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Exam Oriented Study material For 1st grade , 2nd grade , FSO , EO/RO , RAS, SI, REET and many more...
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#PTI निम्न लिंक के माध्यम से अभ्यर्थी Application Number एवं DOB से जिला प्राथमिकता विकल्प भर Submit कर देवें ।📚✅

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एक और बोर्ड
◾️ श्री विश्वकर्मा कौशल विकास बोर्ड का गठन
🔹 गठन की मंजूरी - 11 जुलाई 2023
🔹 बोर्ड में एक अध्यक्ष सहित कुल 13 पद शमिल होंगे।
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प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालय अध्यापक सीधी भर्ती 2022
हाईकोर्ट ने कर्मचारी चयन बोर्ड से दो सप्ताह में मांगा जवाब📚✅
अंतिम उत्तर कुंजी में प्रश्नों के उत्तर को निरस्त करने या बदले जाने का मामला
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संगणक भर्ती: आज से आवेदन शुरू
लेब टेक्नीशियन एवं सहायक रेडियोग्राफर भर्ती 2023 के आवेदन में त्रुटि संशोधन
👉गीदड़ नृत्य-
स्थान – शेखावाटी
विशेष विवरण – होली से पूर्व डांडा रोपण से होली के सप्ताह भर बाद तक चलता है।

👉 बिंदौरी नृत्य –
स्थान – झालावाड़ 
विशेष विवरण – होली व विवाह पर पुरुषों द्वारा समूह- नृत्य।

👉 घुड़ला नृत्य-
स्थान – मारवाड़ 
लड़कियाँ नाचती हुई घर-घर तेल मांगती है।

👉 अग्नि नृत्य-
स्थान – कतरियासर (बीकानेर)
विशेष विवरण – बीकानेर के जसनाथी सिद्धों द्वारा फतै-फतै के उद्‌घोष के साथ जलते अंगारोंं पर किया जाता है।

🤗 लांगुरिया नृत्य –
स्थान – करौली 
विशेष विवरण – करौली में कैला देवी के मेले में किया जाने वाला नृत्य।

⭐ डांग नृत्य –
स्थान – नाथद्वारा (राजसमंद)
विशेष विवरण – होली के अवसर पर किए जाने वाला नृत्य।


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डांडिया नृत्य - यह नृत्य राजस्थान में सर्वाधिक अश्विन के नवरात्रों में जोधपुर में किया जाता है। यह नृत्य मूलत: गुजरात का है। यह नृत्य युगल रूप से होता है। यह नृत्य शहनाई एवं नगाड़ा वाद्ययंत्र से किया जाता है। इस नृत्य के दौरान पुरुष 'लोक-ख्याल' विलम्ब लय में गाते है।

सूकर नृत्य –
स्थान – दक्षिण राजस्थान
विशेष विवरण – सूकर देवता का मुखौटा लगाकर दक्षिणी पहाड़ी आदिवासियों का नृत्य।

नाहर नृत्य –
स्थान – मांडल (भीलवाड़ा)
विशेष विवरण – शेर की वेशभूषा में किया जाता है।

ढप नृत्य –
स्थान – शेखावाटी
विशेष विवरण – बसंत पंचमी पर किया जाता है।


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BPSC प्राथमिक शिक्षक भर्ती
द्वितीय पेपर में नेगेटिव मार्किंग 1/4 रहेगा...

मेरिट केवल पेपर 2 के हिसाब से ही बनेगी...

लिखित परीक्षा में शामिल सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों को 40%, पिछड़ा वर्ग के उम्मीदवारों को 36.5%, अत्यन्त पिछड़ा वर्ग के उम्मीदवारों को 34% एवं अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति, महिलाओं तथा निःशक्त (दिव्यांग) उम्मीदवारों को 32% न्यूनतम अर्हतांक प्राप्त करना अनिवार्य होगा। अन्यथा वे प्रतियोगिता परीक्षा से बाहर हो जायेंगे ।

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Not verified 🤐
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एक बार फिर एसओजी की नींद खुली है

