Q.निम्नलिखित में से किस क्रांतिकारी ने अपना अधिकांश समय एक नकली नाम अमरदास वैरागी वाले संत की पोशाक में बिताया -
Anonymous Quiz
19%
(अ) प्रताप सिंह बारहठ
52%
(ब) जोरावर सिंह बारहठ
20%
(स) राव गोपाल सिंह खरवा
9%
(द) अर्जुन लाल सेठी
👍2
Q.उदयपुर में ‘परोपकारिणी सभा’ किसने स्थापित की थी -
Anonymous Quiz
11%
(अ) ज्योतिबा फुले
66%
(ब) स्वामी दयानंद सरस्वती
9%
(स) स्वामी विवेकानंद
14%
(द) ईश्वर चंद्र विद्यासागर
👍14✍2
◾ राजस्थान में हाथकरघा विकास से जुड़ी संसथाएं :-
• राजस्थान राज्य हाथकरघा विकास निगम लिमिटेड - अप्रैल, 1984 (जयपुर)
• राजस्थान राज्य बुनकर सहकारी संघ लिमिटेड - अगस्त, 1957 (जयपुर)
• बुनकर सेवा केंद्र - जुलाई, 1978 (जयपुर)
• भारतीय हाथकरघा प्रौद्योगिकी संस्थान - जोधपुर
◾ राजस्थान खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड :-
• स्थापना - 1955, जयपुर।
• प्रशिक्षण केंद्र - पुष्कर, माउन्ट आबू, सांगानेर।
• उद्देश्य - खादी विकास व हैण्डलूम को बढ़ावा देना।
◾ हैण्डीक्राफ्ट बोर्ड:-
• स्थापना - 1991, जयपुर।
• हस्तशिल्प हेतु शीर्ष संस्था।
• हैण्डीक्राफ्ट पार्क - जैसलमेर व जोधपुर (रीको द्वारा)।
• हैण्डीक्राफ्ट निदेशालय - जोधपुर।
• राजस्थान राज्य हाथकरघा विकास निगम लिमिटेड - अप्रैल, 1984 (जयपुर)
• राजस्थान राज्य बुनकर सहकारी संघ लिमिटेड - अगस्त, 1957 (जयपुर)
• बुनकर सेवा केंद्र - जुलाई, 1978 (जयपुर)
• भारतीय हाथकरघा प्रौद्योगिकी संस्थान - जोधपुर
◾ राजस्थान खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड :-
• स्थापना - 1955, जयपुर।
• प्रशिक्षण केंद्र - पुष्कर, माउन्ट आबू, सांगानेर।
• उद्देश्य - खादी विकास व हैण्डलूम को बढ़ावा देना।
◾ हैण्डीक्राफ्ट बोर्ड:-
• स्थापना - 1991, जयपुर।
• हस्तशिल्प हेतु शीर्ष संस्था।
• हैण्डीक्राफ्ट पार्क - जैसलमेर व जोधपुर (रीको द्वारा)।
• हैण्डीक्राफ्ट निदेशालय - जोधपुर।
👍13
• मणिपुर की आशालता देवी स इंटरनेशनल फुटबॉल मैच खेलने वाली भारत की पहली महिला खिलाड़ी बन गई।
• मणिपुर की बाला देवी 50 इंटरनेशनल गोल करने वाली पहली भारतीय महिला खिलाड़ी बन गई।
• मणिपुर की बाला देवी 50 इंटरनेशनल गोल करने वाली पहली भारतीय महिला खिलाड़ी बन गई।
👍12
✌️REET स्पेशल ✅
राजस्थानी साहित्यिक स्रोत 🔰
राजस्थानी साहित्य -- साहित्यकार
1. पृथ्वीराजरासो -- चन्दबरदाई
2. बीसलदेव रांसो -- नरपति नाल्ह
3. हम्मीर रासो -- जोधराज
4. हम्मीर रासो -- शारगंधर
5. संगत रासो -- गिरधर आंसिया
6. बेलिकृष्ण रूकमणीरी -- पृथ्वीराज राठौड़
7. अचलदास खीची री वचनिका -- शिवदास गाडण
8. कान्हड़ दे प्रबन्ध -- पदमनाभ
9. पातल और पीथल -- कन्हैया लाल सेठिया
10. धरती धोरा री -- कन्हैया लाल सेठिया
11. लीलटास -- कन्हैया लाल सेठिया
12. रूठीराणी, चेतावणी रा चूंगठिया -- केसरीसिंह बारहड
13. राजस्थानी कहांवता -- मुरलीधर ब्यास
14. राजस्थानी शब्दकोष -- सीताराम लालस
15. नैणसी री ख्यात -- मुहणौत नैणसी
16. मारवाड रे परगाना री विगत -- मुहणौत नैणसी
संस्कृत साहित्य
1. पृथ्वीराज विजय -- जयानक (कश्मीरी)
2. हम्मीर महाकाव्य -- नयन चन्द्र सूरी
