Online Notes Store | Online Notes, Quiz & Employment News Portal
19.6K subscribers
6.45K photos
97 videos
2.03K files
1.01K links
Exam Oriented Study material For 1st grade , 2nd grade , FSO , EO/RO , RAS, SI, REET and many more...
#rrb #ntpc
#patwar #reet
#hand_written_notes
#handwrittennotes

Contact Admin for any queries :
📲 @OP_Prajapati
@TheOpPrajapati
👉 Omg000888@gmail.com
Download Telegram
राजस्थान के क्षेत्रीय नृत्य

■ शेखावटी - गीदड़ , चंग, ढप, कच्ची घोड़ी, जिन्दाद, लहुर नृत्य
■ मारवाड़ - डांडिया , घुडला , झांझी नृत्य
■ बीकानेर - अग्नि नृत्य
■जालोर ढोल नृत्य
■ भरतपुर - बम व हुरंगा , नौटंकी , चरकुला
■ झालावाड़ - बिंदौरी नृत्य
■ नाथद्वारा - डांग नृत्य
■ मेवाड़ - रण , लोवडी नृत्य
■ वागड़ - पाँचपदा , पेजणनृत्य
■ डूंगरपुर - चोगोला नृत्य
■ मांडल - नाहर नृत्य
■ फलौदी - थाली नृत्य
■ हाड़ौती - चकरी नृत्य
■ चुरू - कबूतरी नृत्य
■ मेवात - खारी नृत्य
■ धरियाबाद - मोहिली नृत्य
■ जैसलमेर - हिंडौला नृत्य
■ चौहटन - कानुडा नृत्य
■ ब्यावर का मयूर व भैरव नृत्य

Join ~ @OnlineNotesStore
🤔2
1. झाला हवेली किस जिले में है -कोटा

2.किस संस्था ने अछूतों की शिक्षा के लिए चूरू में कबीर पाठशाला स्थापित की -सर्व हितकारिणी सभा

3.किस चौहान वंश के शासक ने प्रताप लंकेश्वर की उपाधि धारण की थी-सोमेश्वर

4.राजस्थान में खेतड़ी कॉपर कंपलेक्स भारत सरकार द्वारा किस वर्ष में स्थापित हुआ था- 1967

5.पहरावना तथा तन्ना विवाह किस जनजाति में प्रचलित है-गरासिया जनजाति


❣️Join ~ @OnlineNotesStore
👍4
🫖भारतीय वन अधिनियम, 1927

☕वन नीति, 1952 (संशोधित 1988)

🫖वन्यजीव संरक्षण अधि  1972

☕वन संरक्षण अधिनियम  1980

🫖पर्यावरण संरक्षण अधि. 1986

☕जैवविविधता अधीनियम 2002

🫖जैव विविधता प्राधिकरण 2003


Join ~ @OnlineNotesStore
👍4
💐💐🎍🎍स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान गठित संस्था/संघ/ संगठन✍✍✍

👉सर्व सेवा संघ :- सर्वोदयी श्री सिदराज ढढढा द्वारा स्थापित

👉सभ्य सभा की स्थापना:- इसकी स्थापना गुरू गोविन्द गिरी ने आदिवासी हितों की सुरक्षा के
लिए की थी।

👉राजस्थान सेवा संघ (1919):-इस संस्था को 1920 में अजमेर स्थानांतरित कर दिया गया।
👉राजस्थान सेवा संघ में प्रमुख भूमिका अर्जुनलाल
सेठी, विजयसिंह पथिक,केसरीसिंह बारहठ एवं रामनारायण चौधरी ने निभाई थी।

👉राजपुताना मध्य भारत सभा (1919): इसकी स्थापना आमेर में जमनालाल बजाज ने की थी। इसमें मुख्य भूमिका अर्जुनलाल सेठी एवं विजयसिंह पथिक ने निभाई थी।

👉वीर भारत समाज (1910):- इसकी स्थापना विजयसिंह पथिक ने की थी।

👉वीर भारत सभा (1910):- इसकी स्थापना केसरीसिंह बारहठ़ एवं गोपालसिंह खरवा ने
की थी।

जैन वर्द्धमान विद्यालय (1907):- इसकी स्थापना अर्जुनलाल सेठी ने जयपुर में
की थी।

वागड़ सेवा मंदिर एवं हरिजन सेवा समिति (1935):-इसकी स्थापना भोगीलाल पाण्ड्या ने की थी।

