वल्लभ सम्प्रदाय -
प्रवर्तक (संस्थापक)- वल्लभाचार्य
वल्लभ सम्प्रदाय की शुरुआत वल्लभाचार्य ने की थी।
वल्लभ सम्प्रदाय में भगवान श्री कृष्ण की पूजा बाल रूप में की जाती है।
वल्लभ सम्प्रदाय के मंदिर को हवेली कहा जाता है।
वल्लभ सम्प्रदाय के मंदिरों में हवेली संगीत गाया जाता है।
वल्लभ सम्प्रदाय के मंदिरों में भगवान श्री कृष्ण के चित्र बनाये जाते हैं जिन्हें पिछवाई कहा जाता है।
राजस्थान में वल्लभ सम्प्रदाय के 41 मंदिर है।
राजस्थान में वल्लभ सम्प्रदाय के प्रमुख मंदिर जैसे-
(I) मथुरेश जी (कोटा)
(II) श्रीनाथ जी (सिहाड़/ नाथद्वारा, राजसमंद)
(III) द्वारिकाधीश जी मंदिर (कांकरोली, राजसमंद)
(IV) गोकुलचन्द्र जी मंदिर (कामां, भरतपुर)
(V) मदन मोहन जी मंदिर (कामां, भरतपुर)
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प्रवर्तक (संस्थापक)- वल्लभाचार्य
वल्लभ सम्प्रदाय की शुरुआत वल्लभाचार्य ने की थी।
वल्लभ सम्प्रदाय में भगवान श्री कृष्ण की पूजा बाल रूप में की जाती है।
वल्लभ सम्प्रदाय के मंदिर को हवेली कहा जाता है।
वल्लभ सम्प्रदाय के मंदिरों में हवेली संगीत गाया जाता है।
वल्लभ सम्प्रदाय के मंदिरों में भगवान श्री कृष्ण के चित्र बनाये जाते हैं जिन्हें पिछवाई कहा जाता है।
राजस्थान में वल्लभ सम्प्रदाय के 41 मंदिर है।
राजस्थान में वल्लभ सम्प्रदाय के प्रमुख मंदिर जैसे-
(I) मथुरेश जी (कोटा)
(II) श्रीनाथ जी (सिहाड़/ नाथद्वारा, राजसमंद)
(III) द्वारिकाधीश जी मंदिर (कांकरोली, राजसमंद)
(IV) गोकुलचन्द्र जी मंदिर (कामां, भरतपुर)
(V) मदन मोहन जी मंदिर (कामां, भरतपुर)
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गौड़ीय सम्प्रदाय -
प्रवर्तक (संस्थापक)- चैतन्य महाप्रभु (गौड/ बंगाल)
गौड़ी सम्प्रदाय की शुरुआत चैतन्य महाप्रभु ने की थी।
गौड़ीय सम्प्रदाय में भगवान श्री कृष्ण की पूजा की जाती है।
राजस्थान में गौड़ीय सम्प्रदाय के प्रमुख मंदिर-
(I) गोविन्द देव जी मंदिर (जयपुर)
(II) मदनमोहन जी मंदिर (करौली)
करौली में मदनमोहन जी मंदिर का निर्माण गोपालपाल ने करवाया था।
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प्रवर्तक (संस्थापक)- चैतन्य महाप्रभु (गौड/ बंगाल)
गौड़ी सम्प्रदाय की शुरुआत चैतन्य महाप्रभु ने की थी।
गौड़ीय सम्प्रदाय में भगवान श्री कृष्ण की पूजा की जाती है।
राजस्थान में गौड़ीय सम्प्रदाय के प्रमुख मंदिर-
(I) गोविन्द देव जी मंदिर (जयपुर)
(II) मदनमोहन जी मंदिर (करौली)
करौली में मदनमोहन जी मंदिर का निर्माण गोपालपाल ने करवाया था।
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निम्बार्क सम्प्रदाय -
प्रवर्तक (संस्थापक)- निम्बार्काचार्य
निम्बार्क सम्प्रदाय की शुरुआत निम्बार्काचार्य ने की थी।
मुख्य केंद्र- सलेमाबाद गाँव, किशनगढ़ तहसील, अजमेर जिला, राजस्थान
परशुराम जी ने निम्बार्क सम्प्रदाय के सलेमाबाद स्थित मुख्य केंद्र की स्थापना की थी।
निम्बार्क सम्प्रदाय में राधा को भगवान श्री कृष्ण की पत्नी माना जाता है।
