रामू राम राईका rpsc सदस्य रह चुके हैं, जिसके बेटा और बेटी दोनों सब इंस्पेक्टर टॉपर है।
राजस्थान रैंक 5 & 37
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🤔8👍4
राजस्थान सरकार का दूसरा ग्लास प्लांट
💥ASAHI INDIA GLASS LTD. - सोनियाणा, चित्तौड़गढ़
[ 1500 करोड़ की लागत से होगा तैयार ]
पहला -
💥द हाई टेक्निकल प्रिसिजन ग्लास वर्क्स - धौलपुर
अन्य ग्लास फैक्ट्री :-
💥धौलपुर ग्लास वर्क्स - धौलपुर
(निजी क्षेत्र में)
💥सैमकोर ग्लास इंडस्ट्रीज - कोटा
💥सेंट गोबैन ग्लास फैक्ट्री - भिवाड़ी, अलवर
ऐसी ही महत्वपूर्ण जानकारियों के लिए
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https://t.me/OnlineNotesStore
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वल्लभ सम्प्रदाय -
प्रवर्तक (संस्थापक)- वल्लभाचार्य
वल्लभ सम्प्रदाय की शुरुआत वल्लभाचार्य ने की थी।
वल्लभ सम्प्रदाय में भगवान श्री कृष्ण की पूजा बाल रूप में की जाती है।
वल्लभ सम्प्रदाय के मंदिर को हवेली कहा जाता है।
वल्लभ सम्प्रदाय के मंदिरों में हवेली संगीत गाया जाता है।
वल्लभ सम्प्रदाय के मंदिरों में भगवान श्री कृष्ण के चित्र बनाये जाते हैं जिन्हें पिछवाई कहा जाता है।
राजस्थान में वल्लभ सम्प्रदाय के 41 मंदिर है।
राजस्थान में वल्लभ सम्प्रदाय के प्रमुख मंदिर जैसे-
(I) मथुरेश जी (कोटा)
(II) श्रीनाथ जी (सिहाड़/ नाथद्वारा, राजसमंद)
(III) द्वारिकाधीश जी मंदिर (कांकरोली, राजसमंद)
(IV) गोकुलचन्द्र जी मंदिर (कामां, भरतपुर)
(V) मदन मोहन जी मंदिर (कामां, भरतपुर)
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प्रवर्तक (संस्थापक)- वल्लभाचार्य
वल्लभ सम्प्रदाय की शुरुआत वल्लभाचार्य ने की थी।
वल्लभ सम्प्रदाय में भगवान श्री कृष्ण की पूजा बाल रूप में की जाती है।
वल्लभ सम्प्रदाय के मंदिर को हवेली कहा जाता है।
वल्लभ सम्प्रदाय के मंदिरों में हवेली संगीत गाया जाता है।
वल्लभ सम्प्रदाय के मंदिरों में भगवान श्री कृष्ण के चित्र बनाये जाते हैं जिन्हें पिछवाई कहा जाता है।
राजस्थान में वल्लभ सम्प्रदाय के 41 मंदिर है।
राजस्थान में वल्लभ सम्प्रदाय के प्रमुख मंदिर जैसे-
(I) मथुरेश जी (कोटा)
(II) श्रीनाथ जी (सिहाड़/ नाथद्वारा, राजसमंद)
(III) द्वारिकाधीश जी मंदिर (कांकरोली, राजसमंद)
(IV) गोकुलचन्द्र जी मंदिर (कामां, भरतपुर)
(V) मदन मोहन जी मंदिर (कामां, भरतपुर)
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गौड़ीय सम्प्रदाय -
प्रवर्तक (संस्थापक)- चैतन्य महाप्रभु (गौड/ बंगाल)
गौड़ी सम्प्रदाय की शुरुआत चैतन्य महाप्रभु ने की थी।
गौड़ीय सम्प्रदाय में भगवान श्री कृष्ण की पूजा की जाती है।
राजस्थान में गौड़ीय सम्प्रदाय के प्रमुख मंदिर-
(I) गोविन्द देव जी मंदिर (जयपुर)
(II) मदनमोहन जी मंदिर (करौली)
करौली में मदनमोहन जी मंदिर का निर्माण गोपालपाल ने करवाया था।
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गौड़ी सम्प्रदाय की शुरुआत चैतन्य महाप्रभु ने की थी।
गौड़ीय सम्प्रदाय में भगवान श्री कृष्ण की पूजा की जाती है।
राजस्थान में गौड़ीय सम्प्रदाय के प्रमुख मंदिर-
(I) गोविन्द देव जी मंदिर (जयपुर)
(II) मदनमोहन जी मंदिर (करौली)
करौली में मदनमोहन जी मंदिर का निर्माण गोपालपाल ने करवाया था।
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निम्बार्क सम्प्रदाय -
प्रवर्तक (संस्थापक)- निम्बार्काचार्य
निम्बार्क सम्प्रदाय की शुरुआत निम्बार्काचार्य ने की थी।
मुख्य केंद्र- सलेमाबाद गाँव, किशनगढ़ तहसील, अजमेर जिला, राजस्थान
परशुराम जी ने निम्बार्क सम्प्रदाय के सलेमाबाद स्थित मुख्य केंद्र की स्थापना की थी।
निम्बार्क सम्प्रदाय में राधा को भगवान श्री कृष्ण की पत्नी माना जाता है।
मेला- निम्बार्क सम्प्रदाय का मेला राधा अष्टमी (भाद्रपद शुक्ल अष्टमी) के दिन लगता है।
शेखावाटी क्षेत्र में निम्बार्क सम्प्रदाय का अधिक प्रभाव है।
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निम्बार्क सम्प्रदाय की शुरुआत निम्बार्काचार्य ने की थी।
मुख्य केंद्र- सलेमाबाद गाँव, किशनगढ़ तहसील, अजमेर जिला, राजस्थान
परशुराम जी ने निम्बार्क सम्प्रदाय के सलेमाबाद स्थित मुख्य केंद्र की स्थापना की थी।
निम्बार्क सम्प्रदाय में राधा को भगवान श्री कृष्ण की पत्नी माना जाता है।
मेला- निम्बार्क सम्प्रदाय का मेला राधा अष्टमी (भाद्रपद शुक्ल अष्टमी) के दिन लगता है।
शेखावाटी क्षेत्र में निम्बार्क सम्प्रदाय का अधिक प्रभाव है।
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परनामी सम्प्रदाय -
प्रवर्तक (संस्थापक)- प्राणनाथ जी
परनामी सम्प्रदाय की शुरुआत प्राणनाथ जी ने की थी।
मुख्य केंद्र- पन्ना (मध्य प्रदेश)
ग्रंथ (पुस्तक)- कुजलम स्वरुप
परनामी सम्प्रदाय में भगवान श्री कृष्ण की पूजा की जाती है।
जयपुर के आदर्श नगर में परनामी सम्प्रदाय का मंदिर है।
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परनामी सम्प्रदाय की शुरुआत प्राणनाथ जी ने की थी।
मुख्य केंद्र- पन्ना (मध्य प्रदेश)
ग्रंथ (पुस्तक)- कुजलम स्वरुप
परनामी सम्प्रदाय में भगवान श्री कृष्ण की पूजा की जाती है।
जयपुर के आदर्श नगर में परनामी सम्प्रदाय का मंदिर है।
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