मारवाड़ सेवा संघ (1920):-इसकी स्थापना चांदमल सुराणा ने की थी।मारवाड़ सेवा संघ को सन् 1924 में जयनारायण व्यास ने पुनः जीवित किया और एक नई संस्था की स्थापना की जिसे
‘‘मारवाड़ हितकारणी सभा’’ के नाम से जाना गया। मारवाड़ हितकारणी सभा की स्थापना 1929 में हुई।

अखिल भारतीय देषी राज्य लोक परिषद
(1927):- इसकी स्थापना में मुख्य भूमिका जवाहरलाल नेहरू ने निभाई थी। इसका प्रथम अधिवेशन मुम्बई में हुआ था। जिसकी अध्यक्षता रामचन्द्र राव ने की थी। इसका उद्देष्य देशी रियासतों में शान्तिपूर्वंक तरीके से उत्तरदायी शासन की स्थापना करना था।

चरखा संघ (1927):-इसकी स्थापना जमनालाल बजाज ने जयपुर में की थी।

सस्ता साहित्य मण्डल (1925):- इसकी स्थापना हरिभाऊ उपाध्याय ने अजमेर के हटूडी में की थी।

जीवन कुटीर (1927):- इसकी स्थापना हीरालाल शास्त्री द्वारा जयपुर में की गई थी। वर्तमान में यह निवाई (टोंक) में हैं।

वनस्थली विद्यापीठ (1938):-इसकी स्थापना हीरालाल शास्त्री द्वारा रतनलाल शास्त्री के साथ मिलकर की गई थी। जीवन कुटीर योजना को ही बाद में वनस्थली विद्यापीठ कहा गया था।

सर्वहितकारिणी सभा (1907):- इसके संस्थापक कन्हैयालाल ढुढँ थें।

सन् 1914 में गोपालदास (बीकानेर) ने इसे पुर्नजिवित किया था।

विद्या प्रचारिणी सभा (1914):- इसकी स्थापना हरि भाई किंकर ने की थी।

नागरी प्रचारणी सभा (1934):-इसकी स्थापना ज्वालाप्रसाद ने धौलपुर में की थी।

नरेन्द्र मण्डल (1921):-देशी राज्यों के राजाओं द्वारा निर्मित मण्डल जिसके चांसलर बीकानरे के
महाराजा गंगासिंह थे।

हरिजन सेवा संघ (1938):-इसकी स्थापना भोगीलाल
पाण्ड्या ने डुंगरपुर में की थी।

उपरमाल पंच बोर्ड :- 1917 में विजय सिंह पथिक द्वारा स्थापित।

Join ~ @OnlineNotesStore
👍8👌1
इस रीट में तो इस सवाल के आसार कम है लेकिन आगामी परीक्षाओ के लिए उपयोगी 📚
❤3
🔰 RAJSSP मोबाइल ऐप

▪️सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री टीकाराम जूली ने अम्बेडकर भवन स्थित सभागार में सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं के लाभार्थियों को घर बैठे वार्षिक सत्यापन किए जाने के लिए RAJSSP मोबाइल ऐप को लाॅन्च किया।

▪️सामाजिक सुरक्षा पेंशनर्स के लिए यह सुविधा प्रदान करने वाला राजस्थान भारत में पहला राज्य हैं।

▪️इससे लगभग 94 लाख पेंशनर्स को यह सुविधा मिलेगी।
👍3😁1
👫 महिला समानता दिवस 🤩

26 अगस्त, 2022

📕 जेईसीसी, सीतापुरा, जयपुर में होगा कार्यक्रम

📗 प्रथम महिला निधि का किया जाएगा लोकार्पण

📘 200 करोड़ का वित्तीय संस्थान

📕 बजट 2022-23 में की गई थी घोषणा

💥 तेलंगाना राज्य की महिला निधि से समझौता

💥 प्रदेश के 6 जिलों से होगी शुरुआत

1. करौली  2. अलवर   3. कोटा
4. डूंगरपुर   5. राजसमंद   6. जोधपुर
👍2
🔰 राजस्थान रत्न पुरस्कार 2022

• यह वर्ष 2012 में प्रारंभ , राजस्थान का सर्वोच्च पुरुस्कार है जो कला , साहित्य , संस्कृति , संगीत आदि क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य के लिए यह पुरस्कार दिया जाता है।

