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#PTI निम्न लिंक के माध्यम से अभ्यर्थी Application Number एवं DOB से जिला प्राथमिकता विकल्प भर Submit कर देवें ।📚✅
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https://rajshaladarpan.nic.in/sd1/Recruitment/CandidateChoice/Home/CandidateRegistration.aspx
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👉गीदड़ नृत्य-
स्थान – शेखावाटी
विशेष विवरण – होली से पूर्व डांडा रोपण से होली के सप्ताह भर बाद तक चलता है।
👉 बिंदौरी नृत्य –
स्थान – झालावाड़
विशेष विवरण – होली व विवाह पर पुरुषों द्वारा समूह- नृत्य।
👉 घुड़ला नृत्य-
स्थान – मारवाड़
लड़कियाँ नाचती हुई घर-घर तेल मांगती है।
👉 अग्नि नृत्य-
स्थान – कतरियासर (बीकानेर)
विशेष विवरण – बीकानेर के जसनाथी सिद्धों द्वारा फतै-फतै के उद्घोष के साथ जलते अंगारोंं पर किया जाता है।
🤗 लांगुरिया नृत्य –
स्थान – करौली
विशेष विवरण – करौली में कैला देवी के मेले में किया जाने वाला नृत्य।
⭐ डांग नृत्य –
स्थान – नाथद्वारा (राजसमंद)
विशेष विवरण – होली के अवसर पर किए जाने वाला नृत्य।
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स्थान – शेखावाटी
विशेष विवरण – होली से पूर्व डांडा रोपण से होली के सप्ताह भर बाद तक चलता है।
👉 बिंदौरी नृत्य –
स्थान – झालावाड़
विशेष विवरण – होली व विवाह पर पुरुषों द्वारा समूह- नृत्य।
👉 घुड़ला नृत्य-
स्थान – मारवाड़
लड़कियाँ नाचती हुई घर-घर तेल मांगती है।
👉 अग्नि नृत्य-
स्थान – कतरियासर (बीकानेर)
विशेष विवरण – बीकानेर के जसनाथी सिद्धों द्वारा फतै-फतै के उद्घोष के साथ जलते अंगारोंं पर किया जाता है।
🤗 लांगुरिया नृत्य –
स्थान – करौली
विशेष विवरण – करौली में कैला देवी के मेले में किया जाने वाला नृत्य।
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स्थान – नाथद्वारा (राजसमंद)
विशेष विवरण – होली के अवसर पर किए जाने वाला नृत्य।
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डांडिया नृत्य - यह नृत्य राजस्थान में सर्वाधिक अश्विन के नवरात्रों में जोधपुर में किया जाता है। यह नृत्य मूलत: गुजरात का है। यह नृत्य युगल रूप से होता है। यह नृत्य शहनाई एवं नगाड़ा वाद्ययंत्र से किया जाता है। इस नृत्य के दौरान पुरुष 'लोक-ख्याल' विलम्ब लय में गाते है।
सूकर नृत्य –
स्थान – दक्षिण राजस्थान
विशेष विवरण – सूकर देवता का मुखौटा लगाकर दक्षिणी पहाड़ी आदिवासियों का नृत्य।
नाहर नृत्य –
स्थान – मांडल (भीलवाड़ा)
विशेष विवरण – शेर की वेशभूषा में किया जाता है।
ढप नृत्य –
स्थान – शेखावाटी
विशेष विवरण – बसंत पंचमी पर किया जाता है।
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सूकर नृत्य –
स्थान – दक्षिण राजस्थान
विशेष विवरण – सूकर देवता का मुखौटा लगाकर दक्षिणी पहाड़ी आदिवासियों का नृत्य।
नाहर नृत्य –
स्थान – मांडल (भीलवाड़ा)
विशेष विवरण – शेर की वेशभूषा में किया जाता है।
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स्थान – शेखावाटी
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BPSC प्राथमिक शिक्षक भर्ती
द्वितीय पेपर में नेगेटिव मार्किंग 1/4 रहेगा...
मेरिट केवल पेपर 2 के हिसाब से ही बनेगी...
लिखित परीक्षा में शामिल सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों को 40%, पिछड़ा वर्ग के उम्मीदवारों को 36.5%, अत्यन्त पिछड़ा वर्ग के उम्मीदवारों को 34% एवं अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति, महिलाओं तथा निःशक्त (दिव्यांग) उम्मीदवारों को 32% न्यूनतम अर्हतांक प्राप्त करना अनिवार्य होगा। अन्यथा वे प्रतियोगिता परीक्षा से बाहर हो जायेंगे ।
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द्वितीय पेपर में नेगेटिव मार्किंग 1/4 रहेगा...
