परिसीमन आयोग [DC] का गठन [अनुच्छेद 82 के अधीन संसद द्वारा अवधारित विधि] परिसीमन आयोग अधिनियम के तहत केंद्र सरकार करती है।
• भारत में परिसीमन आयोगों का गठन 4 बार [1952 में परिसीमन आयोग अधिनियम 1952 , 1963 में परिसीमन आयोग अधिनियम 1962 , 1973 में परिसीमन अधिनियम 1972 और 2002 में परिसीमन अधिनियम, 2002] किया गया है। 2002 में DC का गठन न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) कुलदीप सिंह की अध्यक्षता में बना। [UPSC Pre 2024 , Rpsc Programmer 2024]
• पुनः समायोजन उस तारीख से प्रभावी होगा जो राष्ट्रपति आदेश द्वारा विनिर्दिष्ट करे।
• किशोरचंद्र छंगनलाल राठौड़ बनाम भारत संघ और अन्य 2024 मामले में सुप्रीम कोर्ट ने निर्णय दिया कि परिसीमन आयोग के किसी भी आदेश के स्पष्ट रूप से मनमाने होने और संवैधानिक मूल्यों के अनुरूप नहीं होने पर संवैधानिक न्यायालयों को उन आदेशों की समीक्षा करने का अधिकार है।
• भारत में परिसीमन आयोगों का गठन 4 बार [1952 में परिसीमन आयोग अधिनियम 1952 , 1963 में परिसीमन आयोग अधिनियम 1962 , 1973 में परिसीमन अधिनियम 1972 और 2002 में परिसीमन अधिनियम, 2002] किया गया है। 2002 में DC का गठन न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) कुलदीप सिंह की अध्यक्षता में बना। [UPSC Pre 2024 , Rpsc Programmer 2024]
• पुनः समायोजन उस तारीख से प्रभावी होगा जो राष्ट्रपति आदेश द्वारा विनिर्दिष्ट करे।
• किशोरचंद्र छंगनलाल राठौड़ बनाम भारत संघ और अन्य 2024 मामले में सुप्रीम कोर्ट ने निर्णय दिया कि परिसीमन आयोग के किसी भी आदेश के स्पष्ट रूप से मनमाने होने और संवैधानिक मूल्यों के अनुरूप नहीं होने पर संवैधानिक न्यायालयों को उन आदेशों की समीक्षा करने का अधिकार है।
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♣️ राजस्थान की प्राकृतिक वनस्पति को मुख्य
रूप से चार भागों में बांटा जा सकता है:
🔅थार मरुस्थलीय क्षेत्र (शुष्क क्षेत्र):
- इस क्षेत्र में बबूल, कैक्टस, केर, खेजड़ी, सिंगरी, तथा बेर के पेड़ पाए जाते हैं।
- यहाँ की वनस्पति अधिकतर झाड़ीनुमा और कांटेदार होती है।
- यह क्षेत्र बहुत ही कम वर्षा प्राप्त करता है, इसलिए वनस्पति कम घनी होती है।
🔅अर्ध-शुष्क क्षेत्र:
- इस क्षेत्र में सालार, रोहिड़ा, धोक, और बबूल के पेड़ मुख्य रूप से पाए जाते हैं।
- यहाँ थोड़ी अधिक वर्षा होने के कारण वनस्पति थोड़ी घनी होती है।
🔅 अरावली पर्वतीय क्षेत्र:
- इस क्षेत्र में साल, सागवान, तेंदू, और आम के पेड़ पाए जाते हैं।
- अरावली पर्वत श्रृंखला में अधिक वर्षा होने के कारण वनस्पति हरी-भरी होती है।
- यहाँ मिश्रित पर्णपाती वन भी देखने को मिलते हैं।
🔅 दक्षिणी और दक्षिण-पूर्वी राजस्थान (उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्र):
- इस क्षेत्र में महुआ, बांस, बेर, और पलाश के वृक्ष पाए जाते हैं।
- यह क्षेत्र उपोष्णकटिबंधीय वनस्पति के लिए जाना जाता है और यहाँ पर्णपाती जंगल भी होते हैं।
रूप से चार भागों में बांटा जा सकता है:
🔅थार मरुस्थलीय क्षेत्र (शुष्क क्षेत्र):
- इस क्षेत्र में बबूल, कैक्टस, केर, खेजड़ी, सिंगरी, तथा बेर के पेड़ पाए जाते हैं।
- यहाँ की वनस्पति अधिकतर झाड़ीनुमा और कांटेदार होती है।
- यह क्षेत्र बहुत ही कम वर्षा प्राप्त करता है, इसलिए वनस्पति कम घनी होती है।
🔅अर्ध-शुष्क क्षेत्र:
- इस क्षेत्र में सालार, रोहिड़ा, धोक, और बबूल के पेड़ मुख्य रूप से पाए जाते हैं।
- यहाँ थोड़ी अधिक वर्षा होने के कारण वनस्पति थोड़ी घनी होती है।