• 2012 में प्रथम बार इसे सात लोगों को दिया गया था - कन्हैयालाल सेठिया , लक्ष्मी चूंडावत , कोमल कोठारी , विजय दान देथा , जगजीत सिंह , विश्वमोहन भट्ट , अल्लाह जिलाह बाई

• 2013 में पुनः सात लोग सम्मानित हुए जिनमें गँवरी देवी , कैलाश सांखला , और डीआर मेहता प्रमुख है।

• 2014 में इसे बंद कर दिया गया था , पुनः 2019 में प्रारंभ किया गया।

• वर्ष 2022 में यह छः लोगों को प्रदान किया जाएगा।

(1) श्री दलवीर भंडारी - अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय में जज
(2) श्री आर एम लोढ़ा - सुप्रीम कोर्ट जज
(3) श्री एल एन मित्तल - स्टील उद्योगपति
(4) श्री अनिल अग्रवाल - वेदांता समूह
(5) श्री शीन काफ निजाम - मशहूर शायर
(6) श्री के सी मालू - वीणा कैसेट्स
👍1
राजस्थान में कंजर्वेशन रिजर्व

✍10 जनवरी, 2023 तक राजस्थान में 20 वन्यजीव संरक्षित क्षेत्र है।

✍राज्य के 1155.97 वर्ग किमी क्षेत्रफल में संरक्षित क्षेत्र है।

16. रणखार संरक्षित क्षेत्र- जालौर
(23 अप्रैल, 2022)

17. शाहबाद तलहटी संरक्षित क्षेत्र- बाराँ (01 सितंबर, 2022)

18. बीड़ घास फुलियाखुर्द संरक्षित क्षेत्र- भीलवाड़ा (27 सितंबर, 2022)

19. वाघदर्रा क्रोकोडाइल संरक्षित क्षेत्र- उदयपुर (30 नवंबर, 2022)

20. वाडाखेड़ा संरक्षित क्षेत्र- सिरोही
(27 दिसंबर, 2022)
👍4
★ राजस्थान के कुछ बांधों की ऊंचाई —

• सबसे ऊंचा = जाखम बांध (प्रतापगढ़) : 81m
• राणा प्रताप सागर (चित्तौड़गढ़) : 54m
• जवाहर सागर, कोटा: 45m

• माही बजाज सागर, बांसवाड़ा : 43m
   = राज.का सबसे लंबा बांध (3109m लंबा)

• कोटा बैराज, कोटा : 37m

∆ गांधी सागर बांध, मध्य प्रदेश : 62m
👍3
🔰 देवेंद्र झांझरिया ( चुरू)

पैरा ओलंपियन ( जेवलिन थ्रो F-46 कैटेगरी)


2004 🥇 GOLD
2016 🥇 GOLD

2020 में टोक्यो पैरालंपिक में Silver 🥈


💥 अब तक कुल 3 पदक ओलंपिक खेलों में ।


🧾 अतिरिक्त जानकारी जो याद रख लेनी चाहिए -


2012 पद्मश्री
2022 पद्म भूषण

2017 राजीव गांधी खेल रत्न अवार्ड

💥 राजस्थान निर्वाचन आयोग के ब्रांड एंबेसडर
👍4
🔷 36th National Games
36वें राष्ट्रीय खेल : राजस्थान विशेष

आयोजन : 29Sep.से 12Oct.तक
स्थान : गुजरात के 6 शहरों में

▪️राजस्थान के कुल 254 खिलाड़ी शामिल हुए।
▪️राजस्थान से ध्वजवाहक - रजत चौहान
♦️राजस्थान को 03 स्वर्ण🥇, 03 रजत🥈सहित कुल 30 पदक प्राप्त हुए।

🔘 राज्य से प्रमुख खिलाड़ी :

✓ 03 गोल्ड : कविता सिहाग, विवान कपूर, मुकेश चौधरी

◆ राजस्थान के लिए 1st मेडल हैमर थ्रोअर नितेश पुनिया ने रजत पदक के रूप में जीता।

🔹 बीकानेर की साइकिलिस्ट कविता सिहाग ने स्वर्ण पदक (Gold) जीता

🟦 किरण बालियान (राज.पुलिस में सब इंस्पेक्टर) शॉटपुट में 23 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़कर स्वर्ण पदक (Gold) जीता।
Note: किरण बालियान मेरठ,UP से हैं।

