Q.जालौर, अवन्ति (उज्जैन) और कन्नौज की प्रतिहार शाखा का संस्थापक कौन था ?
Anonymous Quiz
26%
(1) नागभट्ट प्रथम
46%
(2) नागभट्ट द्वितीय
21%
(3) मिहिरभोज
6%
(4) हरिश्चन्द्र
👍2
Q.मत्स्य जनपद का सर्वप्रथम उल्लेख कहाँ मिलता है ?
Anonymous Quiz
77%
(1) ऋग्वेद
11%
(2) सामवेद
9%
(3) यजूर्वेद
2%
(4) अथर्ववेद
👍2
Q .महाभारत काल में वर्तमान जोधपुर और बीकानेर के क्षेत्र को क्या कहा जाता है?
Anonymous Quiz
9%
(1) दशहरो
18%
(2) कांठल
6%
(3) गिरवा
66%
(4) जांगल
👍2
Q.वर्तमान अलवर जिले में कौन कौनसे जनपदों का विस्तार था -
Anonymous Quiz
7%
(1) अर्जुनायन
10%
(2) शाल्व
78%
(3) उपर्युक्त दोनों
6%
(4) योधेय
👍2🎉1
Q.राजस्थान में कुषाण शक्ति को किस जनपद ने नष्ट कर दिया था ?
Anonymous Quiz
13%
(1) मालव
40%
(2) योधेय
31%
(3) अर्जुनायन
16%
(4) शिवि
👍3
Q.महामारू शैली का प्रचलन किसके शासनकाल में हुआ ?
Anonymous Quiz
55%
(1) गुर्जर प्रतिहार
33%
(2) मिहिर भोज
9%
(3) राजसिंह
2%
(4) राजा भोज
👍3❤2
20 Questions
आपका स्कोर - ❔❔
आपका स्कोर - ❔❔
👍4❤2
हाइगम वेटलैंड तथा शाल बुग वेटलैंड कंजर्वेशन रिजर्व किस राज्य में है
Anonymous Quiz
20%
कर्नाटक
43%
तमिलनाडु
32%
जम्मू कश्मीर
5%
गोवा
👍1
किशोरी महल, जवाहर बुर्ज, कोठी खास, दादी मां का महल, गंगा मंदिर आदि किस दुर्ग में स्थित है
[ RBSE राजस्थान अध्ययन कक्षा 10 ]
[ RBSE राजस्थान अध्ययन कक्षा 10 ]
Anonymous Quiz
55%
लोहागढ़ भरतपुर
23%
मेहरानगढ़ जोधपुर
16%
कुंभलगढ़ राजसमंद
6%
जय गढ़ आमेर
👍5
ईश्वर सिंह की छतरी कहां स्थित है
[ RBSE राजस्थान अध्ययन कक्षा 10 ]
[ RBSE राजस्थान अध्ययन कक्षा 10 ]
Anonymous Quiz
15%
जोधपुर
25%
नवलगढ़
21%
रामगढ़
39%
गैटोर
👍3❤1👎1👏1
अरावली पर्वत श्रंखला की सुदूर दक्षिणी जड़ कहां से प्रारंभ होती है वह स्थान है?