3. हम्मीर मदमर्दन -- जयसिंह सूरी
4. कुवलयमाला -- उद्योतन सूरी
5. वंश भासकर/छंद मयूख -- सूर्यमल्ल मिश्रण (बंूदी)
6. नृत्यरत्नकोष -- राणा कुंभा
7. भाषा भूषण -- जसवंत सिंह
8. एक लिंग महात्मय -- कान्ह जी ब्यास
9. ललित विग्रराज -- कवि सोमदेव
फारसी साहित्य
1. चचनामा -- अली अहमद
2. मिम्ता-उल-फुतूह -- अमीर खुसरो
3. खजाइन-उल-फुतूह -- अमीर खुसरों
4. तुजुके बाबरी (तुर्की) बाबरनामा -- बाबर
5. हुमायूनामा -- गुलबदन बेगम
6. अकनामा/आइने अकबरी -- अबुल फजल
7. तुजुके जहांगीरी -- जहांगीर
8. तारीख -ए-राजस्थान -- कालीराम कायस्थ
9. वाकीया-ए- राजपूताना -- मुंशी ज्वाला सहाय
राजस्थानी साहित्यिक स्रोत 🔰
राजस्थानी साहित्य -- साहित्यकार
1. पृथ्वीराजरासो -- चन्दबरदाई
2. बीसलदेव रांसो -- नरपति नाल्ह
3. हम्मीर रासो -- जोधराज
4. हम्मीर रासो -- शारगंधर
5. संगत रासो -- गिरधर आंसिया
6. बेलिकृष्ण रूकमणीरी -- पृथ्वीराज राठौड़
7. अचलदास खीची री वचनिका -- शिवदास गाडण
8. कान्हड़ दे प्रबन्ध -- पदमनाभ
9. पातल और पीथल -- कन्हैया लाल सेठिया
10. धरती धोरा री -- कन्हैया लाल सेठिया
11. लीलटास -- कन्हैया लाल सेठिया
12. रूठीराणी, चेतावणी रा चूंगठिया -- केसरीसिंह बारहड
13. राजस्थानी कहांवता -- मुरलीधर ब्यास
14. राजस्थानी शब्दकोष -- सीताराम लालस
15. नैणसी री ख्यात -- मुहणौत नैणसी
16. मारवाड रे परगाना री विगत -- मुहणौत नैणसी
संस्कृत साहित्य
1. पृथ्वीराज विजय -- जयानक (कश्मीरी)
2. हम्मीर महाकाव्य -- नयन चन्द्र सूरी
3. हम्मीर मदमर्दन -- जयसिंह सूरी
4. कुवलयमाला -- उद्योतन सूरी
5. वंश भासकर/छंद मयूख -- सूर्यमल्ल मिश्रण (बंूदी)
6. नृत्यरत्नकोष -- राणा कुंभा
7. भाषा भूषण -- जसवंत सिंह
8. एक लिंग महात्मय -- कान्ह जी ब्यास
9. ललित विग्रराज -- कवि सोमदेव
फारसी साहित्य
1. चचनामा -- अली अहमद
2. मिम्ता-उल-फुतूह -- अमीर खुसरो
3. खजाइन-उल-फुतूह -- अमीर खुसरों
4. तुजुके बाबरी (तुर्की) बाबरनामा -- बाबर
5. हुमायूनामा -- गुलबदन बेगम
6. अकनामा/आइने अकबरी -- अबुल फजल
7. तुजुके जहांगीरी -- जहांगीर
8. तारीख -ए-राजस्थान -- कालीराम कायस्थ
9. वाकीया-ए- राजपूताना -- मुंशी ज्वाला सहाय
👍15❤1
♣️ अजमेर में स्थापित समाचार पत्र एवं उनके संस्थापक
1. राजपूताना गजट
➪ वर्ष: 1882
➪ संस्थापक: मोलवी मुराद अली
2. देश हितैषी
➪ वर्ष: 1882
➪ संस्थापक: मुंशी मुन्नालाल शर्मा
3. राजपूताना गजेटियर
➪ वर्ष: 1885
➪ संस्थापक: मोलवी मुराद अली
4. राजपूताना हेराल्ड
➪ वर्ष: 1885
➪ संस्थापक: हनुमान सिंह
5. राजस्थान टाइम्स
➪ वर्ष: 1885
➪ संस्थापक: बक्शी लक्ष्मण दास
6. राजस्थान पत्रिका
➪ वर्ष: 1885
➪ संस्थापक: बक्शी लक्ष्मण दास
7. राजपूताना समाचार
➪ वर्ष: 1905
➪ संस्थापक: समर्थनदास चारण
8.नवीन राजस्थान
➪ वर्ष: 1921
➪ संस्थापक: विजय सिंह पथिक एवं रामनाराण चौधरी
9. तरुण राजस्थान
➪ वर्ष: 1922
➪ संस्थापक: विजय सिंह पथिक
10. दैनिक नवज्योति
➪ वर्ष: 1936
➪ संस्थापक: दुर्गा प्रसाद चौधरी
1. राजपूताना गजट
➪ वर्ष: 1882
➪ संस्थापक: मोलवी मुराद अली
2. देश हितैषी
➪ वर्ष: 1882
➪ संस्थापक: मुंशी मुन्नालाल शर्मा
3. राजपूताना गजेटियर
