मलागिरि (मलयगिरि) : भूरे रंग में (चंदन के रंग से)रंगा हुआ वस्त्र जो कई वर्षों तक सुगंध देता था। सिटी पैलेस (जयपुर) में सवाई रामसिंह द्वितीय की अंगरखियां आज भी सुगन्धित है।
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दामणी : मारवाड़ क्षेत्र में प्रचलित लाल रंग की ओढ़नी,जिस पर धागे से कशीदाकारी की होती है।
ध्यान रहे - 'दामणा' अंगुली का आभूषण है।
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ध्यान रहे - 'दामणा' अंगुली का आभूषण है।
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साड़ियों के विविध रूप - चोल, निकोल/निचोल, पट, दुकुल, अंसुक, चीर, पटोरी, चोरसो,धोरावली आदि साड़ियों के विविध रूप है।
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पोत, निबोरी, तिमणिया, तुलसी, जुमावली, चोकी, झालरो, गुंजमाला, गुंजा, चम्पाकली, हंसहार, कंठ साड़ी, कंठमला, हार, चन्द्रहार आदि गले के आभूषण थे।
बाजूबंद (कंगन), रामपाट, चूड़ियां, नोगरी, कंकण, गजरा, गुजरी, बरखा आदि आग्रबाहुओं हाथ की कसाइयों के आभूषण थे।
अंगूठी, विनती, मुंदरी, दामचा (दवनो), नथ-पान आदि हाथ की अंगुलियों के आभूषण थे।
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बाजूबंद (कंगन), रामपाट, चूड़ियां, नोगरी, कंकण, गजरा, गुजरी, बरखा आदि आग्रबाहुओं हाथ की कसाइयों के आभूषण थे।
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