Anonymous Quiz
38%
पालनपुर
27%
आबू पर्वत
28%
अरब सागर तल
7%
गोगुंदा
👍3
Stenographer 1st पेपर.pdf
14.7 MB
✴ आज आयोजित हुई Stenographer भर्ती परीक्षा का प्रथम शिफ्ट का पेपर
👍6🔥2
राज्य के विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों के स्थानीय नाम 🔰
1.छप्पन का मैदान
- क्षेत्र में Dungarpur बांसवाड़ा जिले का दक्षिणावर्ती समप्राय क्षेत्र आता है इस मैदान पर सोम कागदर माही कमला जाखम सावरमती आदि नदियों का या उनकी ऊपरी शाखाओ अथवा नालो का अथार्थ 56 नदी नालों का जल प्रभावित होने के कारण इसे 56 या छप्पनिया का मैदान कहा जाता है
2.वांगड़/वाग्वरांचल
- अरावली पर्वतीय श्रंखलाओं में स्थित डूंगरपुर और बांसवाडा को बांगड़ कहा जाता है इस क्षेत्र में आदिवासी निवास करते हैं सघन वन अच्छी वर्षा समशीतोष्ण
जलवायु( Temperate climate) वाला यह प्रदेश खनिज संपदा और सांस्कृतिक दृष्टि से संपन्न है बांगड़ क्षेत्र राजस्थानी और गुजराती का मिश्रण रूप और डिंगल भाषा का प्रचलन होने के कारण इसे बांगड़ी अथवा बांगड़ भाषा का क्षेत्र भी कहते हैं
प्रोफेसर आर एल सिह ने- मरुस्थलीय के पूर्व में और अरावली श्रृंखला के पश्चिम में स्थित विभाग जो उत्तर में गंगा नगर से लेकर दक्षिण में सिरोही के पश्चिमी भाग तक फैला है भानगढ़ का नाम दिया है
3.विंध्यन बेसिन
- राज्य के दक्षिणी पूर्वी भाग में 50000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले इस बेसिन में कोटा झालावाड़ बॉरा बूंदी के साथ ही Sawai madhopur धोलपुर और भीलवाड़ा जिले का कुछ क्षेत्र आता है
4.मेवाड
-़ उदयपुर पूर्वी राजसमंद चित्तौड़ और पश्चिमी भीलवाड़ा जिलों के मुख्यत: पहाड़ी और उच्च भाग मेवाड़ क्षेत्र के तहत सम्मिलित है मेवाड़ रियासत का इस भूभाग पर नियंत्रण होने से इसे मेवाड़ के नाम से पुकारा जाने लगा
5.मेरवाड़ा
- क्षेत्र अजमेर जिले के अधिकांश भाग और दिवेर राजसमंद व टाटगढ पर विस्तृत है
6.भोमठ क्षेत्र
- के अंतर्गत डूंगरपुर पूर्वी सिरोही उदयपुर जिलो का अरावली पर्वतीय क्षेत्र सम्मिलित है
7.मारवाड
- अरावली पर्वत श्रंखला के पश्चिम में स्थित बीकानेर जोधपुर नागौर को मध्यकाल में मारवाड़ कहा जाता था इस क्षेत्र पर मध्य काल में राठौर शासकों का शासन रहा यह क्षेत्र जलाभाव रेतीली मिट्टी ( Sandy soil) उच्च तापांतर कम वर्षा और वनस्पति विहीन है
8.अर्बुदा
- अरावली पर्वत श्रंखला का नाम अर्बुदा भी है यह पर्वत श्रंखला विश्व की सबसे प्राचीन श्रृंखला है यह गुजरात के पालनपुर से दिल्ली तक फैली हुई है इसकी कुल लंबाई 692 किलोमीटर है राजस्थान में इसकी कुल लंबाई 550 किलोमीटर है यह राज्य के कुल 12 जिलों में फैली हुई है
9.भोराठ का पठार
- इस क्षेत्र के अंतर्गत मुकेश अरावली श्रृंखला के पश्चिमी पहाड़ी भाग आते हैं जो उदयपुर जिले की गोगुंदा धरियावाद ईसवाल और राजसमंद जिले के कुंभलगढ़ भू-भागो पर विस्तृत है
10.हाड़ौती का पठार