➪ वर्ष: 1885
➪ संस्थापक: मोलवी मुराद अली
4. राजपूताना हेराल्ड
➪ वर्ष: 1885
➪ संस्थापक: हनुमान सिंह
5. राजस्थान टाइम्स
➪ वर्ष: 1885
➪ संस्थापक: बक्शी लक्ष्मण दास
6. राजस्थान पत्रिका
➪ वर्ष: 1885
➪ संस्थापक: बक्शी लक्ष्मण दास
7. राजपूताना समाचार
➪ वर्ष: 1905
➪ संस्थापक: समर्थनदास चारण
8.नवीन राजस्थान
➪ वर्ष: 1921
➪ संस्थापक: विजय सिंह पथिक एवं रामनाराण चौधरी
9. तरुण राजस्थान
➪ वर्ष: 1922
➪ संस्थापक: विजय सिंह पथिक
10. दैनिक नवज्योति
➪ वर्ष: 1936
➪ संस्थापक: दुर्गा प्रसाद चौधरी
👍9
👉कटकी/ पावली भांत की ओढ़नी-
➯आदिवासी अविवाहित महिला (कुंवारी कन्या) के द्वारा ओढ़े जाने वाली ओढ़नी को कटकी/ पावली भांत की ओढ़नी कहते है।
👉जाम साई-
➯आदिवासी महिलाओं की साड़ी को जाम साई कहते है।
👉नादंणा-
➯आदिवासी महिलाओं के घाघरे को नादणा कहते है।
➯नादणा घाघरा राजस्थान में भिलवाड़ा का प्रसिद्ध है।
👉रेनसाई-
➯आदिवासी महिलाओं के घाघरे की छिट को रेनसाई कहते है।
👉सिंदरी-
➯भील स्त्रियों के लाल रंग की साड़ी को सिंदरी कहते है।
👉पिरिया-
➯भील स्त्रियों के द्वारा पहने जाने वाले पीले रंग के लहंगे को पिरिया कहते है।
👉तिलका-
➯तिलका मुस्लिम महिलाओं का पहनावा है।
👉कछाबू-
➯भील स्त्रियों के द्वारा घुटने तक पहने जाने वाले लहंगे को कछाबू कहते है।
👉कवर जोड़-
➯मामा के द्वारा वधु के लिये लाई गई ओढ़नी को कवर जोड़ कहते है।
👉बाला चुनड़ी-
➯मामा के द्वारा वधु की माँ के लिये लाई गई चुनड़ी/ ओढ़नी को बाला चुनड़ी कहते है।
👉पोमचा-
➯पोमचे का रंग पीला होता है।
➯पोमचा राजस्थान में जयपुर जिले का प्रसिद्ध माना जाता है।
➯जच्चा स्त्रियों के द्वारा ओढ़े जाने वाली ओढ़नी को पोमचा कहते है।
👉चीड़/चीढ़ का पोमचा-
➯विधवा महिलाओं के द्वारा ओढ़े जाने वाली काले रंग की ओढ़नी को चीड़ का पोमचा कहते है।
पुरुषों के पहनावे (राजस्थानी वेशभूषा)
👉अंगरखी/ बुगतरी-
➯पुरुषों के शरीर के उपरी भाग में पहने जाने वाले वस्त्र को अंगरखी/ बुगतरी कहते है।
👉ठेपाड़ा/ढेपाड़ा-
➯भील पुरुषों के द्वारा पहनी जाने वाली तंग धोती को ढ़ेपाक कहते है।
👉पोत्या-
➯भील पुरुषों के साफे को पोत्या कहते है
➯भील पुरुषों के साफे को पोत्या कहते है।
👉खोयतू/खयोतू-
➯भील पुरुषों के द्वारा बांधे जाने वाली लंगोटी को खोयतू/ खयोतू कहते है।
अन्य महत्वपूर्ण तथ्य
👉आतम सुख-
➯तेज सर्दी से बचने के लिये ओढ़े जाने वाले वस्त्र को अात्मसुख कहते है।
👉खपट्टा-
➯शहरीया जनजाती के साफे को खपट्टा कहते है।
👉गोटे के प्रकार-
1. लप्पा
2. लप्पी
3. किरण
4. बांकड़ी
5. नोदाणी
6. सतदानी
7. बिजिया
👉गोटा उद्योग-
➯राजस्थान में गोटा उद्योग खण्डेला (सीकर) का प्रसिद्ध है।
👉लुगड़ा-
➯राजस्थान में लुगड़ा पाटोदा (सीकर) का प्रसिद्ध है।
👉बंधेज-
➯राजस्थान में बंधेज का सर्वाधिक कार्य सुजानगढ़ (चूरू) में किया जाता है।
➯राजस्थान में बंधेज की सबसे बड़ी मंडी जोधपुर में स्थित है।
👉पगड़ी-
➯पगड़ी को प्रतिष्ठा का प्रतीक माना जाता है।
➯पगड़ी को पागा तथा पेचा भी कहते है।
➯राजस्थान में पगड़ी उदयपुर जिले की प्रसिद्ध मानी जाती है।
➯विश्व की सबसे बड़ी पगड़ी बागौर संग्रहालय (उदयपुर) में रखी हुई है।
