शेखावाटी यूनिवर्सिटी ने बीएड 2 YEAR और 4TH YEAR वालों के एग्जाम एडमिट कार्ड जारी कर दिये है ।
आप निम्न लिंक से एडमिट कार्ड डाऊनलोड कर सकते है -
https://exam.shekhauniexam.in/AdmitCard/UG_ADMIT_CARD.aspx
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कारगिल विजय दिवस पर शहीदों को कोटि कोटि नमन 🇮🇳
जय हिंद जय भारत 🇮🇳🇮🇳
जय हिंद जय भारत 🇮🇳🇮🇳
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"सीईटी परीक्षा की तिथियों के बारे में जानकारी:
- परीक्षा नियत तिथियों पर होगी।
- अपने आधार कार्ड की जांच करें और यदि कोई त्रुटि हो, तो उसे अपडेट करें।
- फॉर्म अगले हफ्ते भरने के लिए नोटिफिकेशन जल्द ही आएगा।
- CET फॉर्म भरते समय अपना OTR भी अपडेट करें, और हस्तलिपि नमूना और लाइव फोटो के साथ सहयोग करें।"
https://is.gd/rssbrajasthangovin
यह एंटी डमी एक्शंस है और आपके आवेदन को सहायक बनाने में मदद करेगा।
- परीक्षा नियत तिथियों पर होगी।
- अपने आधार कार्ड की जांच करें और यदि कोई त्रुटि हो, तो उसे अपडेट करें।
- फॉर्म अगले हफ्ते भरने के लिए नोटिफिकेशन जल्द ही आएगा।
- CET फॉर्म भरते समय अपना OTR भी अपडेट करें, और हस्तलिपि नमूना और लाइव फोटो के साथ सहयोग करें।"
https://is.gd/rssbrajasthangovin
यह एंटी डमी एक्शंस है और आपके आवेदन को सहायक बनाने में मदद करेगा।
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सीईटी के प्रावधानों में बदलाव की तैयारी।
कुछ विद्यार्थियों ने राजस्थान CET परीक्षा को लेकर निम्नलिखित प्रश्न पूछे हैं:
प्रश्न 1: राजस्थान CET का नोटिफिकेशन कब जारी होगा?
उत्तर: राजस्थान CET का नोटिफिकेशन अगस्त के प्रथम सप्ताह में जारी होगा।
प्रश्न 2: CET परीक्षा के आवेदन कब शुरू होंगे?
उत्तर: CET परीक्षा के आवेदन भी अगस्त के प्रथम सप्ताह में ही शुरू हो सकते हैं।
प्रश्न 3: CET परीक्षा का आयोजन कब होगा?
उत्तर: CET परीक्षा का आयोजन सितंबर और अक्टूबर में होगा।
प्रश्न 4: CET पात्रता परीक्षा में किस फ़ॉर्मूला को लागू करने की उम्मीद है?
उत्तर: CET पात्रता परीक्षा में 40% का फ़ॉर्मूला लागू होने की उम्मीद है।
कुछ विद्यार्थियों ने राजस्थान CET परीक्षा को लेकर निम्नलिखित प्रश्न पूछे हैं:
प्रश्न 1: राजस्थान CET का नोटिफिकेशन कब जारी होगा?
उत्तर: राजस्थान CET का नोटिफिकेशन अगस्त के प्रथम सप्ताह में जारी होगा।
प्रश्न 2: CET परीक्षा के आवेदन कब शुरू होंगे?
उत्तर: CET परीक्षा के आवेदन भी अगस्त के प्रथम सप्ताह में ही शुरू हो सकते हैं।
प्रश्न 3: CET परीक्षा का आयोजन कब होगा?
उत्तर: CET परीक्षा का आयोजन सितंबर और अक्टूबर में होगा।
प्रश्न 4: CET पात्रता परीक्षा में किस फ़ॉर्मूला को लागू करने की उम्मीद है?