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लिखित परीक्षा में शामिल सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों को 40%, पिछड़ा वर्ग के उम्मीदवारों को 36.5%, अत्यन्त पिछड़ा वर्ग के उम्मीदवारों को 34% एवं अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति, महिलाओं तथा निःशक्त (दिव्यांग) उम्मीदवारों को 32% न्यूनतम अर्हतांक प्राप्त करना अनिवार्य होगा। अन्यथा वे प्रतियोगिता परीक्षा से बाहर हो जायेंगे ।
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रण नृत्य –
स्थान – मेवाड़
विशेष विवरण – पुरुषों द्वारा हाथों में तलवार लेकर किया जाता है।
पेजण नृत्य-
स्थान – वागड़ (डूंगरपुर, बांसवाड़ा)
विशेष विवरण – दीपावली के अवसर पर किया जाता है।
चारकुला –
स्थान – भरतपुर,अलवर
विशेष विवरण – महिलाएं सिर पर बर्तन के ऊपर दीपक जलाकर करती है।
हिंडोला नृत्य - यह दीपावली के अवसर पर जैसलमेर क्षेत्र में किया जाता है।
भैरव नृत्य - यह नृत्य ब्यावर (अजमेर) में बादशाह बीरबल की सवारी के समय पुरुषों द्वारा किया जाता है।
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स्थान – मेवाड़
विशेष विवरण – पुरुषों द्वारा हाथों में तलवार लेकर किया जाता है।
पेजण नृत्य-
स्थान – वागड़ (डूंगरपुर, बांसवाड़ा)
विशेष विवरण – दीपावली के अवसर पर किया जाता है।
चारकुला –
स्थान – भरतपुर,अलवर
विशेष विवरण – महिलाएं सिर पर बर्तन के ऊपर दीपक जलाकर करती है।
हिंडोला नृत्य - यह दीपावली के अवसर पर जैसलमेर क्षेत्र में किया जाता है।
भैरव नृत्य - यह नृत्य ब्यावर (अजमेर) में बादशाह बीरबल की सवारी के समय पुरुषों द्वारा किया जाता है।
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रामदेवजी के भोपे – तंदुरा − मेघवाल
गोगा जी के भोपे − डेरू − नायक
देवनारायण जी के भोपे − जंतर − गुर्जर
राव−भाट−यजमानो की वंशावलियों का बखान करते है।
लंगा− राजस्थान की संगीत जीवी जाति जो सुरो के लयात्मक उतार−चढाव के लिए जानी जाती हे।
प्रसिद्ध कलाकार –बूदं खाँ/बुंदुखां
भगतण−मध्यकाल में मंदिरों में नाचने−गाने का काम करने वाली महिलाएँ।
पातर/पातुर−मांगलिक अवसरो पर गाने बजाने का काम करने वाली संगीत जीवी जाति।
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गोगा जी के भोपे − डेरू − नायक
देवनारायण जी के भोपे − जंतर − गुर्जर
राव−भाट−यजमानो की वंशावलियों का बखान करते है।
लंगा− राजस्थान की संगीत जीवी जाति जो सुरो के लयात्मक उतार−चढाव के लिए जानी जाती हे।
प्रसिद्ध कलाकार –बूदं खाँ/बुंदुखां
भगतण−मध्यकाल में मंदिरों में नाचने−गाने का काम करने वाली महिलाएँ।
पातर/पातुर−मांगलिक अवसरो पर गाने बजाने का काम करने वाली संगीत जीवी जाति।
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꧁༺Aɴꜱʜᴜ CʜᴀᴜƊʜᴀʀʏ♪♪༻꧂:
जगजीत सिंह−विख्यात गजल गायक, जन्म−श्री गंगानगर
पं. विश्व मोहन भटृ –विख्यात वीणा वादक, जयपुर
मेहंदी हसन− पाकिस्तानी गजल गायक, जन्म−लुणां (झुंझुनु)
रेशमा− पाकिस्तानी सूफी लोक गायिका, जन्म- लोहा(चुरू)
रावल - यह जाती चारणों को अपना यजमान मानती है।
कंजर - घुमंतु जाति के ये कलाकार चकरी नृत्य करते है।
जोगी - यह जाति नाथ संप्रदाय को मानती है। ये भर्तृहीर, शिवाजी का ब्यावला व पंडून का कड़ा गायन में अपना विशिष्ट स्थान रखती है। जोगी अपने गायन के साथ सारंगी वाद्य का प्रयोग करते है।
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जगजीत सिंह−विख्यात गजल गायक, जन्म−श्री गंगानगर
पं. विश्व मोहन भटृ –विख्यात वीणा वादक, जयपुर
मेहंदी हसन− पाकिस्तानी गजल गायक, जन्म−लुणां (झुंझुनु)
रेशमा− पाकिस्तानी सूफी लोक गायिका, जन्म- लोहा(चुरू)
रावल - यह जाती चारणों को अपना यजमान मानती है।
कंजर - घुमंतु जाति के ये कलाकार चकरी नृत्य करते है।
जोगी - यह जाति नाथ संप्रदाय को मानती है। ये भर्तृहीर, शिवाजी का ब्यावला व पंडून का कड़ा गायन में अपना विशिष्ट स्थान रखती है। जोगी अपने गायन के साथ सारंगी वाद्य का प्रयोग करते है।
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