👉चपटी-
➯उदयपुर की पगड़ी को चपटी कहते है।
👉खूंटेदार-
➯जयपुर की पगड़ी को खूंटेदार कहते है।
👉छज्जादार-
➯मारवाड़ा की पगड़ी को छज्जादार कहते है।
👉छाबदार-
➯मेवाड़ में पगड़ी बांधने वाले को छाबदार कहते है।
👉केसरिया पगड़ी-
➯केसरिया पगड़ी केवल राजा के द्वारा ही पहनी जाती थी।
👉कसूमल रंग की पगड़ी-
➯कसूमल रंग की पगड़ी युद्ध के समय पहनी जाती थी।
👉लाल रंग की लहरीदार पगड़ी-
➯लाल रंग की लहरीदार पगड़ी राजघराने के लोगो के द्वारा पहनी जाती थी।
👉पगड़ी के प्रकार-
1. उदयशाही
2. जसवंतशाही
3. भिमशाही
4. डुगरशाही
5. राजशाही
6. मंदिल
👉साफा-
➯राजस्थान में साफा जोधपुर जिले का प्रसिद्ध है।
👉जोधपुरी कोट पेन्ट-
➯जोधपुरी कोट पेन्ट को राष्ट्रीय पौशाक का दर्जा दिया गया है।
👉पंच रंग पाग-
➯पंच रंग पाग का शुभ अवसरों पर पहना जाता है।
➯आदिवासी अविवाहित महिला (कुंवारी कन्या) के द्वारा ओढ़े जाने वाली ओढ़नी को कटकी/ पावली भांत की ओढ़नी कहते है।
👉जाम साई-
➯आदिवासी महिलाओं की साड़ी को जाम साई कहते है।
👉नादंणा-
➯आदिवासी महिलाओं के घाघरे को नादणा कहते है।
➯नादणा घाघरा राजस्थान में भिलवाड़ा का प्रसिद्ध है।
👉रेनसाई-
➯आदिवासी महिलाओं के घाघरे की छिट को रेनसाई कहते है।
👉सिंदरी-
➯भील स्त्रियों के लाल रंग की साड़ी को सिंदरी कहते है।
👉पिरिया-
➯भील स्त्रियों के द्वारा पहने जाने वाले पीले रंग के लहंगे को पिरिया कहते है।
👉तिलका-
➯तिलका मुस्लिम महिलाओं का पहनावा है।
👉कछाबू-
➯भील स्त्रियों के द्वारा घुटने तक पहने जाने वाले लहंगे को कछाबू कहते है।
👉कवर जोड़-
➯मामा के द्वारा वधु के लिये लाई गई ओढ़नी को कवर जोड़ कहते है।
👉बाला चुनड़ी-
➯मामा के द्वारा वधु की माँ के लिये लाई गई चुनड़ी/ ओढ़नी को बाला चुनड़ी कहते है।
👉पोमचा-
➯पोमचे का रंग पीला होता है।
➯पोमचा राजस्थान में जयपुर जिले का प्रसिद्ध माना जाता है।
➯जच्चा स्त्रियों के द्वारा ओढ़े जाने वाली ओढ़नी को पोमचा कहते है।
👉चीड़/चीढ़ का पोमचा-
➯विधवा महिलाओं के द्वारा ओढ़े जाने वाली काले रंग की ओढ़नी को चीड़ का पोमचा कहते है।
पुरुषों के पहनावे (राजस्थानी वेशभूषा)
👉अंगरखी/ बुगतरी-
➯पुरुषों के शरीर के उपरी भाग में पहने जाने वाले वस्त्र को अंगरखी/ बुगतरी कहते है।
👉ठेपाड़ा/ढेपाड़ा-
➯भील पुरुषों के द्वारा पहनी जाने वाली तंग धोती को ढ़ेपाक कहते है।
👉पोत्या-
➯भील पुरुषों के साफे को पोत्या कहते है
➯भील पुरुषों के साफे को पोत्या कहते है।
👉खोयतू/खयोतू-
➯भील पुरुषों के द्वारा बांधे जाने वाली लंगोटी को खोयतू/ खयोतू कहते है।
अन्य महत्वपूर्ण तथ्य
👉आतम सुख-
➯तेज सर्दी से बचने के लिये ओढ़े जाने वाले वस्त्र को अात्मसुख कहते है।
👉खपट्टा-
➯शहरीया जनजाती के साफे को खपट्टा कहते है।
👉गोटे के प्रकार-
1. लप्पा
2. लप्पी
3. किरण
4. बांकड़ी
5. नोदाणी
6. सतदानी
7. बिजिया
👉गोटा उद्योग-
➯राजस्थान में गोटा उद्योग खण्डेला (सीकर) का प्रसिद्ध है।
👉लुगड़ा-
➯राजस्थान में लुगड़ा पाटोदा (सीकर) का प्रसिद्ध है।
👉बंधेज-
➯राजस्थान में बंधेज का सर्वाधिक कार्य सुजानगढ़ (चूरू) में किया जाता है।
➯राजस्थान में बंधेज की सबसे बड़ी मंडी जोधपुर में स्थित है।