- इस प्रदेश के अंतर्गत बूंदी कोटा झालावाड़ और बॉरा सम्मिलित है ।मालवा पठार उत्तरी विस्तार जहां हाड़ा वंश का राज्य रहा हाडोती के पठार के नाम से पुकारा जाने लगा
11.मेवात प्रदेश
- इसके अंतर्गत अलवर भरतपुर धौलपुर और करौली का पूर्वी भाग और चंबल के बीहड़ क्षेत्र सम्मिलित हैं इसे मत्स्य प्रदेश भी कहते हैं यह मीणा जनजाति बाहुल्य क्षेत्र है यहां ब्रज बोली का प्रचलन है सर्वप्रथम राजस्थान निर्माण के समय यह क्षेत्र पहली इकाई के रूप में 18 मार्च 1948 को सम्मिलित हुआ और मत्स्य संघ की स्थापना होने से रियासतों का एकीकरण की शुरुआत हुई
12.ढूंढाड़ क्षेत्र
- के अंतर्गत जयपुर रियासतों का अधिकांश भाग अथार्थ जयपुर पश्चिमी सवाई माधोपुर और उत्तरी टोंक आदी जिले सम्मिलित हैं
13.उपरमाल
- भीलवाड़ा जिले का मध्य और पूर्वी भा, जिला चित्तौड़गढ़ को भैसरोड़गढ़ तहसील और बूंदी जिले के पश्चिमी भाग पर यह विस्तृत है आर्द्र प्रदेश (Wetland) होने के कारण कृषि की
दृष्टि से महत्वपूर्ण है
14.शेखावाटी
- इस क्षेत्र के अंतर्गत उत्तर पूर्वी नागौर, पूर्वी चूरु ,सीकर और झुनझनु जिले आते हैं यह क्षेत्र बांगड़ प्रदेश का ही उत्तरी पूर्वी विस्तार है
15.खेराड और मालखेराड़
- क्षेत्र में अधिकांश भाग बनास नदी के बेसिन में विस्तृत है अथार्थ भीलवाड़ा जिले के जहाजपुर तहसील और टोंक जिले के अधिकांश भाग पर यह क्षेत्र विस्तृत है इस क्षेत्र में पठारी ढाल सामान्यतः सीडीनुमा और बनास घाटी की ओर है इसे खेराड़ के नाम से भी जाना जाता है
16.मारवाड़ी या मरुस्थलीय क्षेत्र
- के अंतर्गत भूतपूर्व जोधपुर बाड़मेर और जैसलमेर के विभाग सम्मिलित है जो वर्तमान में मुख्यत: बाड़मेर, जैसलमेर ,जोधपुर और पश्चिमी नागौर जिले में विस्तृत है यह क्षेत्र पूर्णरूपेण रेतीला है
17.नहरी क्षेत्र-
स्वतंत्रता से पूर्व गंगा नहर ,घग्गर बेसिन और स्वतंत्रता के पश्चात गंगनहर भाखड़ा नहर और इंदिरा गांधी नहर द्वारा निरंतर सिंचित क्षेत्र में वृद्धि के फलस्वरुप राजस्थान का गंगानगर जिला और उत्तरी पश्चिमी हनुमानगढ़ जिला क्षेत्र के अंतर्गत सम्मिलित हैं वैसे यह क्षेत्र सांस्कृतिक
दृश्य
1.छप्पन का मैदान
- क्षेत्र में Dungarpur बांसवाड़ा जिले का दक्षिणावर्ती समप्राय क्षेत्र आता है इस मैदान पर सोम कागदर माही कमला जाखम सावरमती आदि नदियों का या उनकी ऊपरी शाखाओ अथवा नालो का अथार्थ 56 नदी नालों का जल प्रभावित होने के कारण इसे 56 या छप्पनिया का मैदान कहा जाता है
2.वांगड़/वाग्वरांचल
- अरावली पर्वतीय श्रंखलाओं में स्थित डूंगरपुर और बांसवाडा को बांगड़ कहा जाता है इस क्षेत्र में आदिवासी निवास करते हैं सघन वन अच्छी वर्षा समशीतोष्ण
जलवायु( Temperate climate) वाला यह प्रदेश खनिज संपदा और सांस्कृतिक दृष्टि से संपन्न है बांगड़ क्षेत्र राजस्थानी और गुजराती का मिश्रण रूप और डिंगल भाषा का प्रचलन होने के कारण इसे बांगड़ी अथवा बांगड़ भाषा का क्षेत्र भी कहते हैं
