸 भूरिया बाबा – पोसालिया गाँव (सिरोही)
🔸 पनराज जी – नया गाँव (जैसलमेर)
🔸 वीर फत्ता जी – सांचू गाँव (जालौर)
🔸 बिग्गा जी – रीड़ी गाँव (बीकानेर)
🔸 रूपनाथ जी – कोलू गाँव (फलोदी)
🔸 हरिराम बाबा – झोरा गाँव (नागौर)
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♣️ राजस्थानी चित्रकला का स्वर्ण काल
▪️बीकानेर चित्रशैली - अनूप सिंह का काल
▪️मेवाड़ चित्रशैली - जगतसिंह प्रथम
▪️किशनगढ़ चित्रशैली - सावंत सिंह
▪️मारवाड़ चित्रशैली - जसवंत सिंह
▪️चावड चित्रशैली - अमरसिंह प्रथम
▪️अलवर चित्रशैली - विनय सिंह
▪️कोटा बूंदी चित्रशैली - उम्मेदसिंह प्रथम
▪️जैसलमेर चित्रशैली - मूलराज द्वितीय
▪️आमेर चित्रशैली - मिर्जा राजा जयसिंह
▪️जयपुर चित्रशैली - सवाई प्रताप सिंह
▪️बीकानेर चित्रशैली - अनूप सिंह का काल
▪️मेवाड़ चित्रशैली - जगतसिंह प्रथम
▪️किशनगढ़ चित्रशैली - सावंत सिंह
▪️मारवाड़ चित्रशैली - जसवंत सिंह
▪️चावड चित्रशैली - अमरसिंह प्रथम
▪️अलवर चित्रशैली - विनय सिंह
▪️कोटा बूंदी चित्रशैली - उम्मेदसिंह प्रथम
▪️जैसलमेर चित्रशैली - मूलराज द्वितीय
▪️आमेर चित्रशैली - मिर्जा राजा जयसिंह
▪️जयपुर चित्रशैली - सवाई प्रताप सिंह
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घटियाला शिलालेख : मंडोर शासकों के बारे में घटियाला शिलालेख से जानकारी मिलती है और इस शिलालेख से ज्ञात होता है कि प्रतिहारों के गुरु हरिश्चंद्र नामक ब्राह्मण की दो पत्नियों थी एक ब्राह्मणी और दूसरी क्षत्राणी।
हरिश्चंद्र को""रोहलासिद्धि' के नाम से भी जाना जाता है।
#❤️👍🏼
हरिश्चंद्र को""रोहलासिद्धि' के नाम से भी जाना जाता है।
#❤️👍🏼
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जैसलमेर के प्रमुख मंदिर -
◆ चुंधी गणेश तीर्थ मंदिर (जैसलमेर), तनोट माता का मंदिर (तनोट), घटियाली माता मंदिर (तनोट), आशापूर्णा माता मंदिर (पोकरण), चारभुजा मंदिर (पोकरण), खींवज माता का मंदिर (पोकरण), रामदेवजी का मंदिर (रामदेवरा), स्वागियाँ देवी का मंदिर (जैसलमेर दुर्ग)
#important ❤️👍🏼
◆ चुंधी गणेश तीर्थ मंदिर (जैसलमेर), तनोट माता का मंदिर (तनोट), घटियाली माता मंदिर (तनोट), आशापूर्णा माता मंदिर (पोकरण), चारभुजा मंदिर (पोकरण), खींवज माता का मंदिर (पोकरण), रामदेवजी का मंदिर (रामदेवरा), स्वागियाँ देवी का मंदिर (जैसलमेर दुर्ग)
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राजस्थान समान पात्रता परीक्षा : CET नहीं होने से प्रदेश के 20 लाख बेरोजगारों को झटका, अगले साल के लिए अटकी 23 नई भर्तियां ✅
पहले से घोषित पुलिस कांस्टेबल भर्ती और ग्राम विकास अधिकारी भर्तियां समय पर नहीं हो सकेंगी
CET में यह बदलाव प्रस्तावित.... ✔️
👉🏻 REET की तर्ज पर CET में 60% न्यूनतम अंक प्राप्त करने का प्रावधान।
👉🏻 CET परीक्षा RAS की तर्ज पर दो चरणों में कराने का प्रावधान।
👉🏻 CET की वैधता 01 साल से बढ़ाकर 03 सार्थक वैधता करने का प्रावधान।
पहले से घोषित पुलिस कांस्टेबल भर्ती और ग्राम विकास अधिकारी भर्तियां समय पर नहीं हो सकेंगी
CET में यह बदलाव प्रस्तावित.... ✔️
👉🏻 REET की तर्ज पर CET में 60% न्यूनतम अंक प्राप्त करने का प्रावधान।
👉🏻 CET परीक्षा RAS की तर्ज पर दो चरणों में कराने का प्रावधान।
👉🏻 CET की वैधता 01 साल से बढ़ाकर 03 सार्थक वैधता करने का प्रावधान।
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राजस्थान की कुप्रथाएँ सबसे पहले रोकने वाले जिले/सन्
