👍2
शुंग वंश के शासकों में सुज्येष्ठ के बाद उसका उत्तराधिकारी कौन बना था
Anonymous Quiz
19%
अग्नि मित्र
57%
वसुमित्र
17%
अन्ध्रक
7%
पुलिन्दक
👍1
प्लासी के युद्ध के समय बंगाल का गवर्नर कौन था
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4%
हैजेज
11%
ड्रेक
82%
राबर्ट क्लाइव
3%
वेन्सीटार्ट
भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान महात्मा गांधी की रिहाई की मांग करते हुए निम्नलिखित में से किसने वायसराय की कार्यकारिणी से इस्तीफा दे दिया था
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18%
एम आर जयकर
21%
एम एस एनी
13%
एच पी मोदी
48%
उपर्युक्त सभी
👍1
एंटी सर्कुलर सोसाइटी का संबंध निम्नलिखित में से किससे है
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18%
अश्विनी कुमार दत्त
42%
कृष्ण कुमार मित्र
22%
जितिन प्रसाद
19%
जतिन्द्र नाथ बनर्जी
👍3
नहर ए बहिस्त का संबंध निम्नलिखित में से किस मुगल शासक से था
Anonymous Quiz
14%
अकबर
43%
ज़हांगीर
36%
शाहजहां
6%
औरंगजेब
👍1
👍2
पहला मंगोल आक्रमण दिल्ली सल्तनत के किस शासक कै समय हुआ था
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26%
नासिरूद्दीन महमूद
24%
बहराम शाह
39%
जलालुद्दीन खिलजी
12%
अलाउद्दीन खिलजी
निम्नलिखित में से किसका नाम पुराणो में मालिनी मिलता है
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19%
कौशांबी
27%
चंपा
46%
मलसीसर
8%
उज्जैन
🥰2👍1
देश विभाजन के पश्चात संविधान सभा के सदस्यों की संख्या रह गई थी
Anonymous Quiz
18%
389
20%
303
42%
299
21%
284
👍4
अष्टप्रधान का विघटन निम्नलिखित में से किसके द्वारा किया गया
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15%
राजाराम
60%
संभाजी
19%
शाहु
6%
ताराबाई
‘बलवंत राय मेहता समिति’ का गठन कब किया गया ?
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13%
16 जनवरी 1957
41%
16 फरवरी 1957
29%
16 मार्च 1957
17%
16 अप्रैल 1957
👍3
समाचार पत्रों के लिए अनुज्ञाप्ति नियम ( लाइसेंसिंग) किस वर्ष बनाया गया था
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11%
1799
43%
1823
38%
1835
7%
1857
तार विभाग की स्थापना लार्ड डलहौजी के समय किस वर्ष हुई थी
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16%
1852
45%
1853
32%
1854
7%
1856
👍2
सर्वप्रथम किस वर्ष लोक सेवा के लिए परीक्षा का आयोजन किया गया था
Anonymous Quiz
23%
1853
39%
1854
23%
1855
14%
1856
👌4🔥1🎉1
Today's Total Questions 25+9
Correct Answers❔❔
Correct Answers❔❔
राजस्थान में स्थित वन्य जीव अभ्यारण ( rajasthan ke vanya jeev abhyaran)
1. सरिस्का अभयारण्य (अलवर )
यह राजस्थान का दूसरा बाघ परियोजना क्षेत्र है ।
राजस्थान सरकार द्वारा 1955 में से वन्यजीव अभयारण्य की सूची में सम्मिलित किया गया ।
1978 में इसे “टाइगर प्रोजेक्ट” में सम्मिलित किया गया ।