🔹विवान कपूर ने शॉटगन में स्वर्ण (GOLD) पदक जीता।

🔹राज. पुलिस में सब इंस्पेक्टर मुकेश चौधरी ने  वुशू प्रतियोगिता के 75 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण पदक (Gold) जीता।

🔹यमनदीप शर्मा ने एथलेटिक्स की डिकेथलॉन स्पर्धा में रजत पदक जीता।

🔹करण सिंह ने तलवारबाज़ी में रजत पदक जीता।

🔹10 मीटर राइफल मिक्स शूटिंग में दिव्यांश सिंह पंवार और निशा कंवर ने कांस्य पदक जीता है।

🔹महिला कुश्ती के 68kgमें राजस्थान की मोनिका ने कांस्य पदक जीता।


♦️शुभंकर : सावज (एशियाई शेर)
🟢थीम : "एकता के लिए खेल
"
🤔2
✍️✍️✍️
★ " मिशन बुनियाद " राजस्थान

05 सितंबर,2022 को शुरू

• मिशन बुनियाद को राजस्थान सरकार द्वारा चिल्ड्रन इन्वेस्टमेंट फंड फाउंडेशन (CIFF), कैवल्य एजुकेशन फाउंडेशन (पिरामल फाउंडेशन), जी.डी.आई. पार्टनर्स तथा कोंन्वेजीनियस के सहयोग से शुरू किया गया है. 

•भारत का सबसे बड़ा पर्सनलाइज्ड एडैप्टिव लर्निंग (पीएएल) प्रोग्राम है.
❖ कन्हैया लाल सेठिया पोइट्री अवार्ड 2023 - के. सच्चिदानन्द

❖ तीसरा सुंदर कांति जोशी अवार्ड-2022 —
– यह महिला क्रिकेट से संबंधित है,
• सीनियर वर्ग मे - सोनल कलाल एवं
• जूनियर वर्ग मे अनाया गर्ग को

❖ राजस्थान संगीत नाटक अकादमी का सर्वोच्च फैलोशिप सम्मान 2022 - सिंगर इला अरुण
👍3
सांभर फेस्टिवल-2023

➢ राजस्थान पर्यटन विभाग द्वारा सांभर लेक पर 17 से 19 फरवरी तक सांभर फेस्टिवल-2023 का आयोजन किया जाएगा।

➢ मेलों और उत्सवों की तरह ही सांभर फेस्टिवल भी देशी-विदेशी पर्यटकों के लिये आकर्षण का केंद्र होगा। पर्यटकों को आकर्षित करने के लिये फेस्टिवल में विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा।

➢ तीन दिवसीय सांभर फेस्टिवल में प्रतिदिन शाम को विभिन्न सेलिब्रिटी और प्रसिद्ध लोक कलाकार सांस्कृतिक संध्या में अपनी रंगारंग प्रस्तुतियाँ देंगे।

➢ फेस्टिवल की शुरुआत एडवेंचर बाइक राइड से होगा। यह रैली जयपुर से प्रारंभ होकर सांभर झील कार्यक्रम स्थल पर खत्म होगी। स्टार नाइट गेजिंग इवेंट के तहत रात को पर्यटकों को सांभर के खुले आसमान में तारों को निहारने का मौका मिलेगा।

➢ फेस्टिवल के दौरान पतंगबाजी और कैमल राइड सहित पैरा सैलिंग, एटीवी राइड, मोटर साइकिल रैली जैसी विभिन्न साहसिक गतिविधियों का भी आयोजन किया जाएगा।

➢ सांभर स्थित देवयानी कुंड पर दीपोत्सव और सेलिब्रिटी नाइट के आयोजन के साथ ही लोक कलाकारों द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ भी सैलानियों के लिये आकर्षण का केंद्र रहेगी। सैलानियों को सांभर के ऐतिहासिक महत्त्व और परिंदों की रोचक जानकारियों से रूबरू करवाने के लिये टॉक शो का भी आयोजन किया जाएगा।
👍2
राजस्थान के प्रमुख शिवजी मन्दिरों के बारे

🔷 बेणेश्वर महादेव का मंदिर-नेवरपुरा/नवाटापुरा (डूंगरपुर)

▪️ बेणेश्वर का अर्थ होता है-’’डेल्टा की मल्लिका’’ या ’’मृत आत्माओं का मुक्ति स्थल’’। यह मंदिर सोम, माही व जाखम नदियों के त्रिवेणी संगम पर स्थित हैं।

