💥 राजस्थान में नागर शैली के उदाहरण👇
▪️सोमेश्वर मंदिर- किराडू (बाड़मेर)
▪️अम्बिका मंदिर- जगत (उदयपुर)
▪️दधिमाता मंदिर- गोठ मांगलोद
▪️औसियां के मंदिर- जोधपुर
▪️सोमेश्वर मंदिर- किराडू (बाड़मेर)
▪️अम्बिका मंदिर- जगत (उदयपुर)
▪️दधिमाता मंदिर- गोठ मांगलोद
▪️औसियां के मंदिर- जोधपुर
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💥राजस्थान में द्रविड़ शैली के उदाहरण👇
▪️रंगनाथ मंदिर- पुष्कर (अजमेर)
▪️तिरूपति बालाजी का मंदिर-सुजानगढ़ (चुरू)
▪️रंगनाथ मंदिर- पुष्कर (अजमेर)
▪️तिरूपति बालाजी का मंदिर-सुजानगढ़ (चुरू)
💥राजस्थान में पंचायत शैली के उदाहरण👇
▪️भंडदेवरा शिव मंदिर- बारां
▪️बूढ़ादीत सूर्य मंदिर- कोटा
▪️जगदीश मंदिर- उदयपुर
▪️बाडोली के शिव मंदिर- बाडोली
▪️हरिहर मंदिर - औसिया
▪️भंडदेवरा शिव मंदिर- बारां
▪️बूढ़ादीत सूर्य मंदिर- कोटा
▪️जगदीश मंदिर- उदयपुर
▪️बाडोली के शिव मंदिर- बाडोली
▪️हरिहर मंदिर - औसिया
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राजस्थान में भूमिज शैली के उदाहरण👇
▪️उडेश्वर मंदिर- बिजौलिया (भीलवाड़ा)
▪️महानालेश्वर मंदिर- मेनाल (भीलवाड़ा)
▪️भूमिज शैली का सबसे प्राचीन मंदिर
- सेवाड़ी जैन मंदिर ( पाली)
▪️उडेश्वर मंदिर- बिजौलिया (भीलवाड़ा)
▪️महानालेश्वर मंदिर- मेनाल (भीलवाड़ा)
▪️भूमिज शैली का सबसे प्राचीन मंदिर
- सेवाड़ी जैन मंदिर ( पाली)
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खड़नाल : तेजाजी का जन्म स्थल
ददरेवा : गोगाजी का जन्म स्थल
कोलू : पाबूजी का जन्म स्थल
आसींद : देवनारायण जी का जन्म स्थल
#important ❤️☘
ददरेवा : गोगाजी का जन्म स्थल
कोलू : पाबूजी का जन्म स्थल
आसींद : देवनारायण जी का जन्म स्थल
#important ❤️☘
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लोकदेवता के अवतारों के सम्बन्ध में-
(i) पाबूजी - लक्ष्मण का अवतार
(ii) रामदेवजी – श्रीकृष्ण का अवतार
(iii) देवनारायणजी – भगवान विष्णु का अवतार
(iv) वीर कल्लाजी - शेषनाग का अवतार
#important ❤️☘
(i) पाबूजी - लक्ष्मण का अवतार
(ii) रामदेवजी – श्रीकृष्ण का अवतार
(iii) देवनारायणजी – भगवान विष्णु का अवतार
(iv) वीर कल्लाजी - शेषनाग का अवतार
#important ❤️☘
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राजस्थानी भाषा में वर्ष 2025 का साहित्य अकादमी पुरस्कार डॉ॰ जितेंद्र कुमार सोनी (आईएएस) को उनके कहानी संग्रह ‘भरखमा’ के लिए देने की घोषणा हुई हैं।
पपीहा गीत : 'पपीहा' पक्षी को सम्बोन्धित कर गाया जाने वाला गीत, जिसमें प्रेमिका अपने शादी शुदा प्रेमी कों बगीचे में बुलाती है, लेकिन प्रेमी ठुकरा देता है अर्थात दाम्पत्य प्रेम का परिचायक है।
कागा गीत : इसमें विरहणी महिला कौए को सम्बोन्धित करके अपने प्रियतम के आने का शगुन मनाती है। कौए को विभिन्न प्रकार के लालच देकर उड़ने को कहती है। जिसके बोल है- 'उड़-उड़ रे म्हारा काला रे कागला, जद म्हारा पिवजी घर आवै'