यहाँ विश्व में टाइगर स्थानांतरण का पहला सफल प्रयोग किया गया ।
यह हरे कबूतरों के लिए प्रसिद्ध है ।
इस अभयारण्य में कासका एवं कांकनवाड़ी के पठार स्थित है ।
मयूरों का घनत्व सबसे अधिक है ।
यहां कैलाश सांखला इंटरप्रिटेशन सेंटर है ।
इस अभयारण्य में 4 मंदिर स्थित है – पांडुपोल हनुमानजी ,नीलकंठ महादेव, भर्तृहरि, तालवृक्ष
इसमें सरिस्का पैलेस होटल महाराज जयसिंह द्वारा बनवाई गई है । इसके अतिरिक्त यहां निगम के द्वारा पर्यटकों के लिए होटल “टाइगर डेन” बनाया गया है ।
1947 में महाराजा सवाई तेजसिंह फॉरेस्ट सेटलमेंट तैयार करवाई गई, जिसे “पीली किताब” कहा जाता है ।
इस क्षेत्र में सीलिसेड झील स्थित है ।
2. सरिस्का (अ) अभयारण्य (अलवर )
यह राजस्थान का सबसे छोटा अभयारण्य है ।
इसका क्षेत्रफल 3.01 वर्ग किलोमीटर है ।
3. मरू राष्ट्रीय उद्यान (जैसलमेर )
यह क्षेत्रफल की दृष्टि से राजस्थान का सबसे बड़ा अभयारण्य है ।
यह 3162 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में विस्तृत है, जिसमें 1900 वर्ग किलोमीटर जैसलमेर तथा 1262 वर्ग किलोमीटर बाड़मेर में है ।
8 मई 1981 को इस उद्यान की स्थापना की गई ।
इस अभयारण्य में सर्वाधिक संख्या में गोडावन पाए जाते हैं । यहाँ राज्य पशु चिंकारा को संरक्षण प्रदान किया गया है ।
इसमें आकल वुड फॉसिल पार्क स्थित है जो प्राचीन जीवाश्मों की संरक्षण स्थली है । उद्यान में 25 वुड फॉसिल्स विद्यमान है
4. सीतामाता अभयारण्य (प्रतापगढ़ )
इसे 1979 में राज्य सरकार ने अभयारण्य घोषित किया था ।
यह अभयारण्य प्रतापगढ़ के साथ साथ उदयपुर व चित्तौड़गढ़ में भी फैला हुआ है
सागवान वन राजस्थान में एकमात्र इसी अभयारण्य में पाये जाते हैं ।
यह अभयारण्य राजस्थान का सर्वाधिक जैव विविधता वाला अभयारण्य है ।
सीतामाता अभयारण्य करमोई ( कर्म मोचिनी ) नदी का उद्गम स्थल है । इसके अलावा जाखम, सीतामाता, टांकिया, भूदो, नालेश्वर नदियाँ बहती है ।
इस अभयारण्य में जाखम बाँध स्थित है ।
लव- कुश इस अभयारण्य में स्थित दो सदाबहार जल स्रोत हैं ।
इस अभयारण्य में उड़न गिलहरीयाँ पाई जाती है । इसे रेड फ्लाइंग स्क्विरल पेटोरिस्टा एल्बीवेंटर व आशोवा नाम से भी जाना जाता है ।
पेंगोलिन इस अभयारण्य में पाए जाने वाला जंतु है ।
यह विश्व में एंटीलोप प्रजाति के दुर्लभतम वन्य जीव चौसिंगा हिरण(भेड़ल) के सर्वोत्तम आश्रय स्थलों में से एक है ।
5. सवाई मानसिंह वन्य जीव अभ्यारण (सवाई माधोपुर )
रणथम्भौर राष्ट्रीय उद्यान से लगा हुआ वन क्षेत्र है ।
यह 103 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है ।
6. कनक सागर वन्यजीव अभयारण्य (दुगारी बूँदी)
इसे 1987 में अभयारण्य घोषित किया गया था ।
यह अभयारण्य पक्षियों की शरणस्थली माना जाता है ।
1. सरिस्का अभयारण्य (अलवर )
यह राजस्थान का दूसरा बाघ परियोजना क्षेत्र है ।
राजस्थान सरकार द्वारा 1955 में से वन्यजीव अभयारण्य की सूची में सम्मिलित किया गया ।