🔅 अरावली पर्वतीय क्षेत्र:
- इस क्षेत्र में साल, सागवान, तेंदू, और आम के पेड़ पाए जाते हैं।
- अरावली पर्वत श्रृंखला में अधिक वर्षा होने के कारण वनस्पति हरी-भरी होती है।
- यहाँ मिश्रित पर्णपाती वन भी देखने को मिलते हैं।
🔅 दक्षिणी और दक्षिण-पूर्वी राजस्थान (उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्र):
- इस क्षेत्र में महुआ, बांस, बेर, और पलाश के वृक्ष पाए जाते हैं।
- यह क्षेत्र उपोष्णकटिबंधीय वनस्पति के लिए जाना जाता है और यहाँ पर्णपाती जंगल भी होते हैं।
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♣️ राजस्थान ऊर्जा क्षेत्र से जुडे़ महत्वपूर्ण प्रश्न ✍
राजस्थान का पहला सुपर थर्मल पावर प्लांट
राजस्थान का पहला गैस पावर प्लांट प्रोजेक्ट
भारत में पहला सोलर पावर प्लांट
राजस्थान की पहली निजी क्षेत्र की सौर परियोजना
राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड का गठन
मुख्यमंत्री किसान मित्र ऊर्जा योजना लागू हुई
पवन ऊर्जा के उत्पादन में राजस्थान का स्थान
राजस्थान का पहला पवन ऊर्जा परियोजना
राजस्थान का पहला सुपर थर्मल पावर प्लांट
सूरतगढ़ सुपर थर्मल पावर प्लांट
राजस्थान का पहला गैस पावर प्लांट प्रोजेक्ट
रामगढ़ (जैसलमेर)
भारत में पहला सोलर पावर प्लांट
फलौदी-जोधपुर में
राजस्थान की पहली निजी क्षेत्र की सौर परियोजना
खींवसर (नागौर) में
राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड का गठन
19 जुलाई, 2000
मुख्यमंत्री किसान मित्र ऊर्जा योजना लागू हुई
1 मई, 2021 से
पवन ऊर्जा के उत्पादन में राजस्थान का स्थान
5वाँ
राजस्थान का पहला पवन ऊर्जा परियोजना
अमर सागर पवन ऊर्जा परियोजना
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☞︎︎︎ आओ जानें राजस्थान के प्रतीक चिन्ह
राज्य वृक्ष - खेतड़ी (1983 )
✪ राज्य पुष्प - रोहिड़ा (1983 )
✪ राज्य पक्षी- गोडावण(1981)
✪राज्य पशु -चिंकारा (1981) वन्यजीव श्रेणी में
✪राज्य पशु -ऊंट(2014)पालतू पशु की श्रेणी में
✪ राज्य नृत्य - घूमर
✪ राज्य शास्त्रीय नृत्य - कत्थक
✪ राज्य खेल - बॉस्केटबॉल
✪ राज्य वाद्य यंत्र - अलगोजा
✪ राज्य मिठाई - घेवर
✪ राज्य गीत - केसरिया बालम
✪ राज्य कवि- सूर्यमल मिश्रण
✪ राजस्थान दिवस - 30 मार्च
✪ राजस्थान स्थापना दिवस - 1 नवंबर
✪ राजस्थान भाषा दिवस - 21 फरवरी
राज्य वृक्ष - खेतड़ी (1983 )
✪ राज्य पुष्प - रोहिड़ा (1983 )
✪ राज्य पक्षी- गोडावण(1981)
✪राज्य पशु -चिंकारा (1981) वन्यजीव श्रेणी में
✪राज्य पशु -ऊंट(2014)पालतू पशु की श्रेणी में
✪ राज्य नृत्य - घूमर
✪ राज्य शास्त्रीय नृत्य - कत्थक
✪ राज्य खेल - बॉस्केटबॉल
✪ राज्य वाद्य यंत्र - अलगोजा
✪ राज्य मिठाई - घेवर
✪ राज्य गीत - केसरिया बालम
✪ राज्य कवि- सूर्यमल मिश्रण
✪ राजस्थान दिवस - 30 मार्च
✪ राजस्थान स्थापना दिवस - 1 नवंबर
✪ राजस्थान भाषा दिवस - 21 फरवरी
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🔥 ऐ मेहनत करने वाले!
जब थकान महसूस हो, तो याद रखना—सपने आराम से नहीं, जिद से पूरे होते हैं।
वक़्त की कद्र करो, यही तुम्हें मंज़िल तक पहुँचाएगा!
जब थकान महसूस हो, तो याद रखना—सपने आराम से नहीं, जिद से पूरे होते हैं।
वक़्त की कद्र करो, यही तुम्हें मंज़िल तक पहुँचाएगा!
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राजस्थान gk क्विज
राजस्थान के किले और दुर्ग
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राजस्थान के किले और दुर्ग
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