👉पगड़ी-
➯पगड़ी को प्रतिष्ठा का प्रतीक माना जाता है।
➯पगड़ी को पागा तथा पेचा भी कहते है।
➯राजस्थान में पगड़ी उदयपुर जिले की प्रसिद्ध मानी जाती है।
➯विश्व की सबसे बड़ी पगड़ी बागौर संग्रहालय (उदयपुर) में रखी हुई है।
👉चपटी-
➯उदयपुर की पगड़ी को चपटी कहते है।
👉खूंटेदार-
➯जयपुर की पगड़ी को खूंटेदार कहते है।
👉छज्जादार-
➯मारवाड़ा की पगड़ी को छज्जादार कहते है।
👉छाबदार-
➯मेवाड़ में पगड़ी बांधने वाले को छाबदार कहते है।
👉केसरिया पगड़ी-
➯केसरिया पगड़ी केवल राजा के द्वारा ही पहनी जाती थी।
👉कसूमल रंग की पगड़ी-
➯कसूमल रंग की पगड़ी युद्ध के समय पहनी जाती थी।
👉लाल रंग की लहरीदार पगड़ी-
➯लाल रंग की लहरीदार पगड़ी राजघराने के लोगो के द्वारा पहनी जाती थी।
👉पगड़ी के प्रकार-
1. उदयशाही
2. जसवंतशाही
3. भिमशाही
4. डुगरशाही
5. राजशाही
6. मंदिल
👉साफा-
➯राजस्थान में साफा जोधपुर जिले का प्रसिद्ध है।
👉जोधपुरी कोट पेन्ट-
➯जोधपुरी कोट पेन्ट को राष्ट्रीय पौशाक का दर्जा दिया गया है।
👉पंच रंग पाग-
➯पंच रंग पाग का शुभ अवसरों पर पहना जाता है।
👍7
राजस्थान के प्रमुख उद्यान (gardens) जो प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण हैं:
1. सिसोदिया रानी का बाग, जयपुर: यह उद्यान महाराजा सवाई जय सिंह द्वितीय ने अपनी रानी के लिए बनवाया था। यहां की वास्तुकला और पेंटिंग्स बहुत सुंदर हैं।
2.विद्याधर का बाग, जयपुर: यह बाग विद्याधर भट्टाचार्य के नाम पर है, जिन्होंने जयपुर शहर की योजना बनाई थी। यहां के बगीचे और झरने आकर्षण का केंद्र हैं।
3.साहेबगंज का बाग, टोंक: यह बाग टोंक जिले में स्थित है और इसकी खूबसूरत फूलों की क्यारियां और हरियाली पर्यटकों को आकर्षित करती हैं।
4. राम निवास बाग, जयपुर: यह बाग महाराजा सवाई राम सिंह द्वितीय ने बनवाया था। इसके अंदर अल्बर्ट हॉल म्यूजियम भी स्थित है।
5. उमेद उद्यान, जोधपुर: यह उद्यान महाराजा उमेद सिंह के द्वारा बनवाया गया था और जोधपुर शहर का प्रमुख पर्यटक स्थल है।
6. नेहरू उद्यान, उदयपुर: यह उद्यान फतेह सागर झील के बीच स्थित है और यहां नौकायन की सुविधा भी है।
7. गुलाब बाग, उदयपुर: यह उद्यान महाराजा सज्जन सिंह द्वारा बनवाया गया था। इसे 'सज्जन निवास बाग' भी कहा जाता है और यहां एक पुस्तकालय और चिड़ियाघर भी स्थित है।
8. मोती डूंगरी बाग, अलवर: यह उद्यान अलवर जिले में स्थित है और यहाँ की हरियाली और शांत वातावरण इसे प्रसिद्ध बनाता है।
9.कमला नेहरू उद्यान, अजमेर : आनासागर झील के किनारे स्थित यह उद्यान अजमेर का प्रमुख पर्यटक स्थल है।
ये उद्यान राजस्थान की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर का हिस्सा हैं, जो प्रतियोगी परीक्षाओं में अक्सर पूछे जाते हैं
1. सिसोदिया रानी का बाग, जयपुर: यह उद्यान महाराजा सवाई जय सिंह द्वितीय ने अपनी रानी के लिए बनवाया था। यहां की वास्तुकला और पेंटिंग्स बहुत सुंदर हैं।
2.विद्याधर का बाग, जयपुर: यह बाग विद्याधर भट्टाचार्य के नाम पर है, जिन्होंने जयपुर शहर की योजना बनाई थी। यहां के बगीचे और झरने आकर्षण का केंद्र हैं।