प्रोफेसर आर एल सिह ने- मरुस्थलीय के पूर्व में और अरावली श्रृंखला के पश्चिम में स्थित विभाग जो उत्तर में गंगा नगर से लेकर दक्षिण में सिरोही के पश्चिमी भाग तक फैला है भानगढ़ का नाम दिया है
3.विंध्यन बेसिन
- राज्य के दक्षिणी पूर्वी भाग में 50000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले इस बेसिन में कोटा झालावाड़ बॉरा बूंदी के साथ ही Sawai madhopur धोलपुर और भीलवाड़ा जिले का कुछ क्षेत्र आता है
4.मेवाड
-़ उदयपुर पूर्वी राजसमंद चित्तौड़ और पश्चिमी भीलवाड़ा जिलों के मुख्यत: पहाड़ी और उच्च भाग मेवाड़ क्षेत्र के तहत सम्मिलित है मेवाड़ रियासत का इस भूभाग पर नियंत्रण होने से इसे मेवाड़ के नाम से पुकारा जाने लगा
5.मेरवाड़ा
- क्षेत्र अजमेर जिले के अधिकांश भाग और दिवेर राजसमंद व टाटगढ पर विस्तृत है
6.भोमठ क्षेत्र
- के अंतर्गत डूंगरपुर पूर्वी सिरोही उदयपुर जिलो का अरावली पर्वतीय क्षेत्र सम्मिलित है
7.मारवाड
- अरावली पर्वत श्रंखला के पश्चिम में स्थित बीकानेर जोधपुर नागौर को मध्यकाल में मारवाड़ कहा जाता था इस क्षेत्र पर मध्य काल में राठौर शासकों का शासन रहा यह क्षेत्र जलाभाव रेतीली मिट्टी ( Sandy soil) उच्च तापांतर कम वर्षा और वनस्पति विहीन है
8.अर्बुदा
- अरावली पर्वत श्रंखला का नाम अर्बुदा भी है यह पर्वत श्रंखला विश्व की सबसे प्राचीन श्रृंखला है यह गुजरात के पालनपुर से दिल्ली तक फैली हुई है इसकी कुल लंबाई 692 किलोमीटर है राजस्थान में इसकी कुल लंबाई 550 किलोमीटर है यह राज्य के कुल 12 जिलों में फैली हुई है
9.भोराठ का पठार
- इस क्षेत्र के अंतर्गत मुकेश अरावली श्रृंखला के पश्चिमी पहाड़ी भाग आते हैं जो उदयपुर जिले की गोगुंदा धरियावाद ईसवाल और राजसमंद जिले के कुंभलगढ़ भू-भागो पर विस्तृत है
10.हाड़ौती का पठार
- इस प्रदेश के अंतर्गत बूंदी कोटा झालावाड़ और बॉरा सम्मिलित है ।मालवा पठार उत्तरी विस्तार जहां हाड़ा वंश का राज्य रहा हाडोती के पठार के नाम से पुकारा जाने लगा
11.मेवात प्रदेश
- इसके अंतर्गत अलवर भरतपुर धौलपुर और करौली का पूर्वी भाग और चंबल के बीहड़ क्षेत्र सम्मिलित हैं इसे मत्स्य प्रदेश भी कहते हैं यह मीणा जनजाति बाहुल्य क्षेत्र है यहां ब्रज बोली का प्रचलन है सर्वप्रथम राजस्थान निर्माण के समय यह क्षेत्र पहली इकाई के रूप में 18 मार्च 1948 को सम्मिलित हुआ और मत्स्य संघ की स्थापना होने से रियासतों का एकीकरण की शुरुआत हुई
12.ढूंढाड़ क्षेत्र
- के अंतर्गत जयपुर रियासतों का अधिकांश भाग अथार्थ जयपुर पश्चिमी सवाई माधोपुर और उत्तरी टोंक आदी जिले सम्मिलित हैं
13.उपरमाल
- भीलवाड़ा जिले का मध्य और पूर्वी भा, जिला चित्तौड़गढ़ को भैसरोड़गढ़ तहसील और बूंदी जिले के पश्चिमी भाग पर यह विस्तृत है आर्द्र प्रदेश (Wetland) होने के कारण कृषि की
दृष्टि से महत्वपूर्ण है
14.शेखावाटी
- इस क्षेत्र के अंतर्गत उत्तर पूर्वी नागौर, पूर्वी चूरु ,सीकर और झुनझनु जिले आते हैं यह क्षेत्र बांगड़ प्रदेश का ही उत्तरी पूर्वी विस्तार है