उत्तर: CET पात्रता परीक्षा में 40% का फ़ॉर्मूला लागू होने की उम्मीद है।
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राजस्थान के नए राज्यपाल - हरिभाऊ किसनराव बागड़े
28 July 2024 को देर रात बदले गए/ नए बनाये गए राज्यपाल सूची
1️⃣. हरिभाऊ किसनराव बागड़े को राजस्थान का राज्यपाल बनाया गया है।
2️⃣. जिष्णु देव वर्मा को तेलंगाना का राज्यपाल नियुक्त किया गया है।
3️⃣. ओम प्रकाश माथुर को सिक्किम का राज्यपाल बनाया गया है।
4️⃣. संतोष कुमार गंगवार को झारखंड का राज्यपाल नियुक्त किया गया है।
5️⃣. रमन डेका को छत्तीसगढ़ का राज्यपाल बनाया गया है।
6️⃣. सीएच विजयशंकर को मेघालय का राज्यपाल नियुक्त किया गया है।
7️⃣. पी राधाकृष्णन को झारखंड से महाराष्ट्र का राज्यपाल नियुक्त किया गया है।
8️⃣. गुलाब चंद कटारिया को असम से पंजाब और चंडीगढ़ का राज्यपाल नियुक्त किया गया है।
9️⃣. लक्ष्मण प्रसाद आचार्य को सिक्किम से असम का राज्यपाल नियुक्त किया गया है, और उन्हें मणिपुर का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया है।
28 July 2024 को देर रात बदले गए/ नए बनाये गए राज्यपाल सूची
1️⃣. हरिभाऊ किसनराव बागड़े को राजस्थान का राज्यपाल बनाया गया है।
2️⃣. जिष्णु देव वर्मा को तेलंगाना का राज्यपाल नियुक्त किया गया है।
3️⃣. ओम प्रकाश माथुर को सिक्किम का राज्यपाल बनाया गया है।
4️⃣. संतोष कुमार गंगवार को झारखंड का राज्यपाल नियुक्त किया गया है।
5️⃣. रमन डेका को छत्तीसगढ़ का राज्यपाल बनाया गया है।
6️⃣. सीएच विजयशंकर को मेघालय का राज्यपाल नियुक्त किया गया है।
7️⃣. पी राधाकृष्णन को झारखंड से महाराष्ट्र का राज्यपाल नियुक्त किया गया है।
8️⃣. गुलाब चंद कटारिया को असम से पंजाब और चंडीगढ़ का राज्यपाल नियुक्त किया गया है।
9️⃣. लक्ष्मण प्रसाद आचार्य को सिक्किम से असम का राज्यपाल नियुक्त किया गया है, और उन्हें मणिपुर का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया है।
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CUET UG Exam 2024 : का परीक्षा परिणाम जारी, परीणाम देखने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें।
https://cuetug.ntaonline.in/frontend/web/scorecard/index
https://cuetug.ntaonline.in/frontend/web/scorecard/index
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...नागौर जिले या उसके आसपास के नजदीकी गांव के.. बालक बालिकाएं जो प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करना चाहते हैं परंतु आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण बड़ी कोचिंग नहीं जा सकती तो उनके लिए मेरा मंच हमेशा के लिए ओपन है... आप संस्थान आकर अपनी वास्तविक स्थिति से मुझे अवगत करवाना आपकी हर स्थिति में मदद की जाएगी..
... नागौर जिले के वह बालक बालिकाएं जिनके माता-पिता नहीं है मेरी संस्थान की ओर से उनके लिए निशुल्क कोचिंग करवाई जाएगी.....
... संस्था आपके लिए ही बनाई गई है बस मैं एक मंच दिया है आपकी मेहनत ही आपको सफलता दिलवा सकती है अन्य कारक तत्व तैयारी में बाधक होते है तो उनका का निवारण करना मेरी जिम्मेदारी है.... आप नागौर से हो तो इस बात को तैयारी करने वाले बच्चों तक जरूर पहुंचाना..शेयर जरूर करें....
.✍रामावतार अडिग (मनन क्लासेज नागौर)
... नागौर जिले के वह बालक बालिकाएं जिनके माता-पिता नहीं है मेरी संस्थान की ओर से उनके लिए निशुल्क कोचिंग करवाई जाएगी.....
... संस्था आपके लिए ही बनाई गई है बस मैं एक मंच दिया है आपकी मेहनत ही आपको सफलता दिलवा सकती है अन्य कारक तत्व तैयारी में बाधक होते है तो उनका का निवारण करना मेरी जिम्मेदारी है.... आप नागौर से हो तो इस बात को तैयारी करने वाले बच्चों तक जरूर पहुंचाना..शेयर जरूर करें....