▪️ यहाँ पर विश्व का एकमात्र मिट्टी का बना हुआ पांच तरफ से खण्डित शिवलिंग है। इस शिवलिंग को पुजारी के अलावा अन्य कोई नहीं छू सकता हैं।

▪️ यहाँ पर मेला माघ पूर्णिमा को लगता हैं जिसे आदिवासियों का कुम्भ/भीलों का कुम्भ/ वागड़ का पुष्कर भी कहते हैं

▪️ यहाँ पर आदिवासी अपनें पूर्वजों की अस्थियों का विसर्जन करते हैं।

🔷 एकलिंग जी का मंदिर – कैलाशपुरी (उदयपुर)

▪️एकलिंग जी मेवाड़ के महाराणाओं के ईष्टदेव या कुल देवता थे।

▪️इस मन्दिर का निर्माण 8वीं सदी में बप्पा रावल ने करवाया जिसकों वर्तमान स्वरूप महाराजा रायमल ने दिया।

▪️मेवाड़ के शासक स्वयं को एकलिंग जी का दीवान मानकर शासक किया करते थे मेवाड़ के शासक एकलिंग जी के मन्दिर में तलवार के स्थान पर छड़ी लेकर जाते थे!

▪️एकलिंगजी का मन्दिर राज्य में पाशुपत सम्प्रदाय का सबसे बड़ा मन्दिर है।

▪️इस मन्दिर में शिव की चैमुखी मूर्ति है। पूर्व के मुख में सूर्य, उत्तर के मुख में ब्रह्मा, दक्षिण के मुख में शिव तथा पश्चिम के मुख में विष्णु के दृष्य हैं।

▪️इस मन्दिर के पास लकुलीश मन्दिर हैं।

🔷 घुष्मेश्वणर महादेव का मन्दिर- सिवाड़ (सवाई माधोपुर)

▪️देश के 12 ज्योर्तिलिंग में विख्यात है। इस मन्दिर में शिवलिंग सदैव जल में डूबा हुआ रहता है जिसके कारण भक्तों के दर्शन शीषे के माध्यम से होते है।

▪️यहाँ के पर्वत कैलाश पर्वत के अनुभव कराते हैं।

🔷 मण्डलेश्वर शिव मन्दिर अर्थूना (बांसवाड़ा)

▪️अर्थूना को ग्रन्थों में उत्थूनक कहा गया है।

▪️यह लकुलीश सम्प्रदाय का परमार कालीन राजस्थान का प्रसिद्ध मन्दिर है।

▪️शिल्पकला की दृष्टि से आबू तथा यहाँ के मन्दिरों मे काफी समानता हैं।

🔷 राजराजेश्वतर/सिद्धेश्वर शिव मन्दिर (जयपुर)

▪️यह मन्दिर आम जनता के लिए केवल शिवरात्री के दिन खुलता हैं।

▪️मोती डूंगरी के महलों में इस मन्दिर का निर्माण 1864 में जयपुर के नरेश रामसिंह ने करवाया था।

▪️यह जयपुर के राजाओं का निजी मन्दिर हैं।

🔷 देव सोमनाथ मन्दिर- डूंगरपुर

▪️12वी सदी में निर्मित, यह 3 मंजिला देव सोमनाथ मन्दिर सोम नदी के किनारे स्थित हैं।

▪️इसका निर्माण केवल पत्थरों से बिना चूना, मिट्टी व सीमेन्ट के किया गया है।

▪️विेशेष - वागड़ के सोमपुरों की सिलावटी हस्तकला का यह अभूतपूर्व उदाहरण है।

🔷 गेपरनाथ महादेव मंदिर - कोटा

▪️2008 में भूस्खलन के कारण यह मन्दिर चर्चा में रहा, इस मन्दिर में शिवलिंग/गर्भगृह जमीन की सतह से 300 फीट नीचे हैं।

▪️इस मन्दिर में स्थित शिवलिंग पर सदैव एक जलधारा बहती है।

🔷 कंसुआ का शिव मंदिर- कोटा

▪️इस मन्दिर की दीवार पर कुटिया लिपी में 8वीं सदी का शिवगण मौर्य का शिलालेख मिला है।