15.खेराड और मालखेराड़
- क्षेत्र में अधिकांश भाग बनास नदी के बेसिन में विस्तृत है अथार्थ भीलवाड़ा जिले के जहाजपुर तहसील और टोंक जिले के अधिकांश भाग पर यह क्षेत्र विस्तृत है इस क्षेत्र में पठारी ढाल सामान्यतः सीडीनुमा और बनास घाटी की ओर है इसे खेराड़ के नाम से भी जाना जाता है
16.मारवाड़ी या मरुस्थलीय क्षेत्र
- के अंतर्गत भूतपूर्व जोधपुर बाड़मेर और जैसलमेर के विभाग सम्मिलित है जो वर्तमान में मुख्यत: बाड़मेर, जैसलमेर ,जोधपुर और पश्चिमी नागौर जिले में विस्तृत है यह क्षेत्र पूर्णरूपेण रेतीला है
17.नहरी क्षेत्र-
स्वतंत्रता से पूर्व गंगा नहर ,घग्गर बेसिन और स्वतंत्रता के पश्चात गंगनहर भाखड़ा नहर और इंदिरा गांधी नहर द्वारा निरंतर सिंचित क्षेत्र में वृद्धि के फलस्वरुप राजस्थान का गंगानगर जिला और उत्तरी पश्चिमी हनुमानगढ़ जिला क्षेत्र के अंतर्गत सम्मिलित हैं वैसे यह क्षेत्र सांस्कृतिक
दृश्य
👍13
राजस्थान
इतिहास के महत्वपुर्ण काव्य 🔰
1) हमीर महाकाव्य -: नयनचंद्र सूरी द्वारा रचित इस महाकाव्य में रणथंभौर के चैहान शासकों विशेषकर राव हमीर देव चैहान की वीरता एवं उसका अलाउद्धीन खिलजी के साथ हुए युद्ध का वर्णन हैं...
2) कान्हड़दे प्रबंध -: इस ग्रंथ के रचयिता जालौर रियासत के शासक अखैराज सोनगरा के दरबारी कवि पदमनाभ है इसमें जालौर के वीर सोनगरा चैहान शासक कान्हड़देवे व अलाउद्धीन खिलती के मध्य हुए युद्ध का वर्णन है...
3) पृथ्वीराज रासौ -: पिंगल में रचित इस महाकाव्य के रचयिता चंदबरदाई है इसमें अजमेर के अंतिम चैहान शासक पृथ्वीराज तृतीय के जीवन चरित्र एवं युद्धों का वर्णन है यह शौर्य-श्रृंगार, युद्ध प्रेम व जय-विजय का अनूठा चरित्र काव्य है...
4) बातां री फुलवारी -: आधुनिक काल के प्रसिद्ध राजस्थानी कथा साहित्यकार विजयदान देथा द्वारा रचित इस रचना में राजस्थानी लोक कलाओं का संग्रह किया गया..
5) मुहणौत नैणसी री ख्यात -: राजस्थान के अबुल फजल के नाम से प्रसिद्ध एवं जोधपुर महाराज जसवंतसिंह प्रथम के प्रसिद्ध दरबारी (दीवान) मुहणौत नैणसी द्वारा रचित इस ग्रंथ में राजस्थान के विभिन्न राज्यों के इतिहास (विशेषतः मारवाड़) एवं 17 वीं शताब्दी के राजपूत मुगल संबंधों पर विस्तृत प्रकाश डाला गया है इसे जोधपुर का गजेटियर भी कहा जाता है...
6) मारवाड़ रा परगना री विगत -: मुहणौत नैणसी द्वारा रचित इस ग्रंथ में मारवाड़ रियासत के इतिहास पर पर्याप्त प्रकाश डाला गया है मारवाड़ रा परगना री विगत को राजस्थान का गजेटियर कहा जाता है...
7) पदमावत महाकाव्य -: मलिक मोहम्मद जायसी द्वारा सन 1540 ई के लगभग रचित इस महाकाव्य में अलाउद्धीन खिलजी एवं मेवाड़ शासक रावल रतनसिंह के मध्य 1301 ई में हुए युद्ध का वर्णन है...
8) बीसलदेव रासो -: नरपति नाल्ह द्वारा रचित इस रासौ ग्रंथ से अजमेर के चैहान शासक बीसलदेव उर्फ विग्रहराज चतुर्थ एवं उनकी रानी (मालवा के राजा भोज की पुत्री) राजमति की प्रेमगाथा का वर्णन मिलता है...