3.साहेबगंज का बाग, टोंक: यह बाग टोंक जिले में स्थित है और इसकी खूबसूरत फूलों की क्यारियां और हरियाली पर्यटकों को आकर्षित करती हैं।
4. राम निवास बाग, जयपुर: यह बाग महाराजा सवाई राम सिंह द्वितीय ने बनवाया था। इसके अंदर अल्बर्ट हॉल म्यूजियम भी स्थित है।
5. उमेद उद्यान, जोधपुर: यह उद्यान महाराजा उमेद सिंह के द्वारा बनवाया गया था और जोधपुर शहर का प्रमुख पर्यटक स्थल है।
6. नेहरू उद्यान, उदयपुर: यह उद्यान फतेह सागर झील के बीच स्थित है और यहां नौकायन की सुविधा भी है।
7. गुलाब बाग, उदयपुर: यह उद्यान महाराजा सज्जन सिंह द्वारा बनवाया गया था। इसे 'सज्जन निवास बाग' भी कहा जाता है और यहां एक पुस्तकालय और चिड़ियाघर भी स्थित है।
8. मोती डूंगरी बाग, अलवर: यह उद्यान अलवर जिले में स्थित है और यहाँ की हरियाली और शांत वातावरण इसे प्रसिद्ध बनाता है।
9.कमला नेहरू उद्यान, अजमेर : आनासागर झील के किनारे स्थित यह उद्यान अजमेर का प्रमुख पर्यटक स्थल है।
ये उद्यान राजस्थान की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर का हिस्सा हैं, जो प्रतियोगी परीक्षाओं में अक्सर पूछे जाते हैं
👍5❤1
◾ रामदयाल शर्मा (भरतपुर) :-
🔹कला का क्षेत्र - नौटंकी।
🔹 गुरु - रामस्वरूप शर्मा।
🔹पुरस्कार :-
• संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार - 2015।
• पद्मश्री - 2022।
◾ रामदयाल शर्मा (जयपुर) :-
🔹कला का क्षेत्र - तारकशी।
🔹गुरु - रामस्वरूप शर्मा।
🔹पुरस्कार :-
• कलानिधि सम्मान -2010।
🔹कला का क्षेत्र - नौटंकी।
🔹 गुरु - रामस्वरूप शर्मा।
🔹पुरस्कार :-
• संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार - 2015।
• पद्मश्री - 2022।
◾ रामदयाल शर्मा (जयपुर) :-
🔹कला का क्षेत्र - तारकशी।
🔹गुरु - रामस्वरूप शर्मा।
🔹पुरस्कार :-
• कलानिधि सम्मान -2010।
👍8
🔹हलमा👉 भीलों का सामूहिक सहयोग
🔹हमेल👉 गले का आभूषण
🔹हलावी👉 खजूर की किस्म
🔹हेलरू👉 गरसियाओं की सामाजिक सहकारी संस्था
🔹हमेलौं👉माणिक्य लाल वर्मा आदिम शोध संस्थान द्वारा लगाया गया मेला
🔹हथाई👉सांप्रदायिक संपत्ति को हथाई कहा जाता है
🔹हवाई 👉सहरिया समाज में चौकोर झोपड़ी को हवाई कहा जाता है
🔹हमेल👉 गले का आभूषण
🔹हलावी👉 खजूर की किस्म
🔹हेलरू👉 गरसियाओं की सामाजिक सहकारी संस्था
🔹हमेलौं👉माणिक्य लाल वर्मा आदिम शोध संस्थान द्वारा लगाया गया मेला
🔹हथाई👉सांप्रदायिक संपत्ति को हथाई कहा जाता है
🔹हवाई 👉सहरिया समाज में चौकोर झोपड़ी को हवाई कहा जाता है
👍9
Cet 12th exam देने वाले सभी साथियों को शुभकामनाएं अच्छे से exam दो 🙏
Important👇
सीईटी सीनियर सैकंडरी स्तर परीक्षा चैक लिस्ट
1-प्रवेश पत्र
2-आधार कार्ड
3- पेन(नीली स्याही)
4-1 फोटो
ले जाना यह सभी
All The Best ✌️
Important👇
सीईटी सीनियर सैकंडरी स्तर परीक्षा चैक लिस्ट
1-प्रवेश पत्र
2-आधार कार्ड
3- पेन(नीली स्याही)
4-1 फोटो
ले जाना यह सभी
All The Best ✌️
👍36
Gk Fact
★ हम्मीर मदमर्दन - जयसिंह सूरि
★ हम्मीरोत्सर्ग - बैकुंठ नाथ शास्त्री
★ हम्मीरदेव चौपाई - मंडन विजय
★ हम्मीरायण - भांडउ व्यास
★ हम्मीर रासो - जोधराज
★ हम्मीर हठ - चंद्रशेखर
★ बोल भारमली - सत्यप्रकाश जोशी
★ बाघो भारमली - लक्ष्मी कुमारी चुण्डावत
★ ख्याल भारमली - हमीदुल्ला