▪️इस मंदिर की विशेषता है कि सूर्य की पहली किरण मंदिर के 7-8 मीटर अन्दर स्थित शिवलिंग पर गिरती है।

▪️इस मन्दिर में 1008 मुखी शिवलिंग भी है।

🔷 सोमनाथ मन्दिर – भानगढ़ (अलवर)

▪️गुजरात के सोमनाथ मन्दिर की प्रकृति का राज्य में यह एकमात्र मन्दिर है।

🔷 चार-चैमा का शिवालय- चार चैमा (कोटा)

▪️यह कोटा राज्य का सबसे प्राचीन शिव मन्दिर है। इस मन्दिर का निर्माण चैथी सदी के आसपास हुआ था, इसलिए इसे गुदा कालीन मंदिर भी कहते है।

🔷 शीतलेश्वर महादेव मन्दिर - झालरापाटन (झालावाड़)

▪️चन्द्रभागा नदी के किनारे स्थित इस मंदिरदिर को चन्द्रमोली मन्दिर भी कहते हैं।

▪️महामारू शैली में बना यह राजस्थान का पहला समयाकिंत मन्दिर है जिस पर लिखा है 689।

▪️यह एक अर्द्धनारीश्वनर मन्दिर है। अर्द्धनारीश्वसर का अर्थ है आधा शिव आधी पार्वती।

🔷 कपालीश्वर महादेव मन्दिर – इन्द्रगढ़ (बूँदी)

▪️यह मन्दिर चाखण नदी के किनारे है।

▪️विशेष- शैव सम्प्रदाय के आचार्य मत्स्येन्द्र नाथ की राज्य में एकमात्र प्रतिमा इन्द्रगढ़ से मिली है।

🔷 समेद्धश्वर महादेव मन्दिर(चितौड़)

▪️इस मन्दिर का निर्माण मालवा के राजा भोज ने करवाया लेकिन पुनर्निर्माण महाराणा मोकल ने करवाया इसलिए इसे ’’मोकल जी का मन्दिर’’ भी कहते है।

▪️मध्यकाल में पूर्ण विकसित परमार मूर्तिकला का चित्तौड़गढ़ क्षेत्र में एकमात्र उदाहरण है।

🔷 मातृकुण्ड़िया का मन्दिर-राश्मि गाँव (चित्तौड़गढ़)

▪️बनास नदी के किनारे स्थित मातृकुण्डिया को ’’मेवाड़ का हरिद्वार’’ कहते हैं।

▪️यहाँ स्थित कुण्ड़ में मृत व्यक्ति की अस्थियों का विसर्जन किया जाता है।

▪️हरिद्वार की तरह यहाँ भी लक्ष्मण झूला लगा हुआ हैं।
👍7
✍मोरबंदिया - गरासियो के विवाह
✍12 खम्बो की छतरी - कुंभलगढ़
✍जानकी लाल भाड़ - स्वांग
✍ सबसे छोटा NH - 966B
✍ कथोड़ी जनजाति - उदयपुर
✍ नीमूचाना कांड - महाराजा जयसिंह थे
✍ अभिजीत सेन - अर्थशास्त्री
✍ मुख्यमंत्री पर्यटन उद्योग संबल योजना - 2021
✍ राजस्थान में सब्जी उत्कृष्टता केंद्र- बूंदी
✍ राजबल्लभ - किशोर दास लिखित
✍ अमरसार - प. जीवाधार
✍ जेट्रोफा बीज का समर्थन मूल्य - 8.50/kg
✍ महकमा खास - महाराणा शंभू सिंह
👍4
राजस्थान के प्रमुख शिवजी मंदिरों के बारे (पार्ट - 2)🔰

🔷 भंडदेवरा शिव मंदिर - (बारां)

▪️इसे ‘‘हाड़ौती का खजुराहो’’ तथा राजस्थान का लघु (मिनी) खजुराहो भी कहते हैं।

▪️इन मंदिरों का निर्माण पंचायतन शैली में भेदवंशीय राजा मलय ने करवाया।

▪️वर्तमान मे मन्दिर में वायुकोण पर स्थित विष्णु मन्दिर ही अवशिष्ट रह गया हैं।

🔷 नीलकण्ठ महादेव मन्दिर (टहला गाँव, राजगढ़ तह. अलवर)

▪️इस मन्दिर का निर्माण अजयपाल ने करवाया तथा इस मन्दिर में ही नृत्य गणेश की मूर्ति है।