9) वीरसतसई -: बूंदी के शासक महाराव रामसिंह हाड़ा के प्रसिद्ध दरबारी कवि सूर्यमल मिश्रण द्वारा रचित इस ग्रंथ से बूंदी के हाड़ा शासकों के इतिहास, उनकी उपलब्धियों व अंग्रेज विरेाधी भावना की जानकारी मिलती है (सूर्यमल मिश्रण की अन्य रचनाएं – बलवंत विलास, छंद मयूख, उम्मेदसिंह चरित्र व बुद्धसिंह चरित्र है)
10) चेतावनी रा चूंगट्या -: राजस्थान के प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी ठाकुर केसरीसिंह बारहट ने इन दोहों के माध्यम से मेवाड़ा महाराणा फतेहसिंह को वर्ष 1903 के लाॅर्ड कर्जन के दिल्ली दरबार में जाने से रोका था
इतिहास के महत्वपुर्ण काव्य 🔰
1) हमीर महाकाव्य -: नयनचंद्र सूरी द्वारा रचित इस महाकाव्य में रणथंभौर के चैहान शासकों विशेषकर राव हमीर देव चैहान की वीरता एवं उसका अलाउद्धीन खिलजी के साथ हुए युद्ध का वर्णन हैं...
2) कान्हड़दे प्रबंध -: इस ग्रंथ के रचयिता जालौर रियासत के शासक अखैराज सोनगरा के दरबारी कवि पदमनाभ है इसमें जालौर के वीर सोनगरा चैहान शासक कान्हड़देवे व अलाउद्धीन खिलती के मध्य हुए युद्ध का वर्णन है...
3) पृथ्वीराज रासौ -: पिंगल में रचित इस महाकाव्य के रचयिता चंदबरदाई है इसमें अजमेर के अंतिम चैहान शासक पृथ्वीराज तृतीय के जीवन चरित्र एवं युद्धों का वर्णन है यह शौर्य-श्रृंगार, युद्ध प्रेम व जय-विजय का अनूठा चरित्र काव्य है...
4) बातां री फुलवारी -: आधुनिक काल के प्रसिद्ध राजस्थानी कथा साहित्यकार विजयदान देथा द्वारा रचित इस रचना में राजस्थानी लोक कलाओं का संग्रह किया गया..
5) मुहणौत नैणसी री ख्यात -: राजस्थान के अबुल फजल के नाम से प्रसिद्ध एवं जोधपुर महाराज जसवंतसिंह प्रथम के प्रसिद्ध दरबारी (दीवान) मुहणौत नैणसी द्वारा रचित इस ग्रंथ में राजस्थान के विभिन्न राज्यों के इतिहास (विशेषतः मारवाड़) एवं 17 वीं शताब्दी के राजपूत मुगल संबंधों पर विस्तृत प्रकाश डाला गया है इसे जोधपुर का गजेटियर भी कहा जाता है...
6) मारवाड़ रा परगना री विगत -: मुहणौत नैणसी द्वारा रचित इस ग्रंथ में मारवाड़ रियासत के इतिहास पर पर्याप्त प्रकाश डाला गया है मारवाड़ रा परगना री विगत को राजस्थान का गजेटियर कहा जाता है...
7) पदमावत महाकाव्य -: मलिक मोहम्मद जायसी द्वारा सन 1540 ई के लगभग रचित इस महाकाव्य में अलाउद्धीन खिलजी एवं मेवाड़ शासक रावल रतनसिंह के मध्य 1301 ई में हुए युद्ध का वर्णन है...
8) बीसलदेव रासो -: नरपति नाल्ह द्वारा रचित इस रासौ ग्रंथ से अजमेर के चैहान शासक बीसलदेव उर्फ विग्रहराज चतुर्थ एवं उनकी रानी (मालवा के राजा भोज की पुत्री) राजमति की प्रेमगाथा का वर्णन मिलता है...