1978 में इसे “टाइगर प्रोजेक्ट” में सम्मिलित किया गया ।
यहाँ विश्व में टाइगर स्थानांतरण का पहला सफल प्रयोग किया गया ।
यह हरे कबूतरों के लिए प्रसिद्ध है ।
इस अभयारण्य में कासका एवं कांकनवाड़ी के पठार स्थित है ।
मयूरों का घनत्व सबसे अधिक है ।
यहां कैलाश सांखला इंटरप्रिटेशन सेंटर है ।
इस अभयारण्य में 4 मंदिर स्थित है – पांडुपोल हनुमानजी ,नीलकंठ महादेव, भर्तृहरि, तालवृक्ष
इसमें सरिस्का पैलेस होटल महाराज जयसिंह द्वारा बनवाई गई है । इसके अतिरिक्त यहां निगम के द्वारा पर्यटकों के लिए होटल “टाइगर डेन” बनाया गया है ।
1947 में महाराजा सवाई तेजसिंह फॉरेस्ट सेटलमेंट तैयार करवाई गई, जिसे “पीली किताब” कहा जाता है ।
इस क्षेत्र में सीलिसेड झील स्थित है ।
2. सरिस्का (अ) अभयारण्य (अलवर )
यह राजस्थान का सबसे छोटा अभयारण्य है ।
इसका क्षेत्रफल 3.01 वर्ग किलोमीटर है ।
3. मरू राष्ट्रीय उद्यान (जैसलमेर )
यह क्षेत्रफल की दृष्टि से राजस्थान का सबसे बड़ा अभयारण्य है ।
यह 3162 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में विस्तृत है, जिसमें 1900 वर्ग किलोमीटर जैसलमेर तथा 1262 वर्ग किलोमीटर बाड़मेर में है ।
8 मई 1981 को इस उद्यान की स्थापना की गई ।
इस अभयारण्य में सर्वाधिक संख्या में गोडावन पाए जाते हैं । यहाँ राज्य पशु चिंकारा को संरक्षण प्रदान किया गया है ।
इसमें आकल वुड फॉसिल पार्क स्थित है जो प्राचीन जीवाश्मों की संरक्षण स्थली है । उद्यान में 25 वुड फॉसिल्स विद्यमान है
4. सीतामाता अभयारण्य (प्रतापगढ़ )
इसे 1979 में राज्य सरकार ने अभयारण्य घोषित किया था ।
यह अभयारण्य प्रतापगढ़ के साथ साथ उदयपुर व चित्तौड़गढ़ में भी फैला हुआ है
सागवान वन राजस्थान में एकमात्र इसी अभयारण्य में पाये जाते हैं ।
यह अभयारण्य राजस्थान का सर्वाधिक जैव विविधता वाला अभयारण्य है ।
सीतामाता अभयारण्य करमोई ( कर्म मोचिनी ) नदी का उद्गम स्थल है । इसके अलावा जाखम, सीतामाता, टांकिया, भूदो, नालेश्वर नदियाँ बहती है ।
इस अभयारण्य में जाखम बाँध स्थित है ।
लव- कुश इस अभयारण्य में स्थित दो सदाबहार जल स्रोत हैं ।
इस अभयारण्य में उड़न गिलहरीयाँ पाई जाती है । इसे रेड फ्लाइंग स्क्विरल पेटोरिस्टा एल्बीवेंटर व आशोवा नाम से भी जाना जाता है ।
पेंगोलिन इस अभयारण्य में पाए जाने वाला जंतु है ।
यह विश्व में एंटीलोप प्रजाति के दुर्लभतम वन्य जीव चौसिंगा हिरण(भेड़ल) के सर्वोत्तम आश्रय स्थलों में से एक है ।
5. सवाई मानसिंह वन्य जीव अभ्यारण (सवाई माधोपुर )
रणथम्भौर राष्ट्रीय उद्यान से लगा हुआ वन क्षेत्र है ।
यह 103 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है ।
6. कनक सागर वन्यजीव अभयारण्य (दुगारी बूँदी)
इसे 1987 में अभयारण्य घोषित किया गया था ।
यह अभयारण्य पक्षियों की शरणस्थली माना जाता है ।
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