.✍रामावतार अडिग (मनन क्लासेज नागौर)
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AppropriationReply29Jul2024.pdf
1 MB
राजस्थान सरकार
परिवर्तित बजट 2024-2025
वित्त एवं विनियोग विधेयक
चर्चा पर
श्री भजन लाल शर्मा
मुख्यमंत्री,राजस्थान
की घोषणाऐं
29 जुलाई, 2024
परिवर्तित बजट 2024-2025
वित्त एवं विनियोग विधेयक
चर्चा पर
श्री भजन लाल शर्मा
मुख्यमंत्री,राजस्थान
की घोषणाऐं
29 जुलाई, 2024
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♻️ राजस्थान में नागर शैली के उदाहरण-
🔹सोमेश्वर मंदिर- किराडू (बाड़मेर)
🔹अम्बिका मंदिर- जगत (उदयपुर)
🔹दधिमाता मंदिर- गोठ मांगलोद (नागौर)
🔹औसियां के मंदिर- जोधपुरराजस्थान में
✍️द्रविड़ शैली के उदाहरण-
🔹रंगनाथ मंदिर- पुष्कर (अजमेर)
🔹तिरूपति बालाजी का मंदिर-सुजानगढ़ (चुरू)
राजस्थान में पंचायत शैली के उदाहरण-
🔹भंडदेवरा शिव मंदिर- बारां▪️बूढ़ादीत सूर्य मंदिर- कोटा
🔹जगदीश मंदिर- उदयपुर
🔹बाडोली के शिव मंदिर- बाडोली (रावतभाटा, चित्तौड़)
🔹हरिहर मंदिर औसिया
✍️राजस्थान में भूमिज शैली के अन्य उदाहरण-
🔹उडेश्वर मंदिर- बिजौलिया (भीलवाड़ा)
🔹महानालेश्वर मंदिर- मेनाल (भीलवाड़ा)
🔹भूमिज शैली का सबसे प्राचीन मंदिर
🔹सेवाड़ी जैन मंदिर (पाली) है।
🔹सोमेश्वर मंदिर- किराडू (बाड़मेर)
🔹अम्बिका मंदिर- जगत (उदयपुर)
🔹दधिमाता मंदिर- गोठ मांगलोद (नागौर)
🔹औसियां के मंदिर- जोधपुरराजस्थान में
✍️द्रविड़ शैली के उदाहरण-
🔹रंगनाथ मंदिर- पुष्कर (अजमेर)
🔹तिरूपति बालाजी का मंदिर-सुजानगढ़ (चुरू)
राजस्थान में पंचायत शैली के उदाहरण-
🔹भंडदेवरा शिव मंदिर- बारां▪️बूढ़ादीत सूर्य मंदिर- कोटा
🔹जगदीश मंदिर- उदयपुर
🔹बाडोली के शिव मंदिर- बाडोली (रावतभाटा, चित्तौड़)
🔹हरिहर मंदिर औसिया
✍️राजस्थान में भूमिज शैली के अन्य उदाहरण-
🔹उडेश्वर मंदिर- बिजौलिया (भीलवाड़ा)
🔹महानालेश्वर मंदिर- मेनाल (भीलवाड़ा)
🔹भूमिज शैली का सबसे प्राचीन मंदिर
🔹सेवाड़ी जैन मंदिर (पाली) है।
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🍃 आलमगीरपुर –
इसकी खुदाई वर्ष 1958 में यज्ञदत्त शर्मा द्वारा करवाई गयी थी। यह स्थल उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में हिण्डन नदी के तट पर स्थित है।
🍃 रोपड़ –
इसकी खुदाई वर्ष 1953 में यज्ञदत्त शर्मा द्वारा करवाई गयी थी। यह स्थल पंजाब राज्य में सतलुज नदी के तट पर स्थित है।
प्राप्त साक्ष्य – ताँबे की कुल्हाड़ी, आदमी और कुत्ते की एक कब्रगाह आदि।
🍃 सुरकोटड़ा –
इसकी खुदाई वर्ष 1964 में जगपति जोशी द्वारा करवाई गयी थी। यह स्थल गुजरात राज्य के कच्छ नामक जगह पर स्थित है।
प्राप्त साक्ष्य – घोड़े की हड्डियाँ, अनूठी प्रकार की कब्रगाह।
🍃 धौलावीरा –
इसकी खोज वर्ष 1967 में जगपति जोशी द्वारा की गयी थी, परन्तु इसकी व्यापक खुदाई रविंद्र सिंह बिष्ट द्वारा करवाई गयी थी। यह स्थल गुजरात राज्य के कच्छ जिले में मानहर एवं मानसर नदी के बीच स्थित है। यह पहला ऐसा नगर है जो तीन भागों में बटा हुआ था – दुर्गभाग, मध्यम भाग और निचला नगर।
प्राप्त साक्ष्य – दुर्गभाग और मध्यभाग के बीच में भव्य ईमारत के अवशेष, चारों और दर्शकों के बैठने के लिये बनायीं गयी सीढ़ीनुमा संरचना तथा सूचनापट। विभिन्न प्रकार के जलाशय।
🍃 राखीगढ़ी –