पीपली : मारवाड़, बीकानेर, शेखावाटी क्षेत्र में वर्षा ऋतु में गाया जाने वाला गीत। जिसमें प्रेयसी अपने परदेश गए पति को बुलाती है।
झोरावा : पति परदेश जाने पर उसके वियोग में जैसलमेर क्षेत्र में गाया जाने वाला गीत।
कुरजां : एक विरह गीत है, जिसमें विरहनी अपने प्रियतम को कुरजां पक्षी के माध्यम से संदेश पहुंचाना चाहती है।
सपना/सुपनो : विरह गीत, जिसमें विरहणी को रात्री में आया सपने के बारे में अपनी सखियों को बताती है।
प्रमुख विरह गीत ❤️☘
कागा गीत : इसमें विरहणी महिला कौए को सम्बोन्धित करके अपने प्रियतम के आने का शगुन मनाती है। कौए को विभिन्न प्रकार के लालच देकर उड़ने को कहती है। जिसके बोल है- 'उड़-उड़ रे म्हारा काला रे कागला, जद म्हारा पिवजी घर आवै'
पीपली : मारवाड़, बीकानेर, शेखावाटी क्षेत्र में वर्षा ऋतु में गाया जाने वाला गीत। जिसमें प्रेयसी अपने परदेश गए पति को बुलाती है।
झोरावा : पति परदेश जाने पर उसके वियोग में जैसलमेर क्षेत्र में गाया जाने वाला गीत।
कुरजां : एक विरह गीत है, जिसमें विरहनी अपने प्रियतम को कुरजां पक्षी के माध्यम से संदेश पहुंचाना चाहती है।
सपना/सुपनो : विरह गीत, जिसमें विरहणी को रात्री में आया सपने के बारे में अपनी सखियों को बताती है।
प्रमुख विरह गीत ❤️☘
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😇 राजस्थान के लोकदेवता व उनके जन्म स्थान
🔸 रामदेव जी– ऊँडाकासमेर गाँव (बाड़मेर)
🔸 तेजा जी – खड़नाल गाँव (नागौर)
🔸 गोगा जी – ददरेवा गाँव (चूरू)
🔸 पाबू जी – कोलू गाँव (फलोदी)
🔸 देवनारायण जी – आसींद (भीलवाड़ा)
🔸 मल्लीनाथ जी – महेवा (बाड़मेर)
🔸 तल्लीनाथ जी – शेरगढ़ (जोधपुर ग्रामीण)
🔸 हड़बू जी – भुंडेल गाँव (नागौर)
🔸 झूंझार जी – इमलोहा गाँव (नीमकाथाना)
🔸 मेहाजी मांगल्या – तापू गाँव (जोधपुर)
🔸 भूरिया बाबा – पोसालिया गाँव (सिरोही)
🔸 पनराज जी – नया गाँव (जैसलमेर)
🔸 वीर फत्ता जी – सांचू गाँव (जालौर)
🔸 बिग्गा जी – रीड़ी गाँव (बीकानेर)
🔸 रूपनाथ जी – कोलू गाँव (फलोदी)
🔸 हरिराम बाबा – झोरा गाँव (नागौर)
🔸 रामदेव जी– ऊँडाकासमेर गाँव (बाड़मेर)
🔸 तेजा जी – खड़नाल गाँव (नागौर)
🔸 गोगा जी – ददरेवा गाँव (चूरू)
🔸 पाबू जी – कोलू गाँव (फलोदी)
🔸 देवनारायण जी – आसींद (भीलवाड़ा)
🔸 मल्लीनाथ जी – महेवा (बाड़मेर)
🔸 तल्लीनाथ जी – शेरगढ़ (जोधपुर ग्रामीण)
🔸 हड़बू जी – भुंडेल गाँव (नागौर)
🔸 झूंझार जी – इमलोहा गाँव (नीमकाथाना)
🔸 मेहाजी मांगल्या – तापू गाँव (जोधपुर)
🔸 भूरिया बाबा – पोसालिया गाँव (सिरोही)
🔸 पनराज जी – नया गाँव (जैसलमेर)
🔸 वीर फत्ता जी – सांचू गाँव (जालौर)
🔸 बिग्गा जी – रीड़ी गाँव (बीकानेर)
🔸 रूपनाथ जी – कोलू गाँव (फलोदी)
🔸 हरिराम बाबा – झोरा गाँव (नागौर)