★ हम्मीर रासो - जोधराज
★ रतन रासो - कुम्भकरण सांदू
★ राणा रासो - दयाराम
★ बीसलदेव रासो - नरपति नाल्ह
★ विजयपाल रासो - नल्ल सिंह
★ पृथ्वीराज रासो - चंदबरदाई
★ खुमाण रासो - दलपत विजय
★ संगत रासो - गिरधर आसिया
★ भरतेश्वर बाहुबलिघोर - वज्रसेन सूरि
★ भरत बाहुबलि रास - शालिभद्र सूरि
★ हम्मीर मदमर्दन - जयसिंह सूरि
★ हम्मीरोत्सर्ग - बैकुंठ नाथ शास्त्री
★ हम्मीरदेव चौपाई - मंडन विजय
★ हम्मीरायण - भांडउ व्यास
★ हम्मीर रासो - जोधराज
★ हम्मीर हठ - चंद्रशेखर
★ बोल भारमली - सत्यप्रकाश जोशी
★ बाघो भारमली - लक्ष्मी कुमारी चुण्डावत
★ ख्याल भारमली - हमीदुल्ला
★ हम्मीर रासो - जोधराज
★ रतन रासो - कुम्भकरण सांदू
★ राणा रासो - दयाराम
★ बीसलदेव रासो - नरपति नाल्ह
★ विजयपाल रासो - नल्ल सिंह
★ पृथ्वीराज रासो - चंदबरदाई
★ खुमाण रासो - दलपत विजय
★ संगत रासो - गिरधर आसिया
★ भरतेश्वर बाहुबलिघोर - वज्रसेन सूरि
★ भरत बाहुबलि रास - शालिभद्र सूरि
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एक जिला, एक उत्पाद
उद्देश्य - प्रत्येक जिलें में निर्यात क्षमता वाले उत्पाद और सेवाओं की पहचान करना एवं उन्हें बढ़ावा देना
▪️सभी जिलों में जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में जिला स्तरीय निर्यात प्रोत्साहन समितियों (DEPC) का गठन किया है
▪️एक जिला 1 उत्पाद के अन्तर्गत चिन्हित जिलेवार उत्पाद
क. स. जिला उत्पाद का नाम
1. अजमेर - ग्रेनाइट
2. अलवर - ऑटोमोबाइल पार्टस
3. बांसवाड़ा - सिन्थेटिक यार्न
4. बारां - सोयाबीन
5. बाड़मेर - इसबगोल
6. भरतपुर - शहद, खाद्य तेल
7. भीलवाड़ा - रेडिमेड गारमेंट्स - डेनिम
8. बीकानेर - सिरेमिक
9. बूंदी - चावल
10. चितौडगढ - ग्रेनाईट / मार्बल
11. चूरू - वूड प्रोडक्ट्स
12. दौसा - कार्पेट एण्ड स्टोन आर्टीकल
13. धौलपुर - मिल्क पाउडर - स्कीम्ड
14. डूंगरपुर - ग्रेनाईट (मार्बल- स्लेब
15. श्रीगंगानगर - गम पाउडर
16. हनुमानगढ़ - ग्वार गम
17. जयपुर - पॉटरी- ब्लू तथा ज्वेलरी एण्ड जैम्स
18. जैसलमेर - यैलो मार्बल स्लेब एण्ड टाईल्स
19. जालोर - मसालें एवं मौजडी उद्योग
20. झालावाड - संतरा एण्ड सेण्डस्टोन
21. झुंझुनू - स्टोन प्रोडेक्ट एवं वुड प्रोडक्ट
22. जोधपुर - फर्नीचर - हस्तशिल्प उत्पाद
24. कोटा - एमब्रॉयडरी फेबरिक - कोटा डोरिया
25. नागौर - ग्रेनाइट / मार्बल-मकराना
26. पाली - मेहंदी
27. राजसमंद - टेराकोटा
28. स. मधोपुर - टूरिज्म
29. सीकर - फर्नीचर - एंटिक
30. सिरोही - साइलियम हस्क
31. टोंक - सेंडस्टोन
32. उदयपुर - ग्रेनाइट, मार्बल-आइवरी
33. प्रतापगढ़ - लहसून तथा थेवा कला
उद्देश्य - प्रत्येक जिलें में निर्यात क्षमता वाले उत्पाद और सेवाओं की पहचान करना एवं उन्हें बढ़ावा देना
▪️सभी जिलों में जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में जिला स्तरीय निर्यात प्रोत्साहन समितियों (DEPC) का गठन किया है
▪️एक जिला 1 उत्पाद के अन्तर्गत चिन्हित जिलेवार उत्पाद
क. स. जिला उत्पाद का नाम
1. अजमेर - ग्रेनाइट
2. अलवर - ऑटोमोबाइल पार्टस
3. बांसवाड़ा - सिन्थेटिक यार्न
4. बारां - सोयाबीन
5. बाड़मेर - इसबगोल