▪️इस मंदिर के गर्भगृह में काले रंग का नीलम धातु का बना हुआ शिवलिंग है।

🔷 हर्षनाथ जी का मंदिर- काजल शिखर, हर्ष की पहाड़ी (सीकर)

▪️विग्रहराज द्वितीय के काल में 10वीं सदी में निर्मित इस मन्दिर में लिंगोद्भव शिव की मूर्ति स्थित है।

▪️इस मंदिर में ब्रह्मा व विष्णु को शिवलिंग का आदि अन्त जानने हेतु परिक्रमा करते हुए दिखाया गया है।

▪️महामारू शैली में निर्मित इस मन्दिर को औरंगजेब के सेनापति खानजहां बहादुर ने तोड़ा था, जिसके कारण राजा शिव सिंह ने इसका पुनर्निर्माण करवाया।

▪️यहाँ पर मेला भाद्रपद शुक्ल 13 को भरता हैं।

🔷 तिलस्वा महादेव मन्दिर – भीलवाड़ा

▪️यहाँ पर मेला शिवरात्री को लगता है तथा इस मन्दिर में चर्म रोगी व कुष्ठ रोगी को लाभ मिलता है।

🔷 महामन्दिर/ सिरे मंदिर - जोधपुर

▪️इस मन्दिर का निर्माण 84 खम्बों पर मारवाड़ के शासक मानसिंह ने करवाया था, इस मन्दिर में जालन्धर नाथ की प्रतिमा है।

▪️यह मन्दिर नाथ सम्प्रदाय का प्रमुख तीर्थ स्थल हैं।

🔷 फूलदेवरा शिवालय- अटरू (बारां)

▪️इस मंदिर के निर्माण में चूने का प्रयोग नहीं हुआ हैं तथा इस मन्दिर को मामा-भान्जा का मन्दिर कहते हैं।

🔷 अचलेश्वर महादेव मन्दिर (सिरोही)

▪️यहाँ पर शिवलिंग के स्थान पर एक खड्ढ़ा हैं जो ब्रह्मखड्ढ़ा कहलाता हैं, इसे शिव के पैर का अंगूठा मानते है।

▪️इस मन्दिर में महमूद बेगड़ा द्वारा खण्डित शिव प्रिया पार्वती हैं।

🔷 ऑपेश्वमर महादेव मन्दिर-रामसीन (जालौर)

▪️इस मन्दिर का प्राचीन नाम अपराजितेश्वर शिव मंदिर था, यहाँ पर राजस्थान का पहला श्वेत स्फटिक (कांच से निर्मित) शिवलिंग है।

🔷 स्कंध कार्तिकेय मन्दिर - तनेसर (उदयपुर)

▪️यह मन्दिर देवसेना के अधिपति स्कन्ध व शिवजी के पुत्र कार्तिकेय स्वामी का मन्दिर हैं।

🔷 हल्देश्वर महादेव मंदिर (पीपलूद-बाड़मेर)

▪️इसे मारवाड़ का लघु माउण्ट आबू कहते हैं, यह मंदिर 56 की पहाड़ियों की हल्देश्विर पहाड़ी पर बना है।

▪️56 की पहाड़ियों की सबसे ऊंची चोटी पर गुफा में जोगमाया का मन्दिर है।

🔷 बाड़ौली के शिव मन्दिर (भैंसरोड़गढ़- चित्तौड़गढ़)

▪️भगवान शिव को समर्पित इस मंदिर में गुप्तकालीन स्थापत्य कला की छाप दिखाई देती है।

▪️यहाँ का मुख्य मन्दिर घाटेश्वपर शिव का मन्दिर हैं, लेकिन इस मंदिर में विष्णु के वामन अवतार की मूर्ति है।

🔷 मुकन्दरा का शिव मन्दिरः- कोटा

▪️यह राजस्थान का एकमात्र गुप्तकालीन शिव मन्दिर हैं।

🔷 गड़गच्च शिवालय – अटरू (बारां)

▪️इस मन्दिर को औरंगजेब ने तोपों से तोड़ा था।

🔷 गुप्तेश्वर मन्दिर – हाड़ा पर्वत (उदयपुर)

▪️इस मन्दिर को ’’गिरवा व मेवाड़ का अमरनाथ’’ कहते है।

🔷 अचलनाथ महादेव- जोधपुर

▪️इस मन्दिर के पास ’’गंगा बावडी’’ है।

🔷 केशव राय मंदिर – केशवरायपाटन-बूँदी

🔷 जसनगर का शिव मन्दिर-जसनगर (नागौर)