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😇 राजस्थान के लोकदेवता व उनके जन्म स्थान
🔸 रामदेव जी– ऊँडाकासमेर गाँव (बाड़मेर)
🔸 तेजा जी – खड़नाल गाँव (नागौर)
🔸 गोगा जी – ददरेवा गाँव (चूरू)
🔸 पाबू जी – कोलू गाँव (फलोदी)
🔸 देवनारायण जी – आसींद (भीलवाड़ा)
🔸 मल्लीनाथ जी – महेवा (बाड़मेर)
🔸 तल्लीनाथ जी – शेरगढ़ (जोधपुर ग्रामीण)
🔸 हड़बू जी – भुंडेल गाँव (नागौर)
🔸 झूंझार जी – इमलोहा गाँव (नीमकाथाना)
🔸 मेहाजी मांगल्या – तापू गाँव (जोधपुर)
🔸 भूरिया बाबा – पोसालिया गाँव (सिरोही)
🔸 पनराज जी – नया गाँव (जैसलमेर)
🔸 वीर फत्ता जी – सांचू गाँव (जालौर)
🔸 बिग्गा जी – रीड़ी गाँव (बीकानेर)
🔸 रूपनाथ जी – कोलू गाँव (फलोदी)
🔸 हरिराम बाबा – झोरा गाँव (नागौर)
🔸 रामदेव जी– ऊँडाकासमेर गाँव (बाड़मेर)
🔸 तेजा जी – खड़नाल गाँव (नागौर)
🔸 गोगा जी – ददरेवा गाँव (चूरू)
🔸 पाबू जी – कोलू गाँव (फलोदी)
🔸 देवनारायण जी – आसींद (भीलवाड़ा)
🔸 मल्लीनाथ जी – महेवा (बाड़मेर)
🔸 तल्लीनाथ जी – शेरगढ़ (जोधपुर ग्रामीण)
🔸 हड़बू जी – भुंडेल गाँव (नागौर)
🔸 झूंझार जी – इमलोहा गाँव (नीमकाथाना)
🔸 मेहाजी मांगल्या – तापू गाँव (जोधपुर)
🔸 भूरिया बाबा – पोसालिया गाँव (सिरोही)
🔸 पनराज जी – नया गाँव (जैसलमेर)
🔸 वीर फत्ता जी – सांचू गाँव (जालौर)
🔸 बिग्गा जी – रीड़ी गाँव (बीकानेर)
🔸 रूपनाथ जी – कोलू गाँव (फलोदी)
🔸 हरिराम बाबा – झोरा गाँव (नागौर)
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♣️ राजस्थानी चित्रकला का स्वर्ण काल
▪️बीकानेर चित्रशैली - अनूप सिंह का काल
▪️मेवाड़ चित्रशैली - जगतसिंह प्रथम
▪️किशनगढ़ चित्रशैली - सावंत सिंह
▪️मारवाड़ चित्रशैली - जसवंत सिंह
▪️चावड चित्रशैली - अमरसिंह प्रथम
▪️अलवर चित्रशैली - विनय सिंह
▪️कोटा बूंदी चित्रशैली - उम्मेदसिंह प्रथम
▪️जैसलमेर चित्रशैली - मूलराज द्वितीय
▪️आमेर चित्रशैली - मिर्जा राजा जयसिंह
▪️जयपुर चित्रशैली - सवाई प्रताप सिंह
▪️बीकानेर चित्रशैली - अनूप सिंह का काल
▪️मेवाड़ चित्रशैली - जगतसिंह प्रथम
▪️किशनगढ़ चित्रशैली - सावंत सिंह
▪️मारवाड़ चित्रशैली - जसवंत सिंह
▪️चावड चित्रशैली - अमरसिंह प्रथम
▪️अलवर चित्रशैली - विनय सिंह
▪️कोटा बूंदी चित्रशैली - उम्मेदसिंह प्रथम
▪️जैसलमेर चित्रशैली - मूलराज द्वितीय
▪️आमेर चित्रशैली - मिर्जा राजा जयसिंह
▪️जयपुर चित्रशैली - सवाई प्रताप सिंह
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घटियाला शिलालेख : मंडोर शासकों के बारे में घटियाला शिलालेख से जानकारी मिलती है और इस शिलालेख से ज्ञात होता है कि प्रतिहारों के गुरु हरिश्चंद्र नामक ब्राह्मण की दो पत्नियों थी एक ब्राह्मणी और दूसरी क्षत्राणी।
हरिश्चंद्र को""रोहलासिद्धि' के नाम से भी जाना जाता है।
#❤️👍🏼
हरिश्चंद्र को""रोहलासिद्धि' के नाम से भी जाना जाता है।
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