नतीज़ा शून्य रहेगा
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Don't be sad
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रण नृत्य –
स्थान – मेवाड़
विशेष विवरण – पुरुषों द्वारा हाथों में तलवार लेकर किया जाता है।

पेजण नृत्य-
स्थान – वागड़ (डूंगरपुर, बांसवाड़ा)
विशेष विवरण – दीपावली के अवसर पर किया जाता है।

चारकुला –
स्थान – भरतपुर,अलवर 
विशेष विवरण – महिलाएं  सिर पर बर्तन के ऊपर दीपक जलाकर करती है।

हिंडोला नृत्य - यह दीपावली के अवसर पर जैसलमेर क्षेत्र में किया जाता है।

भैरव नृत्य - यह नृत्य ब्यावर (अजमेर) में बादशाह बीरबल की सवारी के समय पुरुषों द्वारा किया जाता है।


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रामदेवजी के भोपे     –      तंदुरा        −     मेघवाल

गोगा जी के भोपे     −     डेरू           −     नायक

देवनारायण जी के भोपे −     जंतर  −     गुर्जर

राव−भाट−यजमानो की वंशावलियों का बखान करते है।

लंगा− राजस्थान की संगीत जीवी जाति जो सुरो के लयात्मक उतार−चढाव के लिए जानी जाती हे।

प्रसिद्ध कलाकार –बूदं खाँ/बुंदुखां

भगतण−मध्यकाल में मंदिरों में नाचने−गाने का काम करने वाली महिलाएँ।

पातर/पातुर−मांगलिक अवसरो पर गाने बजाने का काम करने वाली संगीत जीवी जाति।


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꧁༺Aɴꜱʜᴜ CʜᴀᴜƊʜᴀʀʏ♪♪༻꧂:

जगजीत सिंह−विख्यात गजल गायक, जन्म−श्री गंगानगर

पं. विश्व मोहन भटृ –विख्यात वीणा वादक, जयपुर

मेहंदी हसन− पाकिस्तानी गजल गायक, जन्म−लुणां (झुंझुनु)

रेशमा− पाकिस्तानी सूफी लोक गायिका, जन्म- लोहा(चुरू)

रावल - यह जाती चारणों को अपना यजमान मानती है।

कंजर - घुमंतु जाति के ये कलाकार चकरी नृत्य करते है।

जोगी - यह जाति नाथ संप्रदाय को मानती है। ये भर्तृहीर, शिवाजी का ब्यावला व पंडून का कड़ा गायन में अपना विशिष्ट स्थान रखती है। जोगी अपने गायन के साथ सारंगी वाद्य का प्रयोग करते है।


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भवाई नृत्य -

यह नृत्य चमत्कारों के लिए प्रसिद्ध है।

इस नृत्य का मूल नाम मटका नृत्य है।

भवई नृत्य की उत्पत्ति गुजरात से हुई।

राजस्थान में यह नृत्य ज्यादातर मेवाड़ क्षेत्र में किया जाता है।

इस नृत्य के प्रवर्तक केकड़ी (अजमेर) निवासी नागोजी/बाघोजी जाट थे।

इस नृत्य को प्रसिद्धि भारतीय लोक कला मंडल (उदयपुर) के संस्थापक देवीलाल द्वारा दयालराम के माध्यम से दी।

यह नृत्य मुलत: पुरुषों द्वारा किया जाता है।

भवाई नृत्य का प्रसंग - बोरी-बोरा, सूरदास, लोदी वड़ी, डोकरी, शंकरिया, बीकाजी, बाघाजी, ढोलमारू आदि।

इस नृत्य के प्रसिद्ध नर्तक प्रदीप पुष्कर एवं रूपसिंह शेखावत हैं।

इस नृत्य की पहली महिला नृत्यकार पुष्पा व्यास थीं।

इस नृत्य को जयपुर की नृत्यांगना अस्मिता काला ने अपने सिर पर 111 मटकों के साथ किया, जिसके कारण उनका नाम लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज किया गया।

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तैयारी मे लग जावो
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OTR (वन टाइम रजिस्ट्रेशन) EDIT का ओप्शन On कर दिया है। ✍
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