9) वीरसतसई -: बूंदी के शासक महाराव रामसिंह हाड़ा के प्रसिद्ध दरबारी कवि सूर्यमल मिश्रण द्वारा रचित इस ग्रंथ से बूंदी के हाड़ा शासकों के इतिहास, उनकी उपलब्धियों व अंग्रेज विरेाधी भावना की जानकारी मिलती है (सूर्यमल मिश्रण की अन्य रचनाएं – बलवंत विलास, छंद मयूख, उम्मेदसिंह चरित्र व बुद्धसिंह चरित्र है)
10) चेतावनी रा चूंगट्या -: राजस्थान के प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी ठाकुर केसरीसिंह बारहट ने इन दोहों के माध्यम से मेवाड़ा महाराणा फतेहसिंह को वर्ष 1903 के लाॅर्ड कर्जन के दिल्ली दरबार में जाने से रोका था
👍12
राजस्थान का प्रथम खेल गांव जैरोली स्थित है
Anonymous Quiz
31%
राजगढ़ अलवर में
38%
नीमराणा अलवर में
20%
पांडुपोल अलवर में
11%
भिवाड़ी अलवर में
👍3
अकबर ने जहांगीर को 3 वर्षों तक नजरबंद किस महल में रखा था
Anonymous Quiz
32%
सलीम महल
26%
विजय मंदिर महल
36%
लोहागढ़ दुर्ग
6%
उपरोक्त में से कोई नहीं
👍2
👍1
जोहडे़ वाले बाबा के नाम से प्रसिद्ध है
Anonymous Quiz
29%
मेजर सौरभ सिंह शेखावत
45%
राजेंद्र सिंह
23%
ज्ञानी संत मसकीन
3%
इनमें से कोई नहीं
👍5❤1
राजस्थान का एकीकरण.....
1. मत्स्य संघ.......18 मार्च 1948
2. पूर्व राजस्थान संघ.....25 मार्च 1948
3. सयुक्त राजस्थान संघ.....18 अप्रैल 1948
4. वृहद राजस्थान संघ.....30 मार्च 1949
5. सयुक्त वृहद राजस्थान.....15 मई 1949
6. राजस्थान संघ.......26 जनवरी 1950
7. वर्तमान राजस्थान......1 नवंबर 1956
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1. मत्स्य संघ.......18 मार्च 1948
2. पूर्व राजस्थान संघ.....25 मार्च 1948
3. सयुक्त राजस्थान संघ.....18 अप्रैल 1948
4. वृहद राजस्थान संघ.....30 मार्च 1949
5. सयुक्त वृहद राजस्थान.....15 मई 1949
6. राजस्थान संघ.......26 जनवरी 1950
7. वर्तमान राजस्थान......1 नवंबर 1956
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👍4
रामदेवजी....
पिता..... अजमलदे
माता.... मैणादे
पत्नि... नेतलदे
पाबूजी....
पिता.... धांधलजी जी राठौड़
माता.... कमलादे
पत्नी.... फुलमदे
गोगाजी.....
पिता..... जेवर चौहान
माता.... बाछल
पत्नी.... केलमदे
तेजाजी....
पिता.... ताहड़ जी धोलिया
माता.... राजकुंवरी
पत्नी.... पेमल
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पिता..... अजमलदे
माता.... मैणादे
पत्नि... नेतलदे
पाबूजी....
पिता.... धांधलजी जी राठौड़
माता.... कमलादे
पत्नी.... फुलमदे
गोगाजी.....
पिता..... जेवर चौहान
माता.... बाछल
पत्नी.... केलमदे
तेजाजी....
पिता.... ताहड़ जी धोलिया
माता.... राजकुंवरी
पत्नी.... पेमल
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👍8❤1👌1
हुरड़ा सम्मेलन.....17 जुलाई 1734
मेवाड़ महाराणा.... जगत सिंह...2
जयपुर... सवाई जयसिंह
मारवाड़.... अभय सिंह
नागौर.... बख्त सिंह
बीकानेर.... जोरावर सिंह
बूंदी.... दलेल सिंह
कोटा... दुर्जन शाल
किशनगढ़.... राज सिंह
करौली.... गोपालपाल
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मेवाड़ महाराणा.... जगत सिंह...2
जयपुर... सवाई जयसिंह
मारवाड़.... अभय सिंह
नागौर.... बख्त सिंह
बीकानेर.... जोरावर सिंह
बूंदी.... दलेल सिंह
कोटा... दुर्जन शाल
किशनगढ़.... राज सिंह
करौली.... गोपालपाल
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👍3❤1