🪷Trick : सब का कोटा त्याग जो सज कर उड़ा 22, 33, 41, 44 ,53 (क्रमानुसार)
सब - सती प्रथा - बूँदी - 1822 मेँ
का कोटा - कन्या बध प्रथा - कोटा -1833 मेँ
त्याग जो - त्याग प्रथा - जोधपुर -1841 मेँ
सज - समाधी प्रथा - जयपुर - 1844मेँ
कर - silent
उडा - डाकन प्रथा - उदयपुर -1853 मेँ
❤3🔥1
♦️प्रजामंडलों की स्थापना
1931:—जयपुर , बूंदी
1934:—जोधपुर ,हाडोती
1936:—बीकानेर ,धौलपुर
1938:—शाहपुरा, मेवाड़ ,अलवर, भरतपुर, करौली
1939:—सिरोही ,कोटा, किशनगढ़
1942:— कुशलगढ़
1943:— बांसवाड़ा
1944:— डूंगरपुर
1945:— प्रतापगढ़, जैसलमेर
1946:— झालावाड़
🔹 राजस्थान का सबसे प्राचीनतम व प्रथम प्रजामण्डल— जयपुर
🔹 राजस्थान का सबसे नवीनतम प्रजामंडल —झालावाड़
1931:—जयपुर , बूंदी
1934:—जोधपुर ,हाडोती
1936:—बीकानेर ,धौलपुर
1938:—शाहपुरा, मेवाड़ ,अलवर, भरतपुर, करौली
1939:—सिरोही ,कोटा, किशनगढ़
1942:— कुशलगढ़
1943:— बांसवाड़ा
1944:— डूंगरपुर
1945:— प्रतापगढ़, जैसलमेर
1946:— झालावाड़
🔹 राजस्थान का सबसे प्राचीनतम व प्रथम प्रजामण्डल— जयपुर
🔹 राजस्थान का सबसे नवीनतम प्रजामंडल —झालावाड़
❤4
ई-नाम [ E-NAM]
सरकार ने 2016 से राष्ट्रीय कृषि बाजार (ई-एनएएम) की शुरुआत की है। यह एक ऑनलाइन ट्रेडिंग प्लैटफॉर्म है जो कृषि उत्पादों के पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी ऑनलाइन व्यापार को सुविधाजनक बनाने के लिए विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों (यूटी) में स्थित वास्तविक थोक मंडियों को एकीकृत करता है।
अपनी स्थापना के बाद से अब तक 23 राज्यों और 4 केंद्र शासित प्रदेशों की 1,656 मंडियों को ई-एनएएम पोर्टल पर शामिल किया गया है।
वर्तमान में राजस्थान में 173 मंडियां इस पर पंजीकृत हैं।
सरकार ने 2016 से राष्ट्रीय कृषि बाजार (ई-एनएएम) की शुरुआत की है। यह एक ऑनलाइन ट्रेडिंग प्लैटफॉर्म है जो कृषि उत्पादों के पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी ऑनलाइन व्यापार को सुविधाजनक बनाने के लिए विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों (यूटी) में स्थित वास्तविक थोक मंडियों को एकीकृत करता है।
अपनी स्थापना के बाद से अब तक 23 राज्यों और 4 केंद्र शासित प्रदेशों की 1,656 मंडियों को ई-एनएएम पोर्टल पर शामिल किया गया है।
वर्तमान में राजस्थान में 173 मंडियां इस पर पंजीकृत हैं।
❤2
1.गोगाजी का जन्म कहां हुआ -ददरेवा
2. तेजाजी का जन्म कहां हुआ -खरनाल
3. रामदेवजी का जन्म कहां हुआ - उड़कासमेर
4. पाबूजी का जन्म कहां हुआ - कोलूमण्ड
5.डिग्गी कल्याणजी मेला कहां लगता है - टोंक
♥️👍
2. तेजाजी का जन्म कहां हुआ -खरनाल
3. रामदेवजी का जन्म कहां हुआ - उड़कासमेर
4. पाबूजी का जन्म कहां हुआ - कोलूमण्ड
5.डिग्गी कल्याणजी मेला कहां लगता है - टोंक
♥️👍
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1.भारमल किस वंश के शासक थे- कछवाह वंश
2.महाराणा प्रताप किस वंश के शासक थे- सिसोदिया
3.महाराजा जसवंत सिंह किस वंश के शासक थे- राठौड़
4.अजयराज किस वंश के शासक थे- चौहान
5.सम्प सभा की स्थापना किसने की-गोविंद गिरी
👍♥️
2.महाराणा प्रताप किस वंश के शासक थे- सिसोदिया
3.महाराजा जसवंत सिंह किस वंश के शासक थे- राठौड़
4.अजयराज किस वंश के शासक थे- चौहान
5.सम्प सभा की स्थापना किसने की-गोविंद गिरी
👍♥️