इसकी खुदाई वर्ष 1997 में अमरेंद्र नाथ द्वारा करवाई गयी थी। यह स्थल हरियाणा राज्य के हिसार जिले में सरस्वती तथा दुहद्वती नदियों के पास स्थित है। धोलावीरा के बाद राखीगढ़ी भारत में स्थित सिंधु सभ्यता का सबसे बड़ा नगर है।
🍃 कोटदीजी –
इसकी खुदाई वर्ष 1955 में एफ.ए. खान द्वारा करवाई गयी थी। यह स्थल मोहनजोदड़ो के समीप स्थित है।
प्राप्त साक्ष्य – चाँदी के सर्वप्रथम प्रयोग के साक्ष्य, बारहसिंगा का नमूना।
🍃 अलाहदिनों –
इसकी खुदाई फेयर सर्विस द्वारा करवाई गयी थी। यह स्थल सिंधु नदी और अरब सागर के संगम के समीप स्थित है।
🍃 कुणाल –
यह स्थल हरियाणा में स्थित है।
प्राप्त साक्ष्य – यहाँ से चाँदी के दो मुकुट प्राप्त हुये हैं।
🍃 अलीमुराद –
यह स्थल सिंध (पाकिस्तान) में स्थित है।
प्राप्त साक्ष्य – पीतल (कांसे) की बनी कुल्हाड़ी, बेल की छोटी मृण्मूर्ति।
🍃 रंगपुर –
इसकी खुदाई वर्ष 1953 में रंगनाथ राव द्वारा करवाई गयी थी।
प्राप्त साक्ष्य – कच्ची ईंटों से बना दुर्ग, धान की भूसी।
इसकी खुदाई वर्ष 1958 में यज्ञदत्त शर्मा द्वारा करवाई गयी थी। यह स्थल उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में हिण्डन नदी के तट पर स्थित है।
🍃 रोपड़ –
इसकी खुदाई वर्ष 1953 में यज्ञदत्त शर्मा द्वारा करवाई गयी थी। यह स्थल पंजाब राज्य में सतलुज नदी के तट पर स्थित है।
प्राप्त साक्ष्य – ताँबे की कुल्हाड़ी, आदमी और कुत्ते की एक कब्रगाह आदि।
🍃 सुरकोटड़ा –
इसकी खुदाई वर्ष 1964 में जगपति जोशी द्वारा करवाई गयी थी। यह स्थल गुजरात राज्य के कच्छ नामक जगह पर स्थित है।
प्राप्त साक्ष्य – घोड़े की हड्डियाँ, अनूठी प्रकार की कब्रगाह।
🍃 धौलावीरा –
इसकी खोज वर्ष 1967 में जगपति जोशी द्वारा की गयी थी, परन्तु इसकी व्यापक खुदाई रविंद्र सिंह बिष्ट द्वारा करवाई गयी थी। यह स्थल गुजरात राज्य के कच्छ जिले में मानहर एवं मानसर नदी के बीच स्थित है। यह पहला ऐसा नगर है जो तीन भागों में बटा हुआ था – दुर्गभाग, मध्यम भाग और निचला नगर।
प्राप्त साक्ष्य – दुर्गभाग और मध्यभाग के बीच में भव्य ईमारत के अवशेष, चारों और दर्शकों के बैठने के लिये बनायीं गयी सीढ़ीनुमा संरचना तथा सूचनापट। विभिन्न प्रकार के जलाशय।
🍃 राखीगढ़ी –
इसकी खुदाई वर्ष 1997 में अमरेंद्र नाथ द्वारा करवाई गयी थी। यह स्थल हरियाणा राज्य के हिसार जिले में सरस्वती तथा दुहद्वती नदियों के पास स्थित है। धोलावीरा के बाद राखीगढ़ी भारत में स्थित सिंधु सभ्यता का सबसे बड़ा नगर है।
🍃 कोटदीजी –
इसकी खुदाई वर्ष 1955 में एफ.ए. खान द्वारा करवाई गयी थी। यह स्थल मोहनजोदड़ो के समीप स्थित है।
प्राप्त साक्ष्य – चाँदी के सर्वप्रथम प्रयोग के साक्ष्य, बारहसिंगा का नमूना।
🍃 अलाहदिनों –
इसकी खुदाई फेयर सर्विस द्वारा करवाई गयी थी। यह स्थल सिंधु नदी और अरब सागर के संगम के समीप स्थित है।
🍃 कुणाल –
यह स्थल हरियाणा में स्थित है।
प्राप्त साक्ष्य – यहाँ से चाँदी के दो मुकुट प्राप्त हुये हैं।
🍃 अलीमुराद –
यह स्थल सिंध (पाकिस्तान) में स्थित है।
प्राप्त साक्ष्य – पीतल (कांसे) की बनी कुल्हाड़ी, बेल की छोटी मृण्मूर्ति।
🍃 रंगपुर –
इसकी खुदाई वर्ष 1953 में रंगनाथ राव द्वारा करवाई गयी थी।
प्राप्त साक्ष्य – कच्ची ईंटों से बना दुर्ग, धान की भूसी।
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