6. भरतपुर - शहद, खाद्य तेल
7. भीलवाड़ा - रेडिमेड गारमेंट्स - डेनिम
8. बीकानेर - सिरेमिक
9. बूंदी - चावल
10. चितौडगढ - ग्रेनाईट / मार्बल
11. चूरू - वूड प्रोडक्ट्स
12. दौसा - कार्पेट एण्ड स्टोन आर्टीकल
13. धौलपुर - मिल्क पाउडर - स्कीम्ड
14. डूंगरपुर - ग्रेनाईट (मार्बल- स्लेब
15. श्रीगंगानगर - गम पाउडर
16. हनुमानगढ़ - ग्वार गम
17. जयपुर - पॉटरी- ब्लू तथा ज्वेलरी एण्ड जैम्स
18. जैसलमेर - यैलो मार्बल स्लेब एण्ड टाईल्स
19. जालोर - मसालें एवं मौजडी उद्योग
20. झालावाड - संतरा एण्ड सेण्डस्टोन
21. झुंझुनू - स्टोन प्रोडेक्ट एवं वुड प्रोडक्ट
22. जोधपुर - फर्नीचर - हस्तशिल्प उत्पाद
24. कोटा - एमब्रॉयडरी फेबरिक - कोटा डोरिया
25. नागौर - ग्रेनाइट / मार्बल-मकराना
26. पाली - मेहंदी
27. राजसमंद - टेराकोटा
28. स. मधोपुर - टूरिज्म
29. सीकर - फर्नीचर - एंटिक
30. सिरोही - साइलियम हस्क
31. टोंक - सेंडस्टोन
32. उदयपुर - ग्रेनाइट, मार्बल-आइवरी
33. प्रतापगढ़ - लहसून तथा थेवा कला
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• दो रामसर स्थल सांभर झील एवं केवलादेव राष्ट्रीय पक्षी विहार विश्व पटल पर अंकित।
• मेनार तालाब (उदयपुर), चांदलाई (जयपुर), खींचन (जोधपुर), कानवास पक्षी विहार (कोटा), लूणकरणसर (बीकानेर) के प्रस्ताव तैयार कर वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, भारत सरकार के माध्यम से रामसर सचिवालय में भेजने की अनुशंसा।
• झीलों की नगरी उदयपुर शहर को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रामसर वेटलैंड सिटी के रूप में नामित करने के लिए प्रस्ताव तैयार कर रामसर सचिवालय में भेजा गया है।
• मेनार तालाब (उदयपुर), चांदलाई (जयपुर), खींचन (जोधपुर), कानवास पक्षी विहार (कोटा), लूणकरणसर (बीकानेर) के प्रस्ताव तैयार कर वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, भारत सरकार के माध्यम से रामसर सचिवालय में भेजने की अनुशंसा।
• झीलों की नगरी उदयपुर शहर को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रामसर वेटलैंड सिटी के रूप में नामित करने के लिए प्रस्ताव तैयार कर रामसर सचिवालय में भेजा गया है।
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थार #Special (अति महत्वपूर्ण)
थार का घड़ा - चंदन नलकूप
थार का लाल - स्वरूप खां मांगणियार
थार की कला - उस्ता कला
थार का कल्पवृक्ष - खेजड़ी
थार होटल - बाड़मेर
थार महोत्सव - बाड़मेर
थार की गंगा - लूणी
थार की बाई - गवरी बाई
थार की वैष्णो - तनोट माता
थार की गायिका - मांड
थार/रेगिस्तान का जल महल - बाटाडू कुआं
थार का सागवान - रोहिड़ा
थार का चीता - गोडावण
थार की लता - रूक्मा देवी
थार का घड़ा - चंदन नलकूप
थार का लाल - स्वरूप खां मांगणियार
थार की कला - उस्ता कला
थार का कल्पवृक्ष - खेजड़ी
थार होटल - बाड़मेर
थार महोत्सव - बाड़मेर
थार की गंगा - लूणी
थार की बाई - गवरी बाई
थार की वैष्णो - तनोट माता
थार की गायिका - मांड
थार/रेगिस्तान का जल महल - बाटाडू कुआं
थार का सागवान - रोहिड़ा
थार का चीता - गोडावण
थार की लता - रूक्मा देवी
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