मेला- निम्बार्क सम्प्रदाय का मेला राधा अष्टमी (भाद्रपद शुक्ल अष्टमी) के दिन लगता है।
शेखावाटी क्षेत्र में निम्बार्क सम्प्रदाय का अधिक प्रभाव है।
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प्रवर्तक (संस्थापक)- निम्बार्काचार्य
निम्बार्क सम्प्रदाय की शुरुआत निम्बार्काचार्य ने की थी।
मुख्य केंद्र- सलेमाबाद गाँव, किशनगढ़ तहसील, अजमेर जिला, राजस्थान
परशुराम जी ने निम्बार्क सम्प्रदाय के सलेमाबाद स्थित मुख्य केंद्र की स्थापना की थी।
निम्बार्क सम्प्रदाय में राधा को भगवान श्री कृष्ण की पत्नी माना जाता है।
मेला- निम्बार्क सम्प्रदाय का मेला राधा अष्टमी (भाद्रपद शुक्ल अष्टमी) के दिन लगता है।
शेखावाटी क्षेत्र में निम्बार्क सम्प्रदाय का अधिक प्रभाव है।
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परनामी सम्प्रदाय -
प्रवर्तक (संस्थापक)- प्राणनाथ जी
परनामी सम्प्रदाय की शुरुआत प्राणनाथ जी ने की थी।
मुख्य केंद्र- पन्ना (मध्य प्रदेश)
ग्रंथ (पुस्तक)- कुजलम स्वरुप
परनामी सम्प्रदाय में भगवान श्री कृष्ण की पूजा की जाती है।
जयपुर के आदर्श नगर में परनामी सम्प्रदाय का मंदिर है।
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प्रवर्तक (संस्थापक)- प्राणनाथ जी
परनामी सम्प्रदाय की शुरुआत प्राणनाथ जी ने की थी।
मुख्य केंद्र- पन्ना (मध्य प्रदेश)
ग्रंथ (पुस्तक)- कुजलम स्वरुप
परनामी सम्प्रदाय में भगवान श्री कृष्ण की पूजा की जाती है।
जयपुर के आदर्श नगर में परनामी सम्प्रदाय का मंदिर है।
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रामानन्दी सम्प्रदाय -
प्रवर्तक (संस्थापक)- रामानन्द जी
रामानन्दी सम्प्रदाय की शुरुआत रामानन्द जी ने की थी।
रामानन्दी सम्प्रदाय में भगवान श्री राम की पूजा रसिक नायक के रूप में की जाती है इसलिए रामानन्दी सम्प्रदाय को रसिक सम्प्रदाय भी कहा जाता है।
सवाई जयसिंह के शासन काल में कृष्ण भट्ट ने 'राम रासौ' नामक पुस्तक लिखी थी।
राम रासो पुस्तक में राम व सीता की प्रेम कहानी का वर्णन किया गया है।
राजस्थान में रामानन्दी सम्प्रदाय के केंद्र-
(I) गलता जी (जयपुर)- कृष्णदास पयहारी
(II) रैवासा (सीकर)- अग्रदास जी
रामानन्दी सम्प्रदाय के गलता जी स्थित केंद्र की स्थापना कृष्णदास पयहारी के द्वारा की गई थी।
रामानन्दी सम्प्रदाय के रैवासा स्थित केंद्र की स्थापना अग्रदास जी के द्वारा की गई थी।
आमेर का राजा पृथ्वीराज व उसकी रानी बालाबाई कृष्णदास पयहारी के शिष्य थे।
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प्रवर्तक (संस्थापक)- रामानन्द जी
रामानन्दी सम्प्रदाय की शुरुआत रामानन्द जी ने की थी।
रामानन्दी सम्प्रदाय में भगवान श्री राम की पूजा रसिक नायक के रूप में की जाती है इसलिए रामानन्दी सम्प्रदाय को रसिक सम्प्रदाय भी कहा जाता है।
सवाई जयसिंह के शासन काल में कृष्ण भट्ट ने 'राम रासौ' नामक पुस्तक लिखी थी।
राम रासो पुस्तक में राम व सीता की प्रेम कहानी का वर्णन किया गया है।
राजस्थान में रामानन्दी सम्प्रदाय के केंद्र-
(I) गलता जी (जयपुर)- कृष्णदास पयहारी