🔷 सारणेश्वर मंदिर – सिरोही

🔷 शिव मन्दिर- कुसुमा (सिरोही)

🔷 हरणी महादेव मन्दिर – भीलवाड़ा

🔷 अभनेश्वर महादेव मन्दिर – रणथम्भौर (सवाई माधोपुर)

🔷 नागेश्वर महादेव मन्दिर- अन्ता (बारां)

🔷 भूतेश्वर महादेव मंदिर - बसेड़ी (धौलपुर)

🔷 चौपड़ा महादेव मंदिर - धौलपुर

▪️राजस्थान के नाथद्वारा में दुनिया की सबसे बड़ी शिव मूर्ति स्थित है।

▪️इस मूर्ति की ऊंचाई करीब 351 फुट है। ये इतनी ऊंची है कि 20 किमी दूर से भी नजर आती है। इस मूर्ति को हेलिकॉप्टर से देखने के लिए जॉय राइड की शुरुआत की गई है। अब एक हजार फीट की ऊंचाई से दुनिया की सबसे बड़ी शिव प्रतिमा को देखा जा सकता है।

🔷 सेपऊ महादेव मन्दिर – धौलपुर
👍6🤩1
🌟 राजस्थान हस्तशिल्प नीति 2022

राजस्थान हस्तशिल्प नीति 2022 अधिसूचना की तिथि से 31 मार्च 2026 तक प्रभावी रहेगी


✅हस्तशिल्प सप्ताह - प्रत्येक वर्ष में दिसंबर माह में राष्ट्रीय स्तर का हस्तशिल्प सप्ताह का आयोजन राजस्थान हाट जयपुर में आयोजित किया जाएगा

✅ हस्तशिल्प बैंक जयपुर बनाया जाएगा
✅ हस्तशिल्प डिजाइन सेंटर जोधपुर में बनाया जाएगा
✅ हस्तशिल्प म्यूजियम जयपुर में बनाया जाएगा
✅ आदर्श हस्तशिल्प केंद्र जयपुर में बनाया जाएगा
👍4
🔥 ऊन और भेड़ अनुसंधान केन्द्र (अति महत्वपूर्ण फेक्ट) 🔥

✍सर्वाधिक भेड़ - बाड़मेर
✍न्यूनतम भेड़ - बांसवाड़ा

✍ऊन विश्लेषण बोर्ड - बीकानेर
✍ऊन विकास बोर्ड - जोधपुर
✍ऊन प्रशिक्षण केन्द्र - जयपुर

💥विदेशी आयात निर्यात संस्था - कोटा
💥गलीचा डिजाइन केन्द्र - जयपुर
💥राष्ट्रीय भेड़ अनुसंधान केन्द्र - अविकानगर (टोंक)

⭐️वूलन स्पिनिंग मिल्स - लाडनू चुरू
⭐️स्टेट वूलन मिल्स - बीकानेर
⭐️सिन्थेटिक ऊन बनाने का कारखाना - भीलवाड़ा
⭐️ऊनी नमदो के लिए प्रसिद्ध - मालपुरा (टोंक)
👍4
🔥कुछ अन्य महत्वपूर्ण पुरस्कार 🔥
▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬
⚡️श्री मानगढ़ धाम गौरव पुरस्कार- उदयपुर के कलेक्टर ताराचंद मीणा
⚡️नाना भाई खांट शिक्षक गौरव पुरस्कार- दुर्गाराम मुवाल और महेंद्र कुमार मीणा
▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬
⭐️डॉ. किरण मीणा - आदिकवि महर्षि वाल्मीकि गौरव पुरस्कार
⭐️दीपिका मीणा - मेवाड़ वीर राणा पुंजा भील प्रतिभा पुरस्कार
⭐️डॉ. सुनील मीणा - वीर बालक एकलव्य पुरस्कार
⭐️ललित मीणा - धनुर्धर श्री लिंबाराम पुरस्कार
▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬
✍ राज कलासुआ - शहीद जनजाति वीर बाला कालीबाई पुरस्कार
✍ रणवीर ठोलिया - वीर शहीद नानक भाई सामाजिक नेतृत्व पुरस्कार

▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬
👍3👏1