(II) रैवासा (सीकर)- अग्रदास जी
रामानन्दी सम्प्रदाय के गलता जी स्थित केंद्र की स्थापना कृष्णदास पयहारी के द्वारा की गई थी।
रामानन्दी सम्प्रदाय के रैवासा स्थित केंद्र की स्थापना अग्रदास जी के द्वारा की गई थी।
आमेर का राजा पृथ्वीराज व उसकी रानी बालाबाई कृष्णदास पयहारी के शिष्य थे।
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गलता जी (जयपुर)-
स्थित- जयपुर जिला, राजस्थान
गलता जी में गालव ऋषि रहते थे तथा गालव ऋषि का आश्रम गलता जी में था।
गालव ऋषि के आश्रम के कारण ही गलता जी नाम गलता जी पड़ा है।
गलता जी सूर्य मंदिर के लिए प्रसिद्ध है।
रामानन्दी सम्प्रदाय के प्रवर्तक रामानन्द के गुरु रामानुज थे।
भक्ति आंदोलन की शुरुआत दक्षिण भारत से हुई थी
गलता जी में रामानुज सम्प्रदाय के लोग भी रहते हैं।
उत्तर भारत में रामानुज सम्प्रदाय का केंद्र गलता जी (जयपुर) है।
दक्षिण भारत में रामानुज सम्प्रदाय का केंद्र तोताद्रि (तमिलनाडु) है।
रामानुज तमिलनाडु के थे।
रामानुज सम्प्रदाय का दक्षिण भारत में प्रमुख केंद्र तोताद्रि (तमिलनाडु) है।
गलता जी को उत्तर भारत का तोताद्रि कहते हैं क्योंकि रामनुज सम्प्रदाय का दक्षिण भारत में प्रमुख केंद्र तोताद्रि है तथा उत्तर भारत में रामानुज सम्प्रदाय का प्रमुख केंद्र गलता जी है।
बंदरों की अधिकता के कारण गलता जी को मंकी वेली के नाम से भी जाना जाता है।
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स्थित- जयपुर जिला, राजस्थान
गलता जी में गालव ऋषि रहते थे तथा गालव ऋषि का आश्रम गलता जी में था।
गालव ऋषि के आश्रम के कारण ही गलता जी नाम गलता जी पड़ा है।
गलता जी सूर्य मंदिर के लिए प्रसिद्ध है।
रामानन्दी सम्प्रदाय के प्रवर्तक रामानन्द के गुरु रामानुज थे।
भक्ति आंदोलन की शुरुआत दक्षिण भारत से हुई थी
गलता जी में रामानुज सम्प्रदाय के लोग भी रहते हैं।
उत्तर भारत में रामानुज सम्प्रदाय का केंद्र गलता जी (जयपुर) है।
दक्षिण भारत में रामानुज सम्प्रदाय का केंद्र तोताद्रि (तमिलनाडु) है।
रामानुज तमिलनाडु के थे।
रामानुज सम्प्रदाय का दक्षिण भारत में प्रमुख केंद्र तोताद्रि (तमिलनाडु) है।
गलता जी को उत्तर भारत का तोताद्रि कहते हैं क्योंकि रामनुज सम्प्रदाय का दक्षिण भारत में प्रमुख केंद्र तोताद्रि है तथा उत्तर भारत में रामानुज सम्प्रदाय का प्रमुख केंद्र गलता जी है।
बंदरों की अधिकता के कारण गलता जी को मंकी वेली के नाम से भी जाना जाता है।
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रामस्नेही सम्प्रदाय -
प्रवर्तक (संस्थापक)- स्वामी रामचरण जी महाराज
रामानन्द जी के वे चेले जो सगुण भक्ति की तरफ चले गये वे रामानन्दी सम्प्रदाय से जुड़ गये।
रामानन्द जी के वे चेले जो निर्गुण भक्ति की तरफ चले गये वे रामस्नेही सम्प्रदाय से जुड़ गये।
रामस्नेही सम्प्रदाय एक निर्गुण भक्ति का सम्प्रदाय है।
रामस्नेही सम्प्रदाय में दशरथ पुत्र राम की पूजा नहीं की जाती है।
रामस्नेही सम्प्रदाय में निर्गुण राम की पूजा की जाती है।
रामस्नेही सम्प्रदाय में संत गुलाबी रंग के कपड़े पहनते हैं।
राजस्थान में रामस्नेही सम्प्रदाय के केंद्र-
(I) शाहपुरा (भीलवाड़ा)- रामचरण जी
(II) रैण (नागौर)- दरियाव जी
(III) सिंहथल (बीकानेर)- हरिरामदास जी
(IV) खेडापा (जोधपुर)- रामदास जी (हरिरामदास जी के शिष्य)
रामस्नेही सम्प्रदाय के शाहपुरा (भीलवाड़ा) स्थित केंद्र की स्थापना रामचरण जी ने की थी।
रामस्नेही सम्प्रदाय के रैण (नागौर) स्थित केंद्र की स्थापना दरियाव जी ने की थी।
रामस्नेही सम्प्रदाय के सिंहथल (बीकानेर) स्थित केंद्र की स्थापना हरिरामदास जी ने की थी।
रामस्नेही सम्प्रदाय के खेडापा (जोधपुर) स्थित केंद्र की स्थापना रामदास जी ने की थी।
होली के अलगे दिन शाहपुरा (भीलवाड़ा) में फूलडोल मेले का आयोजन किया जाता है।
अर्थात् चैत्र कृष्ण एकम् के दिन शाहपुरा (भीलवाड़ा) में फूलडोल मेले लगता है।
जैमलदास जी को रामस्नेही सम्प्रदाय की सिंहथल शाखा का 'आदि आचार्य' कहा जाता है क्योंकि सिंहथल शाखा के संस्थापक हरिरामदास जी का गुरु जैमलदास जी था।
जैमलदास जी को रामस्नेही सम्प्रदाय की खेडापा शाखा का 'आदि आचार्य' कहा जाता है क्योंकि खेडापा शाखा के संस्थापक रामदास जी के गुरु हरिरामदास थे और हरिरामदास जी का गुरु जैमलदास जी थे अतः जैमलदास जी रामदास जी के गुरु के गुरु थे।
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प्रवर्तक (संस्थापक)- स्वामी रामचरण जी महाराज
रामानन्द जी के वे चेले जो सगुण भक्ति की तरफ चले गये वे रामानन्दी सम्प्रदाय से जुड़ गये।
रामानन्द जी के वे चेले जो निर्गुण भक्ति की तरफ चले गये वे रामस्नेही सम्प्रदाय से जुड़ गये।
रामस्नेही सम्प्रदाय एक निर्गुण भक्ति का सम्प्रदाय है।
रामस्नेही सम्प्रदाय में दशरथ पुत्र राम की पूजा नहीं की जाती है।
रामस्नेही सम्प्रदाय में निर्गुण राम की पूजा की जाती है।
रामस्नेही सम्प्रदाय में संत गुलाबी रंग के कपड़े पहनते हैं।
राजस्थान में रामस्नेही सम्प्रदाय के केंद्र-
(I) शाहपुरा (भीलवाड़ा)- रामचरण जी
(II) रैण (नागौर)- दरियाव जी
(III) सिंहथल (बीकानेर)- हरिरामदास जी
(IV) खेडापा (जोधपुर)- रामदास जी (हरिरामदास जी के शिष्य)
रामस्नेही सम्प्रदाय के शाहपुरा (भीलवाड़ा) स्थित केंद्र की स्थापना रामचरण जी ने की थी।
रामस्नेही सम्प्रदाय के रैण (नागौर) स्थित केंद्र की स्थापना दरियाव जी ने की थी।
रामस्नेही सम्प्रदाय के सिंहथल (बीकानेर) स्थित केंद्र की स्थापना हरिरामदास जी ने की थी।
रामस्नेही सम्प्रदाय के खेडापा (जोधपुर) स्थित केंद्र की स्थापना रामदास जी ने की थी।
होली के अलगे दिन शाहपुरा (भीलवाड़ा) में फूलडोल मेले का आयोजन किया जाता है।
अर्थात् चैत्र कृष्ण एकम् के दिन शाहपुरा (भीलवाड़ा) में फूलडोल मेले लगता है।
जैमलदास जी को रामस्नेही सम्प्रदाय की सिंहथल शाखा का 'आदि आचार्य' कहा जाता है क्योंकि सिंहथल शाखा के संस्थापक हरिरामदास जी का गुरु जैमलदास जी था।
जैमलदास जी को रामस्नेही सम्प्रदाय की खेडापा शाखा का 'आदि आचार्य' कहा जाता है क्योंकि खेडापा शाखा के संस्थापक रामदास जी के गुरु हरिरामदास थे और हरिरामदास जी का गुरु जैमलदास जी थे अतः जैमलदास जी रामदास जी के गुरु के गुरु थे।
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राम चरण जी -
जन्म स्थान- सोडा, टोंक जिला, राजस्थान
रामचरण जी का जन्म विजयवर्गीय (वैश्य) परिवार में हुआ था।
बचपन का नाम- रामकिशन
पिता- बख्तराम
माता- देउ
गुरु- कृपाराम जी
पुस्तक- अणभैवाणी (रामचरण जी ने अणभैवाणी पुस्तक की रचना की थी।)
शाहपुरा के राजा रणसिंह ने रामचरण जी को छतरी व मठ बनवाकर दिये थे।
रामचरण जी ने रामस्नेही सम्प्रदाय की खेडापा शाखा की स्थापना की थी।
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जन्म स्थान- सोडा, टोंक जिला, राजस्थान
रामचरण जी का जन्म विजयवर्गीय (वैश्य) परिवार में हुआ था।
बचपन का नाम- रामकिशन
पिता- बख्तराम
माता- देउ
गुरु- कृपाराम जी
पुस्तक- अणभैवाणी (रामचरण जी ने अणभैवाणी पुस्तक की रचना की थी।)
शाहपुरा के राजा रणसिंह ने रामचरण जी को छतरी व मठ बनवाकर दिये थे।
रामचरण जी ने रामस्नेही सम्प्रदाय की खेडापा शाखा की स्थापना की थी।
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आज जो 339 पद की बात चल रही है उसकी सच्चाई कुछ यह है –
यह वह 339 पद है जिनकी हाल ही मैं वित्तीय स्वीकृति मिली थी और उनको ऐड करके ही 2200 पोस्ट हुई है और यह वाली बात मैने कुछ दिनों पहले ही चैनल पर बॉक्स में बंद करके डाली थी, यानि की 2200 टोटल में से 339 वो पद है जिनको हाल ही मैं वित्तीय स्वीकृति मिली है बाकी विज्ञप्ति जब भी आयेगी 2200 पोस्ट की ही आएगी
यह फोटो कुछ दिनो पहले चैनल पर डाली गई थी वह है लेटेस्ट कंप्लीट इन्फॉर्मेशन आते ही शेयर कर दी जायेगी
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यह वह 339 पद है जिनकी हाल ही मैं वित्तीय स्वीकृति मिली थी और उनको ऐड करके ही 2200 पोस्ट हुई है और यह वाली बात मैने कुछ दिनों पहले ही चैनल पर बॉक्स में बंद करके डाली थी, यानि की 2200 टोटल में से 339 वो पद है जिनको हाल ही मैं वित्तीय स्वीकृति मिली है बाकी विज्ञप्ति जब भी आयेगी 2200 पोस्ट की ही आएगी
यह फोटो कुछ दिनो पहले चैनल पर डाली गई थी वह है लेटेस्ट कंप्लीट इन्फॉर्मेशन आते ही शेयर कर दी जायेगी
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BSTC परीक्षा 2023 का आयोजन 28 अगस्त 2023 को दोपहर 2 बजे से सायं 5 बजे तक होगी
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Forester2020_Recommedation21072023.pdf
830.5 KB
वनपाल अंतिम रिज़ल्ट जारी
PTI2022_FinalRecomand_21072023.pdf
802.8 KB
PTI भर्ती की एक और सूची जारी
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D.EL.ED VS B.ED विवाद को लेकर जो सुनवाई 17 July को सुप्रीम कोर्ट में होने वाली थी, किंतु नहीं हुई थी;
वह सुनवाई अब 24 जुलाई सोमवार को होगी।
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वह सुनवाई अब 24 जुलाई